इंडोनेशिया में प्रेम संबंध बना अपराध, प्रेमी जोड़े को 140 कोड़ों की सज़ा

इंडोनेशिया का एकमात्र प्रांत है, जहां शादी से बाहर यौन संबंध पूरी तरह गैरकानूनी हैं। जिस पर प्रेमी जोड़े को बिना शादी के यौन संबंध बनाने और शराब पीने के आरोप में एक प्रेमी जोड़े को शरिया कानून के तहत 140-140 कोड़े मारे गए है।

Love affairs in Indonesia
प्रेमी जोड़े पर टूटा शरिया कानून (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar29 Jan 2026 04:11 PM
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इंडोनेशिया के आचे प्रांत से एक बेहद परेशान करने वाली घटना सामने आई है, जहां बिना शादी के यौन संबंध बनाने और शराब पीने के आरोप में एक प्रेमी जोड़े को शरिया कानून के तहत सार्वजनिक रूप से 140-140 कोड़े मारे गए। सज़ा के दौरान महिला बेहोश हो गई, जिसके बाद उसे एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना आचे प्रांत के एक सार्वजनिक पार्क में हुई, जहां दर्जनों लोगों की मौजूदगी में शरिया पुलिस ने बांस की पतली छड़ी से दोनों को पीठ पर कोड़े मारे। आचे शरिया कानून लागू करने वाला इंडोनेशिया का एकमात्र प्रांत है, जहां शादी से बाहर यौन संबंध पूरी तरह गैरकानूनी हैं।

100 कोड़े अवैध संबंध के लिए, 40 शराब पीने पर

बता दें कि आचे की शरिया पुलिस के प्रमुख मुहम्मद रिजल ने बताया कि प्रेमी जोड़े को कुल 140-140 कोड़े मारे गए। इनमें से 100 कोड़े बिना शादी के यौन संबंध बनाने के लिए और 40 कोड़े शराब पीने के आरोप में दिए गए। सज़ा इतनी कठोर थी कि महिला अंत में बेहोश हो गई।

2001 से लागू है शरिया कानून

बता दें कि वर्ष 2001 में इंडोनेशियाई सरकार ने आचे को विशेष स्वायत्तता दी थी, जिसके बाद यहां शरिया कानून लागू किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, यह अब तक के सबसे कठोर दंडों में से एक माना जा रहा है। इस मामले में कुल छह लोगों को इस्लामिक कानून का उल्लंघन करने पर सज़ा दी गई है। एक अन्य मामले में शरिया पुलिस के एक अधिकारी और उसकी महिला साथी को भी दोषी पाए जाने पर 23-23 कोड़े लगाए गए।

“अपने लोगों के लिए भी कोई छूट नहीं”

मुहम्मद रिजल ने कहा कि जैसा कि हमने वादा किया था, हम किसी के लिए कोई अपवाद नहीं करते — यहां तक कि अपने अधिकारियों के लिए भी नहीं। यह घटना हमारे लिए शर्मनाक है, लेकिन कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है। आचे प्रांत में जुआ खेलने, शराब पीने, समलैंगिक संबंध रखने और शादी से बाहर यौन संबंध बनाने जैसे मामलों में कोड़े मारने की सज़ा दी जाती है। मानवाधिकार संगठनों द्वारा इस तरह की सार्वजनिक सजाओं की लगातार आलोचना की जाती रही है।

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भारत के साथ काउंटर टेरर पर सऊदी का जोर, UAE डील के बाद बढ़ी हलचल

इसी कड़ी के कुछ ही दिनों बाद 28 जनवरी को भारत और सऊदी अरब के बीच डिफेंस/सिक्योरिटी सेक्टर को लेकर रियाद में एक अहम बैठक हुई। इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि पाकिस्तान के साथ सुरक्षा ढांचे को लेकर सऊदी के कुछ कदमों के बाद, रियाद अब नई दिल्ली के साथ विश्वास बहाली पर जोर दे रहा है।

UAE डील के बाद बढ़ी हलचल
UAE डील के बाद बढ़ी हलचल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar29 Jan 2026 10:28 AM
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India-Saudi Ties : मध्य पूर्व की रणनीतिक तस्वीर तेजी से बदल रही है। हाल ही में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए रणनीतिक साझेदारी से जुड़ा लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया। इसी कड़ी के कुछ ही दिनों बाद 28 जनवरी को भारत और सऊदी अरब के बीच डिफेंस/सिक्योरिटी सेक्टर को लेकर रियाद में एक अहम बैठक हुई। इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि पाकिस्तान के साथ सुरक्षा ढांचे को लेकर सऊदी के कुछ कदमों के बाद, रियाद अब नई दिल्ली के साथ विश्वास बहाली पर जोर दे रहा है।

रियाद में क्या हुआ?

भारत और सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई इस बैठक में दोनों पक्षों ने चल रहे सुरक्षा सहयोग की विस्तृत समीक्षा की। चर्चा का केंद्र आतंकवादी संगठनों से पैदा होने वाले खतरे, कट्टरपंथ और उग्रवाद की चुनौती, और दोनों देशों के क्षेत्रों तथा वैश्विक स्तर पर उभरते सुरक्षा जोखिम रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक तीसरे सुरक्षा वर्किंग ग्रुप के तहत हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता भारत की ओर से विदेश मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी (काउंटर टेररिज्म) विनोद बहाडे और सऊदी अरब की ओर से गृह मंत्रालय में कानूनी मामलों व अंतरराष्ट्रीय सहयोग के डायरेक्टर जनरल अहमद अल-ईसा ने की। भारत के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने आतंकवाद से निपटने में सहयोग को और मजबूत करने पर बात की जिसमें आतंकी फंडिंग पर शिकंजा, टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग रोकना, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और आतंकवाद के संबंध, तथा कट्टरपंथ/उग्रवाद के नेटवर्क जैसी चुनौतियां शामिल रहीं।

हमलों की निंदा और कानून-व्यवस्था सहयोग पर जोर

विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में भारतीय और सऊदी अधिकारियों ने पिछले वर्ष अप्रैल में हुए पहलगाम हमले और 10 नवंबर को लाल किले पर हुए आतंकी हमलों की निंदा भी की। साथ ही, द्विपक्षीय कानूनी व न्यायिक सहयोग और लॉ-एन्फोर्समेंट कोऑर्डिनेशन बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

डैमेज कंट्रोल की चर्चा क्यों?

इस बैठक को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि भारत-UAE के रक्षा समझौते के बाद क्षेत्रीय समीकरणों में हलचल दिख रही है। दूसरी ओर, सऊदी अरब ने पिछले साल पाकिस्तान के साथ NATO जैसे सुरक्षा फ्रेमवर्क की दिशा में कदम बढ़ाए थे। वहीं यमन युद्ध की वजह से सऊदी-UAE संबंधों में भी उतार-चढ़ाव की खबरें आती रही हैं। ऐसे माहौल में भारत के साथ रियाद की ताजा बैठक को कुछ विश्लेषक भारत के साथ भरोसा और साझेदारी की रीसेट कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। भारतीय पक्ष का रुख यह रहा है कि UAE के साथ रणनीतिक रक्षा साझेदारी का यह कदम किसी क्षेत्रीय संघर्ष में भारत को खींचने के लिए नहीं है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 19 जनवरी को इस ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ को पहले से चल रहे रक्षा सहयोग का स्वाभाविक विस्तार बताया था । India-Saudi Ties


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भारत-ईयू ऐतिहासिक व्यापार समझौता : 'ट्रंप देखते रहे कारवां गुजर गया'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मदर आफ आल डील्स बताया। इस समझौते के लागू होने से भारतीय बाजार में यूरोपियन कारों की कीमतों में भारी गिरावट आने की संभावना है। इस डील के बाद विशेषज्ञ यह कहने लगे हैं कि ट्रंप देखते रहे और कारवां गुजर गया।

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ईयू और भारत के बीच समझौता करते हुए
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar27 Jan 2026 05:12 PM
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Trade Agreement : भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने कई सालों की बातचीत के बाद आखिरकार मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मदर आफ आल डील्स बताया। इस समझौते के लागू होने से भारतीय बाजार में यूरोपियन कारों की कीमतों में भारी गिरावट आने की संभावना है। इस डील के बाद विशेषज्ञ यह कहने लगे हैं कि ट्रंप देखते रहे और कारवां गुजर गया।

कौन-कौन कंपनियों को फायदा होगा

फॉक्सवैगन, रेनो, मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियां। इन कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में अपने उत्पाद पेश करना अब आसान और किफायती होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को छूट नहीं होगी। इस डील में ईवी शामिल नहीं हैं। टेस्ला और अन्य यूरोपीय इलेक्ट्रिक कार निर्माता अभी भी पुराने टैक्स नियमों के अनुसार ही शुल्क देंगे।

समझौते का इतिहास

2007 में बातचीत शुरू हुई थी। 2013 में यह ठप हो गई। 2022 में पुन: शुरू हुई और 2026 में फाइनल हुई। इस डील के साथ भारत जापान और दक्षिण कोरिया के बाद तीसरा एशियाई देश बन गया जिसने ईवी समेत यूरोप के साथ एफटीए किया। भारत-ईयू का व्यापार 2024-25 में लगभग 190 अरब डॉलर था। नए समझौते से यह और बढ़ने की उम्मीद है। वैश्विक सप्लाई चेन मजबूत होगी और निवेशकों का भारत में भरोसा बढ़ेगा। लग्जरी और प्रीमियम यूरोपियन कारें अब भारतीय बाजार में सस्ती और अधिक उपलब्ध होंगी। यह कदम भारत को वैश्विक व्यापार में और मजबूत स्थिति दिलाएगा।

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