क्विक कॉमर्स में मुनाफे की बात, रिलायंस के दावे से बाजार में हलचल

इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के हवाले से कंपनी ने कहा है कि उसका क्विक कॉमर्स बिजनेस अब कंट्रीब्यूशन मार्जिन पॉजिटिव हो गया है, यानी हर ऑर्डर पर ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी पैसे बचा/कमा रही है।

10 मिनट डिलीवरी की रेस में रिलायंस का नया दावा
10 मिनट डिलीवरी की रेस में रिलायंस का नया दावा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar19 Jan 2026 11:53 AM
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Reliance Quick Commerce Profit : भारत में 10 मिनट डिलीवरी का बाजार जिस रफ्तार से बढ़ा है, उतनी ही तेजी से इसकी सबसे बड़ी चुनौती भी सामने आई है। दूध, ब्रेड, स्नैक्स या रोजमर्रा का राशन… ग्राहक अब दुकान की बजाय ऐप पर भरोसा कर रहे हैं। मगर इस स्पीड के पीछे लागत, डिस्काउंट और डिलीवरी का भारी दबाव होता है। ऐसे में रिलायंस इंडस्ट्रीज का ताजा दावा उद्योग के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के हवाले से कंपनी ने कहा है कि उसका क्विक कॉमर्स बिजनेस अब कंट्रीब्यूशन मार्जिन पॉजिटिव हो गया है, यानी हर ऑर्डर पर ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी पैसे बचा/कमा रही है। साथ ही, तीन साल पहले शुरू किया गया उसका एफएमसीजी कारोबार भी EBITDA पॉजिटिव होने की बात कही गई है।

क्विक कॉमर्स का मुनाफे वाला मोड़ कैसे आया?

अक्टूबर 2024 में रिलायंस ने अपने 10 मिनट डिलीवरी मॉडल को आक्रामक रफ्तार दी और अब कंपनी का दावा है कि उसने बेहद कम समय में वह मुकाम छू लिया है, जिसके लिए क्विक कॉमर्स के दूसरे दिग्गज सालों से संघर्ष कर रहे हैं। रिलायंस के मुताबिक इस तेज और टिकाऊ मॉडल की बुनियाद तीन मजबूत स्तंभों पर टिकी है। पहला, सोर्सिंग पावर देश के बड़े किराना/ग्रोसरी नेटवर्क के चलते रिलायंस बड़े पैमाने पर खरीद करता है, जिससे ब्रांड्स और सप्लायर्स से उसे बेहतर दरें मिलती हैं और लागत अपने आप नीचे आती है। दूसरा, कमाई का सबसे बड़ा इंजन फूड और बेवरेज (F&B) कैटेगरी है, जहां मार्जिन तुलनात्मक रूप से ज्यादा रहता हैकंपनी का कहना है कि उसके प्लेटफॉर्म पर हर तीन में से एक ऑर्डर इसी से जुड़ा होता है। तीसरा, किराना कारोबार की सबसे बड़ी चुनौती वेस्टेज पर कंट्रोल। रिलायंस का दावा है कि बेहतर इन्वेंट्री प्लानिंग और सख्त सप्लाई चेन मैनेजमेंट के जरिए उसने खाने-पीने की चीजों में होने वाले नुकसान को सीमित किया, जिससे मार्जिन सुधरा और 10 मिनट डिलीवर का मॉडल घाटे से निकलकर कमाई की दिशा में बढ़ा।

कम खर्च में बड़ी पहुंच का दावा

रिलायंस की क्विक कॉमर्स रणनीति का सबसे मजबूत पत्ता उसका पहले से बना रिटेल इकोसिस्टम है। कंपनी नई-नई सुविधाएं खड़ी करने की बजाय अपने मौजूदा स्टोर नेटवर्क को ही 10 मिनट डिलीवरी के लिए इस्तेमाल कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस के करीब 3,000 आउटलेट्स इस मॉडल से जुड़े हैं, जिनमें लगभग 800 डार्क स्टोर्स शामिल बताए जाते हैं। यही वह बढ़त है जो उसे कई प्रतिद्वंद्वियों से अलग खड़ा करती है जहां बाकी कंपनियों को विस्तार के लिए नए इंफ्रास्ट्रक्चर, गोदाम और संचालन व्यवस्था पर भारी निवेश करना पड़ता है, वहीं रिलायंस तैयार नेटवर्क के सहारे लागत को काबू में रखने और संचालन को अधिक कुशल बनाने का दावा कर रही है।

ऑर्डर्स की रफ्तार भी तेज

रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 की तिमाही में रिलायंस को औसतन 16 लाख ऑर्डर प्रतिदिन मिल रहे थे और ऑर्डर वॉल्यूम में तिमाही-दर-तिमाही 53% बढ़ोतरी दर्ज होने की बात कही गई है। कंपनी का लक्ष्य इसे देश का सबसे बड़ा क्विक कॉमर्स प्लेयर बनाने का है। साथ ही, रिलायंस अब केवल ग्रोसरी तक सीमित नहीं रहकर इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन जैसी कैटेगरी में भी डिलीवरी बढ़ा रही है, जिससे बास्केट साइज और रेवेन्यू दोनों बढ़ने की संभावना बनती है।

Blinkit–Swiggy की स्थिति क्या?

क्विक कॉमर्स की रेस में Blinkit और Swiggy ने रफ्तार जरूर पकड़ ली है, लेकिन मुनाफे की सीधी लाइन अभी भी इनके लिए चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के संकेतों के मुताबिक, दोनों कंपनियां ग्रोथ के दम पर बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही हैं, मगर कुल मिलाकर प्रॉफिटेबिलिटी अभी दूर है। Blinkit ने कई शहरों/क्लस्टर्स में यूनिट-इकोनॉमिक्स सुधरने की बात कही है, लेकिन जैसे ही कंपनी नए शहरों में विस्तार करती है, डार्क स्टोर्स, लॉजिस्टिक्स और डिस्काउंट का खर्च बढ़कर मार्जिन पर दबाव डाल देता है। वहीं Swiggy के नुकसान में कमी के संकेत जरूर मिले हैं, मगर कंपनी ने अब तक खुद को पूरी तरह प्रॉफिटेबल घोषित नहीं किया है। यानी ग्रोथ की तेज रफ्तार के बावजूद, इस सेक्टर में असली जीत अभी भी उसी की होगी जो स्केल के साथ कमाई का संतुलन बना पाए।

बाजार के लिए संकेत क्या है?

यदि रिलायंस का यह दावा आने वाली कई तिमाहियों तक भी कायम रहता है, तो क्विक कॉमर्स की बहस “यूज़र बढ़ाओ” से निकलकर सीधे टिकाऊ मुनाफा की तरफ शिफ्ट हो जाएगी। क्योंकि 10 मिनट डिलीवरी की असली लड़ाई सिर्फ रफ्तार की नहीं, सिस्टम की मजबूती की है। यहां वही कंपनी बाज़ी मारेगी, जिसके पास लागत को न्यूनतम रखने का मजबूत ढांचा हो, हाई-मार्जिन कैटेगरी का सही और लगातार बिकने वाला मिश्रण हो, और इन्वेंट्री व लॉजिस्टिक्स पर ऐसी पकड़ हो जो वेस्टेज को घाटे में बदलने ही न दे। Reliance Quick Commerce Profit


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अब एक ही स्टेटमेंट में दिखेगा बैंक बैलेंस, PF और निवेश का पूरा हिसाब

प्रस्तावित नई व्यवस्था में यही बिखराव खत्म होने की उम्मीद है उपभोक्ता को एक कॉम्प्रिहेंसिव व्यू मिलेगा, यानी बचत से लेकर निवेश और बीमा तक, पूरी ‘फाइनेंशियल हेल्थ’ का साफ़-सुथरा मासिक स्नैपशॉट एक ही जगह उपलब्ध होगा।

इन्वेस्टर फ्रेंडली अपडेट
इन्वेस्टर फ्रेंडली अपडेट
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar19 Jan 2026 10:38 AM
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Single Monthly Statement : बैंक में कितना पैसा है, पीएफ में कितनी बचत हुई और शेयर/म्यूचुअल फंड में निवेश का क्या हाल है यह जानने के लिए अब अलग-अलग ऐप और स्टेटमेंट खंगालने की परेशानी जल्द कम हो सकती है। वित्तीय क्षेत्र के नियामक एक ऐसे ‘सिंगल मंथली स्टेटमेंट’ पर काम कर रहे हैं, जिसमें आपकी बचत, निवेश, बीमा और रिटायरमेंट फंड का पूरा हिसाब एक ही जगह दिखाई देगा।

महीने के आखिर की माथापच्ची खत्म करने की तैयारी

अभी की व्यवस्था में आम उपभोक्ता को अपनी वित्तीय स्थिति समझने के लिए कई दरवाजे खटखटाने पड़ते हैं कहीं बैंक बैलेंस देखा जाता है, कहीं म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो, डीमैट होल्डिंग्स अलग, बीमा पॉलिसी का स्टेटस अलग और पीएफ की जानकारी के लिए अलग पोर्टल। दिक्कत यह भी है कि ये रिपोर्टें एक साथ नहीं आतीं, इसलिए महीने के आखिर में पूरा हिसाब जोड़ना किसी पज़ल को पूरा करने जैसा हो जाता है। प्रस्तावित नई व्यवस्था में यही बिखराव खत्म होने की उम्मीद है उपभोक्ता को एक कॉम्प्रिहेंसिव व्यू मिलेगा, यानी बचत से लेकर निवेश और बीमा तक, पूरी ‘फाइनेंशियल हेल्थ’ का साफ़-सुथरा मासिक स्नैपशॉट एक ही जगह उपलब्ध होगा।

SEBI ने शुरू की पहल

इस पहल को ज़मीन पर उतारने के लिए शेयर बाजार नियामक SEBI ने कमान संभाल ली है और बाकी वित्तीय संस्थाओं के साथ समन्वय की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। SEBI इस समय RBI (बैंकिंग), IRDAI (बीमा) और PFRDA (पेंशन/एनपीएस) जैसे प्रमुख नियामकों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। मकसद साफ है आम निवेशक को अलग-अलग प्लेटफॉर्म और स्टेटमेंट के बीच भटकना न पड़े। बल्कि एक ही दस्तावेज़ में बैंक, निवेश, बीमा और रिटायरमेंट फंड का पूरा लेखा-जोखा एक नजर में मिल जाए, ताकि हर महीने अपनी “फाइनेंशियल तस्वीर” समझना आसान और पारदर्शी हो सके।

CAS का दायरा बढ़ाने की योजना

SEBI की कोशिश है कि मौजूदा CAS (Consolidated Account Statement) को अब सिर्फ शेयर और म्यूचुअल फंड तक सीमित न रखा जाए। फिलहाल यह स्टेटमेंट निवेशक को मुख्य रूप से डीमैट अकाउंट में मौजूद सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स की ही तस्वीर दिखाता है। लेकिन प्रस्तावित बदलाव के बाद CAS का दायरा व्यापक हो सकता हैइसे एक ऐसे ऑल-इन-वन फाइनेंशियल स्टेटमेंट के रूप में विकसित करने की तैयारी है, जिसमें निवेशक को अपनी वित्तीय स्थिति का कहीं ज्यादा साफ, एकीकृत और भरोसेमंद मासिक सारांश एक ही जगह मिल सके।

नए स्टेटमेंट में किन-किन चीजों को जोड़ने पर चर्चा?

रेगुलेटर्स के बीच चल रही बातचीत में संकेत हैं कि यह एकीकृत मासिक स्टेटमेंट आने वाले समय में सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपकी पूरी फाइनेंशियल लाइफ का सार बन सकता है। प्रस्ताव यह है कि इसमें बैंक खातों का सारांश, छोटी बचत योजनाओं की स्थिति, बीमा उत्पादों का अपडेट, बॉन्ड होल्डिंग्स का विवरण और प्रोविडेंट फंड (PF) की बचत जैसी जानकारियां भी एक साथ दिखाई जाएं। इतना ही नहीं, रिपोर्ट्स के मुताबिक NPS से जुड़ी जानकारी देने वाले PFRDA को भी इस सिस्टम से जोड़ने की तैयारी पर काम हो रहा है ।

आम लोगों को क्या फायदा होगा?

इस प्रस्तावित बदलाव का सबसे बड़ा लाभ सीधे आम उपभोक्ता को मिलने वाला है। एकीकृत स्टेटमेंट के जरिए उसे अपनी पूरी फाइनेंशियल तस्वीर एक ही जगह दिखेगी, यानी अलग-अलग ऐप, पोर्टल और रिपोर्ट्स के चक्कर लगाने की जरूरत काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इससे बचत, निवेश और सुरक्षा कवच (बीमा/रिटायरमेंट फंड) का कुल हिसाब साफ रहेगा और व्यक्ति अपनी वित्तीय योजना ज्यादा समझदारी से बना सकेगा। सबसे अहम बात यह कि महीने-दर-महीने होने वाले बदलाव एक नजर में पकड़ में आ जाएंगे, जिससे ट्रैकिंग आसान और निर्णय तेज हो सकेंगे। हालांकि फिलहाल यह पहल समन्वय और ढांचे की तैयारी के चरण में है, लेकिन यदि यह मॉडल लागू हो गया तो यह आम निवेशक के लिए पर्सनल फाइनेंस मैनेजमेंट में गेम-चेंजर साबित हो सकता है। Single Monthly Statement

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UPI पेमेंट अब बन गया सुपर ईजी, Kiwi App के जरिए करें स्मार्ट शॉपिंग

UPI: भारत में UPI अब और भी स्मार्ट हो गया है। अब आप UPI पेमेंट सीधे क्रेडिट कार्ड से कर सकते हैं और कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट्स और EMI की सुविधा पा सकते हैं। Kiwi App के जरिए RuPay क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ना बेहद आसान है।

UPI
UPI अब और भी स्मार्ट
locationभारत
userअसमीना
calendar17 Jan 2026 10:49 AM
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भारत में डिजिटल पेमेंट की दुनिया तेजी से बदल रही है। पहले लोग नकद या चेक के जरिए लेन-देन करते थे फिर आया डेबिट और क्रेडिट कार्ड का जमाना और अब UPI ने लेन-देन को और आसान बना दिया है। महज QR कोड स्कैन करके सेकंड्स में पेमेंट करना अब आम बात हो गई है लेकिन UPI में अब एक नया बदलाव आया है। अब आप अपने UPI पेमेंट में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि आपके बैंक खाते में पैसे न होने पर भी आप आसानी से खरीदारी कर सकते हैं। साथ ही, इस प्रक्रिया में कुछ बैंक और प्लेटफॉर्म्स आपको कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट्स और EMI विकल्प भी देते हैं।

UPI और क्रेडिट कार्ड का नया तरीका

UPI पेमेंट पहले सिर्फ बैंक खाते से सीधे कटौती करता था। इसका मतलब था कि खाते में पर्याप्त राशि न होने पर पेमेंट रद्द हो जाता। अब क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ने से यह समस्या हल हो गई है। इससे बड़े खर्चों को EMI में बदलना आसान हो जाता है और छोटी खरीदारी के लिए भी आपको हर बार बैंक बैलेंस चेक करने की जरूरत नहीं पड़ती।

कैशबैक और रिवॉर्ड पॉइंट्स

कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और बैंक अब UPI + क्रेडिट पेमेंट पर कैशबैक और रिवॉर्ड पॉइंट्स भी देते हैं। इसका फायदा यह है कि आप रोजमर्रा की खरीदारी में कुछ पैसे बचा सकते हैं। ये रिवॉर्ड पॉइंट्स या कैशबैक सीधे आपके बैंक खाते में जमा हो जाते हैं और कभी भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

EMI विकल्प और बड़े खर्चों के लिए आसान तरीका

UPI + क्रेडिट पेमेंट बड़े खर्चों के लिए भी मददगार है। आप इसे EMI में बदल सकते हैं, जिससे एक साथ बड़ी रकम न कटे और जेब पर बोझ कम हो। यह तरीका डिजिटल इंडिया में सुविधाजनक और सुरक्षित लेन-देन का एक नया तरीका बन रहा है।

डिजिटल इंडिया में क्रेडिट-स्मार्ट होना

जैसे-जैसे ज्यादा लोग UPI + क्रेडिट का इस्तेमाल कर रहे हैं, भारत में पैसे खर्च करने और संभालने का तरीका बदल रहा है। यह तरीका न सिर्फ पेमेंट को तेज बनाता है बल्कि लोगों को क्रेडिट-स्मार्ट और financially aware भी बनाता है। इस तरह, UPI + क्रेडिट पेमेंट डिजिटल इंडिया की स्मार्ट और आसान शॉपिंग का एक हिस्सा बन चुका है।

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