लखपति बनेगी हर बेटी! सरकार देगी 1 लाख रुपये, जानें पूरी प्रक्रिया

Lakhpati Bitiya Scheme: दिल्ली सरकार की लखपति बिटिया योजना 2026 बेटियों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक अहम योजना है। इस योजना के तहत सरकार अलग-अलग चरणों में कुल 56 हजार रुपये जमा करती है जो ब्याज सहित 1 लाख रुपये बनकर बेटी के...

Lakhpati Bitiya Yojana
लखपति बिटिया योजना
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userअसमीना
calendar11 Feb 2026 02:56 PM
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बेटियों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘दिल्ली लखपति बिटिया योजना’ की घोषणा की है जो साल 2008 में शुरू हुई लाडली योजना का उन्नत (अपग्रेड) रूप है। इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली की कोई भी बेटी केवल आर्थिक कमी के कारण अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़े। 1 अप्रैल से लागू होने वाली यह योजना बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास मानी जा रही है।

दिल्ली लखपति बिटिया योजना न सिर्फ आर्थिक सहायता देगी बल्कि परिवारों को बेटियों की शिक्षा के प्रति जागरूक और प्रोत्साहित भी करेगी। सरकार द्वारा अलग-अलग चरणों में जमा की जाने वाली राशि ब्याज सहित अंत में 1 लाख रुपये बन जाएगी जो सीधे बेटी के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।

दिल्ली लखपति बिटिया योजना के तहत क्या मिलेगा?

दिल्ली लखपति बिटिया योजना के अंतर्गत सरकार कुल 56,000 रुपये अलग-अलग चरणों में जमा करेगी। यह राशि समय के साथ ब्याज जोड़कर लगभग 1 लाख रुपये हो जाएगी। यह पूरी रकम बेटी को तब मिलेगी जब वह 21 वर्ष की आयु पूरी कर लेगी या अपनी ग्रेजुएशन अथवा डिप्लोमा की पढ़ाई पूरी कर लेगी। इस योजना का मकसद यह है कि बेटी को उच्च शिक्षा या भविष्य की जरूरतों के लिए एक मजबूत आर्थिक आधार मिल सके। खास बात यह है कि पैसा सीधे लाभार्थी के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी।

किसे मिलेगा दिल्ली लखपति बिटिया योजना का लाभ?

दिल्ली लखपति बिटिया योजना का लाभ पाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं। सबसे पहले, बच्ची का जन्म दिल्ली में हुआ होना चाहिए। इसके साथ ही परिवार कम से कम 3 साल से दिल्ली का स्थायी निवासी होना चाहिए।परिवार की सालाना आय 1 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। एक परिवार की अधिकतम दो बेटियां ही इस योजना के तहत लाभ उठा सकेंगी। अगर बेटी दिल्ली से बाहर रहकर भी डिप्लोमा या ग्रेजुएशन कर रही है तब भी उसे इस योजना का लाभ मिलेगा। इन स्पष्ट नियमों के कारण योजना का लाभ सही और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

फेज वाइज कैसे मिलेगा पैसा?

सरकार द्वारा सहायता राशि अलग-अलग शैक्षणिक पड़ावों पर दी जाएगी ताकि बेटी की पढ़ाई लगातार जारी रहे।

  • बेटी के जन्म पर 11,000 रुपये जमा किए जाएंगे।
  • कक्षा 1 में दाखिले पर 5,000 रुपये मिलेंगे।
  • कक्षा 6, 9, 10 और 12 में प्रवेश पर 5,000 रुपये प्रति कक्षा दिए जाएंगे।
  • ग्रेजुएशन या डिप्लोमा पूरा करने पर 20,000 रुपये की अंतिम सहायता दी जाएगी।

इन सभी किश्तों को मिलाकर कुल 56,000 रुपये जमा होंगे जो ब्याज सहित लगभग 1 लाख रुपये बन जाएंगे।

लाडली योजना के अटके पैसे भी होंगे जारी

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पुरानी लाडली योजना के तहत कई लाभार्थियों के पैसे दावे के अभाव में अटके हुए थे। सरकार ने विशेष अभियान चलाकर ऐसे खातों की पहचान की है और हजारों लाभार्थियों को उनकी राशि जारी की जा चुकी है। आने वाले समय में बाकी पात्र लाभार्थियों को भी उनका बकाया पैसा दिया जाएगा।

क्यों खास है लखपति बिटिया योजना?

दिल्ली लखपति बिटिया योजना केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं है बल्कि यह बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। इससे बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, ड्रॉपआउट दर कम होगी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिलेगी। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि बेटियां बोझ नहीं बल्कि भविष्य की ताकत हैं। सही समय पर आर्थिक सहायता देकर उन्हें शिक्षा और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाया जा सकता है।

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42 लाख किसानों के लिए बड़ा अपडेट, फार्मर ID नहीं बनी तो होगा भारी नुकसान

बिहार के 42 लाख से ज्यादा किसानों के लिए यह खबर बेहद जरूरी है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त की तारीख कभी भी घोषित हो सकती है। ऐसे में जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी तक नहीं बनी है उनकी 2000 रुपये की किस्त अटक सकती है।

Farmer ID Bihar
बिहार फार्मर आईडी क्या है
locationभारत
userअसमीना
calendar10 Feb 2026 02:51 PM
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बिहार के किसानों के लिए एक बेहद अहम अपडेट सामने आया है जिसे नजरअंदाज करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त की तारीख का ऐलान कभी भी किया जा सकता है और इसी महीने राज्य के करीब 73 लाख किसानों के खातों में 2-2 हजार रुपये आने की उम्मीद है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि बिहार के 55 फीसदी से ज्यादा किसानों ने अभी तक फार्मर आईडी नहीं बनवाई है जिससे उनकी किस्त अटक सकती है।

अगर समय रहते यह जरूरी काम पूरा नहीं किया गया तो किसानों को सिर्फ 2000 रुपये ही नहीं बल्कि कुल 9000 रुपये तक का नुकसान हो सकता है। इसलिए सरकार ने पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर फार्मर आईडी बनवाने की व्यवस्था की है।

फार्मर आईडी क्यों है इतनी जरूरी?

फार्मर आईडी यानी किसान पहचान पत्र जो अब हर किसान के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। बिना फार्मर आईडी के किसान को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा चाहे वह पीएम किसान योजना हो या राज्य सरकार की कोई अन्य योजना। सरकार के अनुसार, पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी होने से पहले फार्मर रजिस्ट्री पूरी करना जरूरी है। अगर रजिस्ट्री अधूरी रही तो किसान का नाम लाभार्थी सूची से हट भी सकता है।

बिहार में फार्मर आईडी की मौजूदा स्थिति

बिहार एग्रीस्टैक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में अब तक सिर्फ 30,84,484 किसानों की ही फार्मर आईडी बन पाई है जबकि पीएम किसान योजना के लाभार्थियों की संख्या 73 लाख से ज्यादा है। इसका मतलब यह है कि अभी भी आधे से ज्यादा किसानों की फार्मर रजिस्ट्री बाकी है। वर्तमान में केवल 43.07 फीसदी पीएम किसान लाभार्थियों की ही फार्मर आईडी बनी है जो सरकार के लिए भी चिंता का विषय है।

ये जिले फार्मर आईडी बनवाने में सबसे पीछे

कुछ जिले ऐसे हैं जहां फार्मर आईडी बनवाने की रफ्तार बेहद धीमी है। इन जिलों के किसानों को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि इन्हें पीएम किसान की 22वीं किस्त में दिक्कत आ सकती है। सबसे पीछे रहने वाले जिले मुंगेर, शेखपुरा, शिवहर, अरवल और बेगूसराय हैं। इन जिलों के किसानों को तुरंत शिविर में जाकर अपनी फार्मर आईडी बनवानी चाहिए।

फार्मर आईडी नहीं बनवाई तो 9000 रुपये का नुकसान

अगर किसान सोच रहे हैं कि सिर्फ 2000 रुपये की किस्त ही रुकेगी तो यह सोच गलत है। दरअसल, बिहार सरकार ने पीएम किसान लाभार्थियों के लिए अलग से ‘कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना’ शुरू की है जिसके तहत सालाना 3000 रुपये दिए जाते हैं। इस तरह अगर फार्मर आईडी नहीं बनी तो किसान को पीएम किसान योजना के 6000 रुपये, कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि के 3000 रुपये। यानी कुल 9000 रुपये का सीधा नुकसान हो सकता है।

फार्मर आईडी कहां और कैसे बनवाएं?

सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए पूरे बिहार में पंचायत स्तर पर कैंप लगाए हैं। सिर्फ पटना जिले की बात करें तो यहां की सभी 322 पंचायतों में शिविर लगाए गए हैं।

ऑनलाइन फार्मर आईडी कैसे बनाएं?

अगर आप घर बैठे फार्मर आईडी बनाना चाहते हैं तो इसके लिए बिहार एग्रीस्टैक का आधिकारिक पोर्टल http://bhfr.agristack.gov.in/ उपलब्ध है। पोर्टल पर जाकर आप स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया के जरिए आसानी से किसान पहचान पत्र बना सकते हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी तरह सरल रखी गई है ताकि किसी भी किसान को परेशानी न हो।

किसानों से अपील

अगर आप पीएम किसान योजना या किसी भी सरकारी किसान योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो आज ही फार्मर आईडी बनवाएं। एक बार 22वीं किस्त की तारीख घोषित हो जाने के बाद, सुधार का मौका मिलना मुश्किल हो जाएगा। शिविर में जाएं, फार्मर आईडी बनवाएं और अपने 9000 रुपये सुरक्षित करें।

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गरीबों के लिए बड़ी खबर, सरकार दे रही है घर बनाने के पैसे

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत छत्तीसगढ़ में 2.80 लाख नए घरों को मंजूरी दी गई है। इस योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। सरकार ने पीएम आवास योजना के लिए 4000 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है जिसमें से बड़ी राशि जारी भी की जा चुकी है।

PM Awas Yojana
पीएम आवास योजना
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userअसमीना
calendar10 Feb 2026 02:10 PM
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छत्तीसगढ़ के लाखों गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। पक्के घर का सपना देख रहे लोगों को अब राहत मिलने वाली है क्योंकि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत राज्य में 2 लाख 80 हजार नए आवासों को मंजूरी दे दी है। इनमें से 2 लाख 65 हजार घरों का निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है जिससे साफ है कि योजना तेजी से जमीन पर उतर रही है। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर आवासों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है।

केंद्रीय मंत्री ने दी योजना की अहम जानकारी

केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास व शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर हाल ही में छत्तीसगढ़ दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि पीएम आवास योजना (शहरी) के लिए 4000 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है जिसमें से 3550 करोड़ रुपये की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। ये सभी मकान प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के अंतर्गत बनाए जा रहे हैं और सरकार का फोकस समय पर निर्माण पूरा कराने पर है।

पीएम आवास योजना BLC श्रेणी क्या है?

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत कुल चार श्रेणियां आती हैं जिनमें से एक महत्वपूर्ण श्रेणी है BLC (Beneficiary Led Construction)। इस श्रेणी में ऐसे लोग आते हैं जिनके पास खुद की जमीन है या जमीन उपलब्ध कराई जा सकती है। BLC के तहत सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता देती है ताकि वे अपने सपनों का पक्का मकान बना सकें।

BLC के तहत कितनी आर्थिक सहायता मिलती है

PM Awas Yojana BLC के अंतर्गत लाभार्थी को कुल 2.5 लाख रुपये की सहायता दी जाती है। इसमें से 1.5 लाख रुपये केंद्र सरकार और 1 लाख रुपये राज्य सरकार की ओर से दिए जाते हैं। यदि किसी लाभार्थी के पास अपनी जमीन नहीं है तो सरकार अन्य योजनाओं के माध्यम से मुफ्त या बहुत कम कीमत पर जमीन उपलब्ध कराने में भी मदद कर सकती है।

मकान का आकार और जरूरी सुविधाएं

इस योजना के तहत 30 से 35 वर्ग मीटर तक के आवास निर्माण की अनुमति होती है। घर में कम से कम 2 कमरे, एक रसोई (किचन), शौचालय और वॉशरूम बनाना अनिवार्य होता है। सरकार यह सुनिश्चित करती है कि लाभार्थी को सम्मानजनक और सुरक्षित आवास मिले।

कितनी किस्तों में मिलता है पैसा?

पीएम आवास योजना के तहत मिलने वाली राशि तीन किस्तों में जारी की जाती है। पहली किस्त में 40 प्रतिशत, दूसरी किस्त में 40 प्रतिशत और तीसरी किस्त में बचे हुए 20 प्रतिशत की राशि दी जाती है। यह पैसा निर्माण की प्रगति के आधार पर सीधे लाभार्थी के खाते में भेजा जाता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।

पीएम आवास योजना के लिए आवेदन कैसे करें

पीएम आवास योजना में आवेदन करना बेहद आसान है। इसके लिए आपको PMAY-U (शहरी) के आधिकारिक पोर्टल पर जाना होगा। वहां आपको Apply for PMAY-U 2.0 का विकल्प मिलेगा। उस पर क्लिक करने के बाद सभी दिशानिर्देश ध्यान से पढ़ें और मांगी गई जानकारी भरकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। आवेदन करते समय आधार, आय और जमीन से जुड़े दस्तावेज सही-सही भरना जरूरी है।

पीएम आवास योजना की पात्रता क्या है?

प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ सिर्फ पहली बार घर बनाने वालों को मिलता है। आवेदक का नाम गरीबी रेखा के नीचे (BPL) श्रेणी में होना चाहिए। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), ट्रांसजेंडर और महिलाओं को इस योजना में विशेष प्राथमिकता दी जाती है। इसके अलावा आवेदक के नाम पर देश के किसी भी हिस्से में पक्का मकान नहीं होना चाहिए।