कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, 10 साल की सजा सस्पेंड करने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली हाईकोर्ट के पिछले आॅर्डर पर रोक लगाने के कुछ ही हफ्ते बाद यह निर्णय आया था। उस आदेश में 2017 के रेप केस में सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को अस्थायी तौर पर सस्पेंड किया गया था।

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कुलदीप सेंगर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar19 Jan 2026 04:19 PM
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UP News : दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत से जुड़े मामले में भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने सेंगर की सजा सस्पेंड करने और जमानत देने की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस रविंदर डुडेजा की अदालत ने कहा कि कुलदीप सेंगर ने कुल 10 साल की सजा में लगभग 7.5 साल कस्टडी में बिताए हैं। साथ ही, मामले में सजा के खिलाफ अपील में हुई देरी का एक हिस्सा सेंगर की अपनी अर्जी दाखिल करने की वजह से हुआ। इसलिए, अदालत ने सेंगर की बेल और सजा सस्पेंड करने की याचिका को खारिज कर दिया।

पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत के बाद ही सेंगर को हुई थी सजा

सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली हाईकोर्ट के पिछले आॅर्डर पर रोक लगाने के कुछ ही हफ्ते बाद यह निर्णय आया था। उस आदेश में 2017 के रेप केस में सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को अस्थायी तौर पर सस्पेंड किया गया था। 9 अप्रैल 2018 को, उन्नाव रेप पीड़िता के पिता कस्टडी में मृत पाए गए थे, जिन्हें सेंगर के कथित कहने पर गिरफ्तार किया गया था। मार्च 2020 में, दिल्ली की अदालत ने सेंगर और अन्य आरोपियों को उनके पिता की मौत के लिए दोषी ठहराते हुए 10 साल की जेल की सजा सुनाई। सेंगर 13 अप्रैल 2018 से जेल में हैं और सजा काट रहे हैं।

कोर्ट का दृष्टिकोण

अदालत ने कहा कि सजा के बाद कोई ऐसा नया तथ्य सामने नहीं आया है, जो अपीलकर्ता के पक्ष में अंतरिम राहत देने के लिए पर्याप्त हो। सेंगर के क्रिमिनल रिकॉर्ड और जुर्म की गंभीरता को देखते हुए, कोर्ट ने फैसला किया कि वर्तमान स्थिति में सजा सस्पेंड करना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अपील को मेरिट पर जल्द सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। जस्टिस डुडेजा ने जोर देकर कहा कि सजा सस्पेंड करने की बजाय अंतिम अपील पर फैसला करना ही सही तरीका है। जून 2024 में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की इसी तरह की याचिका खारिज कर दी थी। उस समय अदालत ने कहा था कि अपराध की गंभीरता, दोषी का रिकॉर्ड और न्याय प्रणाली पर असर को ध्यान में रखते हुए, सेंगर की सजा सस्पेंड करने का हकदार नहीं हैं।

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उत्तर प्रदेश बनेगा ग्लोबल केस-स्टडी, 20 देशों के एक्सपर्ट्स होंगे शामिल

तेल अवीव के सम्मेलन में इन्हीं पहलों को इनोवेटिव और प्रैक्टिकल केस-स्टडी मॉडल के तौर पर पेश किया जाएगा, ताकि दुनिया देख सके कि बड़ा राज्य भी डिजिटल चुनौतियों से लड़ने के लिए कैसे स्मार्ट सिस्टम खड़ा कर सकता है।

UP बनेगा ग्लोबल बेंचमार्क
UP बनेगा ग्लोबल बेंचमार्क
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar19 Jan 2026 03:02 PM
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UP News : तेल अवीव में होने जा रहा Cybertech Global Tel Aviv 2026 इस बार भारत के लिए केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं, बल्कि दुनिया के सामने अपनी साइबर ताकत का दमदार प्रदर्शन करने का बड़ा मंच बन रहा है। 26 से 28 जनवरी 2026 तक इजराइल में होने वाले इस ग्लोबल इवेंट में भारत की मौजूदगी का सबसे खास पहलू उत्तर प्रदेश रहेगा। जहां राज्य के साइबर सिक्योरिटी मॉडल, जमीनी स्तर पर की जा रही त्वरित कार्रवाई और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन मॉनिटरिंग सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सामने रखा जाएगा। 

उत्तर प्रदेश का साइबर मॉडल अब ग्लोबल स्टेज पर

उत्तर प्रदेश ने बीते कुछ समय में साइबर सुरक्षा को सिर्फ तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्राथमिकता बनाकर जिस तरह सिस्टम को धार दी है, अब उसी मॉडल को ग्लोबल मंच पर दिखाने की तैयारी है। सोशल मीडिया पर फैलते दुष्प्रचार, डीपफेक के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिशें, डार्क वेब की छिपी गतिविधियां और बढ़ते साइबर अपराध इन सबके बीच यूपी ने साइबर सेफ उत्तर प्रदेश अभियान के जरिए जागरूकता, रियल-टाइम निगरानी और त्वरित कार्रवाई तीनों मोर्चों पर अपनी पकड़ मजबूत की है। तेल अवीव के सम्मेलन में इन्हीं पहलों को इनोवेटिव और प्रैक्टिकल केस-स्टडी मॉडल के तौर पर पेश किया जाएगा, ताकि दुनिया देख सके कि बड़ा राज्य भी डिजिटल चुनौतियों से लड़ने के लिए कैसे स्मार्ट सिस्टम खड़ा कर सकता है।

दो भारतीय दिग्गज मुख्य मेंटर भूमिका में

इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की ओर से दो अनुभवी और भरोसेमंद चेहरों को “मुख्य मेंटर” की भूमिका में आगे किया जा रहा है। एक तरफ माधवन उन्नीकृष्णन नायर भारत सरकार के पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक, जिनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर साइबर नीति और रणनीति गढ़ने वाले अहम विशेषज्ञों में रही है। दूसरी तरफ प्रो. त्रिवेणी सिंह उत्तर प्रदेश के चर्चित साइबर विशेषज्ञ, जो फील्ड-लेवल चुनौतियों से लेकर सिस्टम-बिल्डिंग तक का व्यावहारिक अनुभव रखते हैं। दोनों विशेषज्ञ दुनिया के शीर्ष साइबर वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और टेक इंडस्ट्री लीडर्स के सामने नई पीढ़ी के साइबर खतरों जैसे डीपफेक, फाइनेंशियल फ्रॉड, डेटा ब्रीच और डिजिटल प्रोपेगैंडा पर भारत की तैयारी और जमीनी समाधान को विस्तार से सामने रखेंगे।

20+ देशों की भागीदारी

इस सम्मेलन की ग्लोबल स्केल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें अमेरिका, जापान, स्पेन, इटली, इंग्लैंड, जर्मनी, साइप्रस, रोमानिया, फिलीपींस, यूएई, बेल्जियम, लातविया, नीदरलैंड, अल्बानिया, उरुग्वे, हंगरी समेत 20 से ज्यादा देशों के साइबर विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और टेक लीडर्स एक ही मंच पर जुटेंगे। ऐसे में तेल अवीव का यह प्लेटफॉर्म उत्तर प्रदेश के लिए भी बेहद अहम बन जाता है क्योंकि यहां यूपी की रणनीति सिर्फ प्रस्तुत नहीं होगी, बल्कि दुनिया के अलग-अलग मॉडल्स के साथ तुलना, अनुभवों की साझेदारी और संभावित अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नजरिए से भी परखी जाएगी। यही वजह है कि यूपी का साइबर मॉडल इस बार स्थानीय पहल से आगे बढ़कर वैश्विक चर्चा का हिस्सा बनने जा रहा है।

साइबर सेफ यूपी के उपायों की होगी ग्लोबल प्रेजेंटेशन

प्रो. त्रिवेणी सिंह अपने 25 वर्षों के अनुभव के आधार पर बताएंगे कि कैसे उत्तर प्रदेश ने साइबर अपराध, वित्तीय ठगी और टेक्नोलॉजी आधारित अपराधों पर लगाम कसने के लिए मजबूत और बहुस्तरीय प्रणाली विकसित की। दूसरी ओर माधवन उन्नीकृष्णन नायर भारत के राष्ट्रीय साइबर फ्रेमवर्क, नीतिगत अनुभव और भविष्य की दिशा पर अपने इनपुट साझा करेंगे। सम्मेलन में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होने की बात कही गई है। इस दौरान भारत सहित कई देशों के बीच साइबर सुरक्षा सहयोग, टेक्नोलॉजी साझेदारी और साइबर बिजनेस की संभावनाओं पर बातचीत होगी।

क्यों अहम है यह मंच?

Cybertech Global 2026 भारत के लिए एक ऐसा मौका है, जहां देश अपनी साइबर क्षमता, नीति और टेक्नोलॉजी विजन को दुनिया के सामने मजबूती से रख सकता है। वहीं उत्तर प्रदेश के लिए यह मंच एक साफ संदेश देगा कि राज्य की पहचान अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रही उत्तर प्रदेश अब डिजिटल सुरक्षा, साइबर गवर्नेंस और टेक्नोलॉजी आधारित प्रशासन के मोर्चे पर भी नई लकीर खींच रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस सम्मेलन से निकलने वाली साझेदारियां, रणनीतिक बातचीत और तकनीकी सहयोग भारत को आने वाले वर्षों में ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी हब के तौर पर स्थापित करने की दिशा में एक अहम और व्यावहारिक कदम साबित हो सकते हैं। UP News


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गजब संयोग! जिस दिन बदली थी पार्टी, उसी दिन बिगड़ी घर की कहानी

खास संयोग यह है कि 19 जनवरी वही तारीख है, जिस दिन अपर्णा यादव ने उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी नई दिशा तय की थी और अब चार साल बाद उसी दिन उनके वैवाहिक रिश्तों में उठे तूफान की खबर सामने आकर प्रदेशभर में चर्चाओं का विषय बन गई है।

यादव परिवार से जुड़ी खबर ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
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locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar19 Jan 2026 02:26 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे असरदार नामों में शामिल यादव परिवार से जुड़ी एक निजी खबर ने लखनऊ के सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी। उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे असरदार नामों में से एक मुलायम सिंह यादव परिवार से संबंध रखने वाली अपर्णा यादव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैंलेकिन इस बार वजह कोई राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि उनके निजी जीवन से जुड़ा बड़ा घटनाक्रम है। खास संयोग यह है कि 19 जनवरी वही तारीख है, जिस दिन अपर्णा यादव ने उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी नई दिशा तय की थी और अब चार साल बाद उसी दिन उनके वैवाहिक रिश्तों में उठे तूफान की खबर सामने आकर प्रदेशभर में चर्चाओं का विषय बन गई है।

चुनाव से ठीक पहले बदला था राजनीतिक रास्ता

19 जनवरी 2022 को, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपर्णा यादव ने समाजवादी पार्टी से नाता तोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में हुआ यह कदम उस वक्त उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े सियासी संदेश के तौर पर देखा गया, क्योंकि अपर्णा का रिश्ता सीधे सैफई परिवार से जुड़ा रहा है। सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम की अहमियत और बढ़ा दी थी। यही वजह रही कि सैफई परिवार की छोटी बहू का पाला बदलना सिर्फ उत्तर प्रदेश नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी लंबे समय तक सुर्खियों में रहा।

पति प्रतीक यादव के पोस्ट से मची हलचल

19 जनवरी 2026 को एक बार फिर उत्तर प्रदेश के सियासी माहौल में हलचल तब तेज हो गई, जब अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव के नाम से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई। पोस्ट में उन्होंने अपर्णा यादव पर निजी स्तर के गंभीर आरोप लगाते हुए जल्द तलाक लेने की बात कही। साथ ही अपर्णा के लिए “स्वार्थी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। नोट: यह पूरा मामला फिलहाल सोशल मीडिया पोस्ट/दावों पर आधारित है। परिवार या संबंधित पक्ष की तरफ से आधिकारिक बयान/कानूनी प्रक्रिया की पुष्टि सामने आने पर ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।

उत्तर प्रदेश में संयोग पर बहस

यूपी के राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर लोग इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग अंदाज में चर्चा कर रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जिस तारीख को अपर्णा यादव ने अपने राजनीतिक करियर की नई दिशा तय की थी, उसी तारीख पर उनके वैवाहिक रिश्ते को लेकर इतना बड़ा सार्वजनिक विवाद सामने आना क्या महज़ संयोग है या इसके पीछे कोई सोची-समझी टाइमिंग? अपर्णा यादव फिलहाल उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष के तौर पर सक्रिय हैं। ऐसे में यह विवाद केवल निजी दायरे तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यूपी की सियासत में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है।

सैफई परिवार में पसरा है सन्नाटा

एक ओर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा के भीतर अपर्णा यादव की बढ़ती सक्रियता, और दूसरी ओर पति प्रतीक यादव की तीखी पोस्ट इन दोनों ने मिलकर इस घटनाक्रम को लखनऊ से दिल्ली तक सियासी चर्चा का बड़ा मुद्दा बना दिया है। फिलहाल यादव परिवार या अपर्णा यादव की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है। UP News

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