दिल्ली-एनसीआर को मिलेगा मेट्रो बूस्ट: फेज-4 के 3 कॉरिडोर पर काम तेज

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, इन कॉरिडोर के बनने से राजधानी के कई इलाकों को सीधे मेट्रो से जोड़ा जा सकेगा। इससे सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा, निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि यह निर्माण कार्य चार वर्षों में पूरा कर लिया जाए।

दिल्ली मेट्रो नेटवर्क
दिल्ली मेट्रो नेटवर्क
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar19 Jan 2026 09:44 AM
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Delhi News : दिल्ली में मेट्रो नेटवर्क को और विस्तार देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मेट्रो फेज-4 के तहत तीन नए कॉरिडोर पर जल्द काम शुरू होने जा रहा है। दिल्ली सरकार ने इन परियोजनाओं में अपने हिस्से का 3,386.18 करोड़ रुपये का फंड जारी कर दिया है। तीनों कॉरिडोर की कुल लंबाई 47.225 किलोमीटर होगी और इन पर अनुमानित कुल लागत करीब 14,630.80 करोड़ रुपये बताई गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, इन कॉरिडोर के बनने से राजधानी के कई इलाकों को सीधे मेट्रो से जोड़ा जा सकेगा। इससे सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा, निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि यह निर्माण कार्य चार वर्षों में पूरा कर लिया जाए।

दिल्ली-एनसीआर कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा बूस्ट

सरकार का कहना है कि इन कॉरिडोर के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है और कुछ हिस्सों में काम शुरू भी हो चुका है। नई लाइनों के शुरू होने से उत्तर, मध्य और दक्षिण दिल्ली के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इसका सीधा असर सड़कों पर दिखेगा—ट्रैफिक दबाव कम होगा, यात्रियों का समय बचेगा और मेट्रो को प्राथमिक परिवहन विकल्प के रूप में बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि फेज-4 के ये कॉरिडोर दिल्ली को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक और मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम देंगे। सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा सुविधा के साथ-साथ यह कदम निजी वाहनों की संख्या कम करने और प्रदूषण पर नियंत्रण की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तीनों परियोजनाओं में दिल्ली का वित्तीय योगदान

सरकारी आकलन के मुताबिक, फेज-4 के इन कॉरिडोरों पर निवेश का खाका भी साफ हो चुका है। लाजपत नगर–साकेत जी-ब्लॉक और इंद्रलोक इंद्रप्रस्थ इन दोनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 8,399.81 करोड़ रुपये तय की गई है, जिसमें से 1,987.86 करोड़ रुपये का वित्तीय भार दिल्ली सरकार उठाएगी। वहीं रिठाला–कुंडली कॉरिडोर को दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस लाइन पर करीब 6,230.99 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसमें 1,398.32 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार देगी, जबकि शेष 5,685.22 करोड़ रुपये का हिस्सा दिल्ली और हरियाणा मिलकर वहन करेंगे। यानी, इन तीनों कॉरिडोर के जरिए सरकारें न सिर्फ मेट्रो नेटवर्क बढ़ाने जा रही हैं, बल्कि राजधानी और एनसीआर के बीच आवागमन को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी भी दिख रही है।

1) लाजपत नगर–साकेत जी-ब्लॉक कॉरिडोर

लाजपत नगर–साकेत जी-ब्लॉक कॉरिडोर दक्षिण दिल्ली के लिए कनेक्टिविटी का बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। करीब 8.385 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में 8 एलिवेटेड स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिससे सफर तेज़, सुगम और अधिक भरोसेमंद होगा। यह लाइन लाजपत नगर से शुरू होकर एंड्रूज गंज, ग्रेटर कैलाश-1, चिराग दिल्ली, पुष्प भवन होते हुए साकेत डिस्ट्रिक्ट सेंटर और पुष्प विहार जैसे प्रमुख इलाकों से गुजरेगी। इसके चालू होते ही दक्षिणी दिल्ली के कई रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों को सीधी मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे लोकल आवागमन में लगने वाला समय घटेगा और सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।

2) इंद्रलोक–इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर

इंद्रलोक–इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर को मेट्रो फेज-4 का सबसे रणनीतिक लिंक माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे मध्य दिल्ली की भीड़भाड़ और प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट्स को राहत देगा। करीब 12.377 किलोमीटर लंबे इस रूट पर कुल 10 स्टेशन प्रस्तावित हैं—जिसमें 1 एलिवेटेड और 9 अंडरग्राउंड होंगे, ताकि घनी आबादी वाले इलाकों में न्यूनतम बाधा के साथ काम आगे बढ़ सके। यह कॉरिडोर इंद्रलोक से शुरू होकर दयाबस्ती, सराय रोहिल्ला, अजमल खान पार्क, झंडेवालान, नबी करीम होते हुए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, फिर दिल्ली गेट से गुजरते हुए दिल्ली सचिवालय–आईजी स्टेडियम तक पहुंचेगा। इसके शुरू होते ही शहर के सबसे व्यस्त हिस्सों में कनेक्टिविटी तेज़ होगी, रेलवे स्टेशन और प्रमुख सरकारी/व्यावसायिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनेगी और सड़क यातायात पर निर्भरता घटने की उम्मीद है।

3) रिठाला–कुंडली कॉरिडोर

रिठाला–कुंडली कॉरिडोर को फेज-4 का सबसे लंबा और सबसे ज्यादा असर डालने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है। करीब 26.463 किलोमीटर लंबे इस रूट पर 21 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जो उत्तर-पश्चिम दिल्ली को सीधे एनसीआर की ओर मजबूती से जोड़ेंगे। यह लाइन रिठाला से निकलकर रोहिणी के सेक्टर-25, 26, 31, 32 और 36 जैसे घनी आबादी वाले इलाकों से होते हुए बरवाला, फिर रोहिणी सेक्टर-34/35 और बवाना इंडस्ट्रियल एरिया (सेक्टर 3-4) को कवर करते हुए कुंडली तक पहुंचेगी। इसके चालू होने के बाद रोहिणी-बवाना-बॉर्डर बेल्ट में रोज़ाना का सफर अधिक तेज़ और भरोसेमंद होगा, औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनेगी और दिल्ली से कुंडली-सोनीपत तरफ आने-जाने वाले यात्रियों को ट्रैफिक से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। Delhi News

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नितिन नबीन का उदय भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत

भाजपा ने आज एक बड़ा संगठनात्मक और राजनीतिक कदम उठाते हुए 45 वर्षीय युवा नेता नितिन नबीन को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह फैसला केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि पार्टी के नेतृत्व में एक पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक भी माना जा रहा है।

Rise of Nitin Nabin BJP
नितिन नबीन के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar18 Jan 2026 10:12 PM
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भाजपा आलाकमान ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर यह साफ संकेत दिया है कि पार्टी में नेतृत्व का रास्ता उम्र या वंशवाद नहीं, बल्कि मेहनत, ऊर्जा और संगठनात्मक क्षमता तय करती है। इस कदम के साथ ही भाजपा ने यह भी दिखाया है कि वह आगामी चुनावों के लिए युवा नेतृत्व तैयार करने में विश्वास रखती है। इससे पहले कांग्रेस की कमान 83 वर्षीय मल्लिकार्जुन खड़गे के हाथ में है, जो इस बदलाव को और भी महत्वपूर्ण बना देता है।

पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक

बता दें कि भाजपा का नेतृत्व अनुभव में पहली, दूसरी और तीसरी पीढ़ी के नेताओं के बाद अब चौथी पीढ़ी यानी युवा नेताओं की तरफ बढ़ रहा है। पार्टी की स्थापना के बाद से ही अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गजों ने संगठन को मजबूत किया। इसके बाद नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह जैसे युवा नेताओं ने पार्टी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। अब नितिन नबीन के नेतृत्व में नई पीढ़ी ने नेतृत्व की बागडोर संभाली है।

सामाजिक और क्षेत्रीय परिदृश्य

बता दें कि नितिन नबीन का चुनाव क्षेत्रीय संतुलन को भी ध्यान में रखते हुए किया गया है। बिहार से आने वाले नबीन पूर्वी भारत से भाजपा के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनका चयन इस बात का संकेत है कि भाजपा अब केवल हिंदी पट्टी या पश्चिमी भारत पर ही ध्यान केंद्रित नहीं कर रही, बल्कि बिहार, बंगाल, ओडिशा, असम और उत्तर-पूर्व जैसे राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

राजनीतिक अनुभव और कार्यक्षेत्र

बता दें कि 2006 में अपनी राजनीतिक शुरुआत करने वाले नबीन ने पटना पश्चिम विधानसभा सीट से उपचुनाव जीत कर अपने करियर की शुरुआत की। तब से वे लगातार पांच बार इस सीट से विजेता रहे हैं। राज्य सरकार में मंत्री के रूप में उन्होंने पथ निर्माण, नगर विकास, विधि जैसे अहम विभाग संभाले। संगठन में भी उन्होंने युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव और बिहार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह सिक्किम और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संगठन प्रभारी रह चुके हैं।

तिन नबीन के नेतृत्व में लड़ा जाएगा 2029 का चुनाव

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने भाषण में कहा था कि उन्होंने एक लाख युवाओं को राजनीति में लाने का संकल्प लिया है। संघ के प्रमुख मोहन भागवत समेत अन्य संगठनात्मक प्रमुखों ने भी युवाओं को नेतृत्व में आगे आने के संकेत दिए हैं। भाजपा का मानना है कि नितिन नबीन के नेतृत्व में 2029 के लोकसभा चुनाव लड़ा जाएगा, जो उनके तीन साल के कार्यकाल का अंतिम चुनाव होगा।

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दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने फेज-4 मेट्रो विस्तार को दी हरी झंडी!

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने दिल्ली के लोगों के लिए खुशखबरी दी है। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार को तेज़ करते हुए, मेट्रो फेज-IV के शेष तीन कॉरिडोरों के लिए अपने हिस्से का फंड जारी किया है।

CM Rekha Gupta Metro Network
सीएम रेखा गुप्ता द्वारा मेट्रो नेटवर्क का विस्तार (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar18 Jan 2026 08:23 PM
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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि मेट्रो फेज-IV की ये परियोजनाएं दिल्ली को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक परिवहन प्रणाली उपलब्ध कराएंगी। बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी से यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और समयबद्ध यात्रा का लाभ मिलेगा, साथ ही निजी वाहनों पर निर्भरता भी कम होगी।

47.225 किलोमीटर का नया मेट्रो नेटवर्क

बता दें कि फेज-IV के तहत प्रस्तावित तीनों कॉरिडोरों की कुल लंबाई 47.225 किलोमीटर होगी। इन पर करीब 14,630.80 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें से 3,386.18 करोड़ रुपये का वहन दिल्ली सरकार करेगी। परियोजनाओं के अगले चार वर्षों में पूरा होने की संभावना है।

ये हैं फेज-IV के तीन प्रमुख कॉरिडोर

बता दें कि पहला कॉरिडोर लाजपत नगर से साकेत जी-ब्लॉक तक प्रस्तावित है। इसकी लंबाई 8.385 किलोमीटर होगी और इसमें 8 एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे। दूसरा कॉरिडोर इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ तक होगा, जिसकी लंबाई 12.377 किलोमीटर है। इस लाइन पर कुल 10 स्टेशन होंगे, जिनमें एक एलिवेटेड और 9 अंडरग्राउंड स्टेशन शामिल हैं। इन दोनों कॉरिडोरों की संयुक्त परियोजना लागत 8,399.81 करोड़ रुपये है, जिसमें दिल्ली सरकार का अंश 1,987.86 करोड़ रुपये होगा। तीसरा और सबसे लंबा कॉरिडोर रिठाला से कुंडली तक प्रस्तावित है। यह दिल्ली को हरियाणा से जोड़ेगा। इसकी लंबाई 26.463 किलोमीटर होगी और इसमें 21 स्टेशन बनाए जाएंगे। इस परियोजना की कुल लागत 6,230.99 करोड़ रुपये है, जिसमें दिल्ली सरकार का अंश 1,398.32 करोड़ रुपये होगा, जबकि हरियाणा का हिस्सा 545.77 करोड़ रुपये तय किया गया है।

इन इलाकों को मिलेगा सीधा लाभ

बता दें कि लाजपत नगर–साकेत जी-ब्लॉक कॉरिडोर से लाजपत नगर, एंड्रूज गंज, ग्रेटर कैलाश-1, चिराग दिल्ली, पुष्प विहार और साकेत डिस्ट्रिक्ट सेंटर जैसे इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इंद्रलोक–इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर इंद्रलोक, दयाबस्ती, सराय रोहिल्ला, झंडेवालान, नबी करीम, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, दिल्ली गेट और दिल्ली सचिवालय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ेगा। रिठाला–कुंडली कॉरिडोर रोहिणी, बवाना औद्योगिक क्षेत्र, नरेला और कुंडली सहित उत्तर दिल्ली के कई इलाकों के लिए राहत लेकर आएगा।

परिवहन और पर्यावरण को मिलेगा लाभ

बता दें कि सरकार के अनुसार इन कॉरिडोरों के निर्माण से दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में मेट्रो कनेक्टिविटी का बड़ा विस्तार होगा। इससे सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, यात्रियों के समय की बचत होगी और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार राजधानी को विश्वस्तरीय शहर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है और मेट्रो नेटवर्क का विस्तार उसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है।


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