विधानसभा में पेश किए गए अनुपूरक बजट में वित्त मंत्री ने ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म विकास बोर्ड को 1 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव रखा है।

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुपूरक बजट के माध्यम से पर्यटन, ईको-पर्यटन, कला-संस्कृति और धार्मिक स्थलों के समग्र विकास को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का उद्देश्य प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करते हुए पर्यटन को रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़ना है
विधानसभा में पेश किए गए अनुपूरक बजट में वित्त मंत्री ने ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म विकास बोर्ड को 1 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव रखा है। इसके अतिरिक्त, ईको पर्यटन के प्रचार-प्रसार हेतु 10 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है, जिससे प्राकृतिक स्थलों, वन क्षेत्रों और ग्रामीण पर्यटन को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।
प्रदेश में पर्यटकों की सुविधा और पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग यात्री सुविधाओं, संस्थागत ढांचे और पर्यटन से जुड़े आधारभूत ढांचे के विकास में किया जाएगा।
धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से श्री सोरों तीर्थ (जनपद कासगंज), श्री कल्कि धाम (संभल) सहित अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों के विकास के लिए 10 करोड़ रुपये के विशेष अनुदान का प्रस्ताव रखा गया है। इस बजट से तीर्थ क्षेत्रों में सड़क निर्माण, प्रकाश व्यवस्था, सूचना केंद्र, शौचालय, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके। इसके अलावा, प्रदेश के जनपद और ब्लॉक मुख्यालयों पर हेलीपैड सुविधाओं के विकास के लिए भी 10 करोड़ रुपये की मांग की गई है, जिससे आपातकालीन सेवाओं और पर्यटन आवागमन को गति मिलेगी।
कला और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में लोक कलाकारों को सशक्त बनाने हेतु 5 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जिससे वे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की खरीद कर अपनी कला को आगे बढ़ा सकें। वहीं, ऐतिहासिक धरोहर छतर मंजिल, लखनऊ के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए 3 करोड़ 44 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। कुल मिलाकर, यह अनुपूरक बजट उत्तर प्रदेश में ईको-पर्यटन, धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के विकास को एक नई दिशा देने वाला साबित होगा, जिससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।