लगातार घाटे में क्यों चल रही शेयर मार्केट? मिल गई 5 बड़ी वजह

Stock Market: निवेशकों को शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन की भारी गिरावट ने चौंका दिया है। सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूट गया जबकि निफ्टी 25,900 के नीचे फिसल गया है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर ग्लोबल संकेतों ने बाजार की चाल बिगाड़ दी है।

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शेयर बाजार में भारी गिरावट
locationभारत
userअसमीना
calendar08 Jan 2026 02:47 PM
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भारतीय शेयर बाजार में 8 जनवरी को निवेशकों को उस वक्त जोरदार झटका लगा जब लगातार चौथे कारोबारी दिन बाजार लाल निशान में बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 700 अंकों से ज्यादा टूट गया जबकि निफ्टी फिसलकर 25,900 के नीचे आ गया। विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली, कमजोर ग्लोबल संकेत और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने बाजार के सेंटीमेंट को पूरी तरह दबाव में डाल दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी गिरावट देखने को मिली जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।

सेंसेक्स और निफ्टी का ताजा हाल

दोपहर 12:10 बजे के आसपास बीएसई सेंसेक्स 713.82 अंक यानी 0.84 प्रतिशत की गिरावट के साथ 84,247.32 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 251.10 अंक या 0.96 प्रतिशत टूटकर 25,889.65 पर आ गया। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे जिनमें सबसे ज्यादा गिरावट मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में दर्ज की गई।

1. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

शेयर बाजार पर दबाव का सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली रही। बुधवार को विदेशी निवेशकों ने करीब 1,527.71 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। जनवरी महीने में अब तक एफआईआई लगभग 4,650 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। एक दिन को छोड़कर उन्होंने लगभग हर कारोबारी दिन बाजार से पैसा निकाला है जिससे बाजार की मजबूती कमजोर होती चली गई।

2. कमजोर ग्लोबल संकेत

वैश्विक बाजारों से भी भारतीय शेयर बाजार को कोई सहारा नहीं मिला। एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली, जहां जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट में रहे। अमेरिकी बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में कमजोरी के साथ बंद हुए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल ट्रेड से जुड़ी अनिश्चितताओं ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है।

3. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता

भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर बनी असमंजस की स्थिति ने भी बाजार पर नकारात्मक असर डाला। बीते तीन दिनों में निफ्टी करीब 0.7 प्रतिशत और सेंसेक्स लगभग 0.9 प्रतिशत टूट चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। अमेरिका पहले ही कई भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा चुका है जिससे दोनों देशों के व्यापार संबंधों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

4. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई हल्की तेजी ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी। ब्रेंट क्रूड का भाव 0.4 प्रतिशत बढ़कर करीब 60.20 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है ऐसे में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर निवेशकों की आशंकाएं बढ़ जाती हैं।

5. सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी

गुरुवार को सेंसेक्स डेरिवेटिव्स की वीकली एक्सपायरी होने के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव और वॉल्यूम दोनों बढ़ गए। एक्सपायरी के दिन ट्रेडर्स अक्सर अपनी पोजिशन अनवाइंड या रोलओवर करते हैं, जिससे बाजार में अचानक तेज गिरावट या तेजी देखने को मिलती है। इसी वजह से छोटी खबरों का भी बाजार पर बड़ा असर पड़ा।

टेक्निकल एक्सपर्ट्स की राय

HDFC सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च हेड देवर्ष वकील के अनुसार, फिलहाल बाजार में कमजोरी जरूर दिख रही है लेकिन लंबी अवधि का ट्रेंड अब भी पॉजिटिव बना हुआ है। डेली चार्ट पर लगातार ऊंचे हाई और ऊंचे लो बन रहे हैं जो मजबूती का संकेत देते हैं। उनके मुताबिक, निफ्टी के लिए 26,373 का स्तर बड़ी रुकावट बन सकता है जबकि 26,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट के रूप में काम करेगा।


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रिकॉर्ड तोड़ने के बाद क्रैश हुई चांदी, पलट गया बाजार का पूरा खेल

Silver Price Crash: चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड हाई के बाद जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। सिर्फ दो दिनों में चांदी करीब 19 हजार रुपये सस्ती हो गई है। गुरुवार को ही चांदी के दाम 10 हजार रुपये तक टूट गए हैं। सोने की कीमतों में भी तेज गिरावट देखी जा रही है।

Silver Price Crash
चांदी की कीमत में गिरावट
locationभारत
userअसमीना
calendar08 Jan 2026 02:16 PM
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सोने-चांदी में निवेश करने वालों के लिए बीते दो दिन बेहद चौंकाने वाले रहे हैं। जिस चांदी ने हाल ही में रिकॉर्ड हाई बनाकर बाजार में हलचल मचा दी थी वही अब भारी गिरावट का सामना कर रही है। सिर्फ दो दिनों के भीतर चांदी की कीमतों में करीब 19 हजार रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं सोने की कीमतें भी दबाव में आ गई हैं और लगातार कमजोर होती नजर आ रही हैं। इस अचानक आई गिरावट ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर बाजार में ऐसा क्या बदल गया।

रिकॉर्ड हाई के बाद चांदी में तेज गिरावट

दो दिन पहले चांदी की कीमतें ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई थीं। 6 अक्टूबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी ने 2,59,322 रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड बनाया था। लेकिन इसके बाद बाजार का रुख तेजी से बदला। अब तक चांदी की कीमतों में 18,700 रुपये से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है, जिसे बड़ी गिरावट माना जा रहा है।

गुरुवार को 10 हजार रुपये तक टूटी चांदी

गुरुवार के कारोबारी सत्र में चांदी के दामों में जबरदस्त दबाव देखने को मिला। MCX पर चांदी की कीमतें कारोबार के दौरान 10,000 रुपये गिरकर 2,40,605 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं, जो दिन का निचला स्तर रहा। चांदी की ओपनिंग 2,51,041 रुपये पर हुई थी, जबकि बुधवार को यह 2,50,605 रुपये पर बंद हुई थी। दोपहर 11:50 बजे तक चांदी 8,923 रुपये की गिरावट के साथ 2,41,682 रुपये पर कारोबार कर रही थी।

सोने की कीमत में भी बड़ी गिरावट

चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी तेज गिरावट देखने को मिली। MCX पर सोना गुरुवार को 1,500 रुपये से ज्यादा टूट गया। कारोबारी सत्र के दौरान सोना 1,36,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया, जबकि एक दिन पहले यह 1,38,009 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। यानी सोने की कीमत में करीब 1,509 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को सोने की ओपनिंग 1,37,996 रुपये पर हुई थी।

कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह क्या है?

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे बड़ा कारण डॉलर इंडेक्स में मजबूती है। जब डॉलर मजबूत होता है तो कीमती धातुओं पर दबाव बनता है। इसके अलावा, हालिया तेजी के बाद निवेशकों द्वारा की जा रही मुनाफावसूली भी कीमतों को नीचे खींच रही है।

जानकारों की राय क्या कहती है?

वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर से जुड़े जानकार अनुज गुप्ता के अनुसार, सोने और चांदी में हाल की गिरावट पूरी तरह से मुनाफावसूली और डॉलर इंडेक्स में आई तेजी का नतीजा है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ भू-राजनीतिक प्रभाव अब कमजोर पड़ रहे हैं जिससे कीमती धातुओं को सपोर्ट मिलना कम हुआ है। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में भी सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

मौजूदा हालात में विशेषज्ञ जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचने की सलाह दे रहे हैं। अगर आप लॉन्ग-टर्म निवेशक हैं तो गिरावट के दौरान रणनीति बनाकर निवेश किया जा सकता है। वहीं शॉर्ट-टर्म निवेशकों के लिए बाजार फिलहाल जोखिम भरा बना हुआ है।

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Meesho ने डुबोए करोड़ों, हड़बड़ी में निवेशक

Meesho IPO: Meesho के शेयर लगातार दूसरे दिन लोअर सर्किट पर बंद हुए जिससे निवेशकों के 40,000 करोड़ से अधिक डूब गए। जानिए कैसे IPO से लेकर रिकॉर्ड हाई तक का सफर बदल गया और अब निवेशकों को क्या कदम उठाने चाहिए।

Meesho IPO
मीशो ने डुबोए करोड़ों रुपए
locationभारत
userअसमीना
calendar08 Jan 2026 11:19 AM
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ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Meesho के शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन लोअर सर्किट पर बंद हुए जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये की चमक धूमिल हो गई। सिर्फ एक महीने पहले लिस्ट हुई इस कंपनी के शेयर अब 35% से ज्यादा गिर चुके हैं और निवेशकों के करीब ₹40,000 करोड़ डूब गए हैं। आइए जानते हैं कि आखिर दो वजहें कौन-सी हैं जिनकी वजह से Meesho के शेयरों में इतना बड़ा दबाव आया।

Meesho के शेयर क्यों हुए लोअर सर्किट पर?

Meesho के शेयर में लगातार गिरावट की पहली वजह थी ₹2,000 करोड़ से ज्यादा के शेयरों का लॉक-इन खत्म होना। नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च के अनुसार, Meesho के लगभग 10.99 करोड़ शेयर यानी 2% आउटस्टैंडिंग इक्विटी का 1 महीने का लॉक-इन पीरियड समाप्त हो गया। लॉक-इन पीरियड खत्म होने का मतलब यह नहीं कि शेयरहोल्डर्स तुरंत बेचेंगे लेकिन इसका मतलब यह है कि अब वे मुनाफा निकाल सकते हैं। जैसे ही ऐसा होता है मार्केट में शेयर की सप्लाई बढ़ती है और कीमतों पर दबाव आता है। 6 जनवरी को इन शेयरों की कुल वैल्यू लगभग ₹2,003 करोड़ थी।

सीनियर मैनेजर का इस्तीफा

Meesho की जनरल मैनेजर (बिजनेस) मेघा अग्रवाल ने हाल ही में इस्तीफा दिया। कंपनी ने इसे एक्सचेंज में फाइलिंग के जरिए सार्वजनिक किया। निवेशक अक्सर सीनियर मैनेजमेंट के इस्तीफे को चिंता का कारण मानते हैं जिससे शेयरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

Meesho के शेयरों का इतिहास

Meesho ने अपने IPO के जरिए निवेशकों को ₹111 प्रति शेयर के भाव पर शेयर जारी किए थे। लिस्टिंग के कुछ ही दिनों बाद 18 दिसंबर 2025 को शेयर ₹254.65 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। इसके बाद 12 दिसंबर 2025 को शेयर लिस्टिंग के बाद के निचले स्तर ₹153.95 पर आ गया। आज बीएसई पर यह ₹164.55 के 5% लोअर सर्किट पर ट्रेड कर रहा है।

ऑपरेशनल सुधारों के बावजूद शेयर पर दबाव

बोनांजा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी के अनुसार, Meesho ने अपने लॉजिस्टिक्स सिस्टम में सुधार किया है। वित्त वर्ष 2023 में प्रतिऑर्डर लागत ₹55 थी जो वित्त वर्ष 2025 में घटकर ₹46 हो गई। Meesho का खुद का लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म Valmo छोटे शहरों में तेजी से फैल रहा है। कैश ऑन डिलीवरी ऑर्डर्स 90% से घटकर 61% पर आ गए हैं जिससे फेल डिलीवरी और लागत कम हुई। इन सुधारों के बावजूद, Meesho के शेयरों की हाई वैल्यूएशन और लॉक-इन पीरियड खत्म होने की वजह से निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। यही कारण है कि शेयर लगातार गिर रहे हैं।

(डिस्क्लेमर: यूजर्स को चेतना मंच की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।)

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