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आप पार्टी शासन के दौरान उपराज्यपाल नजीब जंग, अनिल बैजल और वर्तमान एलजी वीके सक्सेना के साथ सरकार का लगातार टकराव रहा। भाजपा सरकार के इस फैसले को दिल्ली के शासन मॉडल में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां अब टकराव की जगह समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है।

Delhi News : दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के साथ ही प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भाजपा सरकार ने पूर्व आप पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार, उपराज्यपाल और नौकरशाहों के खिलाफ दायर किए गए सभी मुकदमों को वापस लेने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इन कानूनी लड़ाइयों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि इससे न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी हो रही थी, बल्कि प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित हो रहा था।
सरकार के अनुसार, पिछली सरकार द्वारा दायर मुकदमों के कारण प्रशासन और उपराज्यपाल कार्यालय के बीच लगातार टकराव बना रहा, जिससे नीति निर्माण और विकास परियोजनाएं बाधित हुईं। कानून विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव में कहा गया है कि इस तरह की मुकदमेबाजी से नौकरशाही में भय का माहौल बन गया था और अधिकारी स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने से हिचकिचा रहे थे। भाजपा सरकार अब प्रशासन और एलजी कार्यालय के बीच समन्वयपूर्ण माहौल बनाकर कामकाज को गति देना चाहती है।
भाजपा सरकार के गठन के बाद ही इन मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। चूंकि ये मुकदमे सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित थे, इसलिए सरकार ने शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन दिए। हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने उस याचिका को वापस लेने की अनुमति दी, जिसमें उपराज्यपाल द्वारा किसानों के आंदोलन और दंगा मामलों में अपनी पसंद के वकील नियुक्त करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी एलजी के खिलाफ दायर सात मामलों को वापस लेने की अनुमति दे चुका है।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कई मुकदमे केवल राजनीतिक लाभ उठाने के उद्देश्य से दायर किए गए थे। इन्हें वापस लेने से न केवल सरकारी खजाने पर वकीलों की फीस का बोझ कम होगा, बल्कि उन अधिकारियों को भी राहत मिलेगी जिन्हें बार-बार अदालतों में पेश होना पड़ रहा था।
आप पार्टी शासन के दौरान उपराज्यपाल नजीब जंग, अनिल बैजल और वर्तमान एलजी वीके सक्सेना के साथ सरकार का लगातार टकराव रहा। भाजपा सरकार के इस फैसले को दिल्ली के शासन मॉडल में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां अब टकराव की जगह समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है। माना जा रहा है कि इससे केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच पिछले एक दशक से चली आ रही खींचतान खत्म होगी और रुकी हुई विकास योजनाओं को नई गति मिलेगी। Delhi News
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