बजट सत्र पर लोकसभा स्पीकर का ऐलान, 1 फरवरी को पेश होगा बजट
आगामी केंद्रीय बजट को लेकर चल रही सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट कर दिया है कि आम बजट 1 फरवरी को ही पेश किया जाएगा और यह जानकारी रा28वें सम्मेलन से जुड़ी तैयारियों पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि राष्ट्रमंडल स्पीकरों और पीठासीन अधिकारियों का यह सम्मेलन 14 से 16 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन की कार्यकारी बैठक 14 जनवरी को होगी, जिसमें 15 देशों के स्पीकर हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। मुख्य बैठकें 15 और 16 जनवरी 2026 को होंगी और यह आयोजन भारत के नए संसद भवन (संविधान सदन) में किया जाएगा। सम्मेलन में अंतर-संसदीय संघ (IPU) के अध्यक्ष और राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) के चेयरपर्सन भी शामिल होंगे।
16 साल बाद भारत को मिली मेजबानी
ओम बिरला ने बताया कि भारत को यह मेजबानी 1971, 1986 और 2010 के बाद अब 16 साल बाद मिली है। सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य पीठासीन अधिकारियों की निष्पक्षता, भूमिका और संसदीय मूल्यों पर चर्चा करना है। इसके साथ ही संसद को जनता के और करीब लाने, नई तकनीकों के उपयोग और नवाचार जैसे विषयों पर भी विचार होगा।
पूरी तरह पेपरलेस और AI आधारित सम्मेलन
लोकसभा स्पीकर ने बताया कि यह सम्मेलन पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल होगा। इसमें किसी भी तरह के कागज का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पूरा आयोजन वेब-बेस्ड मैनेजमेंट सिस्टम और एक विशेष ऐप के जरिए संचालित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से सभी परिपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे और यह अब तक का सबसे अधिक स्पीकरों की भागीदारी वाला सम्मेलन होगा।
बजट सत्र में 22 भाषाओं में मिलेगी जानकारी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओम बिरला ने बताया कि आगामी बजट सत्र के दौरान सांसदों को 22 भाषाओं में जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके लिए अनुवाद की व्यवस्था की गई है। उन्होंने दोहराया कि केंद्रीय बजट 1 फरवरी को ही पेश होगा।
संसद में गतिरोध पर भी जताई चिंता
संसद में बार-बार होने वाले गतिरोध पर ओम बिरला ने कहा कि चर्चा और संवाद से ही समाधान निकलता है। नारेबाजी, तख्तियां या बैनर लेकर विरोध करना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि कई देशों में संसद में गतिरोध की स्थिति नहीं होती और भारत में भी संसदीय मूल्यों में कोई गिरावट नहीं आई है। साथ ही उन्होंने मीडिया की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि अनावश्यक गतिरोध करने वालों को हतोत्साहित किया जाना चाहिए।
संसदीय सहयोग को मिलेगा नया आयाम
यह सम्मेलन राष्ट्रमंडल देशों के बीच संसदीय सहयोग को मजबूत करने का एक अहम मंच साबित होगा, जहां लोकतंत्र, तकनीक और जनभागीदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा कर भविष्य की दिशा तय की जाएगी।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि राष्ट्रमंडल स्पीकरों और पीठासीन अधिकारियों का यह सम्मेलन 14 से 16 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन की कार्यकारी बैठक 14 जनवरी को होगी, जिसमें 15 देशों के स्पीकर हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। मुख्य बैठकें 15 और 16 जनवरी 2026 को होंगी और यह आयोजन भारत के नए संसद भवन (संविधान सदन) में किया जाएगा। सम्मेलन में अंतर-संसदीय संघ (IPU) के अध्यक्ष और राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) के चेयरपर्सन भी शामिल होंगे।
16 साल बाद भारत को मिली मेजबानी
ओम बिरला ने बताया कि भारत को यह मेजबानी 1971, 1986 और 2010 के बाद अब 16 साल बाद मिली है। सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य पीठासीन अधिकारियों की निष्पक्षता, भूमिका और संसदीय मूल्यों पर चर्चा करना है। इसके साथ ही संसद को जनता के और करीब लाने, नई तकनीकों के उपयोग और नवाचार जैसे विषयों पर भी विचार होगा।
पूरी तरह पेपरलेस और AI आधारित सम्मेलन
लोकसभा स्पीकर ने बताया कि यह सम्मेलन पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल होगा। इसमें किसी भी तरह के कागज का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पूरा आयोजन वेब-बेस्ड मैनेजमेंट सिस्टम और एक विशेष ऐप के जरिए संचालित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से सभी परिपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे और यह अब तक का सबसे अधिक स्पीकरों की भागीदारी वाला सम्मेलन होगा।
बजट सत्र में 22 भाषाओं में मिलेगी जानकारी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओम बिरला ने बताया कि आगामी बजट सत्र के दौरान सांसदों को 22 भाषाओं में जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके लिए अनुवाद की व्यवस्था की गई है। उन्होंने दोहराया कि केंद्रीय बजट 1 फरवरी को ही पेश होगा।
संसद में गतिरोध पर भी जताई चिंता
संसद में बार-बार होने वाले गतिरोध पर ओम बिरला ने कहा कि चर्चा और संवाद से ही समाधान निकलता है। नारेबाजी, तख्तियां या बैनर लेकर विरोध करना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि कई देशों में संसद में गतिरोध की स्थिति नहीं होती और भारत में भी संसदीय मूल्यों में कोई गिरावट नहीं आई है। साथ ही उन्होंने मीडिया की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि अनावश्यक गतिरोध करने वालों को हतोत्साहित किया जाना चाहिए।
संसदीय सहयोग को मिलेगा नया आयाम
यह सम्मेलन राष्ट्रमंडल देशों के बीच संसदीय सहयोग को मजबूत करने का एक अहम मंच साबित होगा, जहां लोकतंत्र, तकनीक और जनभागीदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा कर भविष्य की दिशा तय की जाएगी।












