MSME और स्टार्टअप्स के लिए सुनहरा मौका, भारत आ रही सैकड़ों नौकरियां!
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) जल्द ही लागू होने वाला है। इस डील से भारत के एक्सपोर्ट में तेजी आएगी। यूरोप के बड़े मार्केट में भारतीय उत्पाद कम या बिना टैक्स के प्रवेश कर पाएंगे। इससे टेक्सटाइल, फार्मा, आईटी, सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा होगा।

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चली आ रही व्यापार बातचीत अब अपने अंतिम चरण में है। 27 जनवरी 2026 को दोनों पक्ष इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का ऐलान कर सकते हैं। यह समझौता न सिर्फ भारत के व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि लाखों नई नौकरियों और निवेश के अवसर भी पैदा करेगा। आइए जानते हैं कि इस डील से भारत को क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं।
भारत का बड़ा मार्केट
यूरोपीय संघ में करीब 450 मिलियन लोग रहते हैं और इसका अर्थव्यवस्था $20 ट्रिलियन से भी बड़ी है। 2024–25 में भारत और EU के बीच व्यापार $136.5 अरब था, जिसमें भारत का एक्सपोर्ट $75.8 अरब और इंपोर्ट $60.7 अरब रहा। FTA के बाद भारतीय उत्पादों को यूरोप में कम या बिना टैक्स के प्रवेश मिलेगा। इसका मतलब है कि भारत का EU में व्यापार $200–250 अरब तक बढ़ सकता है।
एक्सपोर्ट में तेजी
FTA से यूरोप में भारतीय उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी कम या खत्म हो जाएगी। इससे टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, फार्मा, चमड़ा, जूते, ज्वेलरी, IT और सर्विस सेक्टर के एक्सपोर्ट में तेजी आएगी। इसके अलावा यूरोप अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए भारत से हथियार और डिफेंस इक्विपमेंट खरीद सकता है।
Make in India को बढ़ावा
FTA के बाद भारत में बने प्रोडक्ट्स यूरोप भेजे जा सकेंगे और यूरोप से कच्चा माल आने की संभावना भी बढ़ेगी। इससे उत्पादन लागत कम होगी और नई फैक्ट्रियां खुलेंगी। बड़े निवेश के साथ-साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी आसान होगा जिससे ‘Make in India’ अभियान को मजबूती मिलेगी।
नई नौकरियों के अवसर
इस डील से मैन्युफैक्चरिंग, IT, डिजिटल सर्विस, लॉजिस्टिक्स और MSME सेक्टर में लाखों नई डायरेक्ट और इनडायरेक्ट नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। युवा पेशेवरों और स्टार्टअप्स के लिए यह सुनहरा अवसर होगा।
यूरोप में भारतीय कंपनियों की एंट्री
FTA नॉन-टैरिफ बैरियर्स को कम करेगा जिससे भारतीय कंपनियां यूरोप में आसानी से अपना व्यवसाय बढ़ा सकेंगी। इसके साथ ही भारतीय पेशेवरों के लिए यूरोप में काम करने के अवसर भी बढ़ेंगे।
चीन पर निर्भरता कम
भारत लंबे समय से चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। यूरोप के साथ FTA के बाद भारत को भरोसेमंद सप्लाई चेन पार्टनर बनने का मौका मिलेगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन में नई फंडिंग की संभावनाएं भी खुलेंगी।
यूरोपीय निवेश से फायदा
यूरोप अब तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने की दिशा में देख रहा है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के कारण यूरोपीय निवेशकों के लिए आकर्षक मार्केट बन सकता है। इससे स्टार्टअप्स और नई कंपनियों को लाभ मिलेगा।
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चली आ रही व्यापार बातचीत अब अपने अंतिम चरण में है। 27 जनवरी 2026 को दोनों पक्ष इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का ऐलान कर सकते हैं। यह समझौता न सिर्फ भारत के व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि लाखों नई नौकरियों और निवेश के अवसर भी पैदा करेगा। आइए जानते हैं कि इस डील से भारत को क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं।
भारत का बड़ा मार्केट
यूरोपीय संघ में करीब 450 मिलियन लोग रहते हैं और इसका अर्थव्यवस्था $20 ट्रिलियन से भी बड़ी है। 2024–25 में भारत और EU के बीच व्यापार $136.5 अरब था, जिसमें भारत का एक्सपोर्ट $75.8 अरब और इंपोर्ट $60.7 अरब रहा। FTA के बाद भारतीय उत्पादों को यूरोप में कम या बिना टैक्स के प्रवेश मिलेगा। इसका मतलब है कि भारत का EU में व्यापार $200–250 अरब तक बढ़ सकता है।
एक्सपोर्ट में तेजी
FTA से यूरोप में भारतीय उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी कम या खत्म हो जाएगी। इससे टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, फार्मा, चमड़ा, जूते, ज्वेलरी, IT और सर्विस सेक्टर के एक्सपोर्ट में तेजी आएगी। इसके अलावा यूरोप अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए भारत से हथियार और डिफेंस इक्विपमेंट खरीद सकता है।
Make in India को बढ़ावा
FTA के बाद भारत में बने प्रोडक्ट्स यूरोप भेजे जा सकेंगे और यूरोप से कच्चा माल आने की संभावना भी बढ़ेगी। इससे उत्पादन लागत कम होगी और नई फैक्ट्रियां खुलेंगी। बड़े निवेश के साथ-साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी आसान होगा जिससे ‘Make in India’ अभियान को मजबूती मिलेगी।
नई नौकरियों के अवसर
इस डील से मैन्युफैक्चरिंग, IT, डिजिटल सर्विस, लॉजिस्टिक्स और MSME सेक्टर में लाखों नई डायरेक्ट और इनडायरेक्ट नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। युवा पेशेवरों और स्टार्टअप्स के लिए यह सुनहरा अवसर होगा।
यूरोप में भारतीय कंपनियों की एंट्री
FTA नॉन-टैरिफ बैरियर्स को कम करेगा जिससे भारतीय कंपनियां यूरोप में आसानी से अपना व्यवसाय बढ़ा सकेंगी। इसके साथ ही भारतीय पेशेवरों के लिए यूरोप में काम करने के अवसर भी बढ़ेंगे।
चीन पर निर्भरता कम
भारत लंबे समय से चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। यूरोप के साथ FTA के बाद भारत को भरोसेमंद सप्लाई चेन पार्टनर बनने का मौका मिलेगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन में नई फंडिंग की संभावनाएं भी खुलेंगी।
यूरोपीय निवेश से फायदा
यूरोप अब तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने की दिशा में देख रहा है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के कारण यूरोपीय निवेशकों के लिए आकर्षक मार्केट बन सकता है। इससे स्टार्टअप्स और नई कंपनियों को लाभ मिलेगा।












