बीएमसी की जंग में दांव पर महाराष्ट्र का भविष्य

बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनाव इस बार सिर्फ एक स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह महाराष्ट्र की आने वाली राजनीति की दिशा और दशा तय करने वाला मुकाबला बन गया है।

Maharashtra Brihanmumbai Municipal Corporation elections
महाराष्ट्र बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar14 Jan 2026 12:06 PM
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बता दें कि 227 वार्डों वाली देश की सबसे अमीर नगरपालिका, जिसका बजट 74 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है, सत्ता की राजनीति का केंद्र बन चुका है। इन चुनावों ने यह भी उजागर कर दिया है कि राज्य की राजनीति में नैतिकता, गठबंधन और वैचारिक स्थिरता लगभग गायब हो चुकी है। हर दल “सब कुछ जायज है” की तर्ज पर मैदान में है। ऐसे में बीएमसी चुनाव महाराष्ट्र के भविष्य से जुड़े पांच बड़े सवालों का जवाब देने वाले हैं।

मराठी अस्मिता में कितना बचा है दम?

बता दें कि मराठी अस्मिता इस चुनाव का सबसे बड़ा और भावनात्मक मुद्दा बनकर उभरी है। उद्धव ठाकरे (शिवसेना यूबीटी) और राज ठाकरे (एमएनएस) करीब 20 साल बाद एक मंच पर आए हैं और “मराठी माणूस” की रक्षा को मुंबई की “आखिरी जंग” बताया जा रहा है। ठाकरे बंधुओं का आरोप है कि भाजपा मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश कर रही है और हिंदी थोपकर गैर-मराठी हितों को बढ़ावा दे रही है। वहीं, महायुति ने भी अपने मेनिफेस्टो में मराठी माणूस, सस्ते घर और संस्कृति संरक्षण का वादा किया है।

हालांकि बदलती वोटर प्रोफाइल इस मुद्दे को कमजोर कर सकती है। बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जेन-जेड वोटर्स भाषा से ज्यादा पॉटहोल, कचरा प्रबंधन, वायु गुणवत्ता और सिविक सुविधाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। मराठी वोटर जहां 30–35% हैं, वहीं उत्तर भारतीय, गुजराती और अन्य समुदाय मिलकर बड़ी आबादी बनाते हैं। राज ठाकरे के पुराने आक्रामक बयानों से गैर-मराठी वोटर दूर भी हो सकते हैं।

क्या महायुति सच में एकजुट है?

बता दें कि भाजपा–शिंदे शिवसेना–अजित पवार एनसीपी की महायुति राज्य की सत्ता में है, लेकिन बीएमसी चुनावों में उसकी एकजुटता सवालों में बनी हुई है। भाजपा 137, शिंदे शिवसेना 90 सीटों पर लड़ रही है, जबकि अजित पवार की एनसीपी ने 94 सीटों पर अलग उम्मीदवार उतार दिए हैं। बता दें कि कई वार्डों में “फ्रेंडली फाइट” वोट कटवा सकती है। ठाणे जैसे निगमों में भी यही हाल है। अगर महायुति 150 से ज्यादा सीटें जीतती है तो 2029 तक गठबंधन मजबूत रहेगा। लेकिन अगर बीजेपी फिर से बाकी सहयोगियों से आगे निकलती है तो राज्य में एकल दल वर्चस्व की राजनीति तेज हो सकती है।

क्या महा विकास अघाड़ी (MVA) का अंत तय है?

बता दें कि बीएमसी चुनावों में MVA का ढांचा पूरी तरह बिखरा हुआ नजर आ रहा है। जिसमें कांग्रेस 143 सीटों पर VBA के साथ शिवसेना (UBT) – MNS अलग गठबंधन और NCP (SP) कुछ जगह अजित पवार गुट के साथ है। 2019 में बनी MVA ने 2024 लोकसभा में अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद अब बीएमसी में बिखराव इसकी राजनीतिक उम्र पर सवाल खड़े कर रहा है। अगर कांग्रेस–VBA गठबंधन अच्छा प्रदर्शन करता है तो सेक्युलर–दलित राजनीति को नई दिशा मिल सकती है। वरना MVA का यह चुनाव आखिरी साबित हो सकता है।

ठाकरे बंधुओं का मिलन, रणनीति या स्थायी गठबंधन?

बता दें कि उद्धव और राज ठाकरे का मिलन परिस्थितिजन्य ज्यादा लगता है। 2022 में शिवसेना विभाजन, 2024 की चुनावी हार और मराठी वोटरों की घटती संख्या ने दोनों को साथ आने पर मजबूर किया। जहां उद्धव खुद को संयमित और उदार नेता के रूप में पेश करते हैं, वहीं राज ठाकरे के बयान कई बार आक्रामक और विवादित रहे हैं। यह वैचारिक टकराव भविष्य में फिर उभर सकता है। बता दें कि यह गठबंधन जीत पर टिका है, हार या सत्ता-साझेदारी के सवाल पर दरार पड़ सकती है।

‘बाहरी’ बनाम मुंबई: कितना जोखिम भरा मुद्दा?

बता दें कि अडानी–अंबानी, गुजराती, तमिल और उत्तर भारतीयों को “बाहरी” बताकर ठाकरे गुट ने चुनावी नैरेटिव गढ़ा है। धारावी पुनर्विकास, एयरपोर्ट और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को अडानी से जोड़कर हमला किया जा रहा है। राज ठाकरे के पुराने नारे “हटाओ लुंगी, बजाओ पुंगी” और अन्नामलाई पर टिप्पणियां इस मुद्दे को और विवादित बनाती हैं। महायुति जहां सभी समुदायों को साथ लेकर चलने और मराठी मेयर का वादा कर रही है, वहीं ठाकरे गठबंधन का यह रुख बहुभाषी मुंबई में उल्टा भी पड़ सकता है।

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महाराष्ट्र चुनाव से पहले नितेश राणे का विवादित बयान

महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव से पहले सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। इसी बीच राज्य के मंत्री नितेश राणे ने एक बार फिर विवादित और भड़काऊ बयान दिया है। सभी 29 महानगरपालिकाओं में वही मेयर चुने जाएंगे जो ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाते होंगे और हर जगह ‘भगवामय’ माहौल दिखाई देगा।

Nitesh Ranes controversial statement
नितेश राणे का विवादित बयान (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar13 Jan 2026 08:05 PM
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नितेश राणे ने मकर संक्रांति के अवसर का जिक्र करते हुए गुजराती और मारवाड़ी समाज से मुंबई और ठाणे में ही रहकर मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने गांव चले जाते हैं, लेकिन इस बार हिंदू समाज के लिए मुंबई और ठाणे में रहकर वोटिंग करना बेहद जरूरी है। सनातन और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए यहीं रहकर मतदान करें।

‘वोट जिहाद’ के बयान से फिर विवाद

मंत्री राणे ने आगे कहा कि अगर हिंदू समाज को सुरक्षित भविष्य चाहिए तो इस बार बड़े पैमाने पर मतदान करना होगा। उन्होंने कहा कि जो सामने से वोट जिहाद हो रहा है, मस्जिद और अजान के नाम पर डराया जा रहा है, उसका जवाब हिंदू समाज को मतदान के जरिए देना होगा। वोट जिहाद को जवाब सनातन धर्म के माध्यम से मिलेगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

‘दो परिवारों ने मुंबई को लूटा’–मिलिंद देवड़ा

वहीं, शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा ने मुंबई महानगरपालिका को लेकर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में दो परिवारों ने मुंबई म्युनिसिपैलिटी को प्राइवेट एटीएम की तरह इस्तेमाल किया है। मिलिंद देवड़ा ने कहा कि “मुंबई एशिया की सबसे बड़ी म्युनिसिपैलिटी है, लेकिन इसे प्राइवेट ठेकेदारों और कुछ परिवारों के फायदे के लिए चलाया गया। हमारा एटीएम ‘एनी टाइम मनी’ नहीं बल्कि ‘Accountable to Mumbaikars’ होगा।

‘महायुति की होगी शानदार जीत’

उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में महायुति की शानदार जीत होगी। लोग बदलाव चाहते हैं, विकास और नागरिक सुविधाओं पर काम चाहते हैं। राज्य और केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में मुंबई और मुंबईकरों के लिए जिस तरह काम किया है, उसे जनता ने देखा है।

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बीएमसी चुनाव 2026 से पहले मुंबई में हिंसा, आधी रात पैसे बांटने को लेकर बवाल

ठाकरे गुट के पदाधिकारियों का दावा है कि शिंदे गुट के कार्यकर्ता मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसे बांट रहे थे। जब उनके कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया तो पहले बहस हुई, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई।

BMC Elections 2026
राजनीतिक विवाद वर्ली विधानसभा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar13 Jan 2026 03:02 PM
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महाराष्ट्र में आगामी बीएमसी चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनाव से पहले ही मुंबई और नवी मुंबई में हिंसक घटनाएं सामने आने लगी हैं। पैसे बांटने के आरोपों को लेकर अलग–अलग राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पों ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात को देखते हुए पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर है।

वार्ड 124 में आधी रात हिंसा, दो कार्यकर्ता गंभीर घायल

मुंबई के वार्ड नंबर 124 में रविवार देर रात उस वक्त तनाव फैल गया, जब शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। झड़प इतनी बढ़ गई कि मामला मारपीट तक पहुंच गया। इस हिंसा में ठाकरे गुट के दो कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल राजावाड़ी अस्पताल में भर्ती कराया गया। ठाकरे गुट का आरोप है कि उनकी उम्मीदवार सकीना शेख के समर्थकों पर शिंदे गुट के उम्मीदवार हारून खान के कार्यकर्ताओं ने हमला किया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। पार्कसाइट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर ली गई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पैसे बांटने के आरोपों से भड़की झड़प

ठाकरे गुट के पदाधिकारियों का दावा है कि शिंदे गुट के कार्यकर्ता मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसे बांट रहे थे। जब उनके कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया तो पहले बहस हुई, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि शिंदे गुट के कार्यकर्ताओं ने ठाकरे गुट के लोगों पर हमला किया, जिससे वे घायल हो गए।

नवी मुंबई में भाजपा और शिंदे गुट के बीच मारपीट

चुनावी हिंसा सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं रही। नवी मुंबई के कोपरखैरने इलाके में भी सोमवार को भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं के बीच जोरदार झड़प हुई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बता दें कि वीडियो में देखा जा सकता है कि भाजपा कार्यकर्ता शिंदे गुट के एक कार्यकर्ता की पिटाई कर रहे हैं। आरोप है कि वह व्यक्ति मतदाताओं को पैसे बांटते हुए पकड़ा गया था। गुस्साए भाजपा कार्यकर्ताओं ने उसका गला दबाने के साथ-साथ मोबाइल फोन भी छीन लिया।

वर्ली में आदित्य ठाकरे के क्षेत्र से भी विवाद

बता दें कि राजनीतिक विवाद वर्ली विधानसभा क्षेत्र तक भी पहुंच गया है, जो कि आदित्य ठाकरे का इलाका माना जाता है। वार्ड नंबर 193 में ठाकरे गुट की उम्मीदवार हेमांगी वार्लिकर के पति हरीश वार्लिकर पर भी पैसे बांटने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिंदे गुट और निर्दलीय उम्मीदवारों का दावा है कि महिलाओं को मीटिंग के बहाने बुलाकर उन्हें पैसे दिए गए। इस मामले को और ज्यादा तूल तब मिला जब ठाकरे गुट के पूर्व पदाधिकारी सूर्यकांत कोली ने इससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। कोली इस बार टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं।

चुनावी पारदर्शिता पर उठे सवाल

बता दें कि मुंबई और नवी मुंबई में सामने आई इन घटनाओं ने BMC चुनाव 2026 की पारदर्शिता और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रहे पैसे बांटने और हिंसा के आरोपों के बीच प्रशासन के लिए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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