आयुष्मान भारत का बड़ा सच आया सामने! जानकर चौंक जाएंगे

Ayushman Bharat Scheme: ज्वाइंट फैमिली और 70 साल से ऊपर के सीनियर सिटीजन्स को आयुष्मान भारत योजना में कितना हेल्थ कवर मिलता है इसे लेकर बड़ा कन्फ्यूजन है। क्या दादा-दादी और नाना-नानी सभी को अलग-अलग 5 लाख रुपये मिलते हैं या कुल लिमिट कुछ और है।

Ayushman Bharat Scheme
आयुष्मान भारत योजना
locationभारत
userअसमीना
calendar08 Jan 2026 01:00 PM
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आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) को लेकर इन दिनों ज्वाइंट फैमिली और 70 साल से अधिक उम्र के सीनियर सिटीजन्स के बीच काफी भ्रम बना हुआ है। कई लोग यह मान रहे हैं कि अगर एक ही घर में दादा-दादी और नाना-नानी सभी साथ रहते हैं तो हर बुजुर्ग को अलग-अलग 5 लाख रुपये का हेल्थ कवर मिलेगा और कुल कवरेज 15 लाख रुपये तक पहुंच जाएगा। लेकिन सच्चाई यह है कि आयुष्मान भारत योजना में ऐसा कोई नियम नहीं है और यह धारणा पूरी तरह गलत है।

आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य

केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को महंगे इलाज के खर्च से बचाना है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाता है। यह कवर सेकेंडरी और टर्शियरी हॉस्पिटलाइजेशन के लिए मान्य होता है और देशभर के सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में लागू होता है।

पूरे परिवारे के लिए होता है 5 लाख का कवर

PM-JAY की सबसे अहम बात यह है कि इसमें मिलने वाला 5 लाख रुपये का कवर पूरे परिवार के लिए होता है न कि किसी एक व्यक्ति के लिए। परिवार में कितने भी सदस्य क्यों न हों, उनकी उम्र या जेंडर कुछ भी हो, सभी इसी एक लिमिट में कवर रहते हैं। यानी पति-पत्नी, बच्चे, माता-पिता और बुजुर्ग सदस्य सभी को मिलाकर सालाना 5 लाख रुपये तक का ही इलाज मुफ्त होता है।

PM-JAY में सालाना 5 लाख रुपये का फ्री इलाज कैसे मिलता है?

सरकार ने अक्टूबर 2024 में इस योजना का दायरा बढ़ाते हुए 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सभी सीनियर सिटीजन्स को भी शामिल किया। इसके तहत आयुष्मान वय वंदना योजना लागू की गई। इस योजना के अनुसार, अगर कोई परिवार पहले से आयुष्मान भारत PM-JAY में शामिल है और उसमें 70 साल से ऊपर के सदस्य हैं तो ऐसे बुजुर्गों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का अतिरिक्त टॉप-अप हेल्थ कवर दिया जाता है। इसका मतलब साफ है कि ऐसे परिवारों को 5 लाख रुपये का रेगुलर फैमिली कवर और 5 लाख रुपये का सीनियर सिटिजन टॉप-अप मिलता है। यानी कुल मिलाकर अधिकतम 10 लाख रुपये तक का हेल्थ कवरेज मिलता है। इससे ज्यादा कवर मिलने का कोई नियम योजना में मौजूद नहीं है।

किनको मिलता है फायदा?

ज्वाइंट फैमिली में सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यहीं से शुरू होता है। कई लोग यह समझ लेते हैं कि दादा-दादी को अलग 5 लाख और नाना-नानी को अलग 5 लाख मिलेगा। इस तरह रेगुलर फैमिली कवर जोड़कर कुल 15 लाख रुपये तक का फायदा मिलेगा। लेकिन आयुष्मान भारत पोर्टल के आधिकारिक FAQs के मुताबिक, वय वंदना योजना के तहत मिलने वाला सीनियर सिटिजन कवर परिवार के आधार पर दिया जाता है न कि प्रति व्यक्ति या प्रति जोड़े के हिसाब से।

10 लाख रुपये तक ही सीमित

चाहे घर में एक बुजुर्ग हों या कई सीनियर सिटीजन्स सभी 70 साल से ऊपर के सदस्यों के लिए मिलने वाला टॉप-अप कवर कुल मिलाकर सिर्फ 5 लाख रुपये ही होता है। अगर आप जॉइंट फैमिली में रहते हैं और घर में दादा-दादी और नाना-नानी सभी साथ हैं तब भी आयुष्मान भारत योजना के तहत अधिकतम हेल्थ कवरेज 10 लाख रुपये तक ही सीमित रहेगा।

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रेहड़ी-पटरी वालों को लौटाए जाएंगे करोड़ों रुपये, एक साथ मिलेंगे कई फायदे

PM Svanidhi Yojana: पीएम स्वनिधि योजना के तहत रेहड़ी-पटरी वालों को बड़ी राहत मिली है। पहले जिन लाभार्थियों से बैंक ने ब्याज काट लिया था उन्हें वह राशि वापस की जाएगी। इस फैसले से स्ट्रीट वेंडर्स का भरोसा बढ़ेगा और छोटे कारोबारियों को आर्थिक सहारा मिलेगा।

PM Svanidhi Yojana
पीएम स्वनिधि योजना
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userअसमीना
calendar08 Jan 2026 12:36 PM
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देश के करोड़ों रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे स्ट्रीट वेंडर्स के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (PM Svanidhi Scheme) के तहत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मध्य प्रदेश सरकार ने इस योजना से जुड़े लाभार्थियों को राहत देते हुए बड़ा फैसला लिया है। अब पीएम स्वनिधि योजना के तहत अधिकतम 14 प्रतिशत ब्याज दर पर ही लोन मिलेगा। इसके साथ ही जिन स्ट्रीट वेंडर्स से बैंकों ने पहले ही ब्याज काट लिया था उन्हें वह पूरी राशि वापस लौटाई जाएगी। सरकार के अनुसार, यह ब्याज वापसी करीब 120 करोड़ रुपये की होगी। यह फैसला उन हजारों छोटे व्यापारियों के लिए राहत लेकर आया है जो कोरोना काल के बाद से आर्थिक संकट से जूझ रहे थे और ऊंचे ब्याज के कारण योजना से दूर हो रहे थे।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मुताबिक, सरकार के पास लगातार शिकायतें आ रही थीं कि कई बैंक पीएम स्वनिधि योजना के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। कुछ बैंकों ने लोन देते समय ही ब्याज की रकम काट ली जिससे लाभार्थियों को तय राशि से कम पैसा मिला। कई मामलों में ब्याज दर 20 से 25 प्रतिशत तक वसूली गई जो योजना की भावना के खिलाफ थी। इसी वजह से राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से संपर्क कर ब्याज दर पर सीमा तय करने और गलत तरीके से काटी गई राशि वापस दिलाने की मांग की।

क्या है पीएम स्वनिधि योजना?

प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना केंद्र सरकार की एक खास योजना है जिसे छोटे रेहड़ी-पटरी वालों, ठेला लगाने वालों और स्ट्रीट वेंडर्स को फिर से आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू किया गया था। इस योजना के तहत बिना किसी गारंटी के लोन दिया जाता है ताकि वे अपना छोटा कारोबार दोबारा खड़ा कर सकें। इस योजना में केंद्र सरकार 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देती है जबकि बाकी ब्याज का भार राज्य सरकार उठाती है। इस तरह नियमों के अनुसार लाभार्थी को किसी भी तरह का ब्याज नहीं देना होता।

पीएम स्वनिधि योजना के तहत कितना लोन मिलता है?

पीएम स्वनिधि योजना में लोन की राशि चरणों में दी जाती है। पहली बार योजना का लाभ लेने पर लाभार्थी को ₹10,000 तक का लोन मिलता है। यदि वह तय समय में इस लोन की राशि चुका देता है तो अगली बार उसे ₹20,000 तक का लोन मिल सकता है। दूसरी बार का लोन समय पर चुकाने पर तीसरे चरण में ₹50,000 तक का लोन लेने की सुविधा मिलती है। समय पर भुगतान करने वालों को आगे चलकर कैशबैक, डिजिटल ट्रांजैक्शन पर इनाम और क्रेडिट कार्ड जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी दी जाती हैं।

अब क्या बदलेगा पीएम स्वनिधि योजना में?

केंद्र सरकार की सहमति के बाद अब यह साफ कर दिया गया है कि कोई भी बैंक पीएम स्वनिधि योजना के तहत 14 प्रतिशत से ज्यादा ब्याज नहीं ले सकेगा। लोन की पूरी राशि सीधे लाभार्थी को मिलेगी और पहले काटी गई ब्याज की रकम वापस की जाएगी। इसके अलावा, योजना को और मजबूत बनाने के लिए लोन की राशि बढ़ाई गई है और समय पर भुगतान करने वालों को ज्यादा फायदे दिए जाएंगे।

स्ट्रीट वेंडर्स को क्या होगा फायदा?

सरकार का कहना है कि इन बदलावों से स्ट्रीट वेंडर्स पर पड़ रहा दोहरा आर्थिक बोझ खत्म होगा। उन्हें अब बिना किसी डर और भ्रम के योजना का लाभ मिल सकेगा। इससे न सिर्फ उनका भरोसा दोबारा मजबूत होगा बल्कि छोटे कारोबारियों को आत्मनिर्भर बनने में भी मदद मिलेगी। पीएम स्वनिधि योजना में किया गया यह बदलाव लाखों रेहड़ी-पटरी वालों के लिए राहत की सांस है और आने वाले समय में यह योजना और ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है।

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आपकी पुरानी कार भी बन सकती है इलेक्ट्रिक, दिल्ली सरकार दे रही है बड़ा अवसर

EV Policy 2.0: दिल्ली सरकार की नई EV Policy 2.0 में अब पेट्रोल और डीजल कारों को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने पर ₹50,000 तक की सब्सिडी दी जा सकती है। यह योजना राजधानी में प्रदूषण कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए लाई गई है।

ev policy 2.0 delhi
दिल्ली EV Policy 2.0 सब्सिडी
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userअसमीना
calendar08 Jan 2026 12:05 PM
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दिल्ली के लोगों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। राजधानी में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार नई EV Policy 2.0 लाने की तैयारी कर रही है। इस पॉलिसी की सबसे खास बात यह है कि अब सिर्फ नई इलेक्ट्रिक गाड़ियां ही नहीं बल्कि मौजूदा पेट्रोल और डीजल कारों को भी इलेक्ट्रिक में बदला जा सकेगा और इसके लिए सरकार ₹50,000 तक की सब्सिडी दे सकती है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो दिल्ली ऐसा कदम उठाने वाला देश का पहला राज्य बन सकता है।

क्या है दिल्ली EV Policy 2.0 का बड़ा प्रस्ताव?

दिल्ली सरकार की EV Policy 2.0 के तहत एक अनूठी योजना पर विचार किया जा रहा है जिसमें पेट्रोल-डीजल कारों को इलेक्ट्रिक वाहन में कन्वर्ट (Retrofitting) करने पर आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत सरकार शुरुआती 1000 कारों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर ₹50,000 का इंसेंटिव दे सकती है। फिलहाल दिल्ली की मौजूदा EV Policy को मार्च 2026 तक बढ़ाया गया है और नई पॉलिसी के अप्रैल 2026 से लागू होने की संभावना है हालांकि इससे पहले जनता से सुझाव भी मांगे जाएंगे।

Retrofitting क्या होता है और यह कैसे काम करता है?

रेट्रोफिटिंग का मतलब होता है किसी मौजूदा पेट्रोल या डीजल कार से उसका इंजन और उससे जुड़े सभी पारंपरिक पार्ट्स हटाकर उसमें इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी और कंट्रोल सिस्टम लगाना। इस प्रक्रिया के बाद वही कार पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन बन जाती है। हालांकि यह तकनीक फिलहाल थोड़ी महंगी है, इसी वजह से सरकार सब्सिडी देने की योजना बना रही है। परिवहन विभाग के अनुसार, आने वाले समय में सरकार रेट्रोफिटिंग सेक्टर में रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी निवेश कर सकती है।

पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग पर भी मिलेगी सब्सिडी

नई ईवी पॉलिसी में सिर्फ रेट्रोफिटिंग ही नहीं बल्कि पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को स्क्रैप करने पर भी सब्सिडी देने का प्रस्ताव है। इसमें पुराने टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और हल्के कमर्शियल वाहन शामिल होंगे। सरकार का उद्देश्य साफ है पुराने वाहनों को हटाकर स्वच्छ और ग्रीन एनर्जी की ओर तेजी से शिफ्ट करना।

नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर फिर मिल सकती है सब्सिडी

EV Policy 2.0 के लागू होने के बाद दिल्ली में नई इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने पर भी सब्सिडी दोबारा शुरू हो सकती है। इससे न सिर्फ ग्राहकों को फायदा मिलेगा बल्कि लोकल मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और EV इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलेगी।

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर कितना मिलेगा फायदा?

नई पॉलिसी में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर खास फोकस किया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक, एक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर ₹21,000 तक की सब्सिडी दी जा सकती है जबकि महिलाओं को ₹30,000 तक का लाभ मिल सकता है। जानकारी के अनुसार, लगभग 1 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर को इस सब्सिडी का फायदा देने की योजना है।

इलेक्ट्रिक कार पर सब्सिडी के नियम

प्राइवेट इलेक्ट्रिक कारों के लिए सरकार कुछ सख्त शर्तें रखने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक, ₹25 लाख से कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को ही सब्सिडी मिलेगी। योजना के तहत प्रति kWh ₹10,000 की दर से अधिकतम ₹1 लाख तक की सब्सिडी दी जा सकती है। इस स्कीम का लाभ करीब 27,000 कारों को मिल सकता है।

EV गाड़ियों पर लोन लेना होगा आसान

इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को और बढ़ाने के लिए सरकार EV लोन प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी में है। इसके तहत ग्राहकों को 5 प्रतिशत तक ब्याज में सब्सिडी मिल सकती है। हाल ही में हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई है, हालांकि अंतिम मसौदे में कुछ बदलाव संभव हैं।

क्यों है यह पॉलिसी दिल्ली के लिए बेहद अहम?

अगर दिल्ली EV Policy 2.0 को मंजूरी मिल जाती है तो यह सिर्फ एक नई स्कीम नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम होगा। इससे लोगों को अपनी पुरानी पेट्रोल-डीजल गाड़ियों को स्क्रैप करने के बजाय इलेक्ट्रिक में बदलने का विकल्प मिलेगा जिससे पैसा भी बचेगा और प्रदूषण भी कम होगा।