उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले एक्टिव हुआ संघ
गोरखपुर प्रवास के बाद मोहन भागवत लखनऊ पहुंचे, जहां उन्होंने पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करीब 30–40 मिनट तक मुलाकात की। इसके बाद मेरठ रवाना होने से पहले गुरुवार को उनकी अलग-अलग बैठकें उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ भी हुईं।

UP News : उत्तर प्रदेश की 2027 विधानसभा चुनावी तैयारियों की आहट तेज होती दिख रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया उत्तर प्रदेश दौरे को इसी सियासी संदर्भ में अहम माना जा रहा है। गोरखपुर प्रवास के बाद मोहन भागवत लखनऊ पहुंचे, जहां उन्होंने पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करीब 30–40 मिनट तक मुलाकात की। इसके बाद मेरठ रवाना होने से पहले गुरुवार को उनकी अलग-अलग बैठकें उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ भी हुईं। इन लगातार बैठकों ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है। औपचारिक तौर पर इन मुलाकातों के एजेंडे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से इसे संगठनात्मक समन्वय, सामाजिक समीकरणों और आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
लखनऊ की बैठकों का टाइमिंग क्यों अहम?
उत्तर प्रदेश की सियासत में गुरुवार की सुबह भी संगठन-संदेश के नाम रही। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मोहन भागवत की मुलाकात लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में हुई, जिसे आरएसएस के शताब्दी वर्ष की पृष्ठभूमि से जोड़ा जा रहा है। लेकिन उत्तर प्रदेश में तेजी से बदलते सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों के बीच इस बैठक को सिर्फ औपचारिकता मानना मुश्किल है। वरिष्ठ जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी बढ़त भाषणों से नहीं, बल्कि बूथ पर अनुशासन, कार्यकर्ता नेटवर्क की धार और सामाजिक संतुलन की रणनीति से तय होती है और यही ग्राउंड प्लान इन मुलाकातों के जरिए और धार पकड़ता दिख रहा है। मुख्यमंत्री योगी से संवाद के बाद भागवत ने सरस्वती कुंज में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से अलग-अलग मुलाकात कर संगठनात्मक संकेत और साफ कर दिए। भले ही बातचीत का एजेंडा सार्वजनिक नहीं हुआ हो, लेकिन संगठन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि फोकस सरकार–संगठन समन्वय को मजबूत करने, सामाजिक समरसता पर एक सुर में संदेश देने, जातीय ध्रुवीकरण के संभावित नुकसान को सीमित करने और चुनावी तैयारी की टाइमलाइन फाइनल करने पर रहा।
क्या हिंदुत्व की राजनीति पर बढ़ेगा फोकस?
पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग मुद्दों पर तेज बहस और बयानबाजी ने उत्तर प्रदेश की सियासत का पारा बढ़ा दिया है। ऐसे वक्त में आरएसएस की तरफ से जाति की सीमाओं से ऊपर उठकर सामाजिक एकता पर लगातार जोर देना सिर्फ वैचारिक संदेश नहीं, बल्कि चुनावी मौसम से पहले एक स्पष्ट दिशा संकेत भी माना जा रहा है। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि यूपी के बड़े चुनाव से पहले प्राथमिकता यही है कि समाज के भीतर कोई ऐसी दरार न गहरी हो जाए, जिसका सीधा असर राजनीतिक समीकरणों पर पड़े। इसी संदर्भ में मोहन भागवत के समरसता वाले संदेश और उत्तर प्रदेश में शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी बैठकों को एक ही सिलसिले की कड़ी समझा जा रहा है। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश की 2027 विधानसभा चुनावी तैयारियों की आहट तेज होती दिख रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया उत्तर प्रदेश दौरे को इसी सियासी संदर्भ में अहम माना जा रहा है। गोरखपुर प्रवास के बाद मोहन भागवत लखनऊ पहुंचे, जहां उन्होंने पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करीब 30–40 मिनट तक मुलाकात की। इसके बाद मेरठ रवाना होने से पहले गुरुवार को उनकी अलग-अलग बैठकें उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ भी हुईं। इन लगातार बैठकों ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है। औपचारिक तौर पर इन मुलाकातों के एजेंडे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से इसे संगठनात्मक समन्वय, सामाजिक समीकरणों और आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
लखनऊ की बैठकों का टाइमिंग क्यों अहम?
उत्तर प्रदेश की सियासत में गुरुवार की सुबह भी संगठन-संदेश के नाम रही। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मोहन भागवत की मुलाकात लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में हुई, जिसे आरएसएस के शताब्दी वर्ष की पृष्ठभूमि से जोड़ा जा रहा है। लेकिन उत्तर प्रदेश में तेजी से बदलते सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों के बीच इस बैठक को सिर्फ औपचारिकता मानना मुश्किल है। वरिष्ठ जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी बढ़त भाषणों से नहीं, बल्कि बूथ पर अनुशासन, कार्यकर्ता नेटवर्क की धार और सामाजिक संतुलन की रणनीति से तय होती है और यही ग्राउंड प्लान इन मुलाकातों के जरिए और धार पकड़ता दिख रहा है। मुख्यमंत्री योगी से संवाद के बाद भागवत ने सरस्वती कुंज में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से अलग-अलग मुलाकात कर संगठनात्मक संकेत और साफ कर दिए। भले ही बातचीत का एजेंडा सार्वजनिक नहीं हुआ हो, लेकिन संगठन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि फोकस सरकार–संगठन समन्वय को मजबूत करने, सामाजिक समरसता पर एक सुर में संदेश देने, जातीय ध्रुवीकरण के संभावित नुकसान को सीमित करने और चुनावी तैयारी की टाइमलाइन फाइनल करने पर रहा।
क्या हिंदुत्व की राजनीति पर बढ़ेगा फोकस?
पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग मुद्दों पर तेज बहस और बयानबाजी ने उत्तर प्रदेश की सियासत का पारा बढ़ा दिया है। ऐसे वक्त में आरएसएस की तरफ से जाति की सीमाओं से ऊपर उठकर सामाजिक एकता पर लगातार जोर देना सिर्फ वैचारिक संदेश नहीं, बल्कि चुनावी मौसम से पहले एक स्पष्ट दिशा संकेत भी माना जा रहा है। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि यूपी के बड़े चुनाव से पहले प्राथमिकता यही है कि समाज के भीतर कोई ऐसी दरार न गहरी हो जाए, जिसका सीधा असर राजनीतिक समीकरणों पर पड़े। इसी संदर्भ में मोहन भागवत के समरसता वाले संदेश और उत्तर प्रदेश में शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी बैठकों को एक ही सिलसिले की कड़ी समझा जा रहा है। UP News












