चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा किए गए विशेष आडिट और बैंक की आंतरिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ऋण वितरण की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं और सुनियोजित धोखाधड़ी हुई है।

UP News : उत्तर प्रदेश को-आपरेटिव बैंक लिमिटेड की गोंडा शाखा में हुए बड़े वित्तीय घोटाले में पुलिस ने कोतवाली नगर थाना में एफआईआर दर्ज कर ली है। चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा किए गए विशेष आडिट और बैंक की आंतरिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ऋण वितरण की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं और सुनियोजित धोखाधड़ी हुई है।
* शाखा प्रबंधक और कर्मचारियों ने मिलकर एक सिंडिकेट बनाया और नियमों का उल्लंघन करते हुए ऋण जारी किया।
* ऋण की पात्रता की जांच, आय प्रमाण पत्र या जमानत मूल्यांकन जैसी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी नहीं की गईं।
* कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत हुआ।
* बैंक के पांच आंतरिक खातों से 46.13 लाख की राशि अवैध रूप से निकाली गई और विभिन्न खातों में ट्रांसफर की गई।
* खाताधारकों की 21.01 करोड़ की धनराशि का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया।
* कुल मिलाकर 21.47 करोड़ की गबन और वित्तीय दुरुपयोग की पुष्टि हुई।
* शाखा प्रबंधक ने अपने माता-पिता, पत्नी और पुत्र के खातों का भी उपयोग किया।
* निकाली गई धनराशि को परिवार के खातों में घुमाकर धोखाधड़ी को योजनाबद्ध रूप दिया गया।
* यह अनियमितताएं दिसंबर 2021 से जून 2025 के बीच हुईं।
* जांच में तीन तत्कालीन शाखा प्रबंधक, सहायक/कैशियर और कुछ खाताधारकों सहित कुल 16 लोगों को नामजद किया गया।
* पुलिस बैंक के सभी संदिग्ध खातों, ऋण फाइलों और डिजिटल लेनदेन की गहन जांच कर रही है।
* आगे जांच में और नाम सामने आने पर उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
* इस घोटाले ने सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में निगरानी और आंतरिक नियंत्रण की गंभीर कमियों को उजागर किया।
* खाताधारकों और प्रशासन के लिए यह चेतावनी है कि धनरक्षा और नियामक प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है।
यह मामला केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि बैंकिंग प्रणाली में नियंत्रण की विफलता और संगठित धोखाधड़ी का उदाहरण है। बैंक और नियामक संस्थाओं को ऐसे मामलों से निपटने और भविष्य में रोकथाम के लिए कठोर कदम उठाना आवश्यक है।