उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला: नक्शा पास कराने की भागदौड़ खत्म
ई व्यवस्था के तहत भू-स्वामी खुद ऑनलाइन आवेदन कर कुछ ही मिनटों में अपने मानचित्र की मंजूरी हासिल कर सकेंगे। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से की गई है, जहां लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने नए बिल्डिंग बायलॉज के तहत फास्ट-ट्रैक सिस्टम फास्टपास लागू कर दिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रह है। उत्तर प्रदेश से जुड़ी यह खबर हर उत्तर प्रदेश वासी के लिए अति आवश्यक है। उत्तर प्रदेश से जुडी खर उत्तर प्रदेश सरकार ने दी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने नए साल 2026 के मौके पर उत्तर प्रदेश वासियों को बड़ा तौफा दिया है। नए साल 2026 पर उत्तर प्रदेश सरकार ने लोगों को बड़ी सुविधा देते हुए भवन मानचित्र (नक्शा) स्वीकृति की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और तेज बना दिया है। अब घर या दुकान का नक्शा पास कराने के लिए विकास प्राधिकरण के दफ्तरों के चक्कर लगाने की मजबूरी नहीं रहेगी। नई व्यवस्था के तहत भू-स्वामी खुद ऑनलाइन आवेदन कर कुछ ही मिनटों में अपने मानचित्र की मंजूरी हासिल कर सकेंगे। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से की गई है, जहां लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने नए बिल्डिंग बायलॉज के तहत फास्ट-ट्रैक सिस्टम ‘फास्टपास’ लागू कर दिया है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, ‘फास्टपास’ के जरिए 100 वर्गमीटर तक के आवासीय और 30 वर्गमीटर तक के व्यावसायिक भवनों के नक्शे अब स्वयं भू-स्वामी ऑनलाइन माध्यम से स्वीकृत करा सकेंगे।
map.up.gov.in पर होगा आवेदन
उत्तर प्रदेश सरकार की इस नई डिजिटल व्यवस्था में आवेदकों को map.up.gov.in पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली रखा गया है, ताकि उत्तर प्रदेश के आम नागरिक बिना किसी बिचौलिये, बिना भागदौड़ और बिना अनावश्यक देरी के अपना नक्शा पास करा सकें। आवेदन की शुरुआत पोर्टल पर नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर रजिस्ट्रेशन से होगी। इसके बाद आवेदक अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड बनाकर सिस्टम में प्रवेश करेगा और वहीं से मानचित्र अपलोड कर सकेगा। इतना ही नहीं, पोर्टल पर ही स्वतः गणना के आधार पर देय शुल्क दिख जाएगा, जिसे आवेदक ऑनलाइन भुगतान कर तुरंत प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगा।
भू-स्वामी को देना होगा पूरा विवरण
उत्तर प्रदेश में फास्टपास के जरिए नक्शा स्वीकृत कराने से पहले भू-स्वामी को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित भूखण्ड का लैंड यूज मास्टर प्लान के अनुरूप हो। यानी नियमों के खिलाफ जाकर अब कोई भी आवेदन आगे नहीं बढ़ पाएगा। आवेदन करते समय भू-स्वामी को पोर्टल पर कुछ जरूरी जानकारियां स्व-प्रमाणित (Self-Verified) करनी होंगी, ताकि मंजूरी की प्रक्रिया तेज भी रहे और पारदर्शी भी। इनमें भूखण्ड की सटीक लोकेशन, आसपास की सड़कों की लंबाई-चौड़ाई, प्रस्तावित भवन की ऊंचाई और कवर्ड एरिया, फ्रंट-साइड-रियर सेटबैक से जुड़ी जानकारी के साथ-साथ प्रवेश-निकास द्वार और पार्किंग व्यवस्था का पूरा ब्योरा शामिल होगा।
मिनटों में मिलेगा प्रमाणित नक्शा और सर्टिफिकेट
उत्तर प्रदेश में लागू इस नई डिजिटल व्यवस्था की खासियत यह है कि जैसे ही भू-स्वामी मानचित्र के साथ पूरा विवरण पोर्टल पर दर्ज करेगा, सिस्टम तय मानकों के आधार पर तुरंत सत्यापन शुरू कर देगा। अगर जानकारी और मानक सही पाए गए, तो कुछ ही मिनटों में नक्शा स्वीकृत हो जाएगा। मंजूरी मिलते ही आवेदक को पोर्टल पर ही ऑटो-जनरेटेड प्रमाणित मानचित्र और स्वीकृति प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) उपलब्ध करा दिया जाएगा, जिसे डाउनलोड कर सीधे उपयोग किया जा सकेगा। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रह है। उत्तर प्रदेश से जुड़ी यह खबर हर उत्तर प्रदेश वासी के लिए अति आवश्यक है। उत्तर प्रदेश से जुडी खर उत्तर प्रदेश सरकार ने दी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने नए साल 2026 के मौके पर उत्तर प्रदेश वासियों को बड़ा तौफा दिया है। नए साल 2026 पर उत्तर प्रदेश सरकार ने लोगों को बड़ी सुविधा देते हुए भवन मानचित्र (नक्शा) स्वीकृति की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और तेज बना दिया है। अब घर या दुकान का नक्शा पास कराने के लिए विकास प्राधिकरण के दफ्तरों के चक्कर लगाने की मजबूरी नहीं रहेगी। नई व्यवस्था के तहत भू-स्वामी खुद ऑनलाइन आवेदन कर कुछ ही मिनटों में अपने मानचित्र की मंजूरी हासिल कर सकेंगे। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से की गई है, जहां लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने नए बिल्डिंग बायलॉज के तहत फास्ट-ट्रैक सिस्टम ‘फास्टपास’ लागू कर दिया है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, ‘फास्टपास’ के जरिए 100 वर्गमीटर तक के आवासीय और 30 वर्गमीटर तक के व्यावसायिक भवनों के नक्शे अब स्वयं भू-स्वामी ऑनलाइन माध्यम से स्वीकृत करा सकेंगे।
map.up.gov.in पर होगा आवेदन
उत्तर प्रदेश सरकार की इस नई डिजिटल व्यवस्था में आवेदकों को map.up.gov.in पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली रखा गया है, ताकि उत्तर प्रदेश के आम नागरिक बिना किसी बिचौलिये, बिना भागदौड़ और बिना अनावश्यक देरी के अपना नक्शा पास करा सकें। आवेदन की शुरुआत पोर्टल पर नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर रजिस्ट्रेशन से होगी। इसके बाद आवेदक अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड बनाकर सिस्टम में प्रवेश करेगा और वहीं से मानचित्र अपलोड कर सकेगा। इतना ही नहीं, पोर्टल पर ही स्वतः गणना के आधार पर देय शुल्क दिख जाएगा, जिसे आवेदक ऑनलाइन भुगतान कर तुरंत प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगा।
भू-स्वामी को देना होगा पूरा विवरण
उत्तर प्रदेश में फास्टपास के जरिए नक्शा स्वीकृत कराने से पहले भू-स्वामी को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित भूखण्ड का लैंड यूज मास्टर प्लान के अनुरूप हो। यानी नियमों के खिलाफ जाकर अब कोई भी आवेदन आगे नहीं बढ़ पाएगा। आवेदन करते समय भू-स्वामी को पोर्टल पर कुछ जरूरी जानकारियां स्व-प्रमाणित (Self-Verified) करनी होंगी, ताकि मंजूरी की प्रक्रिया तेज भी रहे और पारदर्शी भी। इनमें भूखण्ड की सटीक लोकेशन, आसपास की सड़कों की लंबाई-चौड़ाई, प्रस्तावित भवन की ऊंचाई और कवर्ड एरिया, फ्रंट-साइड-रियर सेटबैक से जुड़ी जानकारी के साथ-साथ प्रवेश-निकास द्वार और पार्किंग व्यवस्था का पूरा ब्योरा शामिल होगा।
मिनटों में मिलेगा प्रमाणित नक्शा और सर्टिफिकेट
उत्तर प्रदेश में लागू इस नई डिजिटल व्यवस्था की खासियत यह है कि जैसे ही भू-स्वामी मानचित्र के साथ पूरा विवरण पोर्टल पर दर्ज करेगा, सिस्टम तय मानकों के आधार पर तुरंत सत्यापन शुरू कर देगा। अगर जानकारी और मानक सही पाए गए, तो कुछ ही मिनटों में नक्शा स्वीकृत हो जाएगा। मंजूरी मिलते ही आवेदक को पोर्टल पर ही ऑटो-जनरेटेड प्रमाणित मानचित्र और स्वीकृति प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) उपलब्ध करा दिया जाएगा, जिसे डाउनलोड कर सीधे उपयोग किया जा सकेगा। UP News












