दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है। कई जगहों पर AQI गंभीर श्रेणी में पहुँच गया है और स्मॉग की परत छाई है। ताजा अपडेट यहां पढ़ें।

दिल्ली–एनसीआर में फिर से जहरीली धुंध की मोटी परत जम गई है। आज सुबह जब लोग घरों से बाहर निकले तो हर तरफ बस कोहरा और धुंध ही नजर आई। हवा की क्वालिटी इतनी खराब हो चुकी है कि कई जगहों पर AQI गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया। बवाना में तो AQI 435 तक पहुंच गया जो साफ बताता है कि हालात कितने बदतर हैं। इंडिया गेट और कर्तव्य पथ जैसे जगहों ने भी धुंध की चादर ओढ़ ली है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली का औसत AQI रविवार सुबह करीब 381 दर्ज हुआ। GRAP-IV लागू होने के बावजूद हवा में खास सुधार नहीं दिखा। कई इलाकों में सुबह से ही घना कोहरा था और हवा में मौजूद प्रदूषक कणों की वजह से लोग खुले में सांस लेने से भी बचते नजर आए।
बवाना सबसे प्रदूषित इलाकों में रहा, जबकि NSIT द्वारका जैसे कुछ इलाकों में AQI थोड़ा कम जरूर है, लेकिन फिर भी सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। आनंद विहार में AQI 429 रहा जो कि बेहद खराब श्रेणी में आता है। चांदनी चौक, आरके पुरम, पंजाबी बाग, पटपड़गंज और द्वारका सेक्टर-8 जैसे ज्यादातर इलाकों में भी हवा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इस बीच, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने GRAP के नियमों में कुछ बदलाव किए हैं। अब GRAP-2 के तहत जो गंभीर श्रेणी के कदम लागू होते थे, उन्हें GRAP-3 में शामिल कर दिया गया है। इसका मतलब है कि स्थिति बिगड़ने पर अब और भी सख्त कदम पहले ही लागू हो सकेंगे। एनसीआर के जिलों को ये भी तय करना होगा कि सरकारी और निजी दफ्तर 50% क्षमता के साथ काम करें ताकि सड़क पर वाहनों की संख्या थोड़ी कम हो और प्रदूषण थोड़ा नियंत्रित हो सके।
दिल्ली सरकार ने भी निजी दफ्तरों से अपील की है कि वे 50% कर्मचारियों को ही ऑफिस बुलाएं और बाकी लोगों को वर्क-फ्रॉम-होम की सुविधा दें। केंद्र सरकार भी अपने दफ्तरों में ऐसे ही फैसले लेने पर विचार कर रही है।
इस सबके बीच राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। AAP के दिल्ली प्रभारी सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि प्रदूषण के आंकड़ों में हेरफेर हो रही है और सरकार GRAP के नियम लागू करने में नाकाम रही है। उनका कहना है कि स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि यह अब एक “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी” बन गई है।