चाणक्य नीति में दर्ज है महिलाओं को लेकर बड़ा दावा

चाणक्य नीति में दर्ज है कि महिलाएं सभी मामलों में पुरूषों से अधिक श्रेष्ठ होती हैं। चाणक्य नीति में दावा किया गया है कि पुरूषों के मुकाबले में महिलाओं के अंदर चारगुना अधिक बुद्धि तथा विवेक होता है। इतना ही नहीं चाणक्य नीति में यह भी दर्ज है कि महिलाएं पुरूषों के मुकाबले 6 गुना अधिक साहसी होती हैं।

चाणक्य नीति में नारी शक्ति का उल्लेख
चाणक्य नीति में नारी शक्ति का उल्लेख
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar06 Mar 2026 02:40 PM
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Chanakya Niti : आचार्य चाणक्य की चाणक्य नीति में वह सब-कुछ मौजूद है जो और कहीं नहीं है। चाणक्य नीति में महिलाओं के विषय में बहुत विस्तार से लिखा गया है। चाणक्य नीति में महिलाओं को लेकर एक बहुत बड़ा दावा किया गया है। चाणक्य नीति में दर्ज है कि महिलाएं सभी मामलों में पुरूषों से अधिक श्रेष्ठ होती हैं। चाणक्य नीति में दावा किया गया है कि पुरूषों के मुकाबले में महिलाओं के अंदर चारगुना अधिक बुद्धि तथा विवेक होता है। इतना ही नहीं चाणक्य नीति में यह भी दर्ज है कि महिलाएं पुरूषों के मुकाबले 6 गुना अधिक साहसी होती हैं।

पुरूषों के मुकाबले आठ गुना अधिक होती हैं काम वासना

आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित चाणक्य नीति में महिलाओं के ऊपर खूब लिखा गया है। चाणक्य नीति के पहले अध्याय के 17वें श्लोक में आचार्य चाणक्य ने महिलाओं की अनेक विशेषताओं का वर्णन किया है। चाणक्य नीति के प्रथम अध्याय का 17वां श्लोक इस प्रकार है कि - “स्त्रीणां द्विगुण आहारो बुद्धिस्तासां चतुर्गुणा। साहसं षड्गुणं चैव कामोऽष्टगुण उच्यते।।“ इस श्लोक में कहा गया है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं का आहार दोगुना होता है, उनकी बुद्धि चौगुनी होती है, उनमें पुरुषों के मुकाबले छह गुना अधिक साहस होता है और कामवासना आठ गुना होती है।

पुरुषों से दो गुना भोजन करती हैं महिलाएं

चाणक्य नीति के अनुसार महिलाओं को भोजन की आवश्यकता पुरुष की अपेक्षा अधिक होती है। महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले अधिक शारीरिक कार्य करना पड़ता है। पहले के समय में महिलाओं को घर में कई ऐसे छोटे-मोटे काम करने पड़ते थे, जिनमें ऊर्जा अधिक खर्च होती थी। वहीं, आज के दौर में भी स्थिति लगभग वैसी ही है। इसके अलावा महिलाओं की शारीरिक बनावट, उसमें होने वाले परिवर्तन और प्रजनन आदि कार्यों से क्षय हुई ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए उन्हें अतिरिक्त पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। चाणक्य नीति में आगे कहा गया है कि आचार्य कहते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में चार गुना अधिक बुद्धि होती है। उनके अनुसार, समस्याओं को सुलझाने से बुद्धि का विकास होता है और महिलाओं को परिवार रोजाना कई मामलों को सुलझाना पड़ता है। इससे उनकी बुद्धि अधिक तेज होती है और छोटी-छोटी बातों को समझने की दृष्टि का विकास होता।

पुरुषों से छह गुना अधिक साहस होता है महिलाओं में

चाणक्य नीति में आगे कहा गया है कि महिलाओं में साहस पुरुषों से छह गुना अधिक होना भी स्वाभाविक है। पशु-पक्षियों की मादाओं में भी देखा गया है कि अपनी संतान की रक्षा के लिए वे अपने से कई गुना बलशाली के सामने लड़-मरने के लिए डट जाती हैं। आचार्य चाणक्य का कहना है कि महिलाओं में कामवासना का आठ गुना होना पाप नहीं है। सामाजिक कानून के विरुद्ध भी नहीं है। इसका होना अनैतिक या चरित्रहीन होने की पुष्टि भी नहीं करता है। श्रीकृष्ण ने स्वयं को 'धर्मानुकूल काम' कहा है। काम पितृ ऋण से मुक्त होने का सहज मार्ग है। संतान उत्पन्न करके ही कोई इस ऋण से मुक्त हो सकता है। Chanakya Niti


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ओ तेरी! इस वजह से लोग देखते हैं Porn, सामने आया सबसे बड़ा कारण

हालांकि सरकार समय-समय पर OTT प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती करती रहती है लेकिन सवाल यह है कि आखिर लोग इसे क्यों देखते हैं। क्या यह केवल जिज्ञासा है, मनोरंजन है या इसके पीछे गहरी मनोवैज्ञानिक और सामाजिक वजहें काम करती हैं?

Reasons people watch porn
Porn Addiction Psychology
locationभारत
userअसमीना
calendar06 Mar 2026 02:34 PM
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डिजिटल युग ने मनोरंजन के सारे रास्ते आसान कर दिए हैं। मोबाइल और इंटरनेट के जरिए जानकारी और कंटेंट सिर्फ एक क्लिक दूर है। इसी आसानी ने पॉर्न को भी आम कर दिया है। हालांकि सरकार समय-समय पर OTT प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती करती रहती है लेकिन सवाल यह है कि आखिर लोग इसे क्यों देखते हैं। क्या यह केवल जिज्ञासा है, मनोरंजन है या इसके पीछे गहरी मनोवैज्ञानिक और सामाजिक वजहें काम करती हैं? हालिया रिसर्च ने इस सवाल का विस्तार से जवाब खोजने की कोशिश की गई है।

क्या कहती है रिसर्च?

इंटरनेशनल रिसर्चर्स की टीम ने 276 कॉलेज छात्रों से खुला सवाल पूछा, "आप पॉर्न क्यों देखते हैं?" उनके जवाबों से कुल 78 अलग-अलग कारण सामने आए। इस डेटा का विश्लेषण करके शोधकर्ताओं ने इन कारणों को चार बड़े समूहों में बांटा। इसके बाद दूसरी स्टेज में 322 प्रतिभागियों के आंकड़ों की स्टैटिस्टिकल जांच की गई।

बढ़ी हुई सेक्स ड्राइव सबसे प्रमुख वजह

अध्ययन में सबसे बड़ा कारण बढ़ी हुई सेक्स ड्राइव पाया गया। कई प्रतिभागियों ने माना कि वे एक्साइटमेंट, फैंटेसी, जल्दी संतुष्टि या बोरियत दूर करने के लिए पॉर्न देखते हैं। कुछ लोगों ने इसे आदत भी बताया। यह समूह रिसर्च में सबसे प्रभावशाली पाया गया।

सीखने और परफॉर्मेंस सुधार

दूसरी प्रमुख वजह सेक्सुअल परफॉर्मेंस में सुधार थी। कुछ प्रतिभागियों ने बताया कि वे पॉर्न को एक तरह के अनौपचारिक लर्निंग टूल की तरह देखते हैं। इससे उन्हें नई चीजें सीखने, तकनीक समझने और अपने पार्टनर के साथ बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलती है। तीसरी वजह सामाजिक प्रभाव से जुड़ी पाई गई। दोस्तों की चर्चा, कंटेंट की क्वालिटी या किसी खास एक्टर की लोकप्रियता कई बार पॉर्न देखने की प्रेरणा बनती है। कुछ लोगों के लिए यह केवल टाइम पास या मनोरंजन का जरिया होता है।

भावनात्मक खालीपन और तनाव

रिसर्च में यह भी पाया गया कि अकेलापन, रिश्तों की कमी, तनाव या उदासी जैसी भावनात्मक स्थितियां भी पॉर्न देखने की वजह बनती हैं। कई प्रतिभागियों ने माना कि यह उन्हें अस्थायी राहत और ध्यान भटकाने में मदद करता है।

पर्सनैलिटी और रिलेशनशिप कनेक्शन

शोध में यह भी सामने आया कि जिन लोगों का झुकाव लंबी कमिटमेंट की बजाय कैजुअल रिश्तों की ओर ज्यादा था, वे अक्सर एक्साइटमेंट और सेक्स ड्राइव की वजह से पॉर्न की ओर रुख करते थे। जेंडर के आधार पर भी अंतर दिखा, पुरुषों के स्कोर महिलाओं से थोड़े अधिक थे लेकिन सीखने और परफॉर्मेंस सुधार के मामलों में दोनों समान पाए गए।

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57 साल आगे क्यों चलता है विक्रम संवत? जानिए इसके पीछे का बड़ा रहस्य

Vikram Samvat: विक्रम संवत हिंदू धर्म का पारंपरिक कैलेंडर है, जिसका उपयोग व्रत, त्योहार और शुभ मुहूर्त तय करने के लिए किया जाता है। कहा जाता है कि यह अंग्रेजी कैलेंडर से लगभग 57 साल आगे चलता है। इसकी शुरुआत प्राचीन भारत के महान और पराक्रमी राजा विक्रमादित्य की विजय की याद में मानी जाती है।

vikram samvat calendar
विक्रम संवत
locationभारत
userअसमीना
calendar06 Mar 2026 09:17 AM
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भारत में समय और त्योहारों की गणना के लिए सदियों से अलग-अलग कैलेंडर का उपयोग किया जाता रहा है। हिंदू धर्म में सबसे अधिक प्रचलित कैलेंडर विक्रम संवत है, जिसके आधार पर व्रत, त्योहार और धार्मिक अनुष्ठान तय किए जाते हैं। अक्सर लोग सुनते हैं कि विक्रम संवत अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे चलता है लेकिन इसके पीछे की कहानी और गणना का तरीका बहुत दिलचस्प है। आइए जानते हैं कि विक्रम संवत क्या है, यह अंग्रेजी कैलेंडर से कैसे अलग है और इसकी शुरुआत किस राजा के पराक्रम से जुड़ी मानी जाती है।

हिंदू नववर्ष और विक्रम संवत की शुरुआत

हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नया वर्ष शुरू होता है। इसी दिन विक्रम संवत का नया साल माना जाता है। अभी विक्रम संवत 2082 चल रहा है और जैसे ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा आएगी नया संवत 2083 शुरू हो जाएगा। हिंदू धर्म में जितने भी प्रमुख त्योहार जैसे नवरात्रि, रामनवमी या दीपावली हैं उनकी तिथियां इसी पंचांग के अनुसार तय होती हैं।

अंग्रेजी कैलेंडर और विक्रम संवत में मुख्य अंतर

अंग्रेजी कैलेंडर और विक्रम संवत दोनों में 12 महीने होते हैं लेकिन इनके आधार अलग हैं। अंग्रेजी कैलेंडर पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा पर आधारित है। इसे 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने लागू किया था और इसी वजह से इसे ग्रेगोरियन कैलेंडर कहा जाता है। इसमें नए साल की शुरुआत हर साल 1 जनवरी से होती है। वहीं विक्रम संवत भारतीय परंपरा पर आधारित है और इसमें समय की गणना चंद्रमा की गति के अनुसार की जाती है। इस पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण को मिलाकर समय तय किया जाता है। हर महीने को दो पक्षों में बांटा जाता है कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष।

विक्रम संवत 57 साल आगे क्यों माना जाता है?

अक्सर लोग पूछते हैं कि विक्रम संवत अंग्रेजी साल से 57 साल आगे क्यों चलता है। दरअसल इसकी शुरुआत 57 ईसा पूर्व मानी जाती है। यानी जब अंग्रेजी कैलेंडर में वर्ष 2026 चल रहा है तब विक्रम संवत लगभग 2083 होता है। यही वजह है कि दोनों कैलेंडर के बीच लगभग 57 साल का अंतर दिखाई देता है।

राजा विक्रमादित्य के पराक्रम से जुड़ी कहानी

विक्रम संवत की शुरुआत का श्रेय महान और न्यायप्रिय शासक राजा विक्रमादित्य को दिया जाता है। इतिहास और लोककथाओं के अनुसार उन्होंने शकों के अत्याचार से कई क्षेत्रों को मुक्त कराया था और उज्जैन में अपना शासन स्थापित किया था। इस बड़ी जीत की याद में उन्होंने एक नए युग की शुरुआत की जिसे आगे चलकर विक्रम संवत कहा गया। राजा विक्रमादित्य को उनकी न्यायप्रियता और पराक्रम के लिए जाना जाता था। उनकी विजय को ही इस पंचांग की शुरुआत का आधार माना गया इसलिए यह केवल एक कैलेंडर नहीं बल्कि भारतीय इतिहास और संस्कृति की भी एक महत्वपूर्ण पहचान है।

भारतीय संस्कृति में विक्रम संवत का महत्व

आज भी भारत में कई धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं विक्रम संवत के अनुसार ही निभाई जाती हैं। मंदिरों के पंचांग, ज्योतिषीय गणना और त्योहारों की तिथियां इसी कैलेंडर के आधार पर तय होती हैं। यही कारण है कि आधुनिक समय में अंग्रेजी कैलेंडर के साथ-साथ विक्रम संवत भी भारतीय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।