मुकेश अंबानी की कैंपा और लाहौरी जीरा ने भारतीय सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में बड़ा बदलाव किया है। 60 हजार करोड़ रुपये के इस बाजार में कोका-कोला और पेप्सी की हिस्सेदारी 93% से घटकर 85% हो गई है।

भारत के सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में इस साल ऐसा उलटफेर हुआ है जिसकी शायद किसी को उम्मीद नहीं थी। लगभग 60 हजार करोड़ रुपये के इस बेवरेज मार्केट में पहली बार मल्टीनेशनल दिग्गज कंपनियां कोका-कोला और पेप्सी अपनी मजबूती खोती दिखाई दे रही हैं और इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बनकर दो देसी नाम कैंपा और लाहौरी जीरा सामने आए हैं।
नीलसनIQ के ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि जनवरी से सितंबर 2025 के बीच छोटे और नए ब्रांड्स की ग्रोथ दोगुनी हो गई है। जहां पिछले साल इनकी संयुक्त मार्केट शेयर करीब 7% थी वहीं इस साल ये बढ़कर लगभग 15% पहुंच गई है। सबसे बड़ा झटका कोक और पेप्सी को लगा है जिनकी संयुक्त हिस्सेदारी 93% से घटकर 85% पर आ गई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह ग्रोथ तब हुई है जब न तो नए ब्रांड्स पूरी तरह नेशनल लेवल पर पहुंचे हैं और न ही मौसम उनके फेवर में था। इसके बावजूद उन्होंने मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है
लाहौरी जीरा के को-फाउंडर्स भले ही अपने मार्केट शेयर पर खुलकर बात न कर रहे हों लेकिन कंपनी का प्लान साफ और बड़ा है। वे जल्द ही 80-90% भारतीय पिनकोड कवर करने की तैयारी में हैं। पंजाब में शुरू हुई यह कंपनी अब लखनऊ में अपना तीसरा बड़ा प्लांट बना रही है। लाहौरी जीरा जल्दी ही नए फ्लेवर जैसे-लाहौरी आमरस और मसाला कोला भी लॉन्च करने वाली है। फिलहाल इनके पास 2,500 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर्स हैं और कंपनी आगे इंस्टीट्यूशनल सेल्स पर भी जोर दे रही है।
मुकेश अंबानी की रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) ने कैंपा को मार्केट में फिर से उतारने के बाद से ही आक्रामक रणनीति अपनाई है। कैंपा ने इस साल शुरुआत में ही कई बड़े समझौते किए जिसमें IPL पर ‘को-पावर्ड बाय’ स्पॉन्सरशिप, राम चरण को ब्रांड एंबेसडर बनाना, हैदराबाद मेट्रो के साथ बड़ी पार्टनरशिप और मोटरस्पोर्ट टीम के साथ एनर्जी ड्रिंक के लिए डील करना शामिल है। इन सबके जरिए कैंपा ने न सिर्फ पब्लिक में अपनी मौजूदगी बढ़ाई बल्कि युवा ऑडियंस को भी अपनी ओर खींचा।
कैंपा और लाहौरी के तेजी से बढ़ते प्रेशर ने पहली बार कोक और पेप्सी जैसे दिग्गजों को अपने प्राइसिंग मॉडल में बदलाव के लिए मजबूर कर दिया। अब उन्होंने अपने कई फ्लेवर जैसे-कोक, थम्स अप, स्प्राइट, पेप्सी का ₹10 वाला पैक लॉन्च कर दिया है जो पहले ₹12 या उससे ज्यादा में आता था। मुंबई के एक मार्केट एनालिस्ट के अनुसार, इससे पहले भी छोटे ब्रांड्स आए लेकिन उन्होंने कभी मल्टीनेशनल कंपनियों के एकाधिकार को इतनी मजबूती से चुनौती नहीं दी थी लेकिन इस बार मामला अलग है।
वरुण बेवरेजेस (Pepsi के सबसे बड़े बॉटलर) के चेयरमैन रवि जयपुरिया का कहना है कि बढ़ती प्रतियोगिता से मार्केट को ही फायदा होगा। उनका मानना है कि रिलायंस जैसे बड़े खिलाड़ी के आने से थोड़े समय के लिए असर जरूर होगा, पर लंबी अवधि में यह उद्योग के लिए अच्छा साबित होगा।
कैंपा और लाहौरी ने सिर्फ मार्केट में कदम नहीं रखा उन्होंने कोक और पेप्सी की जड़ें हिलानी शुरू कर दी हैं। एक तरफ देसी ब्रांड्स की कीमतें कम हैं, स्वाद में बदलाव है, और मार्केटिंग दमदार है; दूसरी तरफ MNCs अपनी हिस्सेदारी बचाने की कोशिश में जुटी हैं। अब देखना यह है कि आने वाले सालों में यह टक्कर किस दिशा में जाती है लेकिन इतना तय है कि भारतीय बेवरेज मार्केट में पहली बार असली मुकाबला शुरू हो चुका है।