नेपाल हादसे में नोएडा के डॉक्टर प्रिंस अवाना की मौत,10 मार्च को थी शादी

इस घटना के बाद नया बांस गांव से लेकर नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में शोक की लहर है। परिजनों के अनुसार, प्रिंस की 10 मार्च को नोएडा में शादी तय थी। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन अचानक आई इस खबर ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।

नोएडा के डॉक्टर प्रिंस अवाना
नोएडा के डॉक्टर प्रिंस अवाना
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar09 Jan 2026 04:46 PM
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Noida News : नोएडा के सेक्टर-15 स्तिथ नया बांस गांव से जुड़ी एक दर्दनाक खबर ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। गांव के रहने वाले डॉक्टर प्रिंस अवाना की नेपाल में हुए सड़क हादसे में मौत हो गई हैं। प्रिंस नेपाल में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक अस्पताल में इंटर्नशिप कर रहे थे। हादसे के बाद उनका शव नेपाल से नोएडा लाया गया और गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना के बाद नया बांस गांव से लेकर नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में शोक की लहर है। परिजनों के अनुसार, प्रिंस की 10 मार्च को नोएडा में शादी तय थी। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन अचानक आई इस खबर ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।

अस्पताल से लौटते समय हुआ हादसा

परिवार के अनुसार, डॉक्टर प्रिंस अवाना अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और नोएडा के लोगों की उम्मीदों का भी चेहरा बन चुके थे। बेहतर भविष्य के सपने लेकर उन्हें एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई के लिए नेपाल भेजा गया था। प्रिंस के चाचा रवि अवाना ने बताया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रिंस नेपाल के एक अस्पताल में इंटर्नशिप कर रहे थे। इसी दौरान ड्यूटी खत्म कर बाहर निकलते वक्त एक वाहन ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद इलाज के दौरान उनकी जान नहीं बच सकी।

शादी की खुशियों के बीच टूट गया परिवार

रवि अवाना के अनुसार, प्रिंस के पिता नेत्रपाल अवाना परिवार के साथ ग्रेटर नोएडा वेस्ट की पैरामाउंट सोसायटी में रहते हैं। प्रिंस की इंटर्नशिप लगभग पूरी होने वाली थी और उसके बाद उनकी नोएडा लौटने की तैयारी थी। इसी बीच 10 मार्च को शादी की तारीख तय होने के कारण घर में तैयारियां तेज थीं। परिवार प्रिंस की घर वापसी को लेकर उत्साहित था, लेकिन हादसे ने सबकुछ पलट दिया। जानकारी के मुताबिक, 3 जनवरी की रात नेपाल के रूपलदेव (भुटवल के पास) इलाके में प्रिंस अपनी स्कूटी से जा रहे थे। तभी एक अज्ञात वाहन ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय स्तर पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

लोगों ने पहुंचकर जताई संवेदना

इकलौते बेटे के चले जाने से नेत्रपाल अवाना गहरे सदमे में हैं और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट से बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंच रहे हैं । परिजनों और परिचितों के मुताबिक, डॉक्टर प्रिंस अवाना मेहनती और विनम्र स्वभाव के थे। डॉक्टर बनकर वह न सिर्फ अपने परिवार के सपनों का सहारा थे, बल्कि नोएडा के लिए भी एक उभरती उम्मीद माने जा रहे थे। उनकी असमय मौत ने पूरे इलाके को अंदर तक झकझोर दिया है। Noida News


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नोएडा प्राधिकरण का बड़ा एक्शन, 500 करोड़ की जमीन कब्जामुक्त

इसके बाद दूसरी टीम ग्राम सुथियाना (सेक्टर-143) के डूब क्षेत्र में पहुंची। यहां नोएडा प्राधिकरण की अर्जित व कब्जा प्राप्त भूमि पर कब्जे की शिकायतें थीं। कार्रवाई में करीब 75,000 वर्गमीटर जमीन को कब्जा-मुक्त कराया गया।

नोएडा में अतिक्रमण हटाओ अभियान
नोएडा में अतिक्रमण हटाओ अभियान
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar09 Jan 2026 12:14 PM
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Noida News : नोएडा प्राधिकरण ने शहर के अलग-अलग इलाकों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए करीब 500 करोड़ रुपये की कीमती जमीन को कब्जा-मुक्त कराया है। प्राधिकरण की टीमें बुलडोजर कार्रवाई के साथ भंगेल-बेगमपुर, सुथियाना (सेक्टर-143) और सोरखा-जाहिदाबाद पहुंचीं, जहां अतिक्रमण हटाकर जमीन को अपने कब्जे में लिया गया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। कुछ जगहों पर हल्का विरोध जरूर हुआ, लेकिन प्रशासनिक सख्ती के आगे कब्जाधारकों की एक नहीं चली।

भंगेल-बेगमपुर में 2000 वर्गमीटर जमीन खाली कराई

प्राधिकरण के मुताबिक पहली टीम वर्क सर्किल-8 के नेतृत्व में ग्राम भंगेल-बेगमपुर (खसरा संख्या-58) पहुंची। यहां से अवैध कब्जा हटाकर करीब 2000 वर्गमीटर भूमि को अतिक्रमण-मुक्त कराया गया। इसके बाद दूसरी टीम ग्राम सुथियाना (सेक्टर-143) के डूब क्षेत्र में पहुंची। यहां नोएडा प्राधिकरण की अर्जित व कब्जा प्राप्त भूमि पर कब्जे की शिकायतें थीं। कार्रवाई में करीब 75,000 वर्गमीटर जमीन को कब्जा-मुक्त कराया गया।

सोरखा-जाहिदाबाद में 6000 वर्गमीटर भूमि खाली

तीसरी टीम सोरखा-जाहिदाबाद के डूब क्षेत्र में उतरी, जहां प्राधिकरण की अर्जित एवं कब्जा प्राप्त करीब 6000 वर्गमीटर जमीन को खाली कराया गया। प्राधिकरण का कहना है कि इन तीनों स्थानों की कुल बाजार कीमत करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। कार्रवाई के बाद नोएडा प्राधिकरण ने साफ शब्दों में कहा कि सरकारी/अर्जित जमीन पर अवैध कब्जा किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा और आगे भी इसी तरह अभियान जारी रहेगा। प्राधिकरण के अनुसार, वर्ष 2024-25 में कुल 2,15,912 वर्गमीटर और वर्ष 2025-26 में कुल 23,93,158 वर्गमीटर भूमि को अतिक्रमण-मुक्त कराया गया है। इनका बाजार मूल्य अनुमानित 2745 करोड़ रुपये बताया गया है। इसी कार्रवाई श्रृंखला में पुलिस थानों में करीब 25 एफआईआर भी दर्ज कराई गईं।

174 अतिक्रमणकर्ताओं को नोटिस

फिलहाल नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में 174 अतिक्रमणकर्ताओं के खिलाफ 527 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, विशेष टीमों के जरिए अवैध निर्माण ध्वस्तीकरण की अगली योजना पर काम चल रहा है और आने वाले दिनों में नोएडा में बड़े स्तर पर कार्रवाई तेज की जाएगी। Noida News


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नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल पर खर्च का गणित उलझा, PAC ने मांगा हिसाब

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समिति ने निर्माण एजेंसी राजकीय निर्माण निगम से कुछ बिंदुओं पर जवाब मांगे, लेकिन समय की कमी के चलते नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ नहीं हो सकी।

नोएडा स्थित राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल
नोएडा स्थित राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar09 Jan 2026 10:18 AM
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Noida News : नोएडा के सेक्टर-95 में स्थित राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल एवं ग्रीन गार्डन एक बार फिर खर्च की फाइलों और रिकॉर्ड की खामियों को लेकर चर्चा में आ गया है। CAG की आपत्तियों पर सुनवाई कर रही लोक लेखा समिति (PAC) ने अब नोएडा अथॉरिटी से इस परियोजना पर हुए व्यय का पूरी डिटेल के साथ हिसाब तलब किया है। समिति ने सिर्फ रकम का आंकड़ा ही नहीं, बल्कि निर्माण से जुड़े अन्य अहम बिंदुओं पर भी विस्तृत जानकारी तलब कर नोएडा प्राधिकरण की फाइलों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

CAG आपत्तियों के बाद PAC की सख्ती

यह स्मारक 2007 से 2011 के बीच तैयार हुआ था, लेकिन ऑडिट आपत्तियों ने इसके निर्माण को लेकर शुरुआत से ही सवाल खड़े कर दिए। इन्हीं संकेतित अनियमितताओं पर PAC लगातार सुनवाई कर रही है। इसी सिलसिले में बुधवार को लखनऊ में बैठक बुलाई गई, मगर हैरानी की बात यह रही कि चर्चा महज 10–15 मिनट में ही समाप्त हो गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समिति ने निर्माण एजेंसी राजकीय निर्माण निगम से कुछ बिंदुओं पर जवाब मांगे, लेकिन समय की कमी के चलते नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ नहीं हो सकी। इस बीच नोएडा अथॉरिटी के एसीईओ सतीश पाल ने कहा है कि अगली सुनवाई में समिति द्वारा मांगे गए सभी रिकॉर्ड्स और विवरण नोएडा अथॉरिटी की ओर से प्रस्तुत किए जाएंगे।

1000 करोड़ से अधिक खर्च का दावा

मामले की सबसे बड़ी गांठ नोएडा में MoU और वास्तविक खर्च के बीच दिख रहे भारी अंतर पर आकर अटकती है। नोएडा अथॉरिटी के मुताबिक, अलग-अलग चरणों में निर्माण एजेंसी को करीब 723 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिसे राजकीय निर्माण निगम को MoU के तहत भुगतान बताया जा रहा है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि नोएडा अथॉरिटी की फाइलों में मौजूद MoU की रकम सिर्फ 84 करोड़ रुपये दर्ज बताई जा रही है और इसके बाद के निर्माण कार्यों से जुड़े अन्य MoU रिकॉर्ड में नदारद हैं। इसी विरोधाभास ने सवालों की पूरी श्रृंखला खड़ी कर दी है। नोएडा अथॉरिटी के कुछ अधिकारी 84 करोड़ को चारदीवारी जैसे सीमित कामों से जोड़ते हैं, जबकि परियोजना से जुड़े पूर्व अधिकारियों का दावा है कि कुल खर्च 1000 करोड़ रुपये से ऊपर गया और इसमें शासन व नोएडा अथॉरिटी दोनों स्तरों से धनराशि लगी। उधर, निर्माण सामग्री को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं कहा जा रहा है कि गुलाबी पत्थर की सप्लाई चुनार (मिर्जापुर) से हुई, लेकिन दस्तावेजों में उसे राजस्थान के बयारना से दिखाकर ढुलाई/परिवहन के नाम पर अतिरिक्त भुगतान लिया गया। आरोप है कि इस मद का भुगतान भी नोएडा अथॉरिटी के खजाने से हुआ, जिससे पूरा प्रकरण अब रिकॉर्ड, भुगतान और जवाबदेही के सवालों में और गहराता जा रहा है।

नोएडा में खर्च की परतें खुलीं

सूत्रों के हवाले से नोएडा में इस परियोजना की फाइलों में एक बड़ा ब्लाइंड स्पॉट सामने आता है। बताया जाता है कि 2012 में तत्कालीन चीफ प्रोजेक्ट इंजीनियर की रिपोर्ट में दर्ज था कि 2009–10 तक करीब 679 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे, लेकिन इसके बाद के चरणों से जुड़े बिल-बाउचर नोएडा अथॉरिटी के रिकॉर्ड में नहीं मिले। यहीं पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है इसके बाद खर्च हुई रकम किसके आदेश पर, किस स्वीकृति के आधार पर और किन दस्तावेजों के सहारे जारी की गई, इसका लिखित ट्रेल नोएडा अथॉरिटी की फाइलों में स्पष्ट नहीं दिखता। मामला यहीं नहीं रुकता। सूत्र बताते हैं कि करीब 9 साल पहले शासन की ऑडिट रिपोर्ट में भी इस परियोजना पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। उस रिपोर्ट में भी यही सवाल उभरा था कि 84 करोड़ के MoU के मुकाबले खर्च का आंकड़ा लगभग 1000 करोड़ तक कैसे पहुंच गया और यदि अतिरिक्त काम हुए भी तो उनकी प्रक्रियागत मंजूरी, एग्रीमेंट्स और भुगतान के प्रमाण आखिर कहां हैं? 

अगली सुनवाई में खुलेगा खर्च का पूरा लेखा-जोखा

इस पूरे प्रकरण में लखनऊ विजिलेंस की जांच भी चल रही है। जानकारी के मुताबिक, विजिलेंस रिपोर्ट के आधार पर पिछले साल कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की बात भी सामने आई थी। अब PAC की ताजा मांग के बाद उम्मीद है कि नोएडा अथॉरिटी को दस्तावेजी रिकॉर्ड के जरिए यह स्पष्ट करना होगा कि रकम किस मद में, किस स्वीकृति के तहत और किस जिम्मेदारी के साथ खर्च हुई। Noida News

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