भारत में बहुत तेजी से फैल रहा है शुगर डैडी का चलन

शुगर डैडी दिल खोल कर पैसे खर्च कर सकता है और शुगर बेबी को ज़रूरत है पैसों की। यूरोप, यूएस और अफ्रीका में ऐसी लड़कियों की तादाद बढ़ती जा रही है, जो डेटिंग के लिए लडकों के साथ नहीं, बल्कि बूढ़ों के साथ जाना पसंद करती हैं। अब यह प्रचलन भारत में भी तेजी से बढ़ रहा है।

शुगर डैडी ट्रेंड
शुगर डैडी ट्रेंड
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar12 Jan 2026 04:25 PM
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Sugar Daddy : भारत की संस्कृति तथा सभ्यता का इतिहास वर्षों पुराना है। पश्चिमी देशों में फैल चुके शुगर डैडी (Sugar Daddy) के प्रचलन की आहट पूरे भारत में सुनाई दे रही है। बताया जा रहा है कि शुगर डैडी (Sugar Daddy का प्रचलन भारत में बहुत तेजी के साथ फैल रहा है। शुगर डैडी (Sugar Daddy) वाली सोच तथा यह पश्चिमी पैशन भारत की संस्कृति तथा सभ्यता से बिल्कुल भी मेल नहीं खाता है। ऐसे में भारत में बढ़ते हुए शुगर डैडी (Sugar Daddy) के प्रचलन ने समाज की चिंता बढ़ा दी है।

शुगर डैडी (Sugar Daddy) किसे कहते हैं?

आपको हम यहां विस्तार से बता देते हैं कि शुगर डैडी (Sugar Daddy)किसे कहते हैं। दरअसल शुगर डैडी (Sugar Daddy) का कान्सेप्ट पश्चिमी सभ्यता वाले देशों से शुरू होकर भारत तक आया है। पहले तो शुगर डैडी का प्रचलन भारत के बड़े शहरों तक ही सीमित था। धीरे-धीरे शुगर डैडी वाला प्रवचन भारत के छोटे शहरों तक भी फैल गया है। भारत के तमाम बड़े तथा छोटे शहरों में शुगर डैडी बड़ी संख्या में सक्रिय हैं। भारत के छोटे-बड़े शहरों में शुगर डैडी की संख्या को जानने से पहले शुगर डैडी (Sugar Daddy) को जानना जरूरी है। आखिर कौन होता है शुगर डैडी। हम यहां आपको शुगर डैडी के विषय में विस्तार से बता रहे हैं। शुगर डैडी को जान लेने के बाद आपके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहेगा। आपको बता दें कि शुगर डैडी डेटिंग का एक नया नाम है। भारत में तो डेटिंग शब्द भी नया ही है। Sugar Daddy इसलिए बताते चलें कि अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए स्त्री तथा पुरूष कुछ समय के लिए आपस में मिलते हैं। इस मिलने-जुलने को डेटिंग कहा जाता है। डेटिंग के अनेक तरीके इजाद हुए है। इन्हीं तरीकों में से डेटिंग के एक तरीके का नाम है शुगर डैडी। “शुगर डैडी” एक ऐसा बुजुर्ग होता है जिसके पास खूब धन होता है। इसी धन के बलबूते पर बुजुर्ग अपने से बहुत कम उम्र की लडक़ी के साथ घूमता, फिरता तथा डेटिंग करता है। ऐसे बुजुर्ग को लड़कियां शुगर डैडी (Sugar Daddy) नाम से बुलाती हैं। जो लड़कियां इस प्रकार की डेटिंग करती हैं उन लड़कियों को शुगर बेबी कहा जाता है। डेटिंग का यह नया रूप Sugar Daddy खूब ट्रेंड कर रहा है। जहां एक अमीर, लेकिन उम्रदराज शख़्स रिलेशन रखता है अपने से छोटी लडक़ी से। शुगर डैडी दिल खोल कर पैसे खर्च कर सकता है और शुगर बेबी को ज़रूरत है पैसों की। यूरोप, यूएस और अफ्रीका में ऐसी लड़कियों की तादाद बढ़ती जा रही है, जो डेटिंग के लिए लडकों के साथ नहीं, बल्कि बूढ़ों के साथ जाना पसंद करती हैं। अब यह प्रचलन भारत में भी तेजी से बढ़ रहा है। 

भारत में शुगर डैडी के साथ ही बढ़ रही हैं शुगर बेबी 

शुगर डैडी (Sugar Daddy) की साथी को शुगर बेबी (Sugar Baby) कहा जाता है। शुगर डैडी (Sugar Daddy) तथा शुगर बेबी के रिश्ते की ख़ासियत है कि यह शॉर्ट टर्म होता है। इसे दोनों तरफ से लिया जाता है एक बिजनेस अथवा धंधे की तरह। अगर शुगर बेबी को कोई दूसरा अमीर आदमी मिलता है और पहले वाले शुगर डैडी के पास समय नहीं है, तो वह शिफ्ट हो जाती है। यह रिश्ता चलता है घंटों के हिसाब से। इसमें तय कर लिया जाता है कि शुगर डैडी को कितने घंटे का साथ चाहिए और किस समय। इससे शुगर बेबी (Sugar Baby) एक ही दिन में कई-कई लोगों के साथ रिलेशनशिप मेंटेन कर पाती है। इस रिलेशनशिप की अवधि इस बात पर भी निर्भर करती है कि शुगर डैडी कितनी जिम्मेदारी संभाल कर चल रहा है शुगर बेबी की। युवा लड़कियां मानती हैं कि उनके साथियों में करीब 24 फ़ीसदी साथियों के शुगर डैडी हैं। एशियन ट्रेंड को देखें, तो शुगर डैडी और शुगर बेबी आपस में सोशल नेटवर्किंग साइट्स और सोशल मीडिया के ज़रिए कनेक्ट होते हैं। दुनियाभर में पॉपुलर ‘शुगर डैडी फॉर मी’ डेटिंग वेबसाइट पर इस समय करीब 5 करोड़ यूजर हैं। आपको बता दें कि इस प्रकार के रिश्तों में शुगर डैडी इसलिए आपसे जुड़ता है, क्योंकि वह अपनी पर्सनल लाइफ से खुश नहीं होता। ऐसे में वह अधिकतर समय अपनी दिक्कतें शेयर करता रहता है। वहीं, शुगर बेबी का काम है उन समस्याओं को सुनना और शुगर डैडी को रिलैक्स करना। इससे फर्क नहीं पड़ता कि लडक़ी ख़ुद किस तरह की मानसिक परेशानी से गुजर रही है। ऐसे रिश्ते में भावनात्मक सहारा नहीं मिल पाता। एकतरफा होता है यह रिश्ता। पैसों से जुड़ा होने की वजह से ज्यादातर केस में शुगर डैडी मल्टीपल रिलेशनशिप में होते हैं। ऐसे में मल्टीपल पार्टनर के साथ सेक्स करने से कई तरह की सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज होने की आशंका बढ़ जाती है। Sugar Daddy भारत में शुगर डैडी तथ शुगर बेबी (Sugar Daddy and Sugar Baby) का चलन नया नया है। समाजशास्त्री बताते हैं कि यह चलन भारत में तेजी से बढ़ रहा है। शुगर डैडी व शुगर बेबी के बढ़ते हुए चलन से भारत में समाज के सभी तबके चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि शुगर डैडी (Sugar Daddy) तथा शुगर बेबी वाला चलन भारतीय सभ्यता के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। भारत में रिश्ते-नातों की पवित्रता का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में Sugar Daddy जैसा प्रचलन भारतीय समाज की चिंता का बड़ा कारण बन गया है। कुछ समाजसेवी संगठनों ने शुगर डैडी तथा शुगर बेबी वाले प्रचलन को तुरंत बंद करने की मांग की है।

भारत के छोटे शहरों तक फैल गया है शुगर डैडी का प्रचलन

आपको बता दें कि भारत में शुगर डैडी (Sugar Daddy) का प्रचलन बड़े शहरों में ज्यादा था। धीरे-धीरे शुगर डैडी का प्रचलन भारत के छोटे शहरों तक फैल गया है। भारत की राजधानी दिल्ली की बगल में स्थित नोएडा जैसे शहर में 50 से अधिक शुगर डैडी (Sugar Daddy) सक्रिय हैं। यही हाल दिल्ली-NCR के ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, फरीदाबाद तथा पलवल जैसे शहरों का भी है। शुगर डैडी बनकर मौज-मस्ती करने वाले 58 वर्ष के एक व्यक्ति ने चेतना मंच को बताया कि मौज-मस्ती के लिए शुगर डैडी बनना बहुत अच्छा अनुभव है। उसने बताया कि शुगर डैडी (Sugar Daddy) बनने तथा शुगर बेबी तलाश करने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं होती है। शुगर डैडी (Sugar Daddy) बनने के लिए इंटरनेट पर वेबसाइट तथा एप मौजूद हैं। इनमें से सर्वाधिक लोकप्रिय वेबसाइट का नाम “शुगर डैडी फॉर मी” है। इस वेबसाइट के 6 करोड़ से भी अधिक यूजर हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि दुनिया में करोड़ों की संख्या में शुगर डैडी मौजूद हैं। इस वेबसाइट के अलावा “माई शुगर डैडी डॉट कॉम”तथा “शुगर डैडी मीट”आदि विभिन्न नामों से शुगर डैडी (Sugar Daddy) तथा शुगर बेबी बनने के लिए दो दर्जन से अधिक वेबसाइट तथा एप इंटरनेट पर मौजूद हैं। अब आप जान गए हैं कि कौन होता है शुगर डैडी? शुगर डैडी का ट्रेंड भारत में तेजी के साथ फल-फूल रहा है। शुगर डैडी वाला यह चलन बॉयफ्रेंड वाले चलन पर भारी पड़ रहा है। एक समय में बॉयफ्रेंड वाला प्रचलन भी भारत के लिए बिल्कुल नया प्रचलन था। वर्तमान में बॉयफ्रेंड का प्रचलन खूब चल रहा है। इसी प्रकार भविष्य में शुगर डैडी का प्रचलन भी तेजी के साथ बढ़ेगा।   Sugar Daddy

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हमारा मूल आधार है SEX इस पर बात क्यों नहीं होती

जीवन के सबसे महत्वपूर्ण विषय SEX पर कोई भी खुलकर बात नहीं करता है। SEX के विषय में खुलकर बात करने को अनैतिक बात माना जाता है। जब हम बात ही नहीं करते तो फिर स्कूल तथा कॉलिजों में SEX की शिक्षा की बात करना तो बहुत दूर की बात है।

यौन शिक्षा से बढ़ती है समझ
यौन शिक्षा से बढ़ती है समझ
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar12 Jan 2026 03:58 PM
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Sex Education : यौन संबंध यानि कि SEX पूरे ब्रह्माण्ड (UNIVERSE) का मूल आधार है। पूरी सृष्टि की रचना SEX के द्वारा ही हुई है तथा लगातार हो रही है। वनस्पति का उगना, फूलों का खिलना, पक्षियों को चहकना तथा मानव जीवन का आगे बढऩा सब कुछ SEX के द्वारा ही संचालित होता है। जीवन के सबसे महत्वपूर्ण विषय SEX पर कोई भी खुलकर बात नहीं करता है। SEX के विषय में खुलकर बात करने को अनैतिक बात माना जाता है। जब हम बात ही नहीं करते तो फिर स्कूल तथा कॉलिजों में SEX की शिक्षा की बात करना तो बहुत दूर की बात है।

सबको मिलनी चाहिए SEX की शिक्षा

बदलते परिवेश में स्वास्थ्य खान पान और स्कूलों में पढ़ाया जाने वाला किताबी ज्ञान ही काफी नहीं है। अधिकतर किशोर और वयस्क हमारे शरीर के विभिन्न अंगों से परिचित हैं और वे कैसे कार्य करते हैं। इसे भी जानते है। लेकिन SEX की बात आती है तो किशोरों को तो छोड़िये कई वयस्कों के पास भी पर्याप्त जानकारी नहीं होती है। परिणामस्वरूप SEX एजुकेशन से जुड़ी भ्रांतियां, SEX संबंधी अंधविश्वास और इससे जुड़ी कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं। एक सुखी वैवाहिक जीवन के लिये स्त्री-पुरुष दोनों को SEX के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। समाज का मानना है कि शादी से पहले यौन शिक्षा जरूरी नहीं है। उनके विचारों से यौन शिक्षा भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। देखा जाए तो लोग इस विषय या मुद्दों पर बात करना वर्जित मानते हैं। उनकी सोच है कि इस विषय पर बात करने से किशोरों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। लेकिन, समय बदलने के साथ ही SEX संबंधों को लेकर धारणा भी बदली है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 12 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बच्चों पर यौन शिक्षा दी जानी अनिवार्य है। खासकर आज के समय में यह और भी जरूरी हो गया है, ताकि बच्चे उम्र के साथ होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को बेहतर तरीके से समझ सकें। साथ ही यौन क्रिया और उससे जुड़े नुकसान से भी अवगत हो

वास्तव में Sex Education क्या है?

शरीर में उम्र के साथ हो रहे हार्मोनल बदलाव सुरक्षित SEX संबंध, प्रेगनेंसी, माहवारी और बर्थ कंट्रोल के बारे में बच्चों और किशोर लड़के लड़कियों को बताना SEX एजुकेशन कहलाता है। SEX शिक्षा एक ऐसी प्रोसेस है, जिसमें स्कूल में टीचर और घर में माता-पिता बढ़ते बच्चों को SEX संबंधी जानकारी देते हैं। एक सर्वे से इस बात का खुलासा हुआ है कि जिन देशों के स्कूलों में SEX शिक्षा सही समय में बच्चों को दी गयी, वहां वे अपनी सही उम्र में बहुत ही सुरक्षित और संयमित तरीके से संबंध स्थापित किये। आज के समय में लोग इंटरनेट के माध्यम से हर चीज जान लेते हैं। इसमें से बहुत सी ठीक भी होती हैं और बहुत सी गलत भी। जो बच्चे किशोरावस्था में होते हैं, वह SEX की बातों को अलग ढंग से ले सकते हैं। ऐसे में यदि सही समय पर बच्चों को SEX शिक्षा दी जाये तो इससे बच्चे जिम्मेदार बनेंगे और उनका दिमाग भी विकसित होगा। वह गलत रास्ते पर जाने से पहले सोचेंगे। बच्चे बढ़ती उम्र के साथ शरीर में हो रहे बदलाव को समझ नहीं पाते और किसी से पूछते भी नहीं है, जिसकी वजह से वह अपनी जिज्ञासा को शान्त करने के लिए इंटरनेट की दुनिया में चले जाते हैं, जहां उन्हें आधी-अधूरी जानकारी मिलती है, जिसकी वजह से बहुत सी गलत चीजों को धारण कर लेते हैं। यह उनके स्वास्थ्य और समाज दोनों के लिये बहुत ही खतरनाक होती है। इसलिए ऐसी सभी चीजों से बचने के लिए स्कूलों में यौन SEX जरूर देनी चाहिए। यह बहुत जरूरी है।सभी स्कूलों मे यौन शिक्षा अनिवार्य हो जानी चाहिए

सबसे पहले सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में SEX शिक्षा अनिवार्य कर देनी चाहिए। इसमें SEX शिक्षा के सभी पहलुओं को जरूर शामिल करना चाहिए, जिससे बच्चों को SEX के बारे में जानकारियां हों। सिर्फ लड़कियों को ही नहीं, बल्कि लड़कों को भी मासिक धर्म के बारे में पता होना चाहिए, ताकि लड़का और लड़की दोनों शरीर में होने वाली प्राकृतिक घटना के रूप में इसे स्वीकार कर सकें। गर्भावस्था, यौन संचारित रोग (एसटीडी) और मानव इम्यूनो वायरस (एचआईवी) के बारे में जागरूकता लाने के लिए SEX शिक्षा की आवश्यकता है, ताकि युवा अधिक जिम्मेदार बन सकें और SEX के संबंध में बेहतर निर्णय ले सकें। सभी लड़कियों और लड़कों को गर्भनिरोधक और सुरक्षित SEX के बारे में पता होना चाहिए। बच्चों को इस बात की जानकारी दी जाये कि SEX क्रिया में भागीदारी की सही उम्र क्या है और इस क्रिया में सही उम्र का ना होना कितना नुकसानदेह साबित हो सकता है। Sex Education

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यह क्या बोल गए NSA अजीत डोभाल, बात तो बड़ी है

यह भी क्यों नहीं पढ़ाते कि लुटेरों का मुकाबला करने के बजाय उस समय हमारा समाज और उसके कर्णधार किन किन कामों में लिप्त थे ? पता नहीं क्यों हम अपने नई पीढ़ी को यह बता कर गौरवान्वित होते रहते हैं कि इतिहास में हमने कभी किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया?

NSA अजीत डोभाल
NSA अजीत डोभाल
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar12 Jan 2026 03:15 PM
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Ajit Doval : भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल भी वही सब दोहराने लगे जो सांप्रदायिक मानसिकता वाले नेता जमाने से कहते आ रहे हैं। दिल्ली के एक कार्यक्रम में भारत के NSA अजीत डोभाल भारत द्वारा कभी किसी देश पर हमला न करने और मध्य युग में मंदिरों को तोड़े जाने जैसी बातें दोहराकर युवाओं का आह्वान कर गए कि युवा अपने अंदर आग पैदा करें और इतिहास की दर्दनाक घटनाओं का प्रतिशोध लें । अब इसे देश का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या कहें कि जो बातें इतने बड़े अधिकारी ने कहीं वही सब हमारे स्कूलों में बच्चों को भी पढ़ाई जा रही हैं । बेशक विदेशी हमलावरों ने भारतीय मंदिर तोड़े थे, इससे तो किसी को इनकार ही नहीं है मगर इस जानकारी के साथ साथ ही हम अपनी नई पीढ़ी को यह भी क्यों नहीं बताते कि क्यों उस दौर में देश का सारा खजाना नागरिकों के पास नहीं वरन मंदिरों में जमा था, जिसे लूटने हमलावार आए थे ? यह भी क्यों नहीं पढ़ाते कि लुटेरों का मुकाबला करने के बजाय उस समय हमारा समाज और उसके कर्णधार किन किन कामों में लिप्त थे ? पता नहीं क्यों हम अपने नई पीढ़ी को यह बता कर गौरवान्वित होते रहते हैं कि इतिहास में हमने कभी किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया? भारतीय इतिहास की बाबत हजारों बार बोले गए इसी झूठ को अब एक राजनीतिक एजेंडे के तहत जब NSA अजीत डोभाल जैसे लोग बदले की भावना के आह्वान के साथ युवाओं के समक्ष परोसते हैं तो वाकई दुख होता है।

जिम्मेदार तत्वों पर बात क्यों नहीं करते?

यकीनन हमारा इतिहास दु:ख, क्लेश, उत्पीडऩ और अमानवीय घटनाओं से भरा हुआ है मगर पता नहीं क्यों हम उसके लिए जिम्मेदार तत्वों पर बात न करके एक अजीब किस्म की नैतिकता का यह चोला ओढ़ लेते हैं कि भारत सदैव एक शांतिप्रिय सभ्यता रही है, जिसने कभी किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया। क्या ऐतिहासिक दृष्टि से यह अधूरा और भ्रामक सत्य नहीं है ? यदि भारत ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया तो चंद्रगुप्त मौर्य ने यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर को पराजित कर किस अफग़़ानिस्तान और आज के पाकिस्तान और बलूचिस्तान को अपने विशाल साम्राज्य में शामिल किया था ? क्यों सम्राट अशोक के समय में मौर्य साम्राज्य की सीमाएँ आज के अफग़़ानिस्तान तक फैली थीं ?

भारत ने भी किया था सीमा विस्तार

क्या इससे भी इनकार किया जा सकता है कि दक्षिण भारत के शासकों ने भारत को एक समुद्री सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित किया था और चोल राजाओं ने 10वीं और 11वीं शताब्दी में समुद्र पार कर श्रीलंका, आज के मलेशिया, इंडोनेशिया,, थाईलैंड, म्यांमार और सिंगापुर क्षेत्र तक अपने सैन्य अभियान चलाए थे । क्या यह केवल व्यापारिक यात्राएँ थीं और उन्होंने वहाँ स्थानीय शासकों को पराजित कर कर-वसूली और प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित नहीं किया गया ? क्या यह भी किताबों में दर्ज नहीं है कि आठवीं सदी में कश्मीर के राजा ललितादित्य ने अपने देश की सीमाओं का विस्तार तिब्बत, मध्य एशिया और ईरान की सीमाओं तक कर लिया था ?आधुनिक काल के महाराजा रणजीत सिंह को क्यों हम भूल जाते हैं जिनके नेतृत्व में सिख साम्राज्य लाहौर, पेशावर, मुल्तान और अफग़़ानिस्तान तक फैला हुआ था । 18वीं शताब्दी में मराठों की सेनाएँ भी तो अटक और अफग़़ान सीमा तक अपना भगवा झंडा फहरा आई थीं। इन सभी तथ्यों का जिक्र करने का अर्थ यह साबित करना कतई नहीं है कि भारत भी एक आक्रामक या विस्तारवादी सभ्यता था बल्कि यह है कि अन्य सभ्यताओं की तरह उस दौर में भारत भी राजनीतिक शक्ति, सुरक्षा और प्रभाव के लिए सैन्य अभियानों का सहारा लेता रहा है । इसी लिए यह कहना कि "भारत ने कभी आक्रमण नहीं किया"  मुझे इतिहास को आदर्शवाद की चादर में ढकने जैसा लगता है। 

सच्चा राष्ट्रबोध मिथकों से नहीं आता

पता नहीं हम कब समझेंगे कि सच्चा राष्ट्रबोध मिथकों से नहीं, बल्कि ईमानदार इतिहासबोध से जन्म लेता है। भारत की महानता उसकी निष्क्रियता में नहीं, बल्कि उसकी क्षमता, संतुलन और समयानुसार शक्ति प्रयोग में निहित रही है। इतिहास को स्वीकार करना उसे कमज़ोर नहीं, बल्कि अधिक परिपक्व बनाता है। यूं भी हम भारत शब्द के प्रयोग के साथ जिस सीमाओं और उसके भीतर रहने वाले करोड़ों लोगों के बात करते हैं, वह तो संविधान लागू होने के बाद ही अस्तित्व में आया । अपने युवाओं को बदले की भावना से ओतप्रोत करते हुए हम यह स्पष्ट क्यों नहीं करते कि हमें बदला आखिर लेना किससे है ? जिन देशों के तत्कालीन राजाओं ने भारत पर हमले किए , क्या अब हम उनसे बदला ले भी सकते हैं ? क्या यह संभव भी है ? यदि नहीं तो फिर हमारा प्रतिशोध और नफरत किसके खिलाफ होगी ? काश आज ऐसे लोग की आवाज बुलंद हो जो लोगों को बताएं कि राष्ट्र केवल सीमाएं नहीं उसमें बसे लोग भी होते हैं । मगर दुर्भाग्य देखिए कि वही लोग चहुंओर दिखाई पड़ते हैं जो लोगों के आज के सुख दुख की बात ही नहीं करते और बार बार उन्हें इतिहास की भूल भुलैया में भटकाने की कोशिश करते हैं। Ajit Doval


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