Sunday, 14 July 2024

मुस्लिम समाज से भी उठी देश में जातिगत जनगणना कराने की मांग

देश में जातीय जनगणना को लेकर राजनीतिक दलो की बढ़ती मांग के बीच अब मुस्लिम समाज ने भी अपना सुर…

मुस्लिम समाज से भी उठी देश में जातिगत जनगणना कराने की मांग

देश में जातीय जनगणना को लेकर राजनीतिक दलो की बढ़ती मांग के बीच अब मुस्लिम समाज ने भी अपना सुर मिला दिया है। अखिल भारतीय पसमांदा मुस्लिम महाज ने कहा है कि न केवल हिंदुओं बल्कि मुसलमानों के बीच भी जातिगत जनगणना होनी चाहिए।

पूर्व राज्यसभा सांसद व महाज के मुखिया अली अनवर अंसारी ने कहा कि जाति आधारित जनगणना केवल हिंदू समुदाय तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। बल्कि इसके दायरे में अल्पसंख्यक समुदाय(खासकर मुसलमानों) को भी लाना चाहिए।क्योंकि मुसलमान समाज भी जाति व्यवस्था में भरोसा करता है। उन्होंने कहाकि मुसलमान भी हिंदुओं की तरह विभिन्न जातियों व उपजातियों में विभाजित हैं।

1931 से ही देश में जातिगत जनगणना नहीं कराई गई है। यही वजह है कि सरकारी नीतियों का फायदा अपेक्षाकृत कमजोर वर्गों व अति पिछड़ी जातियों को नहीं मिल सका है। उन्होंने कहाकि पिछड़े समुदाय को पिछड़े व अति पिछड़े वर्गों में उपवर्गित किया जाना चाहिए और इसे केंद्रीय स्तर पर करके देश के सभी हिस्सों में विस्तारित किया जाना चाहिए। बतादें कि इसी विषय को लेकर हाल ही में 17 मुस्लिम संगठनों की बैठक हुई थी। जिसमें तय किया गया था कि जाति आधारित जनगणना में मुसलमानों को भी शामिल किया जाना चाहिए। ताकि पिछड़े वर्ग के आरक्षण व अन्य सुविधाओं का लाभ उन्हें भी मिल सके।

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