हमारा मूल आधार है SEX इस पर बात क्यों नहीं होती

जीवन के सबसे महत्वपूर्ण विषय SEX पर कोई भी खुलकर बात नहीं करता है। SEX के विषय में खुलकर बात करने को अनैतिक बात माना जाता है। जब हम बात ही नहीं करते तो फिर स्कूल तथा कॉलिजों में SEX की शिक्षा की बात करना तो बहुत दूर की बात है।

यौन शिक्षा से बढ़ती है समझ
यौन शिक्षा से बढ़ती है समझ
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar12 Jan 2026 03:58 PM
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Sex Education : यौन संबंध यानि कि SEX पूरे ब्रह्माण्ड (UNIVERSE) का मूल आधार है। पूरी सृष्टि की रचना SEX के द्वारा ही हुई है तथा लगातार हो रही है। वनस्पति का उगना, फूलों का खिलना, पक्षियों को चहकना तथा मानव जीवन का आगे बढऩा सब कुछ SEX के द्वारा ही संचालित होता है। जीवन के सबसे महत्वपूर्ण विषय SEX पर कोई भी खुलकर बात नहीं करता है। SEX के विषय में खुलकर बात करने को अनैतिक बात माना जाता है। जब हम बात ही नहीं करते तो फिर स्कूल तथा कॉलिजों में SEX की शिक्षा की बात करना तो बहुत दूर की बात है।

सबको मिलनी चाहिए SEX की शिक्षा

बदलते परिवेश में स्वास्थ्य खान पान और स्कूलों में पढ़ाया जाने वाला किताबी ज्ञान ही काफी नहीं है। अधिकतर किशोर और वयस्क हमारे शरीर के विभिन्न अंगों से परिचित हैं और वे कैसे कार्य करते हैं। इसे भी जानते है। लेकिन SEX की बात आती है तो किशोरों को तो छोड़िये कई वयस्कों के पास भी पर्याप्त जानकारी नहीं होती है। परिणामस्वरूप SEX एजुकेशन से जुड़ी भ्रांतियां, SEX संबंधी अंधविश्वास और इससे जुड़ी कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं। एक सुखी वैवाहिक जीवन के लिये स्त्री-पुरुष दोनों को SEX के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। समाज का मानना है कि शादी से पहले यौन शिक्षा जरूरी नहीं है। उनके विचारों से यौन शिक्षा भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। देखा जाए तो लोग इस विषय या मुद्दों पर बात करना वर्जित मानते हैं। उनकी सोच है कि इस विषय पर बात करने से किशोरों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। लेकिन, समय बदलने के साथ ही SEX संबंधों को लेकर धारणा भी बदली है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 12 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बच्चों पर यौन शिक्षा दी जानी अनिवार्य है। खासकर आज के समय में यह और भी जरूरी हो गया है, ताकि बच्चे उम्र के साथ होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को बेहतर तरीके से समझ सकें। साथ ही यौन क्रिया और उससे जुड़े नुकसान से भी अवगत हो

वास्तव में Sex Education क्या है?

शरीर में उम्र के साथ हो रहे हार्मोनल बदलाव सुरक्षित SEX संबंध, प्रेगनेंसी, माहवारी और बर्थ कंट्रोल के बारे में बच्चों और किशोर लड़के लड़कियों को बताना SEX एजुकेशन कहलाता है। SEX शिक्षा एक ऐसी प्रोसेस है, जिसमें स्कूल में टीचर और घर में माता-पिता बढ़ते बच्चों को SEX संबंधी जानकारी देते हैं। एक सर्वे से इस बात का खुलासा हुआ है कि जिन देशों के स्कूलों में SEX शिक्षा सही समय में बच्चों को दी गयी, वहां वे अपनी सही उम्र में बहुत ही सुरक्षित और संयमित तरीके से संबंध स्थापित किये। आज के समय में लोग इंटरनेट के माध्यम से हर चीज जान लेते हैं। इसमें से बहुत सी ठीक भी होती हैं और बहुत सी गलत भी। जो बच्चे किशोरावस्था में होते हैं, वह SEX की बातों को अलग ढंग से ले सकते हैं। ऐसे में यदि सही समय पर बच्चों को SEX शिक्षा दी जाये तो इससे बच्चे जिम्मेदार बनेंगे और उनका दिमाग भी विकसित होगा। वह गलत रास्ते पर जाने से पहले सोचेंगे। बच्चे बढ़ती उम्र के साथ शरीर में हो रहे बदलाव को समझ नहीं पाते और किसी से पूछते भी नहीं है, जिसकी वजह से वह अपनी जिज्ञासा को शान्त करने के लिए इंटरनेट की दुनिया में चले जाते हैं, जहां उन्हें आधी-अधूरी जानकारी मिलती है, जिसकी वजह से बहुत सी गलत चीजों को धारण कर लेते हैं। यह उनके स्वास्थ्य और समाज दोनों के लिये बहुत ही खतरनाक होती है। इसलिए ऐसी सभी चीजों से बचने के लिए स्कूलों में यौन SEX जरूर देनी चाहिए। यह बहुत जरूरी है।सभी स्कूलों मे यौन शिक्षा अनिवार्य हो जानी चाहिए

सबसे पहले सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में SEX शिक्षा अनिवार्य कर देनी चाहिए। इसमें SEX शिक्षा के सभी पहलुओं को जरूर शामिल करना चाहिए, जिससे बच्चों को SEX के बारे में जानकारियां हों। सिर्फ लड़कियों को ही नहीं, बल्कि लड़कों को भी मासिक धर्म के बारे में पता होना चाहिए, ताकि लड़का और लड़की दोनों शरीर में होने वाली प्राकृतिक घटना के रूप में इसे स्वीकार कर सकें। गर्भावस्था, यौन संचारित रोग (एसटीडी) और मानव इम्यूनो वायरस (एचआईवी) के बारे में जागरूकता लाने के लिए SEX शिक्षा की आवश्यकता है, ताकि युवा अधिक जिम्मेदार बन सकें और SEX के संबंध में बेहतर निर्णय ले सकें। सभी लड़कियों और लड़कों को गर्भनिरोधक और सुरक्षित SEX के बारे में पता होना चाहिए। बच्चों को इस बात की जानकारी दी जाये कि SEX क्रिया में भागीदारी की सही उम्र क्या है और इस क्रिया में सही उम्र का ना होना कितना नुकसानदेह साबित हो सकता है। Sex Education

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यह क्या बोल गए NSA अजीत डोभाल, बात तो बड़ी है

यह भी क्यों नहीं पढ़ाते कि लुटेरों का मुकाबला करने के बजाय उस समय हमारा समाज और उसके कर्णधार किन किन कामों में लिप्त थे ? पता नहीं क्यों हम अपने नई पीढ़ी को यह बता कर गौरवान्वित होते रहते हैं कि इतिहास में हमने कभी किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया?

NSA अजीत डोभाल
NSA अजीत डोभाल
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar12 Jan 2026 03:15 PM
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Ajit Doval : भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल भी वही सब दोहराने लगे जो सांप्रदायिक मानसिकता वाले नेता जमाने से कहते आ रहे हैं। दिल्ली के एक कार्यक्रम में भारत के NSA अजीत डोभाल भारत द्वारा कभी किसी देश पर हमला न करने और मध्य युग में मंदिरों को तोड़े जाने जैसी बातें दोहराकर युवाओं का आह्वान कर गए कि युवा अपने अंदर आग पैदा करें और इतिहास की दर्दनाक घटनाओं का प्रतिशोध लें । अब इसे देश का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या कहें कि जो बातें इतने बड़े अधिकारी ने कहीं वही सब हमारे स्कूलों में बच्चों को भी पढ़ाई जा रही हैं । बेशक विदेशी हमलावरों ने भारतीय मंदिर तोड़े थे, इससे तो किसी को इनकार ही नहीं है मगर इस जानकारी के साथ साथ ही हम अपनी नई पीढ़ी को यह भी क्यों नहीं बताते कि क्यों उस दौर में देश का सारा खजाना नागरिकों के पास नहीं वरन मंदिरों में जमा था, जिसे लूटने हमलावार आए थे ? यह भी क्यों नहीं पढ़ाते कि लुटेरों का मुकाबला करने के बजाय उस समय हमारा समाज और उसके कर्णधार किन किन कामों में लिप्त थे ? पता नहीं क्यों हम अपने नई पीढ़ी को यह बता कर गौरवान्वित होते रहते हैं कि इतिहास में हमने कभी किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया? भारतीय इतिहास की बाबत हजारों बार बोले गए इसी झूठ को अब एक राजनीतिक एजेंडे के तहत जब NSA अजीत डोभाल जैसे लोग बदले की भावना के आह्वान के साथ युवाओं के समक्ष परोसते हैं तो वाकई दुख होता है।

जिम्मेदार तत्वों पर बात क्यों नहीं करते?

यकीनन हमारा इतिहास दु:ख, क्लेश, उत्पीडऩ और अमानवीय घटनाओं से भरा हुआ है मगर पता नहीं क्यों हम उसके लिए जिम्मेदार तत्वों पर बात न करके एक अजीब किस्म की नैतिकता का यह चोला ओढ़ लेते हैं कि भारत सदैव एक शांतिप्रिय सभ्यता रही है, जिसने कभी किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया। क्या ऐतिहासिक दृष्टि से यह अधूरा और भ्रामक सत्य नहीं है ? यदि भारत ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया तो चंद्रगुप्त मौर्य ने यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर को पराजित कर किस अफग़़ानिस्तान और आज के पाकिस्तान और बलूचिस्तान को अपने विशाल साम्राज्य में शामिल किया था ? क्यों सम्राट अशोक के समय में मौर्य साम्राज्य की सीमाएँ आज के अफग़़ानिस्तान तक फैली थीं ?

भारत ने भी किया था सीमा विस्तार

क्या इससे भी इनकार किया जा सकता है कि दक्षिण भारत के शासकों ने भारत को एक समुद्री सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित किया था और चोल राजाओं ने 10वीं और 11वीं शताब्दी में समुद्र पार कर श्रीलंका, आज के मलेशिया, इंडोनेशिया,, थाईलैंड, म्यांमार और सिंगापुर क्षेत्र तक अपने सैन्य अभियान चलाए थे । क्या यह केवल व्यापारिक यात्राएँ थीं और उन्होंने वहाँ स्थानीय शासकों को पराजित कर कर-वसूली और प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित नहीं किया गया ? क्या यह भी किताबों में दर्ज नहीं है कि आठवीं सदी में कश्मीर के राजा ललितादित्य ने अपने देश की सीमाओं का विस्तार तिब्बत, मध्य एशिया और ईरान की सीमाओं तक कर लिया था ?आधुनिक काल के महाराजा रणजीत सिंह को क्यों हम भूल जाते हैं जिनके नेतृत्व में सिख साम्राज्य लाहौर, पेशावर, मुल्तान और अफग़़ानिस्तान तक फैला हुआ था । 18वीं शताब्दी में मराठों की सेनाएँ भी तो अटक और अफग़़ान सीमा तक अपना भगवा झंडा फहरा आई थीं। इन सभी तथ्यों का जिक्र करने का अर्थ यह साबित करना कतई नहीं है कि भारत भी एक आक्रामक या विस्तारवादी सभ्यता था बल्कि यह है कि अन्य सभ्यताओं की तरह उस दौर में भारत भी राजनीतिक शक्ति, सुरक्षा और प्रभाव के लिए सैन्य अभियानों का सहारा लेता रहा है । इसी लिए यह कहना कि "भारत ने कभी आक्रमण नहीं किया"  मुझे इतिहास को आदर्शवाद की चादर में ढकने जैसा लगता है। 

सच्चा राष्ट्रबोध मिथकों से नहीं आता

पता नहीं हम कब समझेंगे कि सच्चा राष्ट्रबोध मिथकों से नहीं, बल्कि ईमानदार इतिहासबोध से जन्म लेता है। भारत की महानता उसकी निष्क्रियता में नहीं, बल्कि उसकी क्षमता, संतुलन और समयानुसार शक्ति प्रयोग में निहित रही है। इतिहास को स्वीकार करना उसे कमज़ोर नहीं, बल्कि अधिक परिपक्व बनाता है। यूं भी हम भारत शब्द के प्रयोग के साथ जिस सीमाओं और उसके भीतर रहने वाले करोड़ों लोगों के बात करते हैं, वह तो संविधान लागू होने के बाद ही अस्तित्व में आया । अपने युवाओं को बदले की भावना से ओतप्रोत करते हुए हम यह स्पष्ट क्यों नहीं करते कि हमें बदला आखिर लेना किससे है ? जिन देशों के तत्कालीन राजाओं ने भारत पर हमले किए , क्या अब हम उनसे बदला ले भी सकते हैं ? क्या यह संभव भी है ? यदि नहीं तो फिर हमारा प्रतिशोध और नफरत किसके खिलाफ होगी ? काश आज ऐसे लोग की आवाज बुलंद हो जो लोगों को बताएं कि राष्ट्र केवल सीमाएं नहीं उसमें बसे लोग भी होते हैं । मगर दुर्भाग्य देखिए कि वही लोग चहुंओर दिखाई पड़ते हैं जो लोगों के आज के सुख दुख की बात ही नहीं करते और बार बार उन्हें इतिहास की भूल भुलैया में भटकाने की कोशिश करते हैं। Ajit Doval


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वर्ष-2026 के बजट में रचा जाएगा नया इतिहास, सरकार तैयार

1 फवरी को रविवार होने के बावजूद वर्ष-2026 के बजट को 1 फरवरी के दिन ही संसद में पेश करने का फैसला किया है। भारत के इतिहास में यह ऐतिहासिक घटना होने जा रही है कि भारत सरकार का बजट रविवार के दिन संसद में पेश किया जाएगा। इस मामले में वर्ष-2026 का बजट नया इतिहास रचने जा रहा है।

1 फरवरी को संसद में पेश होगा बजट
1 फरवरी को संसद में पेश होगा बजट
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar09 Jan 2026 04:16 PM
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Budget 2026 : भारत सरकार की तरफ से वर्ष-2026 का वार्षिक बजट एक नया इतिहास बनाएगा। भारत सरकार की तरफ से केन्द्र वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण वर्ष-2026 का बजट पेश करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। केन्द्र सरकार के अंतरंग सूत्रों ने बताया कि वर्ष-2026 के बजट को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वित्त मंत्रालय की एक बहुत बड़ी टीम बजट-2026 को अंतिम रूप देने में लगी हुई है।

इस खास कारण से ऐतिहासिक होगा वर्ष-2026 का बजट

आपको बता दें कि वर्ष-2026 तक भारत सरकार का बजट फरवरी की आखिरी तारीख यानि 28 अथवा 29 फरवरी को संसद में पेश किया जाता था। वर्ष-2017 के बाद भारत सरकार ने केन्द्रीय बजट को फरवरी की पहली तारीख (1 फरवरी) को पेश करना शुरू कर दिया था। वर्ष-2017 से लगातार केन्द्रीय बजट 1 फरवरी को ही संसद में पेश किया जाता रहा है। वर्ष-2017 के बाद यह पहला मौका है कि जब 1 फरवरी को रविवार का दिन पड़ रहा है। 1 फवरी को रविवार होने के बावजूद वर्ष-2026 के बजट को 1 फरवरी के दिन ही संसद में पेश करने का फैसला किया है। भारत के इतिहास में यह ऐतिहासिक घटना होने जा रही है कि भारत सरकार का बजट रविवार के दिन संसद में पेश किया जाएगा। इस मामले में वर्ष-2026 का बजट नया इतिहास रचने जा रहा है।

क्या-क्या खास होगा वर्ष-2026 के बजट में

संसद में पेश होने तक भारत में बजट की व्यवस्था को गोपनीय रखा जाता है। बजट में क्या-क्या नया होने वाला है इस बात की भनक किसी को भी नहीं लगने दी जाती है। यहां तक गोपनीयता बरती जाती है कि बजट से जुड़े अधिकारियों तथा कर्मचारियों को किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने तक नहीं दिया जाता है। इस कारण से वर्ष-2026 के बजट के विषय में कोई भी भविष्यवाणी केवल कोरी कल्पना ही हो सकती है। अत: हम इस विषय में आपको कोई जानकारी नहीं दे सकते हैं।

भारत के संविधान में जिक्र तक नहीं है बजट का

बजट की चर्चा चल रही है तो आपको बता दें कि भारत के संविधान में कहीं भी बजट का जिक्र तक नहीं है। भारत के संविधान में बजट की जगह अनुच्छेद 112 में जानकारी तो दी गई है लेकिन इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 112 में बजट को बजट नहीं बल्कि वार्षिक वित्तीय विवरण यानी Annual Financia Statement(AFS) कहा जाता है। इसका अर्थ सरकार की अनुमानित आय (इनकम) और व्यय (खर्च) का एक ब्यौरा है. बताया जाता है कि Annual Financia Statement(AFS) शब्द अंग्रेजों की परंपरा से आया हुआ है, जिसे भारत के संविधान बनाने वालों ने 'वार्षिक वित्तीय विवरण' कहा है। मतलब कि आप कह सकते हैं कि संविधान में लिखित 'वार्षिक वित्तीय विवरण' का ही लोकप्रिय नाम बजट है।

लम्बा इतिहास है बजट शब्द का

बजट शब्द के इतिहास की बात करें तो बजट शब्द का इतिहास एक लम्बा इतिहास है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार बजट शब्द कुछ दशक पहले आया है, लेकिन इसकी यात्रा काफी पुरानी है। सबसे पहले हम यहां बात बजट शब्द के आने की करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह शब्द लैटिन के 'बुल्गा'(Bulga) से निकला हुआ है, जिसका अर्थ होता है चमड़े का थैला या बैग। उसके बाद यह फ्रांसीसी रूप में आ गया। मतलब कि लैटिन से फ्रांसीसी में इसे बोजेट (Bougeette) कहा जाने लगा, जिसका अर्थ होता है चमड़े का छोटा थैला. उसके बाद यह शब्द 15वीं शताब्दी में अग्रेजी में एंट्री कर लिया। जी हां, अंग्रेजी में यह पहले बोगेट (Bogget) कहलाया, जो बाद में चलकर बजट (Budget) के रूप में पहचाना गया। भारत में भी इसी बजट शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन देश के संविधान में इस शब्द का जिक्र नहीं है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बजट शब्द कुछ दशक पहले आया है, लेकिन इसकी यात्रा काफी पुरानी है। सबसे पहले हम यहां बात बजट शब्द के आने की करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह शब्द लैटिन के 'बुल्गा'(Bulga) से निकला हुआ है, जिसका अर्थ होता है चमड़े का थैला या बैग। उसके बाद यह फ्रांसीसी रूप में आ गया। मतलब कि लैटिन से फ्रांसीसी में इसे बोजेट (Bougeette) कहा जाने लगा, जिसका अर्थ होता है चमड़े का छोटा थैला। उसके बाद यह शब्द 15वीं शताब्दी में अग्रेजी में एंट्री कर लिया। जी हां, अंग्रेजी में यह पहले बोगेट (Bogget) कहलाया, जो बाद में चलकर बजट (Budget) के रूप में पहचाना गया। भारत में भी इसी बजट शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन देश के संविधान में इस शब्द का जिक्र नहीं है।

सबसे अधिक बजट पेश करने के मामले में पीछे है निर्मला सीतारमण

आपको यह नहीं पता होगा कि भारत में सबसे ज्यादा बजट भारत के किस वित्त म़ंत्री ने पेश किए हैं। यदि आप यह मान रहे हैं कि बजट पेश करने के मामले में भारत की वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नम्बर—1 पर हैं तो आप गलत हैं। हम आपको विस्तार से बताते हैं कि भारत में सबसे अधिक बजट पेश करने का रिकार्ड किस नेता के नाम पर दर्ज है। 

मोरारजी देसाई हैं सबसे अधिक बार बजट पेश करने वाले नेता

भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम सबसे अधिक बार बजट पेश करने का रिकार्ड मौजूद है। स्व0 मोरारजी देसाई ने अपने जीवन काल में भारत सरकार के 10 बजट पेश किए थे। मोरारजी देसाई के बाद इस कड़ी में दूसरा नम्बर पूर्व वित्त मंत्री पी.0 चिदम्बरम ने 9 बार भारत का केन्द्रीय बजट संसद में पेश किया था। इस मामले में तीसरा नम्बर प्रणव मुखर्जी का है उन्होंने 8 बार बजट पेश किया था। वर्ष—2025 का बजट पेश करके वर्तमान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण प्रणव मुखर्जी जी बराबरी कर ली थी। निर्मला सीतारमण वर्ष 2026 का बजट पेश करके 9 बार बजट पेश करने वाली वित्त मंत्री बन जाएंगी। Budget 2026

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