BPL और केल्विनटर का बाजार में कमबैक, ग्लोबल ब्रांड्स को देंगे टक्कर?
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ईशा अंबानी के नेतृत्व में कैंपा-कोला, बीपीएल और केल्विनटर जैसे पुराने भारतीय ब्रांडों को नए जमाने की रणनीति के साथ दोबारा लॉन्च किया है। कम कीमत, मजबूत रिटेल नेटवर्क और नॉस्टैल्जिया मार्केटिंग के जरिए रिलायंस FMCG और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

भारत के कंज्यूमर मार्केट में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर ग्लोबल ब्रांड्स प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस कर रहे हैं वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज ‘ओल्ड इज गोल्ड’ की सोच को नए जमाने के बिजनेस मॉडल में बदल रही है। कैंपा-कोला, बीपीएल, केल्विनटर और वेलवेट जैसे पुराने भारतीय ब्रांड्स को दोबारा लॉन्च कर रिलायंस न सिर्फ लोगों की पुरानी यादों को ताजा कर रही है बल्कि कम कीमत, मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन और बड़े पैमाने पर निवेश के दम पर बाजार में बड़ी हलचल भी मचा रही है।
क्यों काम कर रहा है ‘रेट्रो फॉर्मूला’?
भारतीय उपभोक्ता भावनाओं से जुड़ा हुआ है। बचपन में देखे या इस्तेमाल किए गए ब्रांड्स आज भी भरोसे का एहसास कराते हैं। रिलायंस इसी भावनात्मक जुड़ाव को आधुनिक पैकेजिंग, बेहतर सप्लाई चेन और आक्रामक प्राइसिंग के साथ जोड़ रही है। नतीजा यह है कि उपभोक्ताओं को कम दाम में जाना-पहचाना नाम मिल रहा है।
एफएमसीजी में तेज रफ्तार
रिलायंस का फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) बिजनेस इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2024 में जहां इस सेगमेंट की बिक्री करीब 3,000 करोड़ रुपये थी वहीं अगले ही साल यह बढ़कर लगभग 11,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। जुलाई से सितंबर 2026 की एक ही तिमाही में 5,400 करोड़ रुपये की बिक्री इस बात का सबूत है कि उपभोक्ता इन ब्रांड्स को हाथों-हाथ ले रहे हैं।
सिर्फ सॉफ्ट ड्रिंक नहीं पूरा कंज्यूमर इकोसिस्टम
रिलायंस ने अपनी रणनीति को केवल कैंपा तक सीमित नहीं रखा। कन्फेक्शनरी में रावलगांव, पर्सनल केयर में वेलवेट और अब इलेक्ट्रॉनिक्स में बीपीएल व केल्विनटर की वापसी इसी सोच का हिस्सा है। टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे प्रोडक्ट्स में रिलायंस वही फॉर्मूला लागू कर रहा है। FMCG के मुकाबले इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। एलजी, सैमसंग और सोनी जैसी कंपनियां दो दशकों से भारतीय बाजार में जमी हुई हैं। सवाल यह है कि क्या 20-30 साल का युवा कंज्यूमर बीपीएल टीवी या केल्विनटर फ्रिज को चुन पाएगा? विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ सस्ती कीमत काफी नहीं होगी। ब्रांड को भरोसा, क्वालिटी और आधुनिक डिजाइन के साथ पेश करना होगा।
रिलायंस की सबसे बड़ी ताकत
रिलायंस के पास दो ऐसे हथियार हैं जो किसी भी प्रतिस्पर्धी को परेशान कर सकते हैं मजबूत बैलेंस शीट और विशाल रिटेल नेटवर्क। थर्ड आईसाइट के CEO देवांगशु दत्ता के अनुसार, रिलायंस जिस भी सेक्टर में उतरती है वहां लीडर बनने की कोशिश करती है। कंपनी नुकसान सहकर भी लंबे समय तक निवेश कर सकती है जब तक कि स्केल और मुनाफा दोनों हासिल न हो जाएं।
टियर-2 और टियर-3 शहरों पर बड़ा दांव
जहां ग्लोबल ब्रांड प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस करते हैं वहीं रिलायंस की नजर छोटे शहरों पर है। भारत में अब भी टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और AC की पैठ कम है जिससे ग्रोथ की जबरदस्त संभावनाएं मौजूद हैं। ई-कॉमर्स, रीजनल रिटेल चेन और लोकल आउटलेट्स के जरिए रिलायंस तेजी से विस्तार की तैयारी में है।
FMCG में 1 लाख करोड़ का सपना
ईशा अंबानी ने AGM में साफ किया कि रिलायंस का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में FMCG रेवेन्यू को 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। कंपनी 30 लाख आउटलेट तक डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ाने, 40,000 करोड़ रुपये के फूड पार्क और भारी मैन्युफैक्चरिंग निवेश की योजना पर काम कर रही है। कैंपा-कोला की दो अंकों की बाजार हिस्सेदारी ने कोका-कोला और पेप्सिको जैसे दिग्गजों को सीधी चुनौती दी है।
भारत के कंज्यूमर मार्केट में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर ग्लोबल ब्रांड्स प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस कर रहे हैं वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज ‘ओल्ड इज गोल्ड’ की सोच को नए जमाने के बिजनेस मॉडल में बदल रही है। कैंपा-कोला, बीपीएल, केल्विनटर और वेलवेट जैसे पुराने भारतीय ब्रांड्स को दोबारा लॉन्च कर रिलायंस न सिर्फ लोगों की पुरानी यादों को ताजा कर रही है बल्कि कम कीमत, मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन और बड़े पैमाने पर निवेश के दम पर बाजार में बड़ी हलचल भी मचा रही है।
क्यों काम कर रहा है ‘रेट्रो फॉर्मूला’?
भारतीय उपभोक्ता भावनाओं से जुड़ा हुआ है। बचपन में देखे या इस्तेमाल किए गए ब्रांड्स आज भी भरोसे का एहसास कराते हैं। रिलायंस इसी भावनात्मक जुड़ाव को आधुनिक पैकेजिंग, बेहतर सप्लाई चेन और आक्रामक प्राइसिंग के साथ जोड़ रही है। नतीजा यह है कि उपभोक्ताओं को कम दाम में जाना-पहचाना नाम मिल रहा है।
एफएमसीजी में तेज रफ्तार
रिलायंस का फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) बिजनेस इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2024 में जहां इस सेगमेंट की बिक्री करीब 3,000 करोड़ रुपये थी वहीं अगले ही साल यह बढ़कर लगभग 11,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। जुलाई से सितंबर 2026 की एक ही तिमाही में 5,400 करोड़ रुपये की बिक्री इस बात का सबूत है कि उपभोक्ता इन ब्रांड्स को हाथों-हाथ ले रहे हैं।
सिर्फ सॉफ्ट ड्रिंक नहीं पूरा कंज्यूमर इकोसिस्टम
रिलायंस ने अपनी रणनीति को केवल कैंपा तक सीमित नहीं रखा। कन्फेक्शनरी में रावलगांव, पर्सनल केयर में वेलवेट और अब इलेक्ट्रॉनिक्स में बीपीएल व केल्विनटर की वापसी इसी सोच का हिस्सा है। टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे प्रोडक्ट्स में रिलायंस वही फॉर्मूला लागू कर रहा है। FMCG के मुकाबले इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। एलजी, सैमसंग और सोनी जैसी कंपनियां दो दशकों से भारतीय बाजार में जमी हुई हैं। सवाल यह है कि क्या 20-30 साल का युवा कंज्यूमर बीपीएल टीवी या केल्विनटर फ्रिज को चुन पाएगा? विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ सस्ती कीमत काफी नहीं होगी। ब्रांड को भरोसा, क्वालिटी और आधुनिक डिजाइन के साथ पेश करना होगा।
रिलायंस की सबसे बड़ी ताकत
रिलायंस के पास दो ऐसे हथियार हैं जो किसी भी प्रतिस्पर्धी को परेशान कर सकते हैं मजबूत बैलेंस शीट और विशाल रिटेल नेटवर्क। थर्ड आईसाइट के CEO देवांगशु दत्ता के अनुसार, रिलायंस जिस भी सेक्टर में उतरती है वहां लीडर बनने की कोशिश करती है। कंपनी नुकसान सहकर भी लंबे समय तक निवेश कर सकती है जब तक कि स्केल और मुनाफा दोनों हासिल न हो जाएं।
टियर-2 और टियर-3 शहरों पर बड़ा दांव
जहां ग्लोबल ब्रांड प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस करते हैं वहीं रिलायंस की नजर छोटे शहरों पर है। भारत में अब भी टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और AC की पैठ कम है जिससे ग्रोथ की जबरदस्त संभावनाएं मौजूद हैं। ई-कॉमर्स, रीजनल रिटेल चेन और लोकल आउटलेट्स के जरिए रिलायंस तेजी से विस्तार की तैयारी में है।
FMCG में 1 लाख करोड़ का सपना
ईशा अंबानी ने AGM में साफ किया कि रिलायंस का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में FMCG रेवेन्यू को 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। कंपनी 30 लाख आउटलेट तक डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ाने, 40,000 करोड़ रुपये के फूड पार्क और भारी मैन्युफैक्चरिंग निवेश की योजना पर काम कर रही है। कैंपा-कोला की दो अंकों की बाजार हिस्सेदारी ने कोका-कोला और पेप्सिको जैसे दिग्गजों को सीधी चुनौती दी है।












