नोएडा में गैस की किल्लत से हाहाकार, एजेंसियों पर लगी लंबी कतारें

घरेलू और कमर्शियल गैस की सप्लाई प्रभावित होने से दोनों शहरों में आम उपभोक्ता से लेकर छोटे कारोबारी तक परेशान हैं। सबसे ज्यादा मार उन परिवारों पर पड़ रही है, जो छोटे सिलेंडरों के सहारे रोजमर्रा की रसोई चलाते हैं।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में LPG संकट
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में LPG संकट
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar12 Mar 2026 10:16 AM
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Noida News : नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एलपीजी गैस की किल्लत अब गंभीर रूप लेती दिखाई दे रही है। घरेलू और कमर्शियल गैस की सप्लाई प्रभावित होने से दोनों शहरों में आम उपभोक्ता से लेकर छोटे कारोबारी तक परेशान हैं। सबसे ज्यादा मार उन परिवारों पर पड़ रही है, जो छोटे सिलेंडरों के सहारे रोजमर्रा की रसोई चलाते हैं। गैस की कमी का फायदा उठाते हुए बाजार में 5 किलो वाले सिलेंडरों की रीफिलिंग के नाम पर खुलेआम मनमानी वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं।

नोएडा में 5 किलो सिलेंडर बना मजबूरी

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर की रीफिलिंग अपेक्षाकृत कम खर्च में हो जाती थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। गैस की उपलब्धता कम होने से कुछ बिचौलिए और अनधिकृत सप्लायर ऊंचे दाम वसूल रहे हैं। आरोप है कि कई जगहों पर प्रति किलो 300 से 400 रुपये तक की वसूली की जा रही है। ग्रेटर नोएडा के बीटा-1 इलाके में रहने वाले मजदूर परिवारों का कहना है कि बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। दिहाड़ी पर काम करने वाले लोगों के लिए इतनी महंगी गैस खरीदना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है।

ग्रेटर नोएडा के छोटे कारोबारी भी संकट में

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कमर्शियल गैस की आपूर्ति बाधित होने का असर छोटे होटल, ढाबों, चाय स्टॉल और फास्ट फूड कारोबार पर भी साफ दिख रहा है। कई दुकानदारों का कहना है कि एजेंसियों से समय पर कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में उन्हें या तो काम सीमित करना पड़ रहा है या फिर घरेलू सिलेंडर ऊंचे दाम पर खरीदकर किसी तरह कारोबार चलाना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि अगर नोएडा में जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो बड़ी संख्या में छोटे फूड स्टॉल और सड़क किनारे चलने वाले खाने-पीने के कारोबार बंद होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं।

नोएडा की गैस एजेंसियों पर लगी लंबी लाइनें

गैस संकट का सबसे ज्यादा असर एजेंसियों के बाहर दिखाई दे रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की कई गैस एजेंसियों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सेक्टर-54 स्थित एजेंसी पर हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस को मौके पर तैनात करना पड़ा। इसी तरह सेक्टर-20 और सेक्टर-73 की एजेंसियों पर भी भारी भीड़ देखने को मिली। कई जगहों पर जैसे ही डिलीवरी वाहन पहुंचे, उपभोक्ता सिलेंडर लेने के लिए उमड़ पड़े। इससे अव्यवस्था की स्थिति बन गई। नोएडा और Greater Noida में गैस की यह कमी सबसे ज्यादा निम्न आय वर्ग और किराये पर रहने वाले मजदूर परिवारों को प्रभावित कर रही है। छोटे सिलेंडरों पर निर्भर ये परिवार पहले ही महंगाई की मार झेल रहे थे, ऊपर से अब गैस की कालाबाजारी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कई घरों में खाना बनाने तक का संकट खड़ा हो गया है।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

नोएडा के लोगों और स्थानीय कारोबारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गैस की सप्लाई व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए। साथ ही कमर्शियल सिलेंडरों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने और कालाबाजारी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उपभोक्ताओं का कहना है कि एक ओर शहर गैस संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसी संकट को मुनाफे का जरिया बना रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की सख्ती ही राहत दिला सकती है। Noida News

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नोएडा की मीटर फैक्टरी में अचानक भड़क उठी आग, मच गई चीख-पुकार

नोएडा थाना फेज-2 क्षेत्र में सोमवार सुबह अचानक उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक फैक्ट्री की तीसरी मंजिल पर आग भड़क उठी। देखते ही देखते धुआं और लपटें उठने लगीं, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

फेज-2 फैक्ट्री में आग
फेज-2 फैक्ट्री में आग
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar12 Mar 2026 09:28 AM
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Noida News : नोएडा से इस समय एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नोएडा थाना फेज-2 क्षेत्र में सोमवार सुबह अचानक उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक फैक्ट्री की तीसरी मंजिल पर आग भड़क उठी। देखते ही देखते धुआं और लपटें उठने लगीं, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड को अलर्ट किया गया, जिसके बाद नोएडा फायर विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बिना देर किए राहत व बचाव अभियान शुरू कर दिया।

मीटर बनाने वाली फैक्ट्री में लगी आग

जानकारी के मुताबिक, नोएडा के इस औद्योगिक क्षेत्र में स्थित फैक्ट्री में बिजली के मीटर बनाने का काम किया जाता है। आग लगने के दौरान फैक्ट्री के भीतर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना सबसे बड़ी चुनौती थी। दमकल विभाग की टीम ने तेजी दिखाते हुए पहले रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और अंदर फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद आग बुझाने का अभियान तेज किया गया। आग की गंभीरता को देखते हुए नोएडा में दमकल विभाग की कुल 7 गाड़ियों को मौके पर लगाया गया। फैक्ट्री की ऊपरी मंजिल से उठती लपटों और धुएं ने कुछ देर के लिए हालात को चिंताजनक बना दिया था। हालांकि दमकल कर्मियों की तत्परता के चलते आग को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

फैक्ट्री में आग के कारणों की पड़ताल जारी

प्राथमिक जानकारी में सामने आया है कि आग फैक्ट्री की तीसरी मंजिल पर लगी थी। फिलहाल इस घटना में किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। नोएडा प्रशासन और फायर विभाग आग लगने के कारणों की जांच में जुटे हुए हैं। शुरुआती तौर पर तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट जैसी आशंका जताई जा रही है, लेकिन वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो सकेगी। Noida News

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नोएडा-ग्रेटर नोएडा में एलपीजी संकट का असर, कई फैक्ट्रियों में उत्पादन हुआ धीमा

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में एलपीजी की कमी के कारण कई फैक्ट्रियों और व्यवसायों में उत्पादन धीमा हो गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के निदेर्शों के तहत कॉमर्शियल सिलेंडरों के वितरण पर अस्थायी रोक लगाई गई है।

lpg
औद्योगिक क्षेत्र में एलपीजी की कमी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar11 Mar 2026 07:37 PM
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Noida News: नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में एलपीजी की कमी के कारण कई फैक्ट्रियों और व्यवसायों में उत्पादन धीमा हो गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के निदेर्शों के तहत कॉमर्शियल सिलेंडरों के वितरण पर अस्थायी रोक लगाई गई है। इससे जिले की हजारों औद्योगिक इकाइयों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते वैश्विक तनाव के कारण गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई है। मंत्रालय ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगाई है।

औद्योगिक इकाइयों पर प्रभाव

नोएडा में लगभग चार लाख कनेक्शन धारक हैं, जबकि 35 हजार से अधिक एमएसएमई इकाइयां गैस पर निर्भर हैं। पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग, सिलिकॉन मैन्युफैक्चरिंग और अन्य कई उद्योग उत्पादन के लिए एलपीजी का इस्तेमाल करते हैं। गैस की कमी के कारण कई फैक्ट्रियों ने उत्पादन कम कर दिया है और कुछ स्थानों पर काम पूरी तरह रुक गया है।

होटल और कैटरिंग कारोबार में मुश्किलें

कॉमर्शियल एलपीजी की कमी का असर होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग उद्योग पर भी पड़ रहा है। कई रेस्टोरेंट संचालकों ने बताया कि गैस की कमी के कारण रसोई संचालन में कठिनाइयाँ हो रही हैं। कुछ प्रतिष्ठान अन्य स्रोतों से गैस खरीद कर काम चला रहे हैं, जबकि कुछ को ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं।

कालाबाजारी और प्रशासन की सतर्कता

बाजार में बढ़ती सिलेंडर कालाबाजारी के चलते जिला प्रशासन ने विशेष निगरानी शुरू कर दी है। अऊट वित्त एवं राजस्व अतुल कुमार के नेतृत्व में चार टीमों का गठन किया गया है, जो गैस की आपूर्ति और कालाबाजारी पर नजर रख रही हैं। कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि बाजार में सिलेंडर 3,500 से 5,000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। फिलहाल प्रशासन ने केवल आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं जैसे अस्पताल, सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस आपूर्ति की अनुमति दी है।


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