ईरान-US जंग का सऊदी को भारी नुकसान, रूस पर भारत की नजर
अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया था, साथ ही रूसी तेल की खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ को भी खत्म कर दिया था।

Internatioanl News :मध्य-पूर्व में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति की राह रोक दी है। होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) को ईरान द्वारा बंद कर दिए जाने के बाद भारत को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल से दूरी बनाई थी, लेकिन सऊदी अरब समेत खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति अनिश्चित होने के बाद भारत एक बार फिर रूस की ओर देखने को मजबूर हो गया है।
होर्मुज की खाड़ी में ताला, सऊदी को भारी नुकसान
बीते शनिवार से अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने तेल निर्यात की जीवन रेखा मानी जाने वाली होर्मुज की खाड़ी से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी। इसका सीधा असर दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक भारत पर पड़ा है। हाल ही में भारत ने रूसी तेल की खरीद कम करके सऊदी अरब और अन्य मध्य-पूर्वी देशों पर निर्भरता बढ़ाई थी, लेकिन अब यह विकल्प भी संकट में पड़ गया है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि ईरान ने सऊदी अरब की दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको की 'रास तनुरा' रिफाइनरी पर ड्रोन हमले भी किए। हालांकि सऊदी ने इन्हें नाकाम कर दिया, लेकिन एहतियातन रिफाइनरी को बंद करना पड़ा, जिससे सऊदी के तेल क्षेत्र को भारी नुकसान हो रहा है।
भारत का 'इमर्जेंसी प्लान' और रूसी जहाजों का इंतजार
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट से निपटने के लिए भारत ने आकस्मिक योजना (Emergency Plan) तैयार करनी शुरू कर दी है। सोमवार को नई दिल्ली में सरकारी रिफाइनरियों और सरकारी अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की गई। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारत अपने समुद्री क्षेत्र के पास भटक रहे उन रूसी तेल जहाजों को खरीदने पर विचार कर रहा है जिनका कोई खरीदार नहीं है। अनुमान है कि एशियाई जलक्षेत्र में इस समय टैंकरों पर करीब 95 लाख बैरल रूसी तेल मौजूद है, जिसे भारत अपना सकता है।
टैरिफ की नीतिगत उलझन और अमेरिकी दबाव
यह घटनाक्रम तब हुआ है जब हाल ही में अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया था, साथ ही रूसी तेल की खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ को भी खत्म कर दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि यह छूट इसलिए दी गई क्योंकि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है।
भारत ने आधिकारिक तौर पर रूसी तेल खरीदना बंद करने की कभी पुष्टि नहीं की, लेकिन अमेरिकी दबाव के चलते फरवरी में रूस से तेल आयात गिरकर प्रतिदिन 10 लाख बैरल रह गया था, जो सितंबर 2022 के बाद सबसे कम स्तर था। इस दौरान सऊदी अरब भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था।
सरकार की कवायद: अमेरिकी छूट की मांग
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल मंत्रालय के अधिकारी विदेश मंत्रालय से अमेरिका से छूट दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। भारतीय तेल कंपनियां बिना अमेरिकी छूट लिए रूसी तेल खरीदने का जोखिम नहीं उठाना चाहतीं, ताकि वे अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में न आएं। लेकिन मध्य-पूर्व में गहराते संकट को देखते हुए रूसी तेल की खरीद बढ़ाना भारत के लिए सबसे व्यावहारिक विकल्प बनकर उभर रहा है। Internatioanl News
Internatioanl News :मध्य-पूर्व में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति की राह रोक दी है। होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) को ईरान द्वारा बंद कर दिए जाने के बाद भारत को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल से दूरी बनाई थी, लेकिन सऊदी अरब समेत खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति अनिश्चित होने के बाद भारत एक बार फिर रूस की ओर देखने को मजबूर हो गया है।
होर्मुज की खाड़ी में ताला, सऊदी को भारी नुकसान
बीते शनिवार से अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने तेल निर्यात की जीवन रेखा मानी जाने वाली होर्मुज की खाड़ी से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी। इसका सीधा असर दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक भारत पर पड़ा है। हाल ही में भारत ने रूसी तेल की खरीद कम करके सऊदी अरब और अन्य मध्य-पूर्वी देशों पर निर्भरता बढ़ाई थी, लेकिन अब यह विकल्प भी संकट में पड़ गया है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि ईरान ने सऊदी अरब की दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको की 'रास तनुरा' रिफाइनरी पर ड्रोन हमले भी किए। हालांकि सऊदी ने इन्हें नाकाम कर दिया, लेकिन एहतियातन रिफाइनरी को बंद करना पड़ा, जिससे सऊदी के तेल क्षेत्र को भारी नुकसान हो रहा है।
भारत का 'इमर्जेंसी प्लान' और रूसी जहाजों का इंतजार
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट से निपटने के लिए भारत ने आकस्मिक योजना (Emergency Plan) तैयार करनी शुरू कर दी है। सोमवार को नई दिल्ली में सरकारी रिफाइनरियों और सरकारी अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की गई। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारत अपने समुद्री क्षेत्र के पास भटक रहे उन रूसी तेल जहाजों को खरीदने पर विचार कर रहा है जिनका कोई खरीदार नहीं है। अनुमान है कि एशियाई जलक्षेत्र में इस समय टैंकरों पर करीब 95 लाख बैरल रूसी तेल मौजूद है, जिसे भारत अपना सकता है।
टैरिफ की नीतिगत उलझन और अमेरिकी दबाव
यह घटनाक्रम तब हुआ है जब हाल ही में अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया था, साथ ही रूसी तेल की खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ को भी खत्म कर दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि यह छूट इसलिए दी गई क्योंकि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है।
भारत ने आधिकारिक तौर पर रूसी तेल खरीदना बंद करने की कभी पुष्टि नहीं की, लेकिन अमेरिकी दबाव के चलते फरवरी में रूस से तेल आयात गिरकर प्रतिदिन 10 लाख बैरल रह गया था, जो सितंबर 2022 के बाद सबसे कम स्तर था। इस दौरान सऊदी अरब भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था।
सरकार की कवायद: अमेरिकी छूट की मांग
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल मंत्रालय के अधिकारी विदेश मंत्रालय से अमेरिका से छूट दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। भारतीय तेल कंपनियां बिना अमेरिकी छूट लिए रूसी तेल खरीदने का जोखिम नहीं उठाना चाहतीं, ताकि वे अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में न आएं। लेकिन मध्य-पूर्व में गहराते संकट को देखते हुए रूसी तेल की खरीद बढ़ाना भारत के लिए सबसे व्यावहारिक विकल्प बनकर उभर रहा है। Internatioanl News












