गाजियाबाद में हर शुक्रवार खुलेगा प्रॉपर्टी का बड़ा मौका, 130 प्राइम संपत्तियों की होगी नीलामी

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने फैसला किया है कि अब शहर में हर शुक्रवार आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की नियमित नीलामी की जाएगी। इस पहल के तहत कुल 130 प्राइम प्रॉपर्टीज को बोली के लिए पेश किया जाएगा।

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गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए)
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar03 Feb 2026 06:09 PM
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UP News : गाजियाबाद में प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक बड़ी राहत और सुनहरा अवसर सामने आया है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने फैसला किया है कि अब शहर में हर शुक्रवार आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की नियमित नीलामी की जाएगी। इस पहल के तहत कुल 130 प्राइम प्रॉपर्टीज को बोली के लिए पेश किया जाएगा।

हिंदी भवन में होगी नीलामी, सुबह 11 बजे से शुरुआत

जीडीए की यह नीलामी लोहिया नगर स्थित हिंदी भवन में आयोजित की जाएगी, जहां बोली प्रक्रिया सुबह 11 बजे शुरू होगी। इस नीलामी में गाजियाबाद के उन इलाकों की संपत्तियां शामिल की गई हैं, जिन्हें शहर की सबसे विकसित और हाई-डिमांड लोकेशन माना जाता है। इंदिरापुरम, कौशांबी, कोयल एन्क्लेव, इंद्रप्रस्थ और आंबेडकर रोड जैसे क्षेत्रों में मौजूद प्लॉट निवेशकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

मकान ही नहीं, बिजनेस और सामाजिक जरूरतों के लिए भी प्लॉट

इस नीलामी की खास बात यह है कि इसमें केवल घर या दुकान के लिए ही संपत्तियां उपलब्ध नहीं हैं, बल्कि स्कूल, अस्पताल, हेल्थ सेंटर और कियोस्क जैसे जरूरी ढांचों के लिए भी भूखंड शामिल किए गए हैं। जीडीए अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य सिर्फ राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि गाजियाबाद के संतुलित और समग्र शहरी विकास को गति देना है।

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आसान, आनलाइन और आफलाइन दोनों विकल्प

नीलामी में भाग लेने के लिए जीडीए ने आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया है। गाजियाबाद के निवेशक एचडीएफसी बैंक की किसी भी शाखा से आॅफलाइन आवेदन फॉर्म लेकर उसे जमा कर सकते हैं। वहीं, बाहर के निवेशकों के लिए आॅनलाइन आवेदन की सुविधा दी गई है, जिसके तहत वे जीडीए की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से सीधे नीलामी में हिस्सा ले सकते हैं।

2026 की शुरुआत में ही जीडीए को मिला बड़ा राजस्व

गाजियाबाद की प्रॉपर्टी मार्केट में निवेशकों का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है। साल 2026 में अब तक हुई केवल दो नीलामियों से जीडीए को लगभग 450 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित नीलामी से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। कुल मिलाकर, जो लोग गाजियाबाद में अपना घर बनाने या व्यवसाय का विस्तार करने का सपना देख रहे हैं, उनके लिए जीडीए की यह साप्ताहिक नीलामी एक बेहद अहम और लाभकारी अवसर साबित हो सकती है।

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उत्तर प्रदेश के इस शहर में रेलवे की जमीन पर चला बुलडोजर, अवैध निर्माण ध्वस्त

आरपीएफ, जीआरपी और स्थानीय पुलिस के साथ मौके पर पहुंची और अवैध निमार्णों को ध्वस्त करना शुरू किया। कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों में खलबली मच गई लेकिन सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। जिसकी वजह से कोई अनहोनी घटना नहीं घट सकी।

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अवैध कब्जों के खिलाफ बुलडोजर से कार्रवाई की गई
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar03 Feb 2026 04:50 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के बरेली के बारादरी इलाके में मंगलवार को रेलवे की जमीन पर चल रहे अवैध कब्जों के खिलाफ बुलडोजर से कार्रवाई की गई। ईंट पजाया चौराहा के पास कई लोगों ने रेलवे की जमीन पर पक्के निर्माण करा रखे थे, जिन्हें कई नोटिस देने के बावजूद हटाया नहीं गया। 

कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों में खलबली मची 

दोपहर करीब 12 बजे रेलवे की टीम, आरपीएफ, जीआरपी और स्थानीय पुलिस के साथ मौके पर पहुंची और अवैध निमार्णों को ध्वस्त करना शुरू किया। कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों में खलबली मच गई लेकिन सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। जिसकी वजह से कोई अनहोनी घटना नहीं घट सकी। अतिक्रमणकारियों ने यह जमीन पिछले काफी समय से कब्जा कर रखी थी जिसे अब जाकर ध्वस्त किया जा सका है।

भविष्य में और भी होगी इस तरह की कार्रवाई

इतिहास के अनुसार, श्यामगंज से इज्जतनगर तक की रेल लाइन 50 साल पहले संचालित होती थी, लेकिन इसके बंद होने के बाद इस क्षेत्र की सैकड़ों बीघा जमीन पर अवैध कब्जे बढ़ गए। श्यामगंज रेलवे स्टेशन और पुराने लकड़ी डिपो के आसपास भी लोगों ने पक्के निर्माण कर लिए थे। रेलवे ने लंबे समय तक नोटिस भेजकर कब्जा हटाने की कोशिश की, लेकिन जब इसका पालन नहीं हुआ, तो मंगलवार को बुलडोजर से कार्रवाई कर जमीन को खाली कराया गया। शहर के अन्य हिस्सों में भी पूर्वोत्तर रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जे मौजूद हैं, जिन पर भविष्य में इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है।

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उत्तर प्रदेश में है कब्रों वाला गांव, घर में ही होती है कब्र

गांव किरावली तहसील के अछनेरा क्षेत्र में स्थित है और इसे अक्सर कब्रों वाला गांव कहा जाता है। गांव का बाहरी रूप आम भारतीय गांवों जैसा ही दिखता है। कच्चे-पक्के मकान, आंगन, खेलते हुए बच्चे और चूल्हों पर रोटियाँ सेंकते हुए घर के लोग।

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अपने ही घर के भीतर कब्र
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar03 Feb 2026 04:16 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के आगरा जिले का छह पोखर गांव अपने अद्वितीय और दुखद कारण के लिए जाना जाता है। यह गांव किरावली तहसील के अछनेरा क्षेत्र में स्थित है और इसे अक्सर कब्रों वाला गांव कहा जाता है। गांव का बाहरी रूप आम भारतीय गांवों जैसा ही दिखता है। कच्चे-पक्के मकान, आंगन, खेलते हुए बच्चे और चूल्हों पर रोटियाँ सेंकते हुए घर के लोग। लेकिन जैसे ही घर के अंदर झाँकते हैं, वहां का दृश्य दिल दहला देने वाला होता है। इस गांव में कुछ मुस्लिम परिवार अपने मृतक सदस्यों को दफन करने के लिए मजबूरी में अपने ही घर के आंगन या कमरों का इस्तेमाल करते हैं।

अपने ही घर के भीतर बनाते हैं कब्र 

इसका मुख्य कारण यह है कि गांव में इनके समुदाय के लिए कोई आधिकारिक कब्रिस्तान नहीं है। जमीन की कमी के चलते, जब किसी की मृत्यु होती है, तो परिवार के पास विकल्प नहीं बचता और वे अपने ही घर के भीतर कब्र बनाते हैं। परिणामस्वरूप, आंगन में रोजमर्रा की जिंदगी और मौत दोनों साथ-साथ मौजूद हैं। वहीं बच्चे उसी आंगन में खेलते हैं, जहां उनके माता-पिता या अन्य रिश्तेदार हमेशा के लिए सो गए हैं।

प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर सवाल

यह स्थिति प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर सवाल खड़ा करती है। आखिरकार, क्या इन परिवारों को अपने मृतक सदस्यों को दफनाने के लिए न्यूनतम जमीन तक नहीं मिल पाई? छह पोखर गांव में जन्म, जीवन और मृत्यु तीनों सीमित जगह के भीतर सिमट गए हैं, जो इस गांव की अलग पहचान बनाती है।

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