दिल्ली-NCR में उड़ान भरेगी फ्लाइंग टैक्सी, जल्द होगी शुरुआत
दावा है कि गुरुग्राम से कनॉट प्लेस (CP) जैसी दूरी, जो अभी ट्रैफिक, सिग्नल और भीड़ के कारण अक्सर डेढ़ से दो घंटे तक खिंच जाती है, वही सफर महज 7 से 10 मिनट में पूरा हो सकेगा। फिलहाल यही सफर सड़क या मेट्रो से अक्सर डेढ़ से दो घंटे तक खींच जाता है।

Delhi News : दिल्ली-एनसीआर की जाम भरी सड़कों पर रोज-रोज घंटों गंवाने वाले यात्रियों के लिए आने वाले समय में सफर की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। प्रस्तावित योजना के मुताबिक अब यात्रा केवल सड़क या मेट्रो तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आसमान में भी शॉर्ट रूट तैयार किया जाएगा। दावा है कि गुरुग्राम से कनॉट प्लेस (CP) जैसी दूरी, जो अभी ट्रैफिक, सिग्नल और भीड़ के कारण अक्सर डेढ़ से दो घंटे तक खिंच जाती है, वही सफर महज 7 से 10 मिनट में पूरा हो सकेगा। फिलहाल यही सफर सड़क या मेट्रो से अक्सर डेढ़ से दो घंटे तक खींच जाता है। ऐसे में एयर टैक्सी सेवा अगर जमीन पर उतरी, तो यह एनसीआर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।
CII की रिपोर्ट में हवाई नेटवर्क का रोडमैप
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की नई रिपोर्ट में दिल्ली-एनसीआर के लिए एयर टैक्सी सेवा शुरू करने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना के तहत गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक प्रस्तावित हवाई मार्ग से जोड़ने की रूपरेखा तैयार की जा सकती है। उद्देश्य साफ है भीड़भाड़ वाले कॉरिडोर पर दबाव कम हो और तेज कनेक्टिविटी का नया विकल्प तैयार हो।
एयर टैक्सी क्या होती है?
यह सेवा छोटी इलेक्ट्रिक एयर व्हीकल्स के जरिए चलेगी, जिन्हें eVTOL कहा जाता है। ये मशीनें हेलिकॉप्टर की तरह वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सकती हैं, यानी रनवे की जरूरत नहीं होगी। चूंकि ये बिजली से संचालित होती हैं, इसलिए इनमें धुआं नहीं निकलता और शहरी इलाकों में कम दूरी के तेज, स्मार्ट और तुलनात्मक रूप से पर्यावरण-अनुकूल सफर का विकल्प बन सकती हैं।
कौन-सा रूट होगा और कितनी दूरी तय होगी?
रिपोर्ट के मुताबिक गुरुग्राम–कनॉट प्लेस–जेवर के बीच करीब 65 से 75 किमी का एक तय हवाई कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव है, जिसे शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उतारने की योजना है। परीक्षण चरण सफल रहा तो इसे आगे चलकर कमर्शियल पैसेंजर सर्विस में बदला जा सकता है। संचालन के लिए शहर की चुनिंदा इमारतों की छतों पर वर्टीपोर्ट यानी छोटे लैंडिंग पैड बनाने की बात कही गई है ताकि ऑफिस हब, अस्पताल और एयरपोर्ट जैसे प्रमुख केंद्रों से कम जगह में टेकऑफ-लैंडिंग संभव हो सके। इस पहल में CII के साथ The ePlane Company, Sarla Aviation और Hunch Mobility जैसी कंपनियों के सहयोग के संकेत भी सामने आए हैं।
कब तक शुरू हो सकती है सेवा?
रिपोर्ट के संकेत बताते हैं कि एयर टैक्सी की शुरुआत आम यात्रियों से नहीं, बल्कि हाई-प्रायोरिटी सेवाओं से की जा सकती है—जैसे मेडिकल इमरजेंसी में त्वरित पहुंच, ऑर्गन ट्रांसपोर्ट और दवाइयों की फास्ट डिलीवरी। इसके बाद जब तकनीक, सुरक्षा और ऑपरेशन का परीक्षण सफल रहेगा, तब इसे धीरे-धीरे पब्लिक पैसेंजर सर्विस के तौर पर खोला जा सकता है। अनुमान है कि शुरुआती प्रक्रिया एक साल के भीतर गति पकड़ सकती है, जबकि यात्रियों के लिए 2–3 साल में टेस्ट फ्लाइट्स का रास्ता बन सकता है। रिपोर्ट में 2026 से 2028 के बीच इसे प्रयोगात्मक चरण में आगे बढ़ाने की संभावना भी जताई गई है।
फायदा क्या होगा?
एयर टैक्सी की सबसे बड़ी ताकत यही मानी जा रही है कि यह जाम से भरी सड़कों का दबाव कम कर सकती है। भीड़भाड़ वाले रूट पर यह एक वैकल्पिक और तेज माध्यम बनेगी, जिससे समय की बचत बड़े पैमाने पर हो सकती है। चूंकि यह सेवा इलेक्ट्रिक होगी, इसलिए पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटने और प्रदूषण कम होने की उम्मीद भी जताई जा रही है। इसके साथ ही एयरपोर्ट कनेक्टिविटी, खासकर जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक, तेज और आसान होने का दावा किया जा रहा है।
चुनौतियां क्या हैं?
यह प्रोजेक्ट आकर्षक जरूर है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं। दिल्ली का एयरस्पेस पहले से व्यस्त होने के कारण अलग नियम और एयर-ट्रैफिक मैनेजमेंट की जरूरत होगी। सुरक्षा मानक, उड़ान रूट और इमरजेंसी प्रोटोकॉल तय करने होंगे। साथ ही वर्टीपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और संचालन व्यवस्था तैयार करनी पड़ेगी। इसके लिए सरकार और विमानन नियामकों की मंजूरी अनिवार्य रहेगी। Delhi News
Delhi News : दिल्ली-एनसीआर की जाम भरी सड़कों पर रोज-रोज घंटों गंवाने वाले यात्रियों के लिए आने वाले समय में सफर की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। प्रस्तावित योजना के मुताबिक अब यात्रा केवल सड़क या मेट्रो तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आसमान में भी शॉर्ट रूट तैयार किया जाएगा। दावा है कि गुरुग्राम से कनॉट प्लेस (CP) जैसी दूरी, जो अभी ट्रैफिक, सिग्नल और भीड़ के कारण अक्सर डेढ़ से दो घंटे तक खिंच जाती है, वही सफर महज 7 से 10 मिनट में पूरा हो सकेगा। फिलहाल यही सफर सड़क या मेट्रो से अक्सर डेढ़ से दो घंटे तक खींच जाता है। ऐसे में एयर टैक्सी सेवा अगर जमीन पर उतरी, तो यह एनसीआर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।
CII की रिपोर्ट में हवाई नेटवर्क का रोडमैप
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की नई रिपोर्ट में दिल्ली-एनसीआर के लिए एयर टैक्सी सेवा शुरू करने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना के तहत गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक प्रस्तावित हवाई मार्ग से जोड़ने की रूपरेखा तैयार की जा सकती है। उद्देश्य साफ है भीड़भाड़ वाले कॉरिडोर पर दबाव कम हो और तेज कनेक्टिविटी का नया विकल्प तैयार हो।
एयर टैक्सी क्या होती है?
यह सेवा छोटी इलेक्ट्रिक एयर व्हीकल्स के जरिए चलेगी, जिन्हें eVTOL कहा जाता है। ये मशीनें हेलिकॉप्टर की तरह वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सकती हैं, यानी रनवे की जरूरत नहीं होगी। चूंकि ये बिजली से संचालित होती हैं, इसलिए इनमें धुआं नहीं निकलता और शहरी इलाकों में कम दूरी के तेज, स्मार्ट और तुलनात्मक रूप से पर्यावरण-अनुकूल सफर का विकल्प बन सकती हैं।
कौन-सा रूट होगा और कितनी दूरी तय होगी?
रिपोर्ट के मुताबिक गुरुग्राम–कनॉट प्लेस–जेवर के बीच करीब 65 से 75 किमी का एक तय हवाई कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव है, जिसे शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उतारने की योजना है। परीक्षण चरण सफल रहा तो इसे आगे चलकर कमर्शियल पैसेंजर सर्विस में बदला जा सकता है। संचालन के लिए शहर की चुनिंदा इमारतों की छतों पर वर्टीपोर्ट यानी छोटे लैंडिंग पैड बनाने की बात कही गई है ताकि ऑफिस हब, अस्पताल और एयरपोर्ट जैसे प्रमुख केंद्रों से कम जगह में टेकऑफ-लैंडिंग संभव हो सके। इस पहल में CII के साथ The ePlane Company, Sarla Aviation और Hunch Mobility जैसी कंपनियों के सहयोग के संकेत भी सामने आए हैं।
कब तक शुरू हो सकती है सेवा?
रिपोर्ट के संकेत बताते हैं कि एयर टैक्सी की शुरुआत आम यात्रियों से नहीं, बल्कि हाई-प्रायोरिटी सेवाओं से की जा सकती है—जैसे मेडिकल इमरजेंसी में त्वरित पहुंच, ऑर्गन ट्रांसपोर्ट और दवाइयों की फास्ट डिलीवरी। इसके बाद जब तकनीक, सुरक्षा और ऑपरेशन का परीक्षण सफल रहेगा, तब इसे धीरे-धीरे पब्लिक पैसेंजर सर्विस के तौर पर खोला जा सकता है। अनुमान है कि शुरुआती प्रक्रिया एक साल के भीतर गति पकड़ सकती है, जबकि यात्रियों के लिए 2–3 साल में टेस्ट फ्लाइट्स का रास्ता बन सकता है। रिपोर्ट में 2026 से 2028 के बीच इसे प्रयोगात्मक चरण में आगे बढ़ाने की संभावना भी जताई गई है।
फायदा क्या होगा?
एयर टैक्सी की सबसे बड़ी ताकत यही मानी जा रही है कि यह जाम से भरी सड़कों का दबाव कम कर सकती है। भीड़भाड़ वाले रूट पर यह एक वैकल्पिक और तेज माध्यम बनेगी, जिससे समय की बचत बड़े पैमाने पर हो सकती है। चूंकि यह सेवा इलेक्ट्रिक होगी, इसलिए पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटने और प्रदूषण कम होने की उम्मीद भी जताई जा रही है। इसके साथ ही एयरपोर्ट कनेक्टिविटी, खासकर जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक, तेज और आसान होने का दावा किया जा रहा है।
चुनौतियां क्या हैं?
यह प्रोजेक्ट आकर्षक जरूर है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं। दिल्ली का एयरस्पेस पहले से व्यस्त होने के कारण अलग नियम और एयर-ट्रैफिक मैनेजमेंट की जरूरत होगी। सुरक्षा मानक, उड़ान रूट और इमरजेंसी प्रोटोकॉल तय करने होंगे। साथ ही वर्टीपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और संचालन व्यवस्था तैयार करनी पड़ेगी। इसके लिए सरकार और विमानन नियामकों की मंजूरी अनिवार्य रहेगी। Delhi News












