क्या ये बड़ी मंदी की आहट है? बाजार में अचानक आई तूफानी गिरावट

Stock Market Crash: अमेरिका से लेकर भारत तक शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया है। सेंसेक्स करीब 800 अंक और निफ्टी 200 अंक से अधिक टूट गया है जबकि आईटी सेक्टर के बड़े शेयर जैसे TCS, Infosys और HCL Tech में 5-6 फीसदी तक की गिरावट देखी गई है।

Stock Market
आज शेयर बाजार में बड़ी गिरावट
locationभारत
userअसमीना
calendar13 Feb 2026 10:46 AM
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हाल ही में वैश्विक शेयर बाजारों में अचानक और तेज गिरावट देखी गई है। अमेरिका के बाजारों से लेकर भारत तक निवेशकों के लिए यह संकटपूर्ण समय बन गया है। भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स लगभग 800 अंक टूटकर 82,902.73 पर और निफ्टी 200 अंकों की गिरावट के साथ 25,606.90 पर कारोबार कर रहा था। निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी नई तकनीकों का प्रभाव है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI अब सिर्फ तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं है बल्कि यह वैश्विक स्तर पर विभिन्न उद्योगों के बिजनेस मॉडल पर असर डाल रहा है।

IT सेक्टर पर पड़ा गिरावट के सबसे बड़ा असर

भारतीय बाजार में इस गिरावट का सबसे बड़ा असर IT सेक्टर पर पड़ा है। Infosys के शेयर लगभग 6% तक गिर गए हैं वहीं TCS में 5% से अधिक, HCL टेक में 4.14% और टेक महिंद्रा के शेयरों में करीब 3% की गिरावट देखी गई। BSE के टॉप 30 शेयरों में से 24 शेयरों में गिरावट रही जबकि केवल 6 शेयर मामूली तेजी पर बंद हुए। कुल 3,337 BSE शेयरों में से 2,327 शेयर गिरावट पर और 847 शेयर तेजी पर कारोबार कर रहे थे। इसके अलावा 41 शेयर 52 सप्ताह के हाई पर और 106 शेयर 52 सप्ताह के लोअर स्तर पर पहुंचे।

अमेरिकी बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट

वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों की चिंता बढ़ी है। अमेरिकी बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। Dow Jones 669.42 अंक या 1.34% गिरकर 49,451.98 पर बंद हुआ Nasdaq में सबसे ज्यादा गिरावट 2.03% या 469.32 अंक रही और S&P 500 इंडेक्स 1.57% या 108.71 अंक गिरकर 6,832.76 पर क्लोज हुआ। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी बाजार में हुई इस गिरावट से लगभग एक ट्रिलियन डॉलर (करीब 90 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति घट गई है।

वैश्विक बाजार में क्यों आई गिरावट?

विशेषज्ञों का कहना है कि AI टूल्स के तेजी से बढ़ते उपयोग से पारंपरिक व्यवसायों पर दबाव बढ़ रहा है। खासकर ट्रकिंग, लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और सॉफ्टवेयर सेक्टर में इसका असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। निवेशक डर रहे हैं कि नई AI तकनीकें कंपनियों के मुनाफे पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। यही वजह है कि वैश्विक बाजार में अचानक गिरावट आई है और भारतीय बाजार भी इसका असर झेल रहा है।

निवेशकों के लिए सलाह

निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे इस समय जल्दबाजी में शेयर बेचने के बजाय सतर्क रहें और बाजार की लंबी अवधि की संभावनाओं पर ध्यान दें। विशेषज्ञ मानते हैं कि AI का प्रभाव भविष्य में स्थायी रहेगा, लेकिन फिलहाल यह केवल संभावित अस्थिरता का संकेत दे रहा है।

(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने योग्यत वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें।)

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क्रेडिट कार्ड बेचने से पहले 10 बार सोचेगा बैंक, RBI का नया आदेश

RBI: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों की मिस-सेलिंग और एक क्लिक सहमति की प्रक्रिया पर सख्ती करते हुए नए नियम प्रस्तावित किए हैं। अब बैंक ग्राहकों को लोन, क्रेडिट कार्ड या इंश्योरेंस बेचते समय हर प्रोडक्ट के लिए अलग और स्पष्ट मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

RBI
RBI के नए मिस‑सेलिंग नियम क्या हैं?
locationभारत
userअसमीना
calendar12 Feb 2026 11:16 AM
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों की मिस-सेलिंग और डिजिटल एक क्लिक सहमति पर सख्ती करते हुए नए नियम प्रस्तावित किए हैं। अगर आप बैंक से लोन लेते समय बिना आपकी सहमति के क्रेडिट कार्ड, इंश्योरेंस या अन्य प्रोडक्ट्स पा रहे थे तो यह खबर आपके लिए है। RBI का मानना है कि ऐसे तरीके ग्राहक के हित में नहीं हैं। अब हर प्रोडक्ट के लिए अलग से साफ और स्पष्ट मंजूरी लेना जरूरी होगा। इन नए नियमों से बैंकिंग सेल्स की पूरी रणनीति बदलने वाली है और ग्राहकों को सही जानकारी मिलने में मदद मिलेगी।

बैंकों की मिस-सेलिंग पर रोक

अक्सर देखा गया है कि ग्राहक बैंक जाकर लोन या खाता खुलवाता है और उसे बिना पूरी जानकारी के इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड या क्रेडिट कार्ड थमा दिया जाता है। डिजिटल फॉर्म में एक ही I Agree बटन दबाने से कई प्रोडक्ट्स स्वचालित रूप से जुड़ जाते थे। RBI ने इसे ग्राहक हितों के खिलाफ माना और नए नियमों में यह साफ किया कि अब हर प्रोडक्ट के लिए अलग मंजूरी जरूरी होगी।

ग्राहक की प्रोफाइल के अनुसार बिक्री

नए नियमों के अनुसार बैंक को यह जांचना होगा कि जो प्रोडक्ट वह बेच रहा है वह ग्राहक की आय, जरूरत और प्रोफाइल के अनुसार है या नहीं। उदाहरण के लिए, अगर किसी ग्राहक की आय सीमित है और उसे जटिल निवेश योजना दी जाती है तो इसे गलत बिक्री माना जाएगा। इसके अलावा, बैंक को यह स्पष्ट करना होगा कि प्रोडक्ट उनकी खुद की सर्विस है या किसी तीसरे पक्ष की। इससे ग्राहकों को सही और पारदर्शी जानकारी मिलेगी।

एक क्लिक से मंजूरी का दौर खत्म

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब पहले से टिक किए गए बॉक्स या एक साथ कई शर्तों को स्वीकार करने का तरीका बंद हो जाएगा। हर प्रोडक्ट के लिए अलग-अलग सहमति लेना जरूरी होगा। ग्राहक को स्पष्ट बताया जाएगा कि वह किस प्रोडक्ट के लिए हां कह रहा है और बैंक को इसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। यह कदम छुपे हुए एग्रीमेंट और उलझे हुए कंसेंट सिस्टम पर रोक लगाएगा।

डार्क पैटर्न पर सख्ती

RBI ने डिजिटल तरीकों को भी निशाना बनाया है जिन्हें डार्क पैटर्न कहा जाता है। ये ऐसे तरीके हैं जो ग्राहक को भ्रमित करते हैं जैसे पहले से टिक किए बॉक्स, दबाव बनाना या आज आखिरी मौका दिखाना। अब बैंकों को अपने ऐप और वेबसाइट की नियमित जांच करनी होगी और ऐसे भ्रामक फीचर्स हटाने होंगे। इससे डिजिटल बैंकिंग अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी।

एजेंट की जिम्मेदारी भी बैंक पर

अक्सर बैंक शाखाओं में मौजूद एजेंट असली बैंक कर्मचारी नहीं होते लेकिन ग्राहक उन्हें कर्मचारी मान लेते हैं। नए नियमों के तहत बैंक को ऐसे थर्ड पार्टी एजेंटों की सूची सार्वजनिक करनी होगी उनकी ट्रेनिंग की जिम्मेदारी बैंक की होगी और एजेंट को स्पष्ट करना होगा कि वह स्थायी बैंक कर्मचारी नहीं है। इसके अलावा, कॉल करने का समय सीमित होगा जिससे अनचाहे कॉल और दबाव वाली बिक्री में कमी आएगी।

गलत बिक्री पर कार्रवाई

अगर किसी बैंक ने प्रोडक्ट गलत तरीके से बेचा या पूरी जानकारी नहीं दी तो ग्राहक को पैसा लौटाना होगा। यदि ग्राहक को आर्थिक नुकसान हुआ है, तो उसकी भरपाई भी करनी पड़ेगी। हर बिक्री के 30 दिनों में ग्राहक से फीडबैक लिया जाएगा और हर छह महीने में पूरी रिपोर्ट तैयार करनी होगी। यह नियम बैंक की जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे।

नियम कब से लागू होंगे?

यह अभी ड्राफ्ट गाइडलाइंस हैं। 4 मार्च 2026 तक सुझाव दिए जा सकते हैं और अंतिम नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे। बैंकों को इससे पहले अपनी नीतियां, डिजिटल सिस्टम और एजेंट व्यवस्था में जरूरी बदलाव करने होंगे।

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बदल जाएंगे PAN के नियम, आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर?

इनकम टैक्स रूल्स 2026 के तहत पैन कार्ड से जुड़े कई बड़े बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू हो सकते हैं। सीबीडीटी ने ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनमें बैंक कैश जमा लिमिट, प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री, गाड़ी खरीद, इंश्योरेंस पॉलिसी, होटल पेमेंट और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन पर नए प्रावधान प्रस्तावित हैं।

Pan Card
PAN Card New Update
locationभारत
userअसमीना
calendar11 Feb 2026 01:25 PM
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अगर आप बैंक में पैसे जमा करते हैं, गाड़ी खरीदने की सोच रहे हैं, प्रॉपर्टी डील करने वाले हैं या होटल में बड़ा पेमेंट करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सरकार ने नए Income Tax Rules 2026 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है जिसमें PAN कार्ड से जुड़े कई अहम बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। ये नियम नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 का हिस्सा हैं और 1 अप्रैल 2026 से लागू किए जाने की तैयारी है। इन बदलावों का मकसद छोटे लेन-देन को आसान बनाना और बड़े ट्रांजैक्शन पर सख्त निगरानी रखना है ताकि टैक्स सिस्टम ज्यादा पारदर्शी और सरल बन सके।

ड्राफ्ट नियमों को किया गया सार्वजनिक

CBDT ने बजट 2026 के बाद इन ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक किया है ताकि आम लोग और स्टेकहोल्डर्स अपनी राय दे सकें। सभी सुझावों पर विचार करने के बाद मार्च 2026 की शुरुआत में फाइनल नियमों को नोटिफाई किया जा सकता है। ऐसे में अभी यह ड्राफ्ट स्टेज में है लेकिन अगर ये नियम इसी रूप में लागू होते हैं तो आम लोगों के रोजमर्रा के वित्तीय व्यवहार पर सीधा असर पड़ेगा।

बैंक में कैश जमा करने को लेकर हुआ बड़ा बदलाव

सबसे बड़ा बदलाव बैंक में कैश जमा और निकासी के नियमों में प्रस्तावित है। ड्राफ्ट के अनुसार, अब PAN कार्ड तभी जरूरी होगा जब कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में अपने एक या एक से अधिक बैंक खातों से कुल 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा नकद जमा या निकासी करता है। फिलहाल नियम यह है कि एक दिन में 50 हजार रुपये से ज्यादा कैश जमा करने पर PAN देना पड़ता है। नए प्रस्ताव में डेली लिमिट की जगह सालभर की कुल राशि को आधार बनाया गया है जिससे छोटे और सामान्य बैंकिंग ट्रांजैक्शन करने वालों को राहत मिल सकती है।

PAN को लेकर नियम सख्त करने की तैयारी

इंश्योरेंस सेक्टर में भी PAN को लेकर नियम सख्त करने की तैयारी है। ड्राफ्ट के मुताबिक, जब भी कोई व्यक्ति किसी इंश्योरेंस कंपनी के साथ अकाउंट आधारित रिश्ता शुरू करेगा तब PAN देना अनिवार्य होगा। अभी तक PAN की जरूरत मुख्य रूप से तब पड़ती है जब लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम एक साल में 50 हजार रुपये से ज्यादा हो। नए नियम लागू होने पर इंश्योरेंस से जुड़े ट्रांजैक्शन पर निगरानी और मजबूत होगी और टैक्स पारदर्शिता बढ़ेगी।

वाहन खरीदने वालों के लिए राहत की खबर

वाहन खरीदने वालों के लिए राहत की खबर है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, अब PAN कार्ड तभी देना होगा जब कार या बाइक की कीमत 5 लाख रुपये से ज्यादा होगी। वर्तमान में किसी भी कीमत की गाड़ी खरीदने पर PAN देना अनिवार्य माना जाता है और दोपहिया वाहनों को लेकर स्पष्टता भी कम थी। नए नियम से सस्ती कार या बाइक खरीदने वालों को कागजी प्रक्रिया में आसानी मिल सकती है।

प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने के नियमों में भी बदलाव

प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने के नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव है। ड्राफ्ट के अनुसार, अब 20 लाख रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी डील पर ही PAN देना होगा जबकि अभी यह सीमा 10 लाख रुपये है। प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे मध्यम वर्ग को कुछ राहत मिल सकती है खासकर उन शहरों में जहां संपत्ति के दाम तेजी से बढ़े हैं।

बढ़ाई जाएगी PAN की लिमिट!

होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, कन्वेंशन सेंटर या इवेंट मैनेजर को किए जाने वाले पेमेंट पर भी PAN की लिमिट बढ़ाने का प्रस्ताव है। नए ड्राफ्ट के मुताबिक, अब PAN तभी देना होगा जब बिल 1 लाख रुपये से ज्यादा होगा। फिलहाल यह सीमा 50 हजार रुपये है। इस बदलाव से शादी, पारिवारिक समारोह या सामान्य होटल स्टे के दौरान लोगों को बार-बार PAN देने की परेशानी कम हो सकती है।

वैल्यू लिमिट बढ़ाने का सुझाव भी शामिल

ड्राफ्ट नियमों में कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को दिए जाने वाले कुछ बेनिफिट्स की वैल्यू लिमिट बढ़ाने का सुझाव भी शामिल है। इससे सैलरी स्ट्रक्चर को सरल बनाने और अनुपालन प्रक्रिया को आसान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला फाइनल नोटिफिकेशन के बाद ही साफ होगा। सरकार ने डिजिटल लेन-देन और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन पर भी ध्यान दिया है। ड्राफ्ट में प्रस्ताव है कि क्रिप्टो एक्सचेंज इनकम टैक्स विभाग के साथ ट्रांजैक्शन की जानकारी साझा करेंगे। साथ ही डिजिटल रुपया या CBDC को वैध इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का दर्जा देने की बात भी कही गई है। इससे डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा और टैक्स ट्रैकिंग अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।

ट्रांजैक्शन को सरल बनाने की कोशिश

इन सभी प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य टैक्स सिस्टम को आधुनिक, पारदर्शी और व्यवहारिक बनाना है। छोटे और रोजमर्रा के ट्रांजैक्शन को सरल बनाने की कोशिश की गई है जबकि बड़े लेन-देन पर निगरानी को और मजबूत करने की योजना है। यदि ये नियम तय समय पर लागू होते हैं तो 1 अप्रैल 2026 से पैसों के लेन-देन का तरीका काफी हद तक बदल सकता है।

दलावों के लिए पहले से करें तैयारी

फिलहाल ये नियम ड्राफ्ट रूप में हैं और अंतिम अधिसूचना के बाद ही पूरी तरह लागू होंगे। इसलिए आम लोगों और व्यवसायों को सलाह दी जाती है कि वे इन प्रस्तावित नियमों को ध्यान से समझें और आने वाले बदलावों के लिए पहले से तैयारी रखें। सही जानकारी और समय पर योजना बनाकर आप इन बदलावों का फायदा उठा सकते हैं और किसी भी तरह की परेशानी से बच सकते हैं।