2027 से पहले उत्तर प्रदेश में तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव तय, सियासी हलचल तेज

अभी तक चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि अप्रैल से मई 2026 के बीच उपचुनाव की घोषणा हो सकती है। उत्तर प्रदेश इन सीटों पर होने वाले चुनावों को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले का राजनीतिक सेमीफाइनल माना जा रहा है।

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अखिलेश यादव व योगी आदित्यनाथ
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar08 Jan 2026 04:25 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज होने वाली है। राज्य की घोसी, फरीदपुर और दुद्धी विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराए जाने लगभग तय माने जा रहे हैं। इन तीनों सीटों पर मौजूदा विधायकों के निधन के कारण रिक्तता उत्पन्न हो गई है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार चुनाव आयोग को सीट खाली होने के छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना अनिवार्य होता है। हालांकि अभी तक चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि अप्रैल से मई 2026 के बीच उपचुनाव की घोषणा हो सकती है। उत्तर प्रदेश इन सीटों पर होने वाले चुनावों को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले का राजनीतिक सेमीफाइनल माना जा रहा है।

घोसी सीट : समाजवादी पार्टी के लिए साख की लड़ाईपूर्वांचल की अहम विधानसभा सीटों में शामिल मऊ जिले की घोसी सीट सपा विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद खाली हुई है। सुधाकर सिंह चार बार विधायक रहे और क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। 2022 में इस सीट से दारा सिंह चौहान ने सपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन बाद में उनके भाजपा में जाने से उपचुनाव हुआ। 2023 के उपचुनाव में सपा ने सुधाकर सिंह को मैदान में उतारा और उन्होंने भाजपा प्रत्याशी दारा सिंह चौहान को बड़े अंतर से हराया। अब सपा ने सहानुभूति और संगठनात्मक मजबूती को ध्यान में रखते हुए सुधाकर सिंह के पुत्र सुजीत सिंह को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पारिवारिक विरासत और जनाधार का फायदा मिलेगा। वहीं भाजपा के लिए यह सीट चुनौती बनी हुई है और पार्टी अभी उपयुक्त उम्मीदवार की तलाश में जुटी है।

फरीदपुर सीट : भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न

बरेली जिले की फरीदपुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक श्याम बिहारी लाल का जनवरी 2026 में हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वे लगातार दूसरी बार विधायक बने थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बेहद कम अंतर से जीत हासिल की थी, जिससे यह सीट पहले से ही मुकाबले वाली मानी जाती रही है। स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता और संगठन श्याम बिहारी लाल के परिवार से किसी सदस्य को टिकट देने की मांग कर रहे हैं, ताकि सहानुभूति का लाभ मिल सके। इस क्षेत्र में ब्राह्मण और अन्य पिछड़ा वर्ग निर्णायक भूमिका निभाते हैं। भाजपा इस सीट को हर हाल में बचाने की कोशिश करेगी, जबकि सपा इसे छीनने का अवसर मान रही है।दुद्धी सीट : राजनीतिक विरासत पर नजरें

सोनभद्र जिले की दुद्धी विधानसभा सीट भी उपचुनाव की ओर बढ़ रही है। यहां से सपा विधायक विजय सिंह गोंड का निधन हुआ है। वे इस सीट से आठ बार विधायक चुने जा चुके थे और आदिवासी समाज में उनकी गहरी पकड़ थी। विजय सिंह गोंड ने 1980 से 2002 तक लगातार सात चुनाव जीते थे। लंबे अंतराल के बाद 2024 में हुए उपचुनाव में उन्होंने सपा के टिकट पर एक बार फिर जीत दर्ज की थी। अब उनके निधन के बाद यह सीट फिर खाली हो गई है। यह सीट भी उन विधानसभा क्षेत्रों में शामिल है, जहां पांच साल के भीतर दूसरी बार उपचुनाव होगा2027 की राह तय करेंगे नतीजे

इन तीनों सीटों पर होने वाले उपचुनाव केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इनके नतीजे 2027 विधानसभा चुनाव की दिशा और दशा का संकेत देंगे। अगर समाजवादी पार्टी दो या अधिक सीटें जीतने में सफल रहती है, तो विपक्ष का आत्मविश्वास बढ़ेगा। वहीं भाजपा के लिए इन उपचुनावों में जीत सरकार की स्थिरता और संगठनात्मक मजबूती का संदेश देगी। कुल मिलाकर, घोसी, फरीदपुर और दुद्धी के उपचुनाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले बड़े मुकाबले की भूमिका तैयार करते नजर आ रहे हैं।।



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“मस्जिद नहीं जाता…” अमेठी में BJP विधायक के बिगड़े बोल, वीडियो वायरल

वायरल वीडियो में विधायक सुरेश पासी कथित तौर पर कहते हैं, “मैं कभी मस्जिद नहीं जाता… न पहले गया, न आगे जाऊंगा। मैं वोट मांगने नहीं जाता, न उनके सुख-दुख में शामिल होता हूं।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मुस्लिम वोटों की जरूरत नहीं है और उनका रुख स्पष्ट है।

“मस्जिद नहीं जाता…” बयान पर गरमाई अमेठी की राजनीति
“मस्जिद नहीं जाता…” बयान पर गरमाई अमेठी की राजनीति
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar08 Jan 2026 04:51 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में सियासत उस वक्त गरमा गई, जब जगदीशपुर से भाजपा विधायक सुरेश पासी के बयान का एक करीब 20 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में विधायक को यह कहते सुना जा रहा है कि उन्हें मुस्लिम वोट नहीं चाहिए और वे मस्जिद नहीं जाते। बयान सामने आते ही भाजपा ने इसे “निजी विचार” बताकर खुद को अलग कर लिया, जबकि विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। वायरल वीडियो में विधायक सुरेश पासी कथित तौर पर कहते हैं, “मैं कभी मस्जिद नहीं जाता… न पहले गया, न आगे जाऊंगा। मैं वोट मांगने नहीं जाता, न उनके सुख-दुख में शामिल होता हूं।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मुस्लिम वोटों की जरूरत नहीं है और उनका रुख स्पष्ट है।



“पार्टी लाइन नहीं”- जिलाध्यक्ष ने विधायक के बयान से बनाई दूरी

उत्तर प्रदेश के अमेठी में उठे इस विवाद पर भाजपा ने जिला स्तर से ही तुरंत पार्टी बनाम व्यक्ति की रेखा खींच दी। जिलाध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने स्पष्ट कहा कि विधायक का बयान संगठन की सोच या आधिकारिक रुख नहीं है। उन्होंने दोहराया कि भाजपा उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” की नीति के साथ आगे बढ़ती है, इसलिए इस टिप्पणी को व्यक्तिगत राय माना जाए पार्टी इसे अपनी विचारधारा से जोड़कर नहीं देखती।

उत्तर प्रदेश में सियासी तापमान हाई

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस बयान ने विपक्ष को एक और बड़ा हमला करने का मौका दे दिया है। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष प्रदीप सिंघल ने इसे चुनावी मौसम की सोची-समझी बयानबाजी बताते हुए आरोप लगाया कि माहौल बनते ही कुछ नेताओं की भाषा समाज को बांटने की दिशा में मोड़ दी जाती है। उधर समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष राम उदित यादव ने इसे प्रदेश के सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक करार देते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां सिर्फ तनाव बढ़ाती हैं और भाईचारे को चोट पहुंचाती हैं। बयान सामने आते ही उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चाओं का तापमान बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर जहां विधायक का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, वहीं विपक्षी खेमे से कुछ तस्वीरें भी साझा की जा रही हैं, जिनमें उन्हें धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में मौजूद बताने का दावा किया जा रहा है।

जगदीशपुर सीट से दूसरी बार विधायक है सुरेश पासी

सुरेश पासी उत्तर प्रदेश की जगदीशपुर (सुरक्षित) विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार विधायक हैं, ऐसे में उनका यह बयान अब केवल स्थानीय विवाद नहीं रह गया है। वायरल वीडियो के बाद बढ़ते सियासी दबाव के बीच निगाहें इस पर टिक गई हैं कि विधायक की ओर से कोई औपचारिक और विस्तृत सफाई आती है या नहीं। साथ ही, यह भी देखना अहम होगा कि क्या भाजपा नेतृत्व इस मुद्दे पर आगे कोई स्पष्ट कदम उठाता है, या फिर यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े विवाद के रूप में और तेज़ हो जाता है। UP News

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जिसे पढ़ा-लिखाकर दरोगा बनाया, उसीने दहेज उत्पीड़न के केस में फंसाया

बरेली में तैनात महिला सब-इंस्पेक्टर पायल रानी हैं, जिन्होंने अपने पति गुलशन और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर पति गुलशन का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक साथ रहकर, संघर्ष करते हुए अपनी पत्नी को पढ़ाया-लिखाया और पुलिस विभाग तक पहुँचाया।

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शादी के समय पति-पत्नी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar08 Jan 2026 03:14 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से सामने आया यह मामला न केवल कानूनी रूप से गंभीर है, बल्कि सामाजिक रूप से भी कई सवाल खड़े करता है। एक ओर बरेली में तैनात महिला सब-इंस्पेक्टर पायल रानी हैं, जिन्होंने अपने पति गुलशन और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर पति गुलशन का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक साथ रहकर, संघर्ष करते हुए अपनी पत्नी को पढ़ाया-लिखाया और पुलिस विभाग तक पहुँचाया, लेकिन अब उन्हीं पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।

पत्नी का पक्ष: दहेज और उत्पीड़न के गंभीर आरोप

महिला दरोगा पायल रानी ने पुलिस अधीक्षक हापुड़ को दी गई शिकायत में कहा है कि उनकी शादी 2 दिसंबर 2022 को गुलशन के साथ हुई थी। उनका आरोप है कि शादी के समय मायके की ओर से दहेज दिया गया, लेकिन इसके बावजूद ससुराल वाले संतुष्ट नहीं थे।

पायल रानी के अनुसार, शादी के कुछ समय बाद ही उनसे 10 लाख रुपये नकद और एक कार की मांग की जाने लगी। जब यह मांग पूरी नहीं हुई, तो कथित तौर पर मानसिक दबाव, मारपीट और अपमान का सिलसिला शुरू हो गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और तेजाब फेंकने जैसी डरावनी धमकियाँ भी मिलीं। इन परिस्थितियों में उन्होंने अपनी सुरक्षा को खतरे में बताते हुए कानूनी कार्रवाई का सहारा लिया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर नगर कोतवाली में पति समेत छह ससुरालजनों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट और धमकी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

पति का पक्ष: प्रेम संबंध, संघर्ष और झूठे केस का आरोप

वहीं पति गुलशन ने पत्नी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि वे और पायल रानी वर्ष 2016 से एक-दूसरे को जानते थे और उनके बीच प्रेम संबंध था। दोनों ने साथ पढ़ाई की और 2021 में आपसी सहमति से कोर्ट मैरिज की। गुलशन के अनुसार, परिवार की सहमति से 2022 में सामाजिक रीति-रिवाज से शादी हुई, जिसमें किसी भी प्रकार का दहेज नहीं लिया गया। उनका दावा है कि शादी के बाद पायल रानी उनके साथ ही रहीं और उन्होंने अपनी कमाई से उनकी पढ़ाई, तैयारी और हर तरह का सहयोग किया, जिससे वे सब-इंस्पेक्टर बन सकीं। गुलशन का आरोप है कि नौकरी लगने के बाद रिश्तों में दूरी आई और अब उन्हें व उनके परिवार को झूठे दहेज केस में फंसाया जा रहा है। इसी को लेकर उन्होंने एसपी हापुड़ से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

कानून की नजर में मामला

भारतीय कानून में दहेज उत्पीड़न एक गंभीर अपराध है और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून बेहद सख्त हैं। लेकिन साथ ही उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय यह भी कह चुके हैं कि इन कानूनों का दुरुपयोग भी कुछ मामलों में सामने आया है। इसलिए हर केस में तथ्यों, साक्ष्यों और निष्पक्ष जांच को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।

सच्चाई कैसे तय होगी?

इस मामले में सच्चाई इन बिंदुओं पर निर्भर करेगी:

* शादी और कोर्ट मैरिज से जुड़े दस्तावेज

* दहेज मांग से संबंधित कोई लिखित या डिजिटल सबूत

* मारपीट या उत्पीड़न की मेडिकल रिपोर्ट

* दोनों पक्षों के कॉल रिकॉर्ड, चैट और गवाह

* यह भी कि विवाद कब और किन परिस्थितियों में शुरू हुआ

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस मामले में कौन सही है और कौन गलत। न तो केवल आरोप के आधार पर पति को दोषी ठहराया जा सकता है और न ही बिना जांच पत्नी के बयान को झूठा कहा जा सकता है। सच वही होगा जो निष्पक्ष पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद सामने आएगा। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि रिश्तों में जब भरोसा टूटता है, तो कानूनी लड़ाई सामाजिक बहस का रूप ले लेती है।

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