उत्तर प्रदेश की बड़ी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार, लागू हुई नई व्यवस्था

नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश के 41 विभागों और उनसे जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं को इस पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे अब अलग-अलग विभागों में चल रही परियोजनाओं की स्थिति पर एकीकृत तरीके से नजर रखी जा सकेगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar10 Mar 2026 04:42 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं की निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए योगी सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अब केंद्र के पीएमजी मॉडल की तर्ज पर स्टेट PMG पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजनाएं समय पर पूरी हों और उनके निर्माण के दौरान आने वाली रुकावटों का जल्द समाधान किया जा सके। नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश के 41 विभागों और उनसे जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं को इस पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे अब अलग-अलग विभागों में चल रही परियोजनाओं की स्थिति पर एकीकृत तरीके से नजर रखी जा सकेगी।

मुख्य सचिव ने अफसरों को दिए सख्त निर्देश

इस नई व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने शासन से लेकर जिला स्तर तक के अफसरों को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों के साथ-साथ सरकारी निर्माण एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों से कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए स्टेट PMG पोर्टल का सक्रिय और प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए। सरकार का फोकस इस बात पर है कि उत्तर प्रदेश के अहम प्रोजेक्ट्स से जुड़ी अड़चनों की पहचान समय रहते हो, ताकि विभागीय स्तर पर फाइलों में देरी और समन्वय की कमी के कारण विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित न हो।

उत्तर प्रदेश की अटकी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

केंद्र सरकार पहले से ही अपनी वित्तपोषित और अहम परियोजनाओं के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप पोर्टल का उपयोग करती रही है। अब उत्तर प्रदेश ने इसी व्यवस्था को राज्य स्तर पर अपनाकर परियोजना प्रबंधन को और मजबूत बनाने की कोशिश की है। इस पोर्टल के जरिए उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन परियोजनाओं के सामने आने वाले मुद्दों को संबंधित विभागों, जिलों और जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार के मंत्रालयों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और अटके हुए मामलों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश में वे सड़क और अन्य विकास कार्य भी इस व्यवस्था के दायरे में लाए जाएंगे, जो स्थानीय अवरोधों या धार्मिक स्थलों जैसी वजहों से लंबे समय से फंसे हुए हैं।

10 करोड़ से ज्यादा लागत वाली परियोजनाएं होंगी पोर्टल से लिंक

नियोजन विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को स्टेट PMG पोर्टल से जोड़ा गया है। ये परियोजनाएं सीएमआईएस पोर्टल पर दर्ज हैं और अब एपीआई के माध्यम से उनकी जानकारी स्वत: स्टेट PMG प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ी परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति, लंबित अनुमतियों और निर्माण में आ रही बाधाओं की जानकारी एक ही मंच पर मिल सकेगी। इससे निगरानी अधिक व्यवस्थित होगी और जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।

समीक्षा बैठकों से होगा लंबित मामलों का निस्तारण

सरकार ने यह भी तय किया है कि पोर्टल पर दर्ज समस्याओं के समाधान के लिए समय-समय पर संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य यह है कि उत्तर प्रदेश में कोई भी बड़ी परियोजना सिर्फ फाइलों में अटककर न रह जाए, बल्कि जमीन पर उसका काम तेजी से आगे बढ़े। इन बैठकों के जरिए उत्तर प्रदेश में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा होगी और जिन परियोजनाओं में अनुमति, समन्वय या प्रशासनिक बाधा आ रही है, उनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार इस नई पहल के जरिए विकास परियोजनाओं की मॉनिटरिंग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाना चाहती है। साथ ही, अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय को बेहतर करके मल्टी-स्टेकहोल्डर कोऑर्डिनेशन को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने सभी विभागों से कहा है कि वे उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े अनुमोदन, अवरोध और अन्य मुद्दों को स्टेट PMG पोर्टल पर दर्ज करें, ताकि उनका समयबद्ध समाधान हो सके। माना जा रहा है कि यह कदम उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के साथ-साथ परियोजनाओं की निगरानी को भी नई दिशा देगा। UP News

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योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, अब इस वर्ग को भी मिलेगा कैशलेस इलाज

सरकार के इस निर्णय से उत्तर प्रदेश के 1.28 लाख से अधिक शिक्षक और कर्मचारी लाभान्वित होंगे। योजना के तहत लाभार्थियों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध निजी अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा मिलेगी। कैशलेस इलाज की सीमा 5 लाख रुपये तक तय की गई है।

सीएम योगी
सीएम योगी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar10 Mar 2026 04:22 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोक भवन में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े एक बड़े वर्ग को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, राज्य विश्वविद्यालयों तथा स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत नियमित और स्ववित्तपोषित शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिल सकेगा। सरकार के इस निर्णय से उत्तर प्रदेश के 1.28 लाख से अधिक शिक्षक और कर्मचारी लाभान्वित होंगे। योजना के तहत लाभार्थियों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध निजी अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा मिलेगी। कैशलेस इलाज की सीमा 5 लाख रुपये तक तय की गई है।

शिक्षक दिवस की घोषणा को कैबिनेट ने दिया अमलीजामा

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस फैसले के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस घोषणा को धरातल पर उतार दिया है, जो उन्होंने 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर की थी। उस समय उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का आश्वासन दिया गया था। अब योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह फैसला लागू होने की दिशा में आगे बढ़ गया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि इस योजना में अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के नियमित शिक्षक, स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में पढ़ाने वाले शिक्षक, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षक और उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत नियमित व स्ववित्तपोषित शिक्षक शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस सुविधा के दायरे में लाया गया है।

उत्तर प्रदेश सरकार पर कितना आएगा सालाना खर्च

इस स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत प्रति शिक्षक 2479.70 रुपये का प्रीमियम खर्च आएगा। सरकार के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुल 1,28,725 लाभार्थियों को इसका फायदा मिलेगा। इस पर राज्य सरकार को हर साल करीब 31 करोड़ 92 लाख 38 हजार रुपये खर्च करने होंगे। इस राशि की व्यवस्था उच्च शिक्षा विभाग के बजट से की जाएगी। उत्तर प्रदेश में इस योजना का संचालन राज्य समग्र स्वास्थ्य एवं एकीकृत सेवा एजेंसी (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। लाभार्थियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सरकारी और पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा तय मानकों के आधार पर लागू होंगी।

हर साल 30 जून तक देना होगा लाभार्थियों का ब्योरा

योजना के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग हर वर्ष 30 जून तक शिक्षकों, कर्मचारियों और उनके आश्रितों का विवरण साचीज को उपलब्ध कराएगा। हालांकि, जो व्यक्ति पहले से केंद्र या राज्य सरकार की किसी दूसरी स्वास्थ्य योजना के तहत कवर होंगे, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े शिक्षक और कर्मचारी लंबे समय से इस तरह की सुविधा की मांग कर रहे थे। खासतौर पर सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक लगातार यह मुद्दा उठा रहे थे कि जब वे वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं, तो उन्हें भी सरकारी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए। इससे पहले जनवरी में हुई एक कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार ने बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा क्षेत्र के कुछ वर्गों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी, लेकिन उस समय उच्च शिक्षा के कई शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी योजना से बाहर रह गए थे। इसके बाद विभिन्न शिक्षक संगठनों, जिनमें उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ और लुआक्टा जैसे संगठन भी शामिल हैं, ने सरकार से छूटे हुए वर्ग को भी योजना में शामिल करने की मांग की थी।

फैसले से शिक्षकों और कर्मचारी संगठनों में खुशी

अब योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में खुशी का माहौल है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह फैसला न सिर्फ कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हजारों परिवारों को भी राहत देगा। माना जा रहा है कि इस निर्णय से उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा। मंगलवार को हुई बैठक में कैशलेस इलाज योजना के अलावा उत्तर प्रदेश के विकास, प्रशासन और सुशासन से जुड़े करीब 30 प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा उच्च शिक्षा क्षेत्र के शिक्षकों और कर्मचारियों को चिकित्सा बीमा योजना में शामिल किए जाने के फैसले की रही। UP News

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उत्तर प्रदेश में रसोई गैस की किल्लत : सिलिंडर लेने के लिए लगी भीड़

घरेलू एलपीजी (रसोई गैस) सिलिंडर की आपूर्ति में खामी के कारण गैस एजेंसियों पर भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग सिलिंंडर लेने के लिए एजेंसी पहुंचे, जिससे वहां लंबी कतारें और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

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सिलिंडर की आपूर्ति में खामी के कारण गैस एजेंसियों पर भारी भीड़
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar10 Mar 2026 03:17 PM
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UP News : बदायूं में मंगलवार को घरेलू एलपीजी (रसोई गैस) सिलिंडर की आपूर्ति में खामी के कारण गैस एजेंसियों पर भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग सिलिंंडर लेने के लिए एजेंसी पहुंचे, जिससे वहां लंबी कतारें और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि स्थानीय लोग इसे ईरान-अमेरिका युद्ध से जोड़कर देख रहे हैं। लोगों को डर है कि अगर युद्ध लंबा चला तो गैस आदि की किल्लत का सामना करना पड़ेगा।

आपूर्ति में बाधा का कारण

पिछले कुछ दिनों से गैस सिलिंडरों की नियमित आपूर्ति प्रभावित रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक गैस सप्लाई चेन पर दबाव पड़ा है, जिससे स्थानीय एजेंसियों में सिलिंडरों की संख्या सीमित हो गई। जैसे ही एजेंसी पर सिलिंडर आने की खबर लोगों को मिली, वे बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए।

भीड़ और अव्यवस्था

एजेंसी परिसर के बाहर लंबी कतारें लगीं और कई लोग घंटों इंतजार करते रहे। इस दौरान कुछ समय के लिए अव्यवस्था भी देखने को मिली। एजेंसी के कर्मचारी लगातार लाइन में व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे और उपभोक्ताओं को सिलिंडर वितरित कर रहे थे। उपभोक्ताओं ने कहा कि यदि सिलिंडरों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, तो इस तरह की भीड़ और परेशानी से बचा जा सकता है। वहीं, एजेंसी कर्मचारियों ने भरोसा दिलाया कि जैसे-जैसे सिलिंडर उपलब्ध होंगे, सभी को उनकी जरूरत के अनुसार वितरित किया जाएगा। सिर्फ बदायूं ही नहीं, बल्कि गोंडा, कुशीनगर, महाराजगंज और बरेली जैसे जिलों में भी गैस सिलिंडरों की कमी की वजह से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे घरेलू रसोई संचालन प्रभावित हो रहा है और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर ध्यान बढ़ा है।


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