सोना-चांदी के दामों में हफ्तेभर की गिरावट, मार्केट अपडेट

Gold Silver Price: सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट जारी है। बीते एक हफ्ते में सोना 4000 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3000 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हुई है। निवेशक और खरीदार इस बदलाव को ध्यान से देख रहे हैं और मार्केट अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं।

Gold Rate Today
सोने का भाव क्या है
locationभारत
userअसमीना
calendar04 Jan 2026 01:54 PM
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नए साल की शुरुआत से पहले ही सोना और चांदी के रेट्स में गिरावट का सिलसिला तेज हो गया है। बीते एक हफ्ते में सोना 4000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा और चांदी 3000 रुपये से ज्यादा सस्ती हो गई है। ऐसे में निवेशक और खरीदार दोनों ही इस बदलाव को ध्यान से देख रहे हैं।

सोने की कीमत में बड़ी गिरावट

बीते साल 2025 के आखिरी हफ्ते से सोने की कीमत में गिरावट शुरू हुई थी जो 2026 के पहले हफ्ते में भी जारी रही। Multi Commodity Exchange (MCX) के आंकड़ों के अनुसार, 26 दिसंबर 2025 को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,39,873 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। लेकिन नए साल के पहले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यह गिरकर 1,35,752 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। सोने का लाइफ टाइम हाई MCX पर 1,40,456 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इसके मुकाबले अब सोना अपने उच्च स्तर से 4,704 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया है।

घरेलू बाजार में भी गिरावट

MCX के आंकड़ों के अलावा घरेलू बाजार में भी सोने की कीमतों में कमी आई है। इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट के अनुसार, 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 1,37,956 रुपये से गिरकर 1,34,782 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई।

चांदी के दाम भी गिरे

चांदी के रेट्स में भी गिरावट जारी है। बीते एक हफ्ते में सिल्वर की कीमत 3,188 रुपये प्रति किलो तक कम हो गई है। 26 दिसंबर 2025 को चांदी की कीमत 2,39,787 रुपये प्रति किलो थी जो बीते शुक्रवार को 2,36,599 रुपये पर आ गई। चांदी का लाइफ टाइम हाई 2,54,174 रुपये प्रति किलो था। इसके मुकाबले अभी चांदी अपने उच्च स्तर से 17,575 रुपये प्रति किलो तक सस्ती मिल रही है।

निवेशकों और खरीदारों के लिए सुझाव

सोना और चांदी की कीमतों में यह गिरावट निवेशकों और खरीदारों के लिए एक अवसर भी पेश कर सकती है। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा रहता है। इसलिए निवेश या खरीदारी करने से पहले कीमतों की लगातार निगरानी करना और सही समय का इंतजार करना जरूरी है।

(नोट- किसी भी कीमती धातु में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें।)

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निशाने पर सैकड़ों महिलाएं, जानिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का काला सच

AI का दुरुपयोग अब महिलाओं के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। डीपफेक और AI-जनित अश्लील कंटेंट के बढ़ते मामलों ने सरकार, महिला आयोग और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चिंता बढ़ा दी है। इस आर्टिकल में जानिए कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

Deepfake Danger
महिलाओं पर डीपफेक का सबसे ज्यादा खतरा
locationभारत
userअसमीना
calendar04 Jan 2026 10:51 AM
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब सिर्फ तकनीकी उपकरण तक सीमित नहीं रहा। इसके दुरुपयोग ने महिलाओं और लैंगिक अल्पसंख्यकों के लिए गंभीर खतरे पैदा कर दिए हैं। डीपफेक और AI-जनित अश्लील कंटेंट के बढ़ते मामलों ने सरकार, महिला आयोग और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चिंता बढ़ा दी है।

एक्स प्लेटफॉर्म और ग्रोक AI विवाद

भारत में हाल ही में X प्लेटफॉर्म के AI टूल Grok से जुड़ा अश्लील कंटेंट विवाद सामने आया है। इससे स्पष्ट हो गया है कि AI के दुरुपयोग ने ऑनलाइन उत्पीड़न का स्तर बढ़ा दिया है। केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर डिजिटल हमले तेजी से बढ़ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) भी इस पर गंभीर चिंता जता चुका है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की चेतावनी

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने कहा है कि डीपफेक और AI-जनित कंटेंट मौजूदा साइबर कानूनों को कमजोर कर रहा है। आयोग ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि AI से बने फर्जी कंटेंट को अपराध घोषित किया जाए और सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय की जाए। एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया किशोर राहतकर ने कहा कि महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा के लिए कानूनों में तुरंत बदलाव होना चाहिए।

सरकार ने एक्स प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किया

राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी द्वारा उठाए गए सवालों के बाद आईटी मंत्रालय ने एक्स को नोटिस जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि ग्रोक AI टूल का दुरुपयोग महिलाओं के खिलाफ अश्लील कंटेंट बनाने में हो रहा है, जो आईटी एक्ट 2000 और IT Rules 2021 का उल्लंघन है। एक्स को 72 घंटे में सुधारात्मक कदम उठाने, आपत्तिजनक कंटेंट हटाने और नियम तोड़ने वाले यूजर्स के अकाउंट सस्पेंड या टर्मिनेट करने के निर्देश दिए गए हैं।

डीपफेक और ऑनलाइन उत्पीड़न का बढ़ता खतरा

अभिनेत्री गिरीजा ओक और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर कामिया बुच जैसे मामले इस खतरे को उजागर करते हैं। McAfee की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 75% लोग डीपफेक कंटेंट देखते हैं और लगभग 38% लोग इसका शिकार बनते हैं। 2020 से 2024 के बीच महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों में 118% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

समाधान और आगे की राह

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस खतरे से निपटने के लिए निचली अदालतों और साइबर सेल को सशक्त करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करना और AI-जनित कंटेंट के नियम बनाना ही महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।

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हर युवा के पास होगी जॉब! इंडिया आ रही नौकरियों की बाढ़

भारत अब ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत 22 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे निवेश बढ़ेगा और हजारों नए रोजगार पैदा होंगे।

Electric Hub
भारत बनेगा ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब
locationभारत
userअसमीना
calendar04 Jan 2026 01:56 PM
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भारत अब सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबल करने वाला देश नहीं रहना चाहता बल्कि पूरी दुनिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है जो आने वाले वर्षों में देश की तस्वीर बदल सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भारी निवेश और लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलने जा रहे हैं।

22 नई परियोजनाओं को मिली मंजूरी

केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 22 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के जरिए देश में करीब 41,863 करोड़ रुपये का निवेश आएगा। इसके साथ ही 33,791 नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। यह फैसला भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

आयात पर निर्भरता होगी कम

इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य भारत में ही इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का निर्माण बढ़ाना है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके। अब सरकार का फोकस केवल मोबाइल या डिवाइस असेंबल करने तक सीमित नहीं है बल्कि हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी पर है। इससे मोबाइल, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और आईटी हार्डवेयर सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा।

आठ राज्यों में लगेगी नई यूनिट्स

ये सभी परियोजनाएं देश के आठ राज्यों में लगेंगी जिनमें आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान शामिल हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि औद्योगिक विकास कुछ गिने-चुने राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में निवेश और रोजगार के मौके बनेंगे।

Apple सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों का बड़ा दांव

भारत में Apple की मैन्युफैक्चरिंग लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही उसकी सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियां भी यहां बड़ा निवेश कर रही हैं। कई वेंडर्स ऐसे हैं जो भविष्य में भारत से ही इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का निर्यात करेंगे। इससे भारत की पहचान सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग बेस के रूप में नहीं बल्कि ग्लोबल एक्सपोर्ट हब के तौर पर भी मजबूत होगी।

किन सेक्टरों में होगा सबसे ज्यादा निवेश

इस चरण में सबसे ज्यादा निवेश मोबाइल और डिवाइस एनक्लोजर यानी स्मार्टफोन के बाहरी ढांचे बनाने वाली यूनिट्स में होगा। इसके अलावा PCB (प्रिंटेड सर्किट बोर्ड), लिथियम-आयन बैटरी सेल, कैमरा मॉड्यूल और डिस्प्ले मॉड्यूल जैसे अहम कंपोनेंट्स पर भी खास जोर दिया जाएगा। ये सभी कंपोनेंट्स स्मार्टफोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बेहद जरूरी हैं।

सरकार का साफ संदेश

आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार सिर्फ योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके तेज और प्रभावी क्रियान्वयन पर भी पूरा ध्यान दे रही है। उन्होंने कंपनियों से डिजाइन इनोवेशन अपनाने और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने की अपील की ताकि भारतीय उत्पाद ग्लोबल मार्केट में मजबूती से मुकाबला कर सकें।

बड़ी कंपनियों की मजबूत मौजूदगी

इन परियोजनाओं में Foxconn, Samsung, Tata Electronics, Dixon Technologies और Hindalco जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। खास तौर पर तमिलनाडु में Foxconn की एक परियोजना से ही 16,000 से ज्यादा नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। यह दिखाता है कि यह निवेश सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि लोगों की जिंदगी में असली बदलाव लाने वाला है।

भारत के भविष्य के लिए क्या मायने रखता है यह कदम

यह फैसला भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। आने वाले समय में इससे न सिर्फ रोजगार बढ़ेंगे बल्कि भारत की तकनीकी और औद्योगिक ताकत भी दुनिया के सामने और मजबूत होकर उभरेगी।

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