ट्रंप ने मुनीर की तारीफ की, फिर पाकिस्तानियों पर वीजा पाबंदी क्यों?
अमेरिकी प्रशासन ने एक साथ 75 देशों को अपनी नई इमिग्रेशन नीति के दायरे में रखते हुए स्थायी निवास (इमिग्रेंट वीजा) की प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया। इस सूची में पाकिस्तान भी शामिल है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब पाकिस्तानी नागरिक ग्रीन कार्ड या स्थायी बसावट के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे।

Visa Restrictions : डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने हाल के दिनों में पाकिस्तान में उम्मीदें जगा दी थीं। अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को खुले मंच से मेरा पसंदीदा जनरल कहना इस बात का संकेत माना गया कि वॉशिंगटन-इस्लामाबाद रिश्तों में गर्मजोशी लौट रही है। लेकिन इसी बीच अमेरिका से आया एक आदेश पाकिस्तानियों के लिए किसी झटके से कम नहीं था।
अमेरिका ने क्या फैसला लिया?
अमेरिकी प्रशासन ने एक साथ 75 देशों को अपनी नई इमिग्रेशन नीति के दायरे में रखते हुए स्थायी निवास (इमिग्रेंट वीजा) की प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया। इस सूची में पाकिस्तान भी शामिल है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब पाकिस्तानी नागरिक ग्रीन कार्ड या स्थायी बसावट के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। परिवार के आधार पर या रोजगार के जरिए मिलने वाले इमिग्रेंट वीजा फिलहाल ठप रहेंगे। हालांकि यह फैसला पर्यटन, पढ़ाई या अस्थायी कामकाज से जुड़े वीजा पर सीधे लागू नहीं होता, लेकिन उनकी जांच भी पहले से अधिक सख्त हो सकती है।
फिर ट्रंप की तारीफों का क्या मतलब?
यहां सबसे अहम बात समझने की है। ट्रंप द्वारा जनरल आसिम मुनीर की प्रशंसा एक राजनीतिक और सैन्य बयान था। इसका मकसद रणनीतिक रिश्तों और सुरक्षा सहयोग को दर्शाना था। वहीं वीजा रोकने का फैसला पूरी तरह अमेरिका की आंतरिक इमिग्रेशन नीति से जुड़ा है। यह व्यक्तिगत रिश्तों या किसी एक देश से नाराजगी का नतीजा नहीं है। अमेरिकी सरकार का तर्क है कि कुछ देशों से आने वाले आवेदकों के अमेरिका में बसने के बाद सरकारी सहायता पर निर्भर हो जाने का खतरा ज्यादा रहता है। इसी आधार पर उन्हें हाई-रिस्क कैटेगरी में रखा गया है।
पाकिस्तान ही क्यों?
असल में यह फैसला केवल पाकिस्तान के लिए नहीं है। इस सूची में एशिया, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और लैटिन अमेरिका के कई देश शामिल हैं। इसका मतलब साफ है कि यह कोई पाकिस्तान-विरोधी विशेष सजा नहीं बल्कि एक सामूहिक नीति निर्णय है। लेकिन पाकिस्तान में इसका असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है क्योंकि वहां बड़ी संख्या में लोग लंबे समय से अमेरिका में बसने का सपना देखते रहे हैं।
पाकिस्तानी जनता के लिए क्यों बड़ा झटका?
ट्रंप के हालिया रुख और बयानों के बाद पाकिस्तान में यह उम्मीद बनी थी कि अमेरिका के दरवाजे फिर से खुलेंगे। इमिग्रेशन आसान होगा। लेकिन इस आदेश ने उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अमेरिका में स्थायी जीवन की योजना बना रहे हजारों पाकिस्तानी परिवारों के लिए यह फैसला किसी अचानक लगे ब्रेक जैसा है। पाकिस्तान के साथ सैन्य या राजनीतिक समीकरण बेहतर होने का मतलब यह नहीं कि इमिग्रेशन नियम भी ढीले हो जाएंगे। अमेरिका का यह फैसला भावनाओं पर नहीं, बल्कि आर्थिक और प्रशासनिक गणनाओं पर आधारित है। यानी, तारीफ अपनी जगह है लेकिन अमेरिका में बसने का रास्ता फिलहाल पाकिस्तानियों के लिए बंद है।
Visa Restrictions : डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने हाल के दिनों में पाकिस्तान में उम्मीदें जगा दी थीं। अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को खुले मंच से मेरा पसंदीदा जनरल कहना इस बात का संकेत माना गया कि वॉशिंगटन-इस्लामाबाद रिश्तों में गर्मजोशी लौट रही है। लेकिन इसी बीच अमेरिका से आया एक आदेश पाकिस्तानियों के लिए किसी झटके से कम नहीं था।
अमेरिका ने क्या फैसला लिया?
अमेरिकी प्रशासन ने एक साथ 75 देशों को अपनी नई इमिग्रेशन नीति के दायरे में रखते हुए स्थायी निवास (इमिग्रेंट वीजा) की प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया। इस सूची में पाकिस्तान भी शामिल है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब पाकिस्तानी नागरिक ग्रीन कार्ड या स्थायी बसावट के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। परिवार के आधार पर या रोजगार के जरिए मिलने वाले इमिग्रेंट वीजा फिलहाल ठप रहेंगे। हालांकि यह फैसला पर्यटन, पढ़ाई या अस्थायी कामकाज से जुड़े वीजा पर सीधे लागू नहीं होता, लेकिन उनकी जांच भी पहले से अधिक सख्त हो सकती है।
फिर ट्रंप की तारीफों का क्या मतलब?
यहां सबसे अहम बात समझने की है। ट्रंप द्वारा जनरल आसिम मुनीर की प्रशंसा एक राजनीतिक और सैन्य बयान था। इसका मकसद रणनीतिक रिश्तों और सुरक्षा सहयोग को दर्शाना था। वहीं वीजा रोकने का फैसला पूरी तरह अमेरिका की आंतरिक इमिग्रेशन नीति से जुड़ा है। यह व्यक्तिगत रिश्तों या किसी एक देश से नाराजगी का नतीजा नहीं है। अमेरिकी सरकार का तर्क है कि कुछ देशों से आने वाले आवेदकों के अमेरिका में बसने के बाद सरकारी सहायता पर निर्भर हो जाने का खतरा ज्यादा रहता है। इसी आधार पर उन्हें हाई-रिस्क कैटेगरी में रखा गया है।
पाकिस्तान ही क्यों?
असल में यह फैसला केवल पाकिस्तान के लिए नहीं है। इस सूची में एशिया, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और लैटिन अमेरिका के कई देश शामिल हैं। इसका मतलब साफ है कि यह कोई पाकिस्तान-विरोधी विशेष सजा नहीं बल्कि एक सामूहिक नीति निर्णय है। लेकिन पाकिस्तान में इसका असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है क्योंकि वहां बड़ी संख्या में लोग लंबे समय से अमेरिका में बसने का सपना देखते रहे हैं।
पाकिस्तानी जनता के लिए क्यों बड़ा झटका?
ट्रंप के हालिया रुख और बयानों के बाद पाकिस्तान में यह उम्मीद बनी थी कि अमेरिका के दरवाजे फिर से खुलेंगे। इमिग्रेशन आसान होगा। लेकिन इस आदेश ने उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अमेरिका में स्थायी जीवन की योजना बना रहे हजारों पाकिस्तानी परिवारों के लिए यह फैसला किसी अचानक लगे ब्रेक जैसा है। पाकिस्तान के साथ सैन्य या राजनीतिक समीकरण बेहतर होने का मतलब यह नहीं कि इमिग्रेशन नियम भी ढीले हो जाएंगे। अमेरिका का यह फैसला भावनाओं पर नहीं, बल्कि आर्थिक और प्रशासनिक गणनाओं पर आधारित है। यानी, तारीफ अपनी जगह है लेकिन अमेरिका में बसने का रास्ता फिलहाल पाकिस्तानियों के लिए बंद है।












