उत्तर प्रदेश की बड़ी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार, लागू हुई नई व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश के 41 विभागों और उनसे जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं को इस पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे अब अलग-अलग विभागों में चल रही परियोजनाओं की स्थिति पर एकीकृत तरीके से नजर रखी जा सकेगी।

UP News : उत्तर प्रदेश में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं की निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए योगी सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अब केंद्र के पीएमजी मॉडल की तर्ज पर स्टेट PMG पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजनाएं समय पर पूरी हों और उनके निर्माण के दौरान आने वाली रुकावटों का जल्द समाधान किया जा सके। नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश के 41 विभागों और उनसे जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं को इस पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे अब अलग-अलग विभागों में चल रही परियोजनाओं की स्थिति पर एकीकृत तरीके से नजर रखी जा सकेगी।
मुख्य सचिव ने अफसरों को दिए सख्त निर्देश
इस नई व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने शासन से लेकर जिला स्तर तक के अफसरों को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों के साथ-साथ सरकारी निर्माण एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों से कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए स्टेट PMG पोर्टल का सक्रिय और प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए। सरकार का फोकस इस बात पर है कि उत्तर प्रदेश के अहम प्रोजेक्ट्स से जुड़ी अड़चनों की पहचान समय रहते हो, ताकि विभागीय स्तर पर फाइलों में देरी और समन्वय की कमी के कारण विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित न हो।
उत्तर प्रदेश की अटकी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार
केंद्र सरकार पहले से ही अपनी वित्तपोषित और अहम परियोजनाओं के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप पोर्टल का उपयोग करती रही है। अब उत्तर प्रदेश ने इसी व्यवस्था को राज्य स्तर पर अपनाकर परियोजना प्रबंधन को और मजबूत बनाने की कोशिश की है। इस पोर्टल के जरिए उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन परियोजनाओं के सामने आने वाले मुद्दों को संबंधित विभागों, जिलों और जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार के मंत्रालयों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और अटके हुए मामलों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश में वे सड़क और अन्य विकास कार्य भी इस व्यवस्था के दायरे में लाए जाएंगे, जो स्थानीय अवरोधों या धार्मिक स्थलों जैसी वजहों से लंबे समय से फंसे हुए हैं।
10 करोड़ से ज्यादा लागत वाली परियोजनाएं होंगी पोर्टल से लिंक
नियोजन विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को स्टेट PMG पोर्टल से जोड़ा गया है। ये परियोजनाएं सीएमआईएस पोर्टल पर दर्ज हैं और अब एपीआई के माध्यम से उनकी जानकारी स्वत: स्टेट PMG प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ी परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति, लंबित अनुमतियों और निर्माण में आ रही बाधाओं की जानकारी एक ही मंच पर मिल सकेगी। इससे निगरानी अधिक व्यवस्थित होगी और जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।
समीक्षा बैठकों से होगा लंबित मामलों का निस्तारण
सरकार ने यह भी तय किया है कि पोर्टल पर दर्ज समस्याओं के समाधान के लिए समय-समय पर संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य यह है कि उत्तर प्रदेश में कोई भी बड़ी परियोजना सिर्फ फाइलों में अटककर न रह जाए, बल्कि जमीन पर उसका काम तेजी से आगे बढ़े। इन बैठकों के जरिए उत्तर प्रदेश में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा होगी और जिन परियोजनाओं में अनुमति, समन्वय या प्रशासनिक बाधा आ रही है, उनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार इस नई पहल के जरिए विकास परियोजनाओं की मॉनिटरिंग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाना चाहती है। साथ ही, अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय को बेहतर करके मल्टी-स्टेकहोल्डर कोऑर्डिनेशन को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने सभी विभागों से कहा है कि वे उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े अनुमोदन, अवरोध और अन्य मुद्दों को स्टेट PMG पोर्टल पर दर्ज करें, ताकि उनका समयबद्ध समाधान हो सके। माना जा रहा है कि यह कदम उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के साथ-साथ परियोजनाओं की निगरानी को भी नई दिशा देगा। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं की निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए योगी सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अब केंद्र के पीएमजी मॉडल की तर्ज पर स्टेट PMG पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजनाएं समय पर पूरी हों और उनके निर्माण के दौरान आने वाली रुकावटों का जल्द समाधान किया जा सके। नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश के 41 विभागों और उनसे जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं को इस पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे अब अलग-अलग विभागों में चल रही परियोजनाओं की स्थिति पर एकीकृत तरीके से नजर रखी जा सकेगी।
मुख्य सचिव ने अफसरों को दिए सख्त निर्देश
इस नई व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने शासन से लेकर जिला स्तर तक के अफसरों को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों के साथ-साथ सरकारी निर्माण एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों से कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए स्टेट PMG पोर्टल का सक्रिय और प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए। सरकार का फोकस इस बात पर है कि उत्तर प्रदेश के अहम प्रोजेक्ट्स से जुड़ी अड़चनों की पहचान समय रहते हो, ताकि विभागीय स्तर पर फाइलों में देरी और समन्वय की कमी के कारण विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित न हो।
उत्तर प्रदेश की अटकी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार
केंद्र सरकार पहले से ही अपनी वित्तपोषित और अहम परियोजनाओं के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप पोर्टल का उपयोग करती रही है। अब उत्तर प्रदेश ने इसी व्यवस्था को राज्य स्तर पर अपनाकर परियोजना प्रबंधन को और मजबूत बनाने की कोशिश की है। इस पोर्टल के जरिए उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन परियोजनाओं के सामने आने वाले मुद्दों को संबंधित विभागों, जिलों और जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार के मंत्रालयों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और अटके हुए मामलों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश में वे सड़क और अन्य विकास कार्य भी इस व्यवस्था के दायरे में लाए जाएंगे, जो स्थानीय अवरोधों या धार्मिक स्थलों जैसी वजहों से लंबे समय से फंसे हुए हैं।
10 करोड़ से ज्यादा लागत वाली परियोजनाएं होंगी पोर्टल से लिंक
नियोजन विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को स्टेट PMG पोर्टल से जोड़ा गया है। ये परियोजनाएं सीएमआईएस पोर्टल पर दर्ज हैं और अब एपीआई के माध्यम से उनकी जानकारी स्वत: स्टेट PMG प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ी परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति, लंबित अनुमतियों और निर्माण में आ रही बाधाओं की जानकारी एक ही मंच पर मिल सकेगी। इससे निगरानी अधिक व्यवस्थित होगी और जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।
समीक्षा बैठकों से होगा लंबित मामलों का निस्तारण
सरकार ने यह भी तय किया है कि पोर्टल पर दर्ज समस्याओं के समाधान के लिए समय-समय पर संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य यह है कि उत्तर प्रदेश में कोई भी बड़ी परियोजना सिर्फ फाइलों में अटककर न रह जाए, बल्कि जमीन पर उसका काम तेजी से आगे बढ़े। इन बैठकों के जरिए उत्तर प्रदेश में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा होगी और जिन परियोजनाओं में अनुमति, समन्वय या प्रशासनिक बाधा आ रही है, उनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार इस नई पहल के जरिए विकास परियोजनाओं की मॉनिटरिंग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाना चाहती है। साथ ही, अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय को बेहतर करके मल्टी-स्टेकहोल्डर कोऑर्डिनेशन को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने सभी विभागों से कहा है कि वे उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े अनुमोदन, अवरोध और अन्य मुद्दों को स्टेट PMG पोर्टल पर दर्ज करें, ताकि उनका समयबद्ध समाधान हो सके। माना जा रहा है कि यह कदम उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के साथ-साथ परियोजनाओं की निगरानी को भी नई दिशा देगा। UP News












