आपकी पुरानी कार भी बन सकती है इलेक्ट्रिक, दिल्ली सरकार दे रही है बड़ा अवसर

EV Policy 2.0: दिल्ली सरकार की नई EV Policy 2.0 में अब पेट्रोल और डीजल कारों को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने पर ₹50,000 तक की सब्सिडी दी जा सकती है। यह योजना राजधानी में प्रदूषण कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए लाई गई है।

ev policy 2.0 delhi
दिल्ली EV Policy 2.0 सब्सिडी
locationभारत
userअसमीना
calendar08 Jan 2026 12:05 PM
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दिल्ली के लोगों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। राजधानी में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार नई EV Policy 2.0 लाने की तैयारी कर रही है। इस पॉलिसी की सबसे खास बात यह है कि अब सिर्फ नई इलेक्ट्रिक गाड़ियां ही नहीं बल्कि मौजूदा पेट्रोल और डीजल कारों को भी इलेक्ट्रिक में बदला जा सकेगा और इसके लिए सरकार ₹50,000 तक की सब्सिडी दे सकती है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो दिल्ली ऐसा कदम उठाने वाला देश का पहला राज्य बन सकता है।

क्या है दिल्ली EV Policy 2.0 का बड़ा प्रस्ताव?

दिल्ली सरकार की EV Policy 2.0 के तहत एक अनूठी योजना पर विचार किया जा रहा है जिसमें पेट्रोल-डीजल कारों को इलेक्ट्रिक वाहन में कन्वर्ट (Retrofitting) करने पर आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत सरकार शुरुआती 1000 कारों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर ₹50,000 का इंसेंटिव दे सकती है। फिलहाल दिल्ली की मौजूदा EV Policy को मार्च 2026 तक बढ़ाया गया है और नई पॉलिसी के अप्रैल 2026 से लागू होने की संभावना है हालांकि इससे पहले जनता से सुझाव भी मांगे जाएंगे।

Retrofitting क्या होता है और यह कैसे काम करता है?

रेट्रोफिटिंग का मतलब होता है किसी मौजूदा पेट्रोल या डीजल कार से उसका इंजन और उससे जुड़े सभी पारंपरिक पार्ट्स हटाकर उसमें इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी और कंट्रोल सिस्टम लगाना। इस प्रक्रिया के बाद वही कार पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन बन जाती है। हालांकि यह तकनीक फिलहाल थोड़ी महंगी है, इसी वजह से सरकार सब्सिडी देने की योजना बना रही है। परिवहन विभाग के अनुसार, आने वाले समय में सरकार रेट्रोफिटिंग सेक्टर में रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी निवेश कर सकती है।

पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग पर भी मिलेगी सब्सिडी

नई ईवी पॉलिसी में सिर्फ रेट्रोफिटिंग ही नहीं बल्कि पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को स्क्रैप करने पर भी सब्सिडी देने का प्रस्ताव है। इसमें पुराने टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और हल्के कमर्शियल वाहन शामिल होंगे। सरकार का उद्देश्य साफ है पुराने वाहनों को हटाकर स्वच्छ और ग्रीन एनर्जी की ओर तेजी से शिफ्ट करना।

नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर फिर मिल सकती है सब्सिडी

EV Policy 2.0 के लागू होने के बाद दिल्ली में नई इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने पर भी सब्सिडी दोबारा शुरू हो सकती है। इससे न सिर्फ ग्राहकों को फायदा मिलेगा बल्कि लोकल मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और EV इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलेगी।

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर कितना मिलेगा फायदा?

नई पॉलिसी में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर खास फोकस किया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक, एक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर ₹21,000 तक की सब्सिडी दी जा सकती है जबकि महिलाओं को ₹30,000 तक का लाभ मिल सकता है। जानकारी के अनुसार, लगभग 1 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर को इस सब्सिडी का फायदा देने की योजना है।

इलेक्ट्रिक कार पर सब्सिडी के नियम

प्राइवेट इलेक्ट्रिक कारों के लिए सरकार कुछ सख्त शर्तें रखने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक, ₹25 लाख से कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को ही सब्सिडी मिलेगी। योजना के तहत प्रति kWh ₹10,000 की दर से अधिकतम ₹1 लाख तक की सब्सिडी दी जा सकती है। इस स्कीम का लाभ करीब 27,000 कारों को मिल सकता है।

EV गाड़ियों पर लोन लेना होगा आसान

इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को और बढ़ाने के लिए सरकार EV लोन प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी में है। इसके तहत ग्राहकों को 5 प्रतिशत तक ब्याज में सब्सिडी मिल सकती है। हाल ही में हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई है, हालांकि अंतिम मसौदे में कुछ बदलाव संभव हैं।

क्यों है यह पॉलिसी दिल्ली के लिए बेहद अहम?

अगर दिल्ली EV Policy 2.0 को मंजूरी मिल जाती है तो यह सिर्फ एक नई स्कीम नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम होगा। इससे लोगों को अपनी पुरानी पेट्रोल-डीजल गाड़ियों को स्क्रैप करने के बजाय इलेक्ट्रिक में बदलने का विकल्प मिलेगा जिससे पैसा भी बचेगा और प्रदूषण भी कम होगा। 

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फार्मर आईडी बनवाने का परसो आखिरी मौका, जल्दी जाएं कैंप

Farmer ID: बिहार के 71 लाख किसान ध्यान दें, अगर आपने अभी तक फार्मर आईडी नहीं बनवाई है तो फरवरी में पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त से वंचित हो सकते हैं। फार्मर आईडी बनवाने के लिए 6 से 9 जनवरी तक पंचायत स्तर पर विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं।

Farmer ID
क्यों जरूरी है फार्मर आईडी
locationभारत
userअसमीना
calendar07 Jan 2026 02:37 PM
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केंद्र और राज्य सरकार लगातार यह संदेश दे रही हैं कि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसान पहचान पत्र यानी Farmer ID बनवाना अनिवार्य है लेकिन दुर्भाग्यवश, देशभर में बड़ी संख्या में किसान इस छोटे से काम को अभी तक पूरा नहीं कर पाए हैं। बिहार की बात करें तो लगभग 71 लाख किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने 6 से 9 जनवरी तक हर पंचायत में विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान में किसान अपने कागजात लेकर जाकर आसानी से फार्मर आईडी बनवा सकते हैं।

पीएम किसान की 22वीं किस्त का फार्मर आईडी से संबंध

यदि किसान इस चार दिन के अभियान में भी फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराते हैं तो उन्हें फरवरी में आने वाली पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त से वंचित होना पड़ सकता है। बिहार में लगभग 75 लाख किसान पीएम किसान योजना का लाभ उठा रहे हैं लेकिन अब तक केवल 4 लाख के आसपास किसानों ने ही फार्मर आईडी बनवाई है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं होगी उन्हें पीएम किसान सम्मान निधि और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा।

फार्मर आईडी क्यों जरूरी है?

फार्मर आईडी एक यूनिक पहचान पत्र की तरह काम करती है। इसके कई फायदे हैं:

1. किसान सीधे सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।

2. कोई अन्य व्यक्ति आपके हक में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

3. पीएम किसान सम्मान निधि और पीएम फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं में आसानी से पहुंच मिलती है।

4. सभी किसानों का एकीकृत डिजिटल पहचान तैयार हो जाती है।

इस तरह फार्मर आईडी किसान के लिए सुरक्षा और सुविधा दोनों सुनिश्चित करती है।

फार्मर आईडी बनाने के लिए जरूरी दस्तावेज

किसान अपनी फार्मर आईडी बनवाने के लिए निम्न दस्तावेज साथ लेकर आएं:

1. आधार कार्ड

2. मोबाइल नंबर

3. जमीन से जुड़े दस्तावेज (खुद के नाम की ऑनलाइन जमाबंदी से संबंधित कागज)

फार्मर आईडी कैसे बनवाएं?

बिहार सरकार ने पंचायत स्तर पर विशेष कैंप आयोजित किए हैं जो 6, 7, 8 और 9 जनवरी तक चलेंगे। इन कैंपों में किसान को अपने कागजात लेकर जाना होगा। प्रक्रिया इस प्रकार है:

1. किसान कृषि समन्यवक, किसान सलाहकार या हलका कर्मचारी से संपर्क करेंगे।

2. फार्मर रजिस्ट्री के पोर्टल या एप पर बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन से वेरिफिकेशन होगा।

3. जमीन से संबंधित दावा दर्ज कराया जाएगा।

4. राजस्व विभाग के कर्मचारी इसकी वेरिफिकेशन करेंगे।

5. इसके बाद किसान को फार्मर आईडी प्रदान की जाएगी।

हेल्पलाइन नंबर

यदि फार्मर आईडी बनवाने में किसी प्रकार की समस्या आती है तो किसान इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं-

कृषि विभाग: 18001801551

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग: 18003456215

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लाखों महिलाओं की उम्मीदों पर फिरा पानी, लाडकी बहीण योजना में इतना बड़ा झोल!

Ladki Bahin Yojana: लाडकी बहिण योजना दिसंबर किस्त के लिए महिलाओं के खाते में केवल 1500 रुपये आए हैं। राज्य सरकार ने नवंबर की 17वीं किस्त जारी कर दी है लेकिन दिसंबर की 18वीं किस्त अभी भी अटकी हुई है। लाभार्थियों को उम्मीद थी कि नए साल में उनके खाते में 3000 रुपये आएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

ladki bahin yojana
मुख्यमंत्री लाडकी बहीण योजना
locationभारत
userअसमीना
calendar07 Jan 2026 01:49 PM
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लाडकी बहिण योजना महाराष्ट्र सरकार की एक अहम योजना है जो राज्य की महिलाओं को वित्तीय मदद देने के लिए शुरू की गई है। लाडकी बहिण योजना के तहत हर महीने महिलाओं के खाते में राशि जमा की जाती है। नवंबर महीने की 17वीं किस्त राज्य सरकार ने जारी कर दी है, लेकिन दिसंबर महीने की 18वीं किस्त अभी तक कई महिलाओं के खाते में नहीं आई है। लाभार्थियों को उम्मीद थी कि नए साल में उनके खाते में 3000 रुपये आएंगे लेकिन कई महिलाओं के खाते में अभी केवल 1500 रुपये ही जमा हुए हैं। इससे महिलाओं में चिंता और सवाल बढ़ गए हैं कि आखिर पैसा कब पूरा मिलेगा।

लाडकी बहीण योजना की दिसंबर की किस्त क्यों अटकी?

महाराष्ट्र में निकाय चुनाव सिर पर हैं। 15 जनवरी को 29 नगर निकायों में वोटिंग होनी है और 2869 सीटें दांव पर हैं। इस चुनावी माहौल में महिलाओं का लाडकी बहिण योजना का पैसा समय पर नहीं मिलना सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के लिए चिंता का विषय बन सकता है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर की किस्त जारी करने के लिए फंड क्लीयरेंस जरूरी है। इसके अलावा, आचार संहिता लागू होने के कारण 15 जनवरी से पहले इसे मंजूरी मिलना मुश्किल है। इसका मतलब है कि चुनाव खत्म होने तक दिसंबर की किस्त के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

क्या आचार संहिता देरी की वजह है?

कई अधिकारियों का कहना है कि लाडकी बहिण योजना सीधे तौर पर आचार संहिता के दायरे में नहीं आती। लेकिन भुगतान में देरी और कम्युनिकेशन का सही तरीके से न होना सत्तारूढ़ दल के लिए चिंता का कारण बन सकता है। कुछ राजनेताओं का कहना है कि यह योजना पहले से ही चल रही है और इसे बिना देरी जारी किया जाना चाहिए। वहीं विपक्ष का आरोप है कि फंड की कमी के कारण पैसा रोका जा रहा है।

लाभार्थियों की प्रतिक्रिया

पुणे जिले की एक महिला ने बताया कि, “मैं हफ्तों तक अपने खाते को चेक करती रही। पैसा आखिरकार आया, लेकिन दिसंबर किस्त को लेकर कोई जानकारी नहीं है।” शोलापुर की एक महिला ने कहा कि उन्हें दोनों किस्तों का एक साथ आने का भरोसा था। उन्हें बताया गया था कि भुगतान हमेशा समय पर आएगी, लेकिन अब केवल नवंबर की किस्त ही आई है।

आखिर कब मिलेगा दिसंबर का पैसा?

अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर की किस्त वित्त विभाग से क्लीयरेंस मिलने के बाद जारी होगी। फिलहाल, नए साल में केवल 1500 रुपये जमा हुए हैं। जो महिलाएं पूरी राशि की उम्मीद कर रही थीं, उन्हें थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है।