जेपी ग्रुप की इस हेराफेरी की जाल में फंसे होम बॉयर्स की शिकायत पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष मनोज गौड़ को अब गिरफ्तार कर लिया गया है। पीडि़तों द्वारा आरोप लगाया गया है कि आवासीय परियोजनाओं के निर्माण और उन्हें पूरा करने के लिए हज़ारों घर

उत्तर प्रदेश के नोएडा-ग्रेटर नोएडा व गाजियाबाद के साथ दिल्ली के हजारों घर खरीददारों से हजारों करोड़ रूपये लेकर जेपी ग्रुप ने बड़ा ‘‘खेला” किया था। मैसर्स जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) ने होम बॉयर्स से हाईराइज सोसायटियां बनाकर उन्हें फ्लैट देने का सपना दिखाया और होम बॉयर्स से 14,599 करोड़ रूपये लेकर ग्रुप की दूसरी कंपनियों में डायवर्ट कर दिये जिस वजह से होम बॉयर्स का अपने घर का सपना अधूरा ही रह गया। जेपी ग्रुप की इस हेराफेरी की जाल में फंसे होम बॉयर्स की शिकायत पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष मनोज गौड़ को अब गिरफ्तार कर लिया गया है।
जेपी ग्रुप की धोखाधड़ी के खिलाफ दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा व नोएडा के जेपी विश टाउन तथा जेपी ग्रीन्स परियोजना में घर खरीदने वाले होम बॉयर्स द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद ED ने कंपनी के MD मनोज गौड़ को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी दिल्ली जोनल कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय (ED), दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने मेसर्स जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी और मेसर्स जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (JIL) के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। जेपी समूह के संबंध में PMLA के तहत ED द्वारा दर्ज की गई एक ईसीआईआर की चल रही जाँच के दौरान एकत्रित साक्ष्यों की विस्तृत जाँच और विश्लेषण के बाद मनोज गौड़ की गिरफ्तारी हुई।
ईडी ने जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स परियोजनाओं के घर खरीदारों द्वारा कंपनी और उसके प्रमोटरों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाते हुए दर्ज की गई शिकायतों के आधार पर दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर जेपी समूह के खिलाफ जाँच शुरू की। पीडि़तों द्वारा आरोप लगाया गया है कि आवासीय परियोजनाओं के निर्माण और उन्हें पूरा करने के लिए हज़ारों घर खरीदारों से एकत्रित धनराशि को निर्माण के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए डायवर्ट किया गया, जिससे घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी हुई और उनकी परियोजनाएँ अधूरी रह गईं।
ED की जाँच से पता चला है कि जेएएल और जेआईएल द्वारा घर खरीदारों से एकत्रित लगभग 14,599 करोड़ रुपये में से, एक बड़ी राशि गैर-निर्माण उद्देश्यों के लिए डायवर्ट की गई और जेपी सेवा संस्थान (JSS), मेसर्स जेपी हेल्थकेयर लिमिटेड (JHL), और मेसर्स जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड (JSIL) सहित संबंधित समूह संस्थाओं और ट्रस्टों को हस्तांतरित कर दी गई। जाँच के दौरान यह भी पता चला है कि मनोज गौड़ जेपी सेवा संस्थान (जेएसएस) के प्रबंध न्यासी हैं, जिन्हें डायवर्ट की गई धनराशि का एक हिस्सा प्राप्त हुआ था।
इससे पहले, 23 मई 2025 को, ईडी ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई में 15 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था, जिसमें मेसर्स जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड और मेसर्स जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के कार्यालय और परिसर शामिल थे। तलाशी के दौरान, ईडी ने बड़ी मात्रा में वित्तीय और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए, साथ ही धन शोधन और धन के हेराफेरी के अपराध के साक्ष्य देने वाले दस्तावेज भी जब्त किए थे।
जांच से जेपी समूह और उससे जुड़ी संस्थाओं के भीतर लेन-देन के एक जटिल जाल के माध्यम से धन के हेराफेरी की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में मनोज गौड़ की केंद्रीय भूमिका स्थापित हुई थी। कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बाद मनोज गौड़ को गिरफ्तार किया गया।