मुरादाबाद में सपा विधायक फहीम इरफान और परिवार के जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए
यह कार्रवाई विश्वास यादव (उर्फ लवली) द्वारा की गई शिकायत के आधार पर हुई है। जांच के बाद जनपद स्तरीय समिति ने पाया कि विधायक और उनके परिवार के सदस्य पिछड़ा वर्ग की झोजा जाति से संबंधित नहीं हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सपा के विधायक मोहम्मद फहीम इरफान और उनके परिवार के जाति प्रमाण पत्र को प्रशासन ने फर्जी करार दिया है। यह कार्रवाई विश्वास यादव (उर्फ लवली) द्वारा की गई शिकायत के आधार पर हुई है। जांच के बाद जनपद स्तरीय समिति ने पाया कि विधायक और उनके परिवार के सदस्य पिछड़ा वर्ग की झोजा जाति से संबंधित नहीं हैं। इसके चलते उनके और उनके परिवार के सदस्यों चाचा मोहम्मद उस्मान तथा बेटियाँ फरहीन और समरीन के जाति प्रमाण पत्र रद कर दिए गए। आदेश पर जिलाधिकारी मुरादाबाद समेत चार अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए।
एसटी हसन ने इस मामले को सियासी अन्याय करार दिया
पूर्व सांसद एसटी हसन ने इस मामले को सियासी अन्याय करार दिया है। उनका कहना है कि फहीम के पास 2011 से जाति के प्रमाण मौजूद हैं और यदि प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई की है, तो वे कोर्ट का सहारा ले सकते हैं। हसन ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी के साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए।
धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया
इस मुद्दे के साथ ही एसटी हसन ने वंदे मातरम को लेकर हाल ही में लागू नई गाइडलाइन पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है और किसी को किसी काम के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पूर्व सांसद एसटी हसन ने इसे सियासी नाइंसाफी बताया और कोर्ट जाने का सुझाव दिया। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सपा के विधायक मोहम्मद फहीम इरफान और उनके परिवार के जाति प्रमाण पत्र को प्रशासन ने फर्जी करार दिया है। यह कार्रवाई विश्वास यादव (उर्फ लवली) द्वारा की गई शिकायत के आधार पर हुई है। जांच के बाद जनपद स्तरीय समिति ने पाया कि विधायक और उनके परिवार के सदस्य पिछड़ा वर्ग की झोजा जाति से संबंधित नहीं हैं। इसके चलते उनके और उनके परिवार के सदस्यों चाचा मोहम्मद उस्मान तथा बेटियाँ फरहीन और समरीन के जाति प्रमाण पत्र रद कर दिए गए। आदेश पर जिलाधिकारी मुरादाबाद समेत चार अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए।
एसटी हसन ने इस मामले को सियासी अन्याय करार दिया
पूर्व सांसद एसटी हसन ने इस मामले को सियासी अन्याय करार दिया है। उनका कहना है कि फहीम के पास 2011 से जाति के प्रमाण मौजूद हैं और यदि प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई की है, तो वे कोर्ट का सहारा ले सकते हैं। हसन ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी के साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए।
धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया
इस मुद्दे के साथ ही एसटी हसन ने वंदे मातरम को लेकर हाल ही में लागू नई गाइडलाइन पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है और किसी को किसी काम के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पूर्व सांसद एसटी हसन ने इसे सियासी नाइंसाफी बताया और कोर्ट जाने का सुझाव दिया। UP News












