आरोपी का नाम ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार है। वह 200 करोड़ रुपये के सरकारी प्रोजेक्ट दिलाने का झांसा देकर लोगों को फंसाता था और इसी धोखाधड़ी से अपनी करोड़ों की लग्जरी लाइफ चलाता था।

UP News : गोरखपुर पुलिस ने ऐसे शख्स का भंडाफोड़ किया है जो खुद को 2022 बैच का आईएएस अधिकारी बताकर करोड़ों रुपये की जालसाजी करता था। आरोपी का नाम ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार है। वह 200 करोड़ रुपये के सरकारी प्रोजेक्ट दिलाने का झांसा देकर लोगों को फंसाता था और इसी धोखाधड़ी से अपनी करोड़ों की लग्जरी लाइफ चलाता था।
जांच में पता चला कि ललित हर महीने लगभग 5 लाख रुपये से ज्यादा खर्च करता था। जहां भी जाता, अफसरों जैसा रुतबा दिखाने के लिए वह हमेशा 10-12 नकली गनरों की फौज के साथ निकलता। प्रत्येक गनर को वह 30,000 रुपये महीना देता था। एक प्राइवेट मैनेजर रखा हुआ था जिसे 60,000 रुपये महीने देता था। स्कॉर्पियो और अर्टिगा जैसी गाड़ियाँ दोनों की अलग-अगल लगभग 30,000 रुपये किराया देता था। गोरखपुर के होटलों में रहने के लिए 30,000 रुपये हर माह खर्च करता था। सरकारी काम लिखी हुई गाड़ियाँ और भारी सुरक्षा घेरा देखकर लोग बिना शक उसे असली आईएएस मान लेते थे।
पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी की एक पत्नी और चार प्रेमिकाएँ थीं। इन चार में से तीन महिलाएँ गर्भवती पाई गईं। ललित इन सभी पर लाखों रुपये उड़ा देता था, महंगे मोबाइल, जेवर, कपड़े, ब्रांडेड सामान सब कुछ। ललित का मूल घर मेहसौल, सीतामढ़ी (बिहार) में है। पहले वह सुपर 100 नाम के एक कोचिंग संस्थान में गणित पढ़ाता था। 2023 में एडमिशन के नाम पर दो लाख रुपये लेने पर उसे कोचिंग से निकाल दिया गया। वह गणित में पीएचडी कर रहा था, लेकिन इसी दौरान उसने फर्जी पहचान बनाकर ठगी का रास्ता पकड़ लिया। 2016 में एक युवती को बहला-फुसला कर ले जाने का केस भी उसके खिलाफ दर्ज हुआ था वही युवती अब उसकी पत्नी है। पिछले पाँच महीनों से वह गोरखपुर के चिलुआताल क्षेत्र में किराए के घर में पत्नी, बच्चों और साले के साथ रहकर आॅनलाइन और आॅफलाइन ठगी का पूरा जाल चला रहा था।
पिछले कुछ महीनों में वह भटहट, पीपीगंज, कैंपियरगंज समेत कई इलाकों के स्कूलों में खुद को कअर बताकर निरीक्षण करने भी पहुंच गया था। बोर्ड परीक्षा के दौरान वह दो गाड़ियों और गनरों के काफिले के साथ स्कूलों में घुसा, जिससे कोई उसे लेकर शक नहीं कर पाया। इस ठग का सबसे खतरनाक पहलू यह था कि वह एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल कर मंत्रालय के नोट, मीटिंग लेटर, नियुक्ति आदेश, सरकारी अनुमोदन, जैसे दस्तावेज तैयार कर लेता था। वह असली अधिकारियों की मीटिंग वाली तस्वीरों में से उनका चेहरा हटाकर अपना चेहरा लगा देता था। उसके पास से देवरिया जिले के एक अफसर की मीटिंग का एडिट किया हुआ फोटो भी मिला है। एसएसपी के निर्देश पर यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज बनाने में कौन-कौन उसकी मदद करता था और अब तक कितने लोग उसकी ठगी का शिकार बने हैं।