दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 10 बैगलेस डे लागू, पढ़ाई बनेगी मजेदार
बैगलेस डे के दौरान स्कूलों में अलग-अलग तरह की गतिविधियां कराई जाएंगी। कहीं नुक्कड़ नाटक, कहीं क्विज, साइंस प्रयोग, कुकिंग प्रतियोगिता, गार्डनिंग और ग्रुप एक्टिविटीज जैसी चीजों पर जोर रहेगा।

Delhi News : दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अब बच्चों की पढ़ाई का अंदाज बदला हुआ नजर आएगा। दिल्ली सरकार ने कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए ‘10 बैगलेस डे लागू करने का फैसला लिया है। इसके तहत जनवरी-फरवरी 2026 के बीच तय दिनों पर बच्चों को किताबों और भारी बैग के बिना स्कूल बुलाया जाएगा और पढ़ाई को एक्टिविटी-बेस्ड लर्निंग के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा।
टीमवर्क और लाइफ-स्किल्स पर दिया जाएगा जोर
शिक्षा विभाग की ओर से जारी सर्कुलर के मुताबिक 10 बैगलेस डे को जनवरी से फरवरी के बीच पूरा किया जाएगा। योजना के तहत हर हफ्ते दो दिन छात्रों को बिना किताब-बैग के स्कूल आना होगा। इन दिनों का उद्देश्य बच्चों को केवल रटने वाली पढ़ाई तक सीमित न रखकर देखकर, समझकर और करके सीखने के अवसर देना है। बैगलेस डे के दौरान स्कूलों में अलग-अलग तरह की गतिविधियां कराई जाएंगी। कहीं नुक्कड़ नाटक, कहीं क्विज, साइंस प्रयोग, कुकिंग प्रतियोगिता, गार्डनिंग और ग्रुप एक्टिविटीज जैसी चीजों पर जोर रहेगा। अधिकारियों के मुताबिक, गतिविधियों के जरिए बच्चों में टीमवर्क, कम्युनिकेशन और प्रॉब्लम सॉल्विंग जैसी लाइफ-स्किल्स विकसित करने की दिशा में भी काम होगा।
स्कूलों को मिलेगी वित्तीय मदद
इस पहल को प्रभावी बनाने के लिए समग्र शिक्षा, दिल्ली की ओर से प्रत्येक स्कूल को 13,500 रुपये की वित्तीय सहायता दिए जाने की बात कही गई है। यह राशि स्टेशनरी, फोटोकॉपी, बैनर और जरूरी लर्निंग मैटीरियल जैसी व्यवस्थाओं में उपयोग की जा सकेगी। स्कूलों ने बैगलेस डे को सिर्फ किताबें छोड़ देने तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे दो अलग ग्रुप बनाकर असरदार तरीके से लागू करने की तैयारी की गई है। जूनियर ग्रुप (कक्षा 1-5) के लिए फैंसी ड्रेस, नुक्कड़ नाटक, खेल और शारीरिक गतिविधियों जैसे सत्र रखे गए हैं, ताकि बच्चे खेल-खेल में सीखें और आत्मविश्वास भी बढ़े। वहीं सीनियर ग्रुप (कक्षा 6-8) के लिए विषय आधारित क्विज, लैब प्रैक्टिकल, लाइब्रेरी रीडिंग और एक्सप्लोरेशन एक्टिविटीज के जरिए पढ़ाई को ज्यादा व्यावहारिक बनाने पर जोर है। कई स्कूलों में इस पहल की शुरुआत भी हो चुकी है। स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, छोटे बच्चों को कैंपस में प्रकृति, पेड़-पौधों और गार्डनिंग से जोड़कर सीखने का अनुभव दिया जा रहा है, जबकि बड़े छात्रों को लाइब्रेरी और स्कूल के अलग-अलग लर्निंग स्पेस को एक्सप्लोर करने के लिए प्रेरित किया गया है। कुल मिलाकर, दिल्ली के सरकारी स्कूलों में यह कदम पढ़ाई को रटंत से बाहर निकालकर उसे रोचक, अनुभव-आधारित और जीवन से जुड़ी सीख में बदलने की दिशा में एक अहम कोशिश माना जा रहा है। Delhi News
Delhi News : दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अब बच्चों की पढ़ाई का अंदाज बदला हुआ नजर आएगा। दिल्ली सरकार ने कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए ‘10 बैगलेस डे लागू करने का फैसला लिया है। इसके तहत जनवरी-फरवरी 2026 के बीच तय दिनों पर बच्चों को किताबों और भारी बैग के बिना स्कूल बुलाया जाएगा और पढ़ाई को एक्टिविटी-बेस्ड लर्निंग के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा।
टीमवर्क और लाइफ-स्किल्स पर दिया जाएगा जोर
शिक्षा विभाग की ओर से जारी सर्कुलर के मुताबिक 10 बैगलेस डे को जनवरी से फरवरी के बीच पूरा किया जाएगा। योजना के तहत हर हफ्ते दो दिन छात्रों को बिना किताब-बैग के स्कूल आना होगा। इन दिनों का उद्देश्य बच्चों को केवल रटने वाली पढ़ाई तक सीमित न रखकर देखकर, समझकर और करके सीखने के अवसर देना है। बैगलेस डे के दौरान स्कूलों में अलग-अलग तरह की गतिविधियां कराई जाएंगी। कहीं नुक्कड़ नाटक, कहीं क्विज, साइंस प्रयोग, कुकिंग प्रतियोगिता, गार्डनिंग और ग्रुप एक्टिविटीज जैसी चीजों पर जोर रहेगा। अधिकारियों के मुताबिक, गतिविधियों के जरिए बच्चों में टीमवर्क, कम्युनिकेशन और प्रॉब्लम सॉल्विंग जैसी लाइफ-स्किल्स विकसित करने की दिशा में भी काम होगा।
स्कूलों को मिलेगी वित्तीय मदद
इस पहल को प्रभावी बनाने के लिए समग्र शिक्षा, दिल्ली की ओर से प्रत्येक स्कूल को 13,500 रुपये की वित्तीय सहायता दिए जाने की बात कही गई है। यह राशि स्टेशनरी, फोटोकॉपी, बैनर और जरूरी लर्निंग मैटीरियल जैसी व्यवस्थाओं में उपयोग की जा सकेगी। स्कूलों ने बैगलेस डे को सिर्फ किताबें छोड़ देने तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे दो अलग ग्रुप बनाकर असरदार तरीके से लागू करने की तैयारी की गई है। जूनियर ग्रुप (कक्षा 1-5) के लिए फैंसी ड्रेस, नुक्कड़ नाटक, खेल और शारीरिक गतिविधियों जैसे सत्र रखे गए हैं, ताकि बच्चे खेल-खेल में सीखें और आत्मविश्वास भी बढ़े। वहीं सीनियर ग्रुप (कक्षा 6-8) के लिए विषय आधारित क्विज, लैब प्रैक्टिकल, लाइब्रेरी रीडिंग और एक्सप्लोरेशन एक्टिविटीज के जरिए पढ़ाई को ज्यादा व्यावहारिक बनाने पर जोर है। कई स्कूलों में इस पहल की शुरुआत भी हो चुकी है। स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, छोटे बच्चों को कैंपस में प्रकृति, पेड़-पौधों और गार्डनिंग से जोड़कर सीखने का अनुभव दिया जा रहा है, जबकि बड़े छात्रों को लाइब्रेरी और स्कूल के अलग-अलग लर्निंग स्पेस को एक्सप्लोर करने के लिए प्रेरित किया गया है। कुल मिलाकर, दिल्ली के सरकारी स्कूलों में यह कदम पढ़ाई को रटंत से बाहर निकालकर उसे रोचक, अनुभव-आधारित और जीवन से जुड़ी सीख में बदलने की दिशा में एक अहम कोशिश माना जा रहा है। Delhi News












