क्या भाजपा के MLC प्रत्याशी श्रीचंद शर्मा के नामांकन के साथ मेरठ-सहारनपुर शिक्षक सीट पर पुराना विवाद फिर गरमाने वाला है ? आखिर कानूनविद् उनके पर्चा दाखिल करने का इंतजार क्यों कर रहे हैं ?

UP News : उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण विधान परिषद सीट मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन सीट मानी जाती है। इस सीट से लगातार 48 वर्ष तक भारत के प्रसिद्ध शिक्षक नेता ओमप्रकाश शर्मा विधान परिषद के सदस्य (MLC) रहे थे। वर्ष-2020 में हुए विधानसभा परिषद के चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आंधी चली थी। BJP की उसी आंधी में उस समय भाजपा के प्रत्याशी रहे श्रीचंद शर्मा उर्फ ‘‘चुटिया” ने ओम प्रकाश शर्मा जैसे महान शिक्षक नेता को ‘‘पटकनी” दे दी थी। उसी ‘‘पटकनी” के कारण श्रीचंद शर्मा से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम प्रसिद्ध शिक्षक, शिक्षाविद् तथा विद्यालयों के प्रबंधक अपना हिसाब-किताब चुकता करने के लिए तैयार बैठे हैं। बस प्रतीक्षा इस बात की है कि BJP के द्वारा किसी विशेष ‘‘दबाव” में दोबारा प्रत्याशी बनाये गये श्रीचंद शर्मा उर्फ ‘‘चुटिया” अपना पर्चा दाखिल करते हैं। UP News
इस समाचार में हमने ऊपर ‘‘दबाव” शब्द का प्रयोग किया है। चेतना मंच इस शब्द का प्रयोग इसलिए कर रहा है क्योंकि चेतना मंच ने अनेक समाचारों में यह साबित कर दिया है कि भाजपा की तरफ से मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से वर्तमान में MLC श्रीचंद शर्मा ‘‘चुटिया” पिछली बार ग्रेजुएशन की फर्जी डिग्री दिखाकर MLC का चुनाव लड़े थे तथा भाजपा की आंधी में चुनाव जीत गए थे। चेतना मंच ने यह भी साबित कर दिया है कि श्रीचंद शर्मा ‘‘चुटिया” की शैक्षणिक योग्यता किसी भी रूप में संवैधानिक तौर पर विधान परिषद का चुनाव लडऩे की योग्यता के लायक नहीं है। फिर भी भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व ने बिना किसी छानबीन के श्रीचंद शर्मा ‘‘चुटिया” को विधान परिषद का टिकट पकड़ा दिया है। यही बात इस बात का परिणाम है कि भाजपा श्रीचंद शर्मा के सामने किसी बड़े ‘‘दबाव” में है या फिर यह भी हो सकता है कि भारतीय जनता पार्टी में कोई ऐसा ‘‘विभीषण” भी है हो श्रीचंद शर्मा ‘‘चुटिया” के कारण भारतीय जनता पार्टी जैसी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी की फजीहत कराने पर तुला है, मामला कुछ भी हो सकता है। इसी कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 100 से अधिक कानूनविद् श्रीचंद शर्मा ‘‘चुटिया” के नये नामांकन की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि इस पूरे फर्जीवाड़े को भारत के चुनाव आयोग से लेकर भारत की सभी संवैधानिक संस्थाओं के सामने विस्तार से उजागर किया जा सके। UP News
आपको बता दें कि चेतना मंच ने एक के बाद एक आधा दर्जन समाचार प्रकाशित करके श्रीचंद शर्मा ‘‘चुटिया” के फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। हम यहां नीचे उन सभी समाचारों का लिंक आपकी सुविधा के लिए उपलब्ध करा रहे हैं ताकि आप सभी पाठक इस पूरे फर्जीवाड़े से परिचित हो सकें ।
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आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की शिक्षक राजनीति में ओमप्रकाश शर्मा का नाम लंबे समय तक एक बड़े अध्याय के रूप में दर्ज है। उत्तर प्रदेश की मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से वह लगातार आठ बार विधान परिषद सदस्य चुने गए और करीब 48 वर्षों तक शिक्षक हितों की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाई। 1970 में पहली बार विधान परिषद पहुंचे ओमप्रकाश शर्मा ने शिक्षक राजनीति में ऐसा प्रभाव बनाया कि उनका गुट लंबे समय तक कई शिक्षक एमएलसी सीटों पर मजबूत स्थिति में रहा। ओमप्रकाश शर्मा ने 1970 में पहली बार मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी का चुनाव जीता था। इसके बाद वह लगातार चुनाव जीतते रहे और 2014 में आठवीं बार विधान परिषद पहुंचे। वर्ष—2020 के चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी श्रीचंद शर्मा ने उन्हें पराजित किया था।
देश के महान शिक्षक नेता ओमप्रकाश शर्मा ने शिक्षक राजनीति में अपनी पहचान बनाने की शुरुआत मेरठ से की। वर्ष 1970 में उन्होंने पहली बार विधान परिषद का चुनाव जीता। इसके बाद शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार सदन में उठाते रहे। उत्तर प्रदेश की मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से ओमप्रकाश शर्मा लगातार आठ बार एमएलसी निर्वाचित हुए। करीब 48 वर्षों तक उनका चुनावी प्रभाव बना रहा। 2014 में उन्होंने आखिरी बार चुनाव जीता था। ओमप्रकाश शर्मा केवल खुद चुनाव जीतने तक सीमित नहीं रहे। उनके नेतृत्व में माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट ने प्रदेश की कई शिक्षक और स्नातक एमएलसी सीटों पर अपना प्रभाव कायम किया। लंबे समय तक शिक्षक संगठनों का विधान परिषद की इन सीटों पर दबदबा रहा। UP News
वर्ष—1990 के दशक में ओमप्रकाश शर्मा की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जाता था कि मतगणना शुरू होने के कुछ ही घंटों में उन्हें प्रथम वरीयता के 50 प्रतिशत से अधिक मत मिल जाते थे। 2014 में आठवीं जीत के बाद भी उन्होंने शिक्षक हितों के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही थी। वर्ष—2020 के विधान परिषद चुनाव में मेरठ-सहारनपुर शिक्षक सीट पर मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण रहा। भाजपा के शिक्षक MLC श्रीचंद शर्मा ने ओमप्रकाश शर्मा को पराजित कर उनका लगातार आठ चुनाव जीतने का सिलसिला रोक दिया। UP News
चुनाव परिणाम के बाद ओमप्रकाश शर्मा ने कहा था कि चुनावी हार से शिक्षकों के लिए उनके संघर्ष में कोई कमी नहीं आएगी। उनकी हार को शिक्षक राजनीति में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा गया और इससे शर्मा गुट के लंबे राजनीतिक वर्चस्व को भी झटका लगा। ओमप्रकाश शर्मा का निधन 87 वर्ष की आयु में 16 जनवरी 2021 में हुआ था। उनके निधन के बाद भी शिक्षक राजनीति में उनके लंबे कार्यकाल और शिक्षक हितों से जुड़े संघर्षों को लगातार याद किया जाता रहा है।
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