भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) का ऐलान किया है। इस ऐलान के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उत्तर प्रदेश के बड़े फैसले की जानकारी हम आपको विस्तार के साथ बता रहे हैं। UP News
बता देकि डिंपल यादव ने कहा कि “अगर चुनाव आयोग एसआईआर कराना चाहता है, तो उसे कराने दीजिए। सरकार जिनकी है वो चाह रहे हैं एसआईआर, तो फॉलो किया जाएगा। लेकिन आखिर SIR कराने की मंशा क्या है? सरकार की मंशा क्लियर नहीं है। सरकार लोकतांत्रिक ढांचे को क्षति पहुंचाने की कोशिश कर रही है।”
वहीं उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एसआईआर (SIR) को लेकर कहा कि भारत निर्वाचन आयोग का यह कदम स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि “जो लोग मतदाता सूची में शामिल होने की पात्रता रखते हैं, केवल उन्हीं का नाम होना चाहिए। जो लोग बाहर के नागरिक हैं और गलती से सूची में शामिल हो गए हैं, उनका चिन्हिकरण करना जरूरी है। यह एक सही दिशा में कदम है।”
चुनाव आयोग ने बताया कि SIR का दूसरा चरण 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किया जाएगा। इनमें शामिल हैं—
उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, पुडुचेरी, मध्य प्रदेश, लक्षद्वीप, केरल, गुजरात, गोवा, छत्तीसगढ़ और अंडमान एवं निकोबार। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अनुसार, इस प्रक्रिया का टाइमलाइन इस प्रकार रहेगा —
29 अक्टूबर से 3 नवंबर 2025 – प्रिंटिंग और ट्रेनिंग
4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025 – हाउस इन्यूमेरेशन फॉर्म का वितरण
9 दिसंबर 2025 – ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स का प्रकाशन
9 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 – दावे और आपत्तियाँ दाखिल करने की अवधि
9 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 – नोटिस फेज
7 फरवरी 2026 – अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन
राजनीतिक मायने
सपा और भाजपा के बीच SIR को लेकर सियासी जुबानी जंग तेज हो गई है। जहां भाजपा इसे पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं सपा इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में हस्तक्षेप करार दे रही है। पंचायत चुनाव से पहले यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की सियासत में गर्मी ला सकता है।