डिजिटल डकैतों पर 'हंटर': गृह मंत्री की चेतावनी के बाद साइबर ठगों के खिलाफ महा-अभियान शुरू

अमित शाह ने बताया कि देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 25 हजार से बढ़कर 100 करोड़ से अधिक हो चुकी है और 1 जीबी डेटा की कीमत में 97 प्रतिशत की कमी आई है। “दुनिया का हर दूसरा डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत में हो रहा है।

Strict action against cyber fraudsters
साइबर अपराध में शामिल लोगों की संपत्ति जब्त होगी (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Feb 2026 06:59 PM
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Delhi News : देश में बढ़ते साइबर अपराधों पर शिकंजा कसने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीबीआई की नई साइबर क्राइम यूनिट का उद्घाटन किया और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के S4C डैशबोर्ड को लॉन्च किया। इस मौके पर उन्होंने साइबर ठगों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अब ठगी के पूरे ईकोसिस्टम को खत्म किया जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि यह एक ऐसी साझा व्यवस्था है, जिसमें अलग-अलग विभाग और एजेंसियां एक मंच पर आकर साइबर अपराध से मुकाबला करेंगी। उन्होंने कहा कि जब सभी प्रयास एक दिशा में होते हैं, तभी इच्छित परिणाम मिलते हैं। भारत की 11 साल की डिजिटल यात्रा में साइबर सुरक्षा सबसे अहम विषय है।

डिजिटल भारत और बढ़ता जोखिम

अमित शाह ने बताया कि देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 25 हजार से बढ़कर 100 करोड़ से अधिक हो चुकी है और 1 जीबी डेटा की कीमत में 97 प्रतिशत की कमी आई है। “दुनिया का हर दूसरा डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत में हो रहा है। 97 करोड़ से ज्यादा जनधन खातों और संस्थानों के डेटा की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने आगाह किया कि देश के संगठनों का डेटा चोरी कर शत्रु देशों को बेचे जाने की कोशिशें भी हो रही हैं, जिसे हर हाल में रोका जाएगा।

बैंक फ्रॉड, सिम कार्ड और गिरफ्तारी

अमित शाह के अनुसार, 20 हजार करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामलों में से 8 हजार करोड़ रुपये फ्रीज किए जा चुके हैं। अब तक 12 लाख सिम कार्ड रद्द किए गए हैं और 20 हजार से अधिक साइबर अपराधियों को पकड़ा गया है। उन्होंने बताया कि साइबर सुरक्षा अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा विषय बन चुकी है।

शिकायतें, 1930 हेल्पलाइन और म्यूल अकाउंट

अमित शाह ने कहा कि 30 नवंबर 2025 तक लाखों/करोड़ों साइबर शिकायतें दर्ज हुई हैं और बड़ी संख्या में एफआईआर भी हुई हैं। उन्होंने 1930 साइबर हेल्पलाइन को और प्रभावी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि आपात स्थिति में समय पर कॉल रिसीव न होने से पीड़ित का पैसा जा सकता है और इससे व्यवस्था की छवि खराब होती है। उन्होंने “म्यूल अकाउंट” को साइबर अपराध की बड़ी कड़ी बताते हुए कहा कि इन्हें अब संगठित अपराध की तरह खरीदा-बेचा जा रहा है। आरबीआई और गृह मंत्रालय द्वारा विकसित म्यूल अकाउंट हंटर ऐप को सभी सरकारी और निजी बैंकों में अपनाने की अपील की गई।

I4C से जुड़े 795 संस्थान

अमित शाह ने बताया कि अब तक I4C से 795 संस्थान जुड़ चुके हैं। उन्होंने राज्यों की पुलिस, बैंकों और जांच एजेंसियों से बेहतर समन्वय की अपील करते हुए कहा कि यदि समय रहते पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए तो साइबर अपराध “क्राइसिस” का रूप ले सकता है। अंत में अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा तंत्र विकसित करने और पीड़ितों से सीबीआई व एनआईए जैसी एजेंसियों के सीधे संवाद पर जोर दिया, ताकि साइबर ठगी के खिलाफ तेज और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। Delhi News

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भाजपा सरकार का यू-टर्न, आप पार्टी कार्यकाल के सभी केस वापस

आप पार्टी शासन के दौरान उपराज्यपाल नजीब जंग, अनिल बैजल और वर्तमान एलजी वीके सक्सेना के साथ सरकार का लगातार टकराव रहा। भाजपा सरकार के इस फैसले को दिल्ली के शासन मॉडल में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां अब टकराव की जगह समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है।

Delhi Politics over litigation ends
आप पार्टी शासन की अदालती रणनीति समाप्त (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Feb 2026 05:45 PM
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Delhi News : दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के साथ ही प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भाजपा सरकार ने पूर्व आप पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार, उपराज्यपाल और नौकरशाहों के खिलाफ दायर किए गए सभी मुकदमों को वापस लेने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इन कानूनी लड़ाइयों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि इससे न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी हो रही थी, बल्कि प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित हो रहा था।

प्रशासनिक गतिरोध खत्म करने की पहल

सरकार के अनुसार, पिछली सरकार द्वारा दायर मुकदमों के कारण प्रशासन और उपराज्यपाल कार्यालय के बीच लगातार टकराव बना रहा, जिससे नीति निर्माण और विकास परियोजनाएं बाधित हुईं। कानून विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव में कहा गया है कि इस तरह की मुकदमेबाजी से नौकरशाही में भय का माहौल बन गया था और अधिकारी स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने से हिचकिचा रहे थे। भाजपा सरकार अब प्रशासन और एलजी कार्यालय के बीच समन्वयपूर्ण माहौल बनाकर कामकाज को गति देना चाहती है।

अदालतों से ली गई अनुमति

भाजपा सरकार के गठन के बाद ही इन मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। चूंकि ये मुकदमे सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित थे, इसलिए सरकार ने शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन दिए। हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने उस याचिका को वापस लेने की अनुमति दी, जिसमें उपराज्यपाल द्वारा किसानों के आंदोलन और दंगा मामलों में अपनी पसंद के वकील नियुक्त करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी एलजी के खिलाफ दायर सात मामलों को वापस लेने की अनुमति दे चुका है।

राजनीतिक लाभ के लिए दायर हुए थे कई मामले

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कई मुकदमे केवल राजनीतिक लाभ उठाने के उद्देश्य से दायर किए गए थे। इन्हें वापस लेने से न केवल सरकारी खजाने पर वकीलों की फीस का बोझ कम होगा, बल्कि उन अधिकारियों को भी राहत मिलेगी जिन्हें बार-बार अदालतों में पेश होना पड़ रहा था।

दशक भर की ‘जंग’ पर विराम

आप पार्टी शासन के दौरान उपराज्यपाल नजीब जंग, अनिल बैजल और वर्तमान एलजी वीके सक्सेना के साथ सरकार का लगातार टकराव रहा। भाजपा सरकार के इस फैसले को दिल्ली के शासन मॉडल में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां अब टकराव की जगह समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है। माना जा रहा है कि इससे केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच पिछले एक दशक से चली आ रही खींचतान खत्म होगी और रुकी हुई विकास योजनाओं को नई गति मिलेगी। Delhi News

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दिल्ली-NCR में उड़ान भरेगी फ्लाइंग टैक्सी, जल्द होगी शुरुआत

दावा है कि गुरुग्राम से कनॉट प्लेस (CP) जैसी दूरी, जो अभी ट्रैफिक, सिग्नल और भीड़ के कारण अक्सर डेढ़ से दो घंटे तक खिंच जाती है, वही सफर महज 7 से 10 मिनट में पूरा हो सकेगा। फिलहाल यही सफर सड़क या मेट्रो से अक्सर डेढ़ से दो घंटे तक खींच जाता है।

दिल्ली-NCR एयर टैक्सी प्रस्ताव
दिल्ली-NCR एयर टैक्सी प्रस्ताव
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar10 Feb 2026 01:10 PM
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Delhi News : दिल्ली-एनसीआर की जाम भरी सड़कों पर रोज-रोज घंटों गंवाने वाले यात्रियों के लिए आने वाले समय में सफर की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। प्रस्तावित योजना के मुताबिक अब यात्रा केवल सड़क या मेट्रो तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आसमान में भी शॉर्ट रूट तैयार किया जाएगा। दावा है कि गुरुग्राम से कनॉट प्लेस (CP) जैसी दूरी, जो अभी ट्रैफिक, सिग्नल और भीड़ के कारण अक्सर डेढ़ से दो घंटे तक खिंच जाती है, वही सफर महज 7 से 10 मिनट में पूरा हो सकेगा। फिलहाल यही सफर सड़क या मेट्रो से अक्सर डेढ़ से दो घंटे तक खींच जाता है। ऐसे में एयर टैक्सी सेवा अगर जमीन पर उतरी, तो यह एनसीआर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।

CII की रिपोर्ट में हवाई नेटवर्क का रोडमैप

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की नई रिपोर्ट में दिल्ली-एनसीआर के लिए एयर टैक्सी सेवा शुरू करने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना के तहत गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक प्रस्तावित हवाई मार्ग से जोड़ने की रूपरेखा तैयार की जा सकती है। उद्देश्य साफ है भीड़भाड़ वाले कॉरिडोर पर दबाव कम हो और तेज कनेक्टिविटी का नया विकल्प तैयार हो।

एयर टैक्सी क्या होती है?

यह सेवा छोटी इलेक्ट्रिक एयर व्हीकल्स के जरिए चलेगी, जिन्हें eVTOL कहा जाता है। ये मशीनें हेलिकॉप्टर की तरह वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सकती हैं, यानी रनवे की जरूरत नहीं होगी। चूंकि ये बिजली से संचालित होती हैं, इसलिए इनमें धुआं नहीं निकलता और शहरी इलाकों में कम दूरी के तेज, स्मार्ट और तुलनात्मक रूप से पर्यावरण-अनुकूल सफर का विकल्प बन सकती हैं।

कौन-सा रूट होगा और कितनी दूरी तय होगी?

रिपोर्ट के मुताबिक गुरुग्राम–कनॉट प्लेस–जेवर के बीच करीब 65 से 75 किमी का एक तय हवाई कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव है, जिसे शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उतारने की योजना है। परीक्षण चरण सफल रहा तो इसे आगे चलकर कमर्शियल पैसेंजर सर्विस में बदला जा सकता है। संचालन के लिए शहर की चुनिंदा इमारतों की छतों पर वर्टीपोर्ट यानी छोटे लैंडिंग पैड बनाने की बात कही गई है ताकि ऑफिस हब, अस्पताल और एयरपोर्ट जैसे प्रमुख केंद्रों से कम जगह में टेकऑफ-लैंडिंग संभव हो सके। इस पहल में CII के साथ The ePlane Company, Sarla Aviation और Hunch Mobility जैसी कंपनियों के सहयोग के संकेत भी सामने आए हैं।

कब तक शुरू हो सकती है सेवा?

रिपोर्ट के संकेत बताते हैं कि एयर टैक्सी की शुरुआत आम यात्रियों से नहीं, बल्कि हाई-प्रायोरिटी सेवाओं से की जा सकती है—जैसे मेडिकल इमरजेंसी में त्वरित पहुंच, ऑर्गन ट्रांसपोर्ट और दवाइयों की फास्ट डिलीवरी। इसके बाद जब तकनीक, सुरक्षा और ऑपरेशन का परीक्षण सफल रहेगा, तब इसे धीरे-धीरे पब्लिक पैसेंजर सर्विस के तौर पर खोला जा सकता है। अनुमान है कि शुरुआती प्रक्रिया एक साल के भीतर गति पकड़ सकती है, जबकि यात्रियों के लिए 2–3 साल में टेस्ट फ्लाइट्स का रास्ता बन सकता है। रिपोर्ट में 2026 से 2028 के बीच इसे प्रयोगात्मक चरण में आगे बढ़ाने की संभावना भी जताई गई है।

फायदा क्या होगा?

एयर टैक्सी की सबसे बड़ी ताकत यही मानी जा रही है कि यह जाम से भरी सड़कों का दबाव कम कर सकती है। भीड़भाड़ वाले रूट पर यह एक वैकल्पिक और तेज माध्यम बनेगी, जिससे समय की बचत बड़े पैमाने पर हो सकती है। चूंकि यह सेवा इलेक्ट्रिक होगी, इसलिए पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटने और प्रदूषण कम होने की उम्मीद भी जताई जा रही है। इसके साथ ही एयरपोर्ट कनेक्टिविटी, खासकर जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक, तेज और आसान होने का दावा किया जा रहा है।

चुनौतियां क्या हैं?

यह प्रोजेक्ट आकर्षक जरूर है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं। दिल्ली का एयरस्पेस पहले से व्यस्त होने के कारण अलग नियम और एयर-ट्रैफिक मैनेजमेंट की जरूरत होगी। सुरक्षा मानक, उड़ान रूट और इमरजेंसी प्रोटोकॉल तय करने होंगे। साथ ही वर्टीपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और संचालन व्यवस्था तैयार करनी पड़ेगी। इसके लिए सरकार और विमानन नियामकों की मंजूरी अनिवार्य रहेगी। Delhi News

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