उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले एक्टिव हुआ संघ

गोरखपुर प्रवास के बाद मोहन भागवत लखनऊ पहुंचे, जहां उन्होंने पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करीब 30–40 मिनट तक मुलाकात की। इसके बाद मेरठ रवाना होने से पहले गुरुवार को उनकी अलग-अलग बैठकें उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ भी हुईं।

योगी–भागवत मुलाकात
योगी–भागवत मुलाकात
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar19 Feb 2026 03:22 PM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश की 2027 विधानसभा चुनावी तैयारियों की आहट तेज होती दिख रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया उत्तर प्रदेश दौरे को इसी सियासी संदर्भ में अहम माना जा रहा है। गोरखपुर प्रवास के बाद मोहन भागवत लखनऊ पहुंचे, जहां उन्होंने पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करीब 30–40 मिनट तक मुलाकात की। इसके बाद मेरठ रवाना होने से पहले गुरुवार को उनकी अलग-अलग बैठकें उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ भी हुईं। इन लगातार बैठकों ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है। औपचारिक तौर पर इन मुलाकातों के एजेंडे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से इसे संगठनात्मक समन्वय, सामाजिक समीकरणों और आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

लखनऊ की बैठकों का टाइमिंग क्यों अहम?

उत्तर प्रदेश की सियासत में गुरुवार की सुबह भी संगठन-संदेश के नाम रही। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मोहन भागवत की मुलाकात लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में हुई, जिसे आरएसएस के शताब्दी वर्ष की पृष्ठभूमि से जोड़ा जा रहा है। लेकिन उत्तर प्रदेश में तेजी से बदलते सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों के बीच इस बैठक को सिर्फ औपचारिकता मानना मुश्किल है। वरिष्ठ जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी बढ़त भाषणों से नहीं, बल्कि बूथ पर अनुशासन, कार्यकर्ता नेटवर्क की धार और सामाजिक संतुलन की रणनीति से तय होती है और यही ग्राउंड प्लान इन मुलाकातों के जरिए और धार पकड़ता दिख रहा है। मुख्यमंत्री योगी से संवाद के बाद भागवत ने सरस्वती कुंज में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से अलग-अलग मुलाकात कर संगठनात्मक संकेत और साफ कर दिए। भले ही बातचीत का एजेंडा सार्वजनिक नहीं हुआ हो, लेकिन संगठन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि फोकस सरकार–संगठन समन्वय को मजबूत करने, सामाजिक समरसता पर एक सुर में संदेश देने, जातीय ध्रुवीकरण के संभावित नुकसान को सीमित करने और चुनावी तैयारी की टाइमलाइन फाइनल करने पर रहा। 

क्या हिंदुत्व की राजनीति पर बढ़ेगा फोकस?

पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग मुद्दों पर तेज बहस और बयानबाजी ने उत्तर प्रदेश की सियासत का पारा बढ़ा दिया है। ऐसे वक्त में आरएसएस की तरफ से जाति की सीमाओं से ऊपर उठकर सामाजिक एकता पर लगातार जोर देना सिर्फ वैचारिक संदेश नहीं, बल्कि चुनावी मौसम से पहले एक स्पष्ट दिशा संकेत भी माना जा रहा है। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि यूपी के बड़े चुनाव से पहले प्राथमिकता यही है कि समाज के भीतर कोई ऐसी दरार न गहरी हो जाए, जिसका सीधा असर राजनीतिक समीकरणों पर पड़े। इसी संदर्भ में मोहन भागवत के समरसता वाले संदेश और उत्तर प्रदेश में शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी बैठकों को एक ही सिलसिले की कड़ी समझा जा रहा हैUP News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बटुकों का किया सम्मान, हुई पुष्प-वर्षा

सूत्रों के मुताबिक, पाठक ने अपने सरकारी आवास पर बड़ी संख्या में बटुकों को आमंत्रित किया और पारंपरिक तरीके से तिलक लगाकर सम्मान किया। कार्यक्रम के दौरान माला पहनाने और पुष्पवर्षा का भी दृश्य सामने आया, जिसे सम्मान संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

बटुकों के साथ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक
बटुकों के साथ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar19 Feb 2026 11:02 AM
bookmark

UP News : शंकराचार्य शिष्य प्रकरण को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ सामने आया है। बटुकों की शिखा खींचे जाने की घटना पर दिए गए अपने बयान के बाद चर्चा में आए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने ने अब अपनी ओर से सामाजिक सौहार्द और परंपराओं के सम्मान का संदेश देने की पहल की है। सूत्रों के मुताबिक, पाठक ने अपने सरकारी आवास पर बड़ी संख्या में बटुकों को आमंत्रित किया और पारंपरिक तरीके से तिलक लगाकर सम्मान किया। कार्यक्रम के दौरान माला पहनाने और पुष्पवर्षा का भी दृश्य सामने आया, जिसे सम्मान संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

धार्मिक पहचान के सम्मान पर दिया था बयान

दरअसल, हाल ही में शंकराचार्य के एक शिष्य की शिखा खींचे जाने की घटना को लेकर यूपी में बहस तेज हुई थी। इस प्रकरण पर एक इंटरव्यू में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने घटना को निंदनीय बताते हुए कहा था कि किसी भी व्यक्ति की धार्मिक पहचान या परंपरा का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसे मामलों में समाज को संयम, संवेदनशीलता और आपसी सम्मान बनाए रखना चाहिए।

सियासी गलियारों में भी चर्चा

बटुकों के स्वागत-सम्मान के इस कार्यक्रम को उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों में भी अहम माना जा रहा है। कई लोग इसे सामाजिक संदेश के तौर पर देख रहे हैं तो कुछ इसे मौजूदा विवाद के बीच राजनीतिक तापमान कम करने वाली पहल भी मान रहे हैं। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान शांति और अनुशासन बना रहा और किसी तरह की अव्यवस्था की सूचना नहीं मिली। कार्यक्रम के अंत में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने यह दोहराया कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अपील की कि किसी भी मुद्दे पर तनाव के बजाय संवाद और सम्मान की परंपरा कायम रखी जाए, ताकि समाज में भाईचारे की भावना मजबूत बनी रहे। UP News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

उत्तर प्रदेश में मैच के बाद दिखा मधुमक्खियों का आतंक, अंपायर की मौत

उन्नाव जिले के शुक्लागंज स्तिथ राहुल सप्रू मैदान पर आयोजित KDMA लीग मैच के दौरान मधुमक्खियों के झुंड ने खिलाड़ियों और अंपायरों पर हमला कर दिया। इस हादसे में कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन (KCA) के वरिष्ठ अंपायर मानिक गुप्ता (65) की मौत हो गई, जबकि दूसरे अंपायर समेत कई खिलाड़ी और स्कोरर घायल हो गए।

केसीए के वरिष्ठ अंपायर मानिक गुप्ता की मौत
केसीए के वरिष्ठ अंपायर मानिक गुप्ता की मौत
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar19 Feb 2026 10:10 AM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के शुक्लागंज में बुधवार को खेला जा रहा अंडर-13 क्रिकेट मुकाबला अचानक मातम में बदल गया। उन्नाव जिले के शुक्लागंज स्तिथ राहुल सप्रू मैदान पर आयोजित KDMA लीग मैच के दौरान मधुमक्खियों के झुंड ने खिलाड़ियों और अंपायरों पर हमला कर दिया। इस हादसे में कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन (KCA) के वरिष्ठ अंपायर मानिक गुप्ता (65) की मौत हो गई, जबकि दूसरे अंपायर समेत कई खिलाड़ी और स्कोरर घायल हो गए। 

मैच के बाद अचानक आया झुंड

जानकारी के मुताबिक, अंडर-13 लीग के तहत वाईएमसीसी और पैरामाउंट के बीच मैच खेला गया था। मुकाबला समाप्त होने के बाद मानिक गुप्ता मैदान पर ही दूसरे अंपायर जगदीश का इंतजार कर रहे थे, जो पास के ग्राउंड में चल रहे मैच में अंपायरिंग कर रहे थे। इसी दौरान अचानक मधुमक्खियों का झुंड मैदान पर टूट पड़ा। हमले से बचने के लिए कई खिलाड़ी जमीन पर लेट गए, कुछ इधर-उधर दौड़कर सुरक्षित जगहों में छिपे। एक अंपायर किसी तरह बाथरूम में घुसकर बच निकले, लेकिन मानिक गुप्ता और जगदीश झुंड के बीच फंस गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जगदीश किसी तरह खुद को बचाने में सफल रहे, लेकिन मानिक गुप्ता पर मधुमक्खियों ने करीब दस मिनट तक लगातार हमला किया। उनके शरीर पर 50 से अधिक डंक लगे। उम्र अधिक होने और पहले से हृदय रोग की समस्या के चलते उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ती चली गई। मैदान में मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें निकालने की कोशिश की और प्राथमिक मदद देकर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। घटना के बाद मैदानकर्मियों और पूर्व रणजी खिलाड़ी राहुल सप्रू की मदद से उन्हें शुक्लागंज के निजी अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन आरोप है कि कई अस्पतालों ने भर्ती करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर किया गया। रास्ते में उनकी हालत और गंभीर हुई और अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बाद में कार्डियोलॉजी विभाग में भी ले जाया गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

तीन दशक से कर रहे थे अंपायरिंग 

इस हमले में अंपायर सुनील निषाद सहित कई खिलाड़ी और स्कोरर के घायल होने की सूचना है। राहत की बात यह है कि सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है। घटना के बाद पूरे मैदान परिसर में दहशत का माहौल रहा और आयोजकों के साथ स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मैदान परिसर में पहले से मधुमक्खियों का छत्ता मौजूद था। इसे हटाने या सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उत्तर प्रदेश में खेल मैदानों और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर यह घटना गंभीर चेतावनी मानी जा रही है। फीलखाना, कानपुर निवासी मानिक गुप्ता करीब 30 वर्षों से अंपायरिंग कर रहे थे। उन्हें क्रिकेट सर्किट में अनुभवी और अनुशासित अंपायर के तौर पर जाना जाता था। UP News

संबंधित खबरें