दिल्ली-एनसीआर को मिलेगा मेट्रो बूस्ट: फेज-4 के 3 कॉरिडोर पर काम तेज
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, इन कॉरिडोर के बनने से राजधानी के कई इलाकों को सीधे मेट्रो से जोड़ा जा सकेगा। इससे सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा, निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि यह निर्माण कार्य चार वर्षों में पूरा कर लिया जाए।

Delhi News : दिल्ली में मेट्रो नेटवर्क को और विस्तार देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मेट्रो फेज-4 के तहत तीन नए कॉरिडोर पर जल्द काम शुरू होने जा रहा है। दिल्ली सरकार ने इन परियोजनाओं में अपने हिस्से का 3,386.18 करोड़ रुपये का फंड जारी कर दिया है। तीनों कॉरिडोर की कुल लंबाई 47.225 किलोमीटर होगी और इन पर अनुमानित कुल लागत करीब 14,630.80 करोड़ रुपये बताई गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, इन कॉरिडोर के बनने से राजधानी के कई इलाकों को सीधे मेट्रो से जोड़ा जा सकेगा। इससे सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा, निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि यह निर्माण कार्य चार वर्षों में पूरा कर लिया जाए।
दिल्ली-एनसीआर कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा बूस्ट
सरकार का कहना है कि इन कॉरिडोर के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है और कुछ हिस्सों में काम शुरू भी हो चुका है। नई लाइनों के शुरू होने से उत्तर, मध्य और दक्षिण दिल्ली के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इसका सीधा असर सड़कों पर दिखेगा—ट्रैफिक दबाव कम होगा, यात्रियों का समय बचेगा और मेट्रो को प्राथमिक परिवहन विकल्प के रूप में बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि फेज-4 के ये कॉरिडोर दिल्ली को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक और मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम देंगे। सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा सुविधा के साथ-साथ यह कदम निजी वाहनों की संख्या कम करने और प्रदूषण पर नियंत्रण की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीनों परियोजनाओं में दिल्ली का वित्तीय योगदान
सरकारी आकलन के मुताबिक, फेज-4 के इन कॉरिडोरों पर निवेश का खाका भी साफ हो चुका है। लाजपत नगर–साकेत जी-ब्लॉक और इंद्रलोक इंद्रप्रस्थ इन दोनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 8,399.81 करोड़ रुपये तय की गई है, जिसमें से 1,987.86 करोड़ रुपये का वित्तीय भार दिल्ली सरकार उठाएगी। वहीं रिठाला–कुंडली कॉरिडोर को दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस लाइन पर करीब 6,230.99 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसमें 1,398.32 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार देगी, जबकि शेष 5,685.22 करोड़ रुपये का हिस्सा दिल्ली और हरियाणा मिलकर वहन करेंगे। यानी, इन तीनों कॉरिडोर के जरिए सरकारें न सिर्फ मेट्रो नेटवर्क बढ़ाने जा रही हैं, बल्कि राजधानी और एनसीआर के बीच आवागमन को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी भी दिख रही है।
1) लाजपत नगर–साकेत जी-ब्लॉक कॉरिडोर
लाजपत नगर–साकेत जी-ब्लॉक कॉरिडोर दक्षिण दिल्ली के लिए कनेक्टिविटी का बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। करीब 8.385 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में 8 एलिवेटेड स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिससे सफर तेज़, सुगम और अधिक भरोसेमंद होगा। यह लाइन लाजपत नगर से शुरू होकर एंड्रूज गंज, ग्रेटर कैलाश-1, चिराग दिल्ली, पुष्प भवन होते हुए साकेत डिस्ट्रिक्ट सेंटर और पुष्प विहार जैसे प्रमुख इलाकों से गुजरेगी। इसके चालू होते ही दक्षिणी दिल्ली के कई रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों को सीधी मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे लोकल आवागमन में लगने वाला समय घटेगा और सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।
2) इंद्रलोक–इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर
इंद्रलोक–इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर को मेट्रो फेज-4 का सबसे रणनीतिक लिंक माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे मध्य दिल्ली की भीड़भाड़ और प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट्स को राहत देगा। करीब 12.377 किलोमीटर लंबे इस रूट पर कुल 10 स्टेशन प्रस्तावित हैं—जिसमें 1 एलिवेटेड और 9 अंडरग्राउंड होंगे, ताकि घनी आबादी वाले इलाकों में न्यूनतम बाधा के साथ काम आगे बढ़ सके। यह कॉरिडोर इंद्रलोक से शुरू होकर दयाबस्ती, सराय रोहिल्ला, अजमल खान पार्क, झंडेवालान, नबी करीम होते हुए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, फिर दिल्ली गेट से गुजरते हुए दिल्ली सचिवालय–आईजी स्टेडियम तक पहुंचेगा। इसके शुरू होते ही शहर के सबसे व्यस्त हिस्सों में कनेक्टिविटी तेज़ होगी, रेलवे स्टेशन और प्रमुख सरकारी/व्यावसायिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनेगी और सड़क यातायात पर निर्भरता घटने की उम्मीद है।
3) रिठाला–कुंडली कॉरिडोर
रिठाला–कुंडली कॉरिडोर को फेज-4 का सबसे लंबा और सबसे ज्यादा असर डालने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है। करीब 26.463 किलोमीटर लंबे इस रूट पर 21 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जो उत्तर-पश्चिम दिल्ली को सीधे एनसीआर की ओर मजबूती से जोड़ेंगे। यह लाइन रिठाला से निकलकर रोहिणी के सेक्टर-25, 26, 31, 32 और 36 जैसे घनी आबादी वाले इलाकों से होते हुए बरवाला, फिर रोहिणी सेक्टर-34/35 और बवाना इंडस्ट्रियल एरिया (सेक्टर 3-4) को कवर करते हुए कुंडली तक पहुंचेगी। इसके चालू होने के बाद रोहिणी-बवाना-बॉर्डर बेल्ट में रोज़ाना का सफर अधिक तेज़ और भरोसेमंद होगा, औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनेगी और दिल्ली से कुंडली-सोनीपत तरफ आने-जाने वाले यात्रियों को ट्रैफिक से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। Delhi News
Delhi News : दिल्ली में मेट्रो नेटवर्क को और विस्तार देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मेट्रो फेज-4 के तहत तीन नए कॉरिडोर पर जल्द काम शुरू होने जा रहा है। दिल्ली सरकार ने इन परियोजनाओं में अपने हिस्से का 3,386.18 करोड़ रुपये का फंड जारी कर दिया है। तीनों कॉरिडोर की कुल लंबाई 47.225 किलोमीटर होगी और इन पर अनुमानित कुल लागत करीब 14,630.80 करोड़ रुपये बताई गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, इन कॉरिडोर के बनने से राजधानी के कई इलाकों को सीधे मेट्रो से जोड़ा जा सकेगा। इससे सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा, निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि यह निर्माण कार्य चार वर्षों में पूरा कर लिया जाए।
दिल्ली-एनसीआर कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा बूस्ट
सरकार का कहना है कि इन कॉरिडोर के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है और कुछ हिस्सों में काम शुरू भी हो चुका है। नई लाइनों के शुरू होने से उत्तर, मध्य और दक्षिण दिल्ली के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इसका सीधा असर सड़कों पर दिखेगा—ट्रैफिक दबाव कम होगा, यात्रियों का समय बचेगा और मेट्रो को प्राथमिक परिवहन विकल्प के रूप में बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि फेज-4 के ये कॉरिडोर दिल्ली को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक और मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम देंगे। सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा सुविधा के साथ-साथ यह कदम निजी वाहनों की संख्या कम करने और प्रदूषण पर नियंत्रण की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीनों परियोजनाओं में दिल्ली का वित्तीय योगदान
सरकारी आकलन के मुताबिक, फेज-4 के इन कॉरिडोरों पर निवेश का खाका भी साफ हो चुका है। लाजपत नगर–साकेत जी-ब्लॉक और इंद्रलोक इंद्रप्रस्थ इन दोनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 8,399.81 करोड़ रुपये तय की गई है, जिसमें से 1,987.86 करोड़ रुपये का वित्तीय भार दिल्ली सरकार उठाएगी। वहीं रिठाला–कुंडली कॉरिडोर को दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस लाइन पर करीब 6,230.99 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसमें 1,398.32 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार देगी, जबकि शेष 5,685.22 करोड़ रुपये का हिस्सा दिल्ली और हरियाणा मिलकर वहन करेंगे। यानी, इन तीनों कॉरिडोर के जरिए सरकारें न सिर्फ मेट्रो नेटवर्क बढ़ाने जा रही हैं, बल्कि राजधानी और एनसीआर के बीच आवागमन को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी भी दिख रही है।
1) लाजपत नगर–साकेत जी-ब्लॉक कॉरिडोर
लाजपत नगर–साकेत जी-ब्लॉक कॉरिडोर दक्षिण दिल्ली के लिए कनेक्टिविटी का बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। करीब 8.385 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में 8 एलिवेटेड स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिससे सफर तेज़, सुगम और अधिक भरोसेमंद होगा। यह लाइन लाजपत नगर से शुरू होकर एंड्रूज गंज, ग्रेटर कैलाश-1, चिराग दिल्ली, पुष्प भवन होते हुए साकेत डिस्ट्रिक्ट सेंटर और पुष्प विहार जैसे प्रमुख इलाकों से गुजरेगी। इसके चालू होते ही दक्षिणी दिल्ली के कई रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों को सीधी मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे लोकल आवागमन में लगने वाला समय घटेगा और सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।
2) इंद्रलोक–इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर
इंद्रलोक–इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर को मेट्रो फेज-4 का सबसे रणनीतिक लिंक माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे मध्य दिल्ली की भीड़भाड़ और प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट्स को राहत देगा। करीब 12.377 किलोमीटर लंबे इस रूट पर कुल 10 स्टेशन प्रस्तावित हैं—जिसमें 1 एलिवेटेड और 9 अंडरग्राउंड होंगे, ताकि घनी आबादी वाले इलाकों में न्यूनतम बाधा के साथ काम आगे बढ़ सके। यह कॉरिडोर इंद्रलोक से शुरू होकर दयाबस्ती, सराय रोहिल्ला, अजमल खान पार्क, झंडेवालान, नबी करीम होते हुए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, फिर दिल्ली गेट से गुजरते हुए दिल्ली सचिवालय–आईजी स्टेडियम तक पहुंचेगा। इसके शुरू होते ही शहर के सबसे व्यस्त हिस्सों में कनेक्टिविटी तेज़ होगी, रेलवे स्टेशन और प्रमुख सरकारी/व्यावसायिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनेगी और सड़क यातायात पर निर्भरता घटने की उम्मीद है।
3) रिठाला–कुंडली कॉरिडोर
रिठाला–कुंडली कॉरिडोर को फेज-4 का सबसे लंबा और सबसे ज्यादा असर डालने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है। करीब 26.463 किलोमीटर लंबे इस रूट पर 21 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जो उत्तर-पश्चिम दिल्ली को सीधे एनसीआर की ओर मजबूती से जोड़ेंगे। यह लाइन रिठाला से निकलकर रोहिणी के सेक्टर-25, 26, 31, 32 और 36 जैसे घनी आबादी वाले इलाकों से होते हुए बरवाला, फिर रोहिणी सेक्टर-34/35 और बवाना इंडस्ट्रियल एरिया (सेक्टर 3-4) को कवर करते हुए कुंडली तक पहुंचेगी। इसके चालू होने के बाद रोहिणी-बवाना-बॉर्डर बेल्ट में रोज़ाना का सफर अधिक तेज़ और भरोसेमंद होगा, औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनेगी और दिल्ली से कुंडली-सोनीपत तरफ आने-जाने वाले यात्रियों को ट्रैफिक से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। Delhi News












