मॉड्यूल में डॉक्टरों, शिक्षित पेशेवरों की संलिप्तता सामने आ रही है। जिसे व्हाइट-कॉलर टेरर नेटवर्क कहा जा रहा है। पुलिस जांच में संकेत मिल रहे हैं कि विस्फोट में इस्तेमाल कार और मॉड्यूल की सामग्री के बीच संबंध हो सकता है।

लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को एक कार विस्फोट हुआ जिसमें कई लोग मारे गए और घायल हुए। उस कार विस्फोट को अब आतंकवादी हमले के रूप में भी देखा जा रहा है। हरियाणा में एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ जिसमें लगभग 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री जब्त की गई, जिसमें 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट भी शामिल है। उस मॉड्यूल में डॉक्टरों, शिक्षित पेशेवरों की संलिप्तता सामने आ रही है। जिसे व्हाइट-कॉलर टेरर नेटवर्क कहा जा रहा है। पुलिस जांच में संकेत मिल रहे हैं कि विस्फोट में इस्तेमाल कार और मॉड्यूल की सामग्री के बीच संबंध हो सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स में जिस डॉक्टर का नाम स्पष्ट रूप से सामने आया है, वे हैं डाक्टर उमर मोहम्मद (पुलवामा से) तथा डाक्टर मोजम्मिल अहमद (फरीदाबाद मॉड्यूल से) आदि। कार पर जो नम्बर-प्लेट, यूनिवर्सिटी चिह्न आदि आपने बताए हैं, उस विशेष विवरण का कोई पुष्टि स्रोत अभी उपलब्ध नहीं है जो मीडिया में व्यापक रूप से उद्धृत हुआ हो। यह स्पष्ट नहीं है कि विस्फोट परीक्षण/प्लान के तहत हुआ था या मॉड्यूल द्वारा दबाव में जल्दबाजी में कराया गया था। कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि डॉक्टर उमर ने पैनिक में कार्रवाई की हो सकती है।
यह मामला बेहद संवेदनशील और जटिल है, क्योंकि इसमें आतंकवाद-संज्ञा, शिक्षित पेशेवरों की हिस्सेदारी और बड़े पैमाने की विस्फोटक सामग्री शामिल है। यदि मॉड्यूल और कार विस्फोट के बीच वास्तविक लिंक साबित होता है, तो यह व्हाइट-कॉलर आतंकवाद की एक नई दिशा हो सकती है, जहाँ डॉक्टर, शिक्षित लोग लॉजिस्टिक्स, फंडिंग या संचालन में शामिल हों। हालांकि, इस तरह के आरोपों में सावधानी बहुत जरूरी है। नाम-जुड़ाव या कार के मालिक का संबंध सुनने में आता है तो भी जांच एजेंसियों द्वारा सबूत जुटाए जाना जरूरी है। आम लोगों को इस तरह की खबरों को सुनते/पढ़ते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि अभी आरोप हैं और अभी अदालत में तय नहीं हुआ इसलिए पुष्टि होने तक संभावनाएँ ही बनीं रह जाती हैं।