कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, 10 साल की सजा सस्पेंड करने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली हाईकोर्ट के पिछले आॅर्डर पर रोक लगाने के कुछ ही हफ्ते बाद यह निर्णय आया था। उस आदेश में 2017 के रेप केस में सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को अस्थायी तौर पर सस्पेंड किया गया था।

UP News : दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत से जुड़े मामले में भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने सेंगर की सजा सस्पेंड करने और जमानत देने की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस रविंदर डुडेजा की अदालत ने कहा कि कुलदीप सेंगर ने कुल 10 साल की सजा में लगभग 7.5 साल कस्टडी में बिताए हैं। साथ ही, मामले में सजा के खिलाफ अपील में हुई देरी का एक हिस्सा सेंगर की अपनी अर्जी दाखिल करने की वजह से हुआ। इसलिए, अदालत ने सेंगर की बेल और सजा सस्पेंड करने की याचिका को खारिज कर दिया।
पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत के बाद ही सेंगर को हुई थी सजा
सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली हाईकोर्ट के पिछले आॅर्डर पर रोक लगाने के कुछ ही हफ्ते बाद यह निर्णय आया था। उस आदेश में 2017 के रेप केस में सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को अस्थायी तौर पर सस्पेंड किया गया था। 9 अप्रैल 2018 को, उन्नाव रेप पीड़िता के पिता कस्टडी में मृत पाए गए थे, जिन्हें सेंगर के कथित कहने पर गिरफ्तार किया गया था। मार्च 2020 में, दिल्ली की अदालत ने सेंगर और अन्य आरोपियों को उनके पिता की मौत के लिए दोषी ठहराते हुए 10 साल की जेल की सजा सुनाई। सेंगर 13 अप्रैल 2018 से जेल में हैं और सजा काट रहे हैं।
कोर्ट का दृष्टिकोण
अदालत ने कहा कि सजा के बाद कोई ऐसा नया तथ्य सामने नहीं आया है, जो अपीलकर्ता के पक्ष में अंतरिम राहत देने के लिए पर्याप्त हो। सेंगर के क्रिमिनल रिकॉर्ड और जुर्म की गंभीरता को देखते हुए, कोर्ट ने फैसला किया कि वर्तमान स्थिति में सजा सस्पेंड करना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अपील को मेरिट पर जल्द सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। जस्टिस डुडेजा ने जोर देकर कहा कि सजा सस्पेंड करने की बजाय अंतिम अपील पर फैसला करना ही सही तरीका है। जून 2024 में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की इसी तरह की याचिका खारिज कर दी थी। उस समय अदालत ने कहा था कि अपराध की गंभीरता, दोषी का रिकॉर्ड और न्याय प्रणाली पर असर को ध्यान में रखते हुए, सेंगर की सजा सस्पेंड करने का हकदार नहीं हैं।
UP News : दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत से जुड़े मामले में भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने सेंगर की सजा सस्पेंड करने और जमानत देने की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस रविंदर डुडेजा की अदालत ने कहा कि कुलदीप सेंगर ने कुल 10 साल की सजा में लगभग 7.5 साल कस्टडी में बिताए हैं। साथ ही, मामले में सजा के खिलाफ अपील में हुई देरी का एक हिस्सा सेंगर की अपनी अर्जी दाखिल करने की वजह से हुआ। इसलिए, अदालत ने सेंगर की बेल और सजा सस्पेंड करने की याचिका को खारिज कर दिया।
पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत के बाद ही सेंगर को हुई थी सजा
सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली हाईकोर्ट के पिछले आॅर्डर पर रोक लगाने के कुछ ही हफ्ते बाद यह निर्णय आया था। उस आदेश में 2017 के रेप केस में सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को अस्थायी तौर पर सस्पेंड किया गया था। 9 अप्रैल 2018 को, उन्नाव रेप पीड़िता के पिता कस्टडी में मृत पाए गए थे, जिन्हें सेंगर के कथित कहने पर गिरफ्तार किया गया था। मार्च 2020 में, दिल्ली की अदालत ने सेंगर और अन्य आरोपियों को उनके पिता की मौत के लिए दोषी ठहराते हुए 10 साल की जेल की सजा सुनाई। सेंगर 13 अप्रैल 2018 से जेल में हैं और सजा काट रहे हैं।
कोर्ट का दृष्टिकोण
अदालत ने कहा कि सजा के बाद कोई ऐसा नया तथ्य सामने नहीं आया है, जो अपीलकर्ता के पक्ष में अंतरिम राहत देने के लिए पर्याप्त हो। सेंगर के क्रिमिनल रिकॉर्ड और जुर्म की गंभीरता को देखते हुए, कोर्ट ने फैसला किया कि वर्तमान स्थिति में सजा सस्पेंड करना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अपील को मेरिट पर जल्द सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। जस्टिस डुडेजा ने जोर देकर कहा कि सजा सस्पेंड करने की बजाय अंतिम अपील पर फैसला करना ही सही तरीका है। जून 2024 में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की इसी तरह की याचिका खारिज कर दी थी। उस समय अदालत ने कहा था कि अपराध की गंभीरता, दोषी का रिकॉर्ड और न्याय प्रणाली पर असर को ध्यान में रखते हुए, सेंगर की सजा सस्पेंड करने का हकदार नहीं हैं।












