मजरूह सुल्तानपुरी: उर्दू का कारवाँ, जिसकी गूंज आज भी ज़िंदा है

उनकी रचनाओं में दौर की धड़कन, आम आदमी की पीड़ा और उम्मीद की रोशनी एक साथ दिखाई देती है यही वजह है कि उन्हें उर्दू साहित्य की सबसे असरदार आवाज़ों में गिना जाता है।

बार-बार पढ़े जाने वाले मजरूह सुल्तानपुरी के चुनिंदा शेर
बार-बार पढ़े जाने वाले मजरूह सुल्तानपुरी के चुनिंदा शेर
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 03:37 PM
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Majrooh Sultanpuri : मजरूह सुल्तानपुरी 20वीं सदी के उन चुनिंदा उर्दू शायरों में शुमार रहे, जिनकी शायरी ने साहित्य और समाज दोनों को नई संवेदना दी। 1 अक्टूबर 1919 को जन्मे और 24 मई 2000 को दुनिया से रुख़्सत हुए मजरूह न सिर्फ़ प्रगतिशील आंदोलन के मजबूत स्वर थे, बल्कि हिंदी सिनेमा में बतौर गीतकार भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी रचनाओं में दौर की धड़कन, आम आदमी की पीड़ा और उम्मीद की रोशनी एक साथ दिखाई देती है यही वजह है कि उन्हें उर्दू साहित्य की सबसे असरदार आवाज़ों में गिना जाता है।

‘कारवाँ बनता गया’ वाली पंक्तियाँ बनीं चर्चा का केंद्र

मजरूह सुल्तानपुरी के साहित्यिक योगदान को केंद्र में रखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के सहयोग से सुल्तानपुर के गनपत सहाय कॉलेज में “ग़ज़ल के आइने में मजरूह सुल्तानपुरी” विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया था । देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों से आए शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने इस आयोजन में भाग लिया और मजरूह के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मजरूह ने उर्दू शायरी को नई ऊँचाई दी और उसे जन-भावनाओं की भाषा बनाया। समिनार की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय की उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा रिज़वी ने की, जबकि आयोजन का संयोजन गनपत सहाय कॉलेज की उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. जेबा महमूद ने किया था । इस अवसर पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. अली अहमद फातिमी ने कहा कि मजरूह का जन्म सुल्तानपुर में हुआ था और उनकी शायरी में इस मिट्टी की झलक साफ दिखाई देती है। उन्होंने मजरूह को तरक्कीपसंद शायरी की ऐसी आवाज़ बताया, जिसने उर्दू को नया मुकाम दिलाने में अहम भूमिका निभाई। मंच से उनकी चर्चित पंक्तियाँ “मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया”का उल्लेख भी हुआ, जिसे मजरूह की लोकप्रियता और वैचारिक असर का प्रतीक माना गया।

मजरूह सुल्तानपुरी की टॉप 5 शायरी 

1 - मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर,       

लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया। 

2 - कोई हम-दम न रहा कोई सहारा न रहा,

हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा। 

3 - बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए,

हम एक बार तिरी आरज़ू भी खो देते। 

4 - अब सोचते हैं लाएँगे तुझ सा कहाँ से हम,

उठने को उठ तो आए तिरे आस्ताँ से हम।

5 - तिरे सिवा भी कहीं थी पनाह भूल गए,

निकल के हम तिरी महफ़िल से राह भूल गए। 


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उत्तर प्रदेश में कोहरे की तबाही : सड़क हादसों में सात लोगों की मौत, दर्जनों घायल

इन हादसों में एक मासूम बच्चे समेत कम से कम सात लोगों की जान चली गई, जबकि 40 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत चिंताजनक बनी हुई है।

accident (5)
सड़क हादसे
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar17 Jan 2026 03:30 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में घने कोहरे ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। शनिवार को राज्य के एक दर्जन से अधिक जिलों में दृश्यता लगभग शून्य रहने के कारण कई भीषण सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन हादसों में एक मासूम बच्चे समेत कम से कम सात लोगों की जान चली गई, जबकि 40 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत चिंताजनक बनी हुई है। कोहरे के कारण एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय और राज्यमार्गों पर वाहन चालकों को सामने का रास्ता दिखाई नहीं दिया, जिससे तेज रफ्तार और लापरवाही ने हादसों को और भयावह बना दिया। 

विभिन्न जिलों में हुए हादसे

सुल्तानपुर : सुल्तानपुर जिले में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर मजदूरों से भरी एक पिकअप को पीछे से अज्ञात ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सात अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। ट्रक चालक दुर्घटना के बाद वाहन लेकर फरार हो गया।

शाहजहांपुर : शाहजहांपुर में घने कोहरे के बीच चार वाहन आपस में टकरा गए। इस हादसे में दो टैंकर चालकों की जान चली गई। दुर्घटना के बाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया, जिसे पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद खुलवाया।

मेरठ : मेरठ में कोहरे की वजह से कार अनियंत्रित होकर नाले में गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में 18 महीने के मासूम की मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

प्रयागराज : प्रयागराज में तेज रफ्तार कार की टक्कर से बाइक सवार युवक की जान चली गई। आरोपी चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।

बुलंदशहर : बुलंदशहर में भी कार की टक्कर से साइकिल सवार युवक की मौत हो गई और कार खाई में पलट गई।

प्रतापगढ़ : प्रतापगढ़ में माघ मेले के लिए प्रयागराज जा रहे श्रद्धालुओं की पिकअप को बस ने टक्कर मार दी। इस हादसे में 23 श्रद्धालु घायल हो गए। सभी घायलों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।

अमरोहा : अमरोहा में नेशनल हाईवे पर कोहरे के कारण अलग-अलग स्थानों पर 10 से अधिक वाहन आपस में भिड़ गए। इन घटनाओं में कई लोग घायल हुए और हाईवे पर घंटों तक यातायात बाधित रहा।

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि घने कोहरे के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, वाहन धीमी गति से चलाएं और फॉग लाइट व इंडिकेटर का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें। पुलिस और आपदा राहत टीमें लगातार अलर्ट मोड पर तैनात हैं।

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5 दिन की परिक्रमा के बाद बिगड़ी तबीयत, कुत्ते को मिली फ्रूट थेरेपी

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस दौरान उसने न कुछ खाया, न पानी पिया। लंबे समय तक भूखा-प्यासा रहने के बाद जब उसकी हालत बिगड़ने लगी, तो उसे पशु चिकित्सकों की निगरानी में लेकर इलाज शुरू कराया गया।

भूख-प्यास से कमजोर कुत्ते की हालत बिगड़ी
भूख-प्यास से कमजोर कुत्ते की हालत बिगड़ी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 11:36 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के बिजनौर में इन दिनों मंदिर परिसर से जुड़ा एक घटनाक्रम सुर्खियों में है, जिसने आस्था के साथ-साथ हैरानी भी बढ़ा दी है। नंदपुर गांव के प्राचीन मंदिर में एक आवारा कुत्ता कथित तौर पर लगातार पांच दिन (करीब 120 घंटे) तक हनुमान जी और मां दुर्गा की प्रतिमाओं के चारों ओर परिक्रमा करता दिखा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस दौरान उसने न कुछ खाया, न पानी पिया। लंबे समय तक भूखा-प्यासा रहने के बाद जब उसकी हालत बिगड़ने लगी, तो उसे पशु चिकित्सकों की निगरानी में लेकर इलाज शुरू कराया गया।

नंदपुर मंदिर में कुत्ता बना आकर्षण का केंद्र 

ग्रामीणों के मुताबिक, कुत्ता बीते कई दिनों से मंदिर परिसर में ही मौजूद था और लगातार मूर्तियों की परिक्रमा करता दिखाई दिया। थकावट और कमजोरी बढ़ने पर जब वह निढाल होकर गिर पड़ा, तो मंदिर समिति और ग्रामीणों ने उसे गद्दे पर लिटाया, रजाई ओढ़ाई और देखभाल शुरू की। धीरे-धीरे यह बात पूरे इलाके में फैल गई। नतीजा यह हुआ कि उत्तर प्रदेश के आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे और वहां मेले जैसा माहौल बन गया।मंदिर में उमड़ी भीड़ अब भगवान के साथ-साथ कुत्ते को भी विशेष संकेत मानकर देख रही है। कई श्रद्धालु उसके पास प्रसाद, रुपये-पैसे रख रहे हैं और मन्नतें मांगने की बातें भी सामने आ रही हैं। मंदिर के बाहर प्रसाद और खिलौनों की दुकानें तक लग गई हैं, जिससे माहौल और ज्यादा भीड़भाड़ वाला हो गया।

परिक्रमा के बाद कुत्ते की हालत नाजुक

लगातार भूख-प्यास के चलते कुत्ते की हालत अब नाजुक बताई जा रही है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में स्थानीय लोगों के मुताबिक, उसने दूध और रोटी तक लेने से इनकार कर दिया, जिसके बाद आनन-फानन में पशु चिकित्सकों को बुलाया गया। पशु चिकित्सक डॉ. अश्वनी चित्रांश के अनुसार, कई दिनों से कुछ न खाने की वजह से उसके शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी हो गई है। इसी कमी को पूरा करने के लिए उसे ग्लूकोज और मल्टी-विटामिन की ड्रिप के साथ ‘फ्रूट थेरेपी’ दी जा रही है, ताकि शरीर में ऊर्जा लौटे और पोषण संतुलन सुधर सके। UP News

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