भारत के साथ काउंटर टेरर पर सऊदी का जोर, UAE डील के बाद बढ़ी हलचल
इसी कड़ी के कुछ ही दिनों बाद 28 जनवरी को भारत और सऊदी अरब के बीच डिफेंस/सिक्योरिटी सेक्टर को लेकर रियाद में एक अहम बैठक हुई। इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि पाकिस्तान के साथ सुरक्षा ढांचे को लेकर सऊदी के कुछ कदमों के बाद, रियाद अब नई दिल्ली के साथ विश्वास बहाली पर जोर दे रहा है।

India-Saudi Ties : मध्य पूर्व की रणनीतिक तस्वीर तेजी से बदल रही है। हाल ही में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए रणनीतिक साझेदारी से जुड़ा लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया। इसी कड़ी के कुछ ही दिनों बाद 28 जनवरी को भारत और सऊदी अरब के बीच डिफेंस/सिक्योरिटी सेक्टर को लेकर रियाद में एक अहम बैठक हुई। इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि पाकिस्तान के साथ सुरक्षा ढांचे को लेकर सऊदी के कुछ कदमों के बाद, रियाद अब नई दिल्ली के साथ विश्वास बहाली पर जोर दे रहा है।
रियाद में क्या हुआ?
भारत और सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई इस बैठक में दोनों पक्षों ने चल रहे सुरक्षा सहयोग की विस्तृत समीक्षा की। चर्चा का केंद्र आतंकवादी संगठनों से पैदा होने वाले खतरे, कट्टरपंथ और उग्रवाद की चुनौती, और दोनों देशों के क्षेत्रों तथा वैश्विक स्तर पर उभरते सुरक्षा जोखिम रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक तीसरे सुरक्षा वर्किंग ग्रुप के तहत हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता भारत की ओर से विदेश मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी (काउंटर टेररिज्म) विनोद बहाडे और सऊदी अरब की ओर से गृह मंत्रालय में कानूनी मामलों व अंतरराष्ट्रीय सहयोग के डायरेक्टर जनरल अहमद अल-ईसा ने की। भारत के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने आतंकवाद से निपटने में सहयोग को और मजबूत करने पर बात की। जिसमें आतंकी फंडिंग पर शिकंजा, टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग रोकना, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और आतंकवाद के संबंध, तथा कट्टरपंथ/उग्रवाद के नेटवर्क जैसी चुनौतियां शामिल रहीं।
हमलों की निंदा और कानून-व्यवस्था सहयोग पर जोर
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में भारतीय और सऊदी अधिकारियों ने पिछले वर्ष अप्रैल में हुए पहलगाम हमले और 10 नवंबर को लाल किले पर हुए आतंकी हमलों की निंदा भी की। साथ ही, द्विपक्षीय कानूनी व न्यायिक सहयोग और लॉ-एन्फोर्समेंट कोऑर्डिनेशन बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा हुई।
डैमेज कंट्रोल की चर्चा क्यों?
इस बैठक को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि भारत-UAE के रक्षा समझौते के बाद क्षेत्रीय समीकरणों में हलचल दिख रही है। दूसरी ओर, सऊदी अरब ने पिछले साल पाकिस्तान के साथ NATO जैसे सुरक्षा फ्रेमवर्क की दिशा में कदम बढ़ाए थे। वहीं यमन युद्ध की वजह से सऊदी-UAE संबंधों में भी उतार-चढ़ाव की खबरें आती रही हैं। ऐसे माहौल में भारत के साथ रियाद की ताजा बैठक को कुछ विश्लेषक भारत के साथ भरोसा और साझेदारी की रीसेट कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। भारतीय पक्ष का रुख यह रहा है कि UAE के साथ रणनीतिक रक्षा साझेदारी का यह कदम किसी क्षेत्रीय संघर्ष में भारत को खींचने के लिए नहीं है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 19 जनवरी को इस ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ को पहले से चल रहे रक्षा सहयोग का स्वाभाविक विस्तार बताया था । India-Saudi Ties
India-Saudi Ties : मध्य पूर्व की रणनीतिक तस्वीर तेजी से बदल रही है। हाल ही में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए रणनीतिक साझेदारी से जुड़ा लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया। इसी कड़ी के कुछ ही दिनों बाद 28 जनवरी को भारत और सऊदी अरब के बीच डिफेंस/सिक्योरिटी सेक्टर को लेकर रियाद में एक अहम बैठक हुई। इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि पाकिस्तान के साथ सुरक्षा ढांचे को लेकर सऊदी के कुछ कदमों के बाद, रियाद अब नई दिल्ली के साथ विश्वास बहाली पर जोर दे रहा है।
रियाद में क्या हुआ?
भारत और सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई इस बैठक में दोनों पक्षों ने चल रहे सुरक्षा सहयोग की विस्तृत समीक्षा की। चर्चा का केंद्र आतंकवादी संगठनों से पैदा होने वाले खतरे, कट्टरपंथ और उग्रवाद की चुनौती, और दोनों देशों के क्षेत्रों तथा वैश्विक स्तर पर उभरते सुरक्षा जोखिम रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक तीसरे सुरक्षा वर्किंग ग्रुप के तहत हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता भारत की ओर से विदेश मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी (काउंटर टेररिज्म) विनोद बहाडे और सऊदी अरब की ओर से गृह मंत्रालय में कानूनी मामलों व अंतरराष्ट्रीय सहयोग के डायरेक्टर जनरल अहमद अल-ईसा ने की। भारत के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने आतंकवाद से निपटने में सहयोग को और मजबूत करने पर बात की। जिसमें आतंकी फंडिंग पर शिकंजा, टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग रोकना, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और आतंकवाद के संबंध, तथा कट्टरपंथ/उग्रवाद के नेटवर्क जैसी चुनौतियां शामिल रहीं।
हमलों की निंदा और कानून-व्यवस्था सहयोग पर जोर
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में भारतीय और सऊदी अधिकारियों ने पिछले वर्ष अप्रैल में हुए पहलगाम हमले और 10 नवंबर को लाल किले पर हुए आतंकी हमलों की निंदा भी की। साथ ही, द्विपक्षीय कानूनी व न्यायिक सहयोग और लॉ-एन्फोर्समेंट कोऑर्डिनेशन बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा हुई।
डैमेज कंट्रोल की चर्चा क्यों?
इस बैठक को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि भारत-UAE के रक्षा समझौते के बाद क्षेत्रीय समीकरणों में हलचल दिख रही है। दूसरी ओर, सऊदी अरब ने पिछले साल पाकिस्तान के साथ NATO जैसे सुरक्षा फ्रेमवर्क की दिशा में कदम बढ़ाए थे। वहीं यमन युद्ध की वजह से सऊदी-UAE संबंधों में भी उतार-चढ़ाव की खबरें आती रही हैं। ऐसे माहौल में भारत के साथ रियाद की ताजा बैठक को कुछ विश्लेषक भारत के साथ भरोसा और साझेदारी की रीसेट कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। भारतीय पक्ष का रुख यह रहा है कि UAE के साथ रणनीतिक रक्षा साझेदारी का यह कदम किसी क्षेत्रीय संघर्ष में भारत को खींचने के लिए नहीं है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 19 जनवरी को इस ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ को पहले से चल रहे रक्षा सहयोग का स्वाभाविक विस्तार बताया था । India-Saudi Ties












