उन पर आरोप है कि उन्होंने जाली शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों का सहारा लेकर स्वयं को योग्य अधिवक्ता के रूप में प्रस्तुत किया और इससे पेशेवर व सामाजिक लाभ प्राप्त किया। इस संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 और 471 सहित अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

Noida News : उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र में बार एसोसिएशन के हाल ही में निर्वाचित अध्यक्ष मनोज भाटी के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने जाली शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों का सहारा लेकर स्वयं को योग्य अधिवक्ता के रूप में प्रस्तुत किया और इससे पेशेवर व सामाजिक लाभ प्राप्त किया। पुलिस के अनुसार, इस संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 और 471 (जाली दस्तावेज तैयार करना और उनका उपयोग करना) सहित अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला लगभग एक सप्ताह पहले दर्ज हुआ था, जिसकी जांच अब तेज कर दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, मनोज भाटी के बार एसोसिएशन अध्यक्ष पद पर चुने जाने के कुछ ही समय बाद यह प्रकरण उजागर हुआ। इस घटनाक्रम के बाद अधिवक्ता समुदाय और प्रशासनिक हलकों में चचार्ओं का दौर शुरू हो गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने पहले भी संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज भाटी ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि यह मुकदमा उनके खिलाफ राजनीतिक और व्यक्तिगत दुर्भावना के तहत दर्ज कराया गया है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सामाजिक सक्रियता और पेशेवर प्रभाव से कुछ लोग असहज थे, जिसके चलते उन्हें फंसाने की कोशिश की गई। साथ ही उन्होंने जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देने की बात कही है।
इस मामले में गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए अदालत में जमानत याचिका दायर की गई है। वहीं, बार एसोसिएशन के सचिव शोभाराम के नाम से जिला न्यायालय में अंतरिम जमानत हेतु प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया गया है। याचिका में कहा गया है कि यह मामला राजनीतिक विरोधियों के दबाव में दर्ज कराया गया और इससे मनोज भाटी को मानसिक व सामाजिक क्षति पहुंची है। यह प्रार्थनापत्र 3 जनवरी को न्यायालय में दाखिल किया गया। नॉलेज पार्क थाना पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। संबंधित शैक्षणिक संस्थानों से दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि कराई जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है।