बालाघाट के प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल से 7 साल बाद रिहा, बहन की मेहनत रंग लाई
प्रसन्नजीत रंगारी आखिरकार पाकिस्तान की जेल से रिहा हो गए। पिछले 7 साल से वे पाकिस्तान में सुनील अदे के नाम से बंद थे। उनकी बहन संघमित्रा पिछले पांच साल से लगातार उनके घर वापसी के लिए प्रयासरत थीं। संघमित्रा के अनथक प्रयासों के कारण ही आखिरकार प्रसन्नजीत पाकिस्तान जेल से छूटकर भारत लौट सके।

Pakistani Prison : बालाघाट के प्रसन्नजीत रंगारी आखिरकार पाकिस्तान की जेल से रिहा हो गए। पिछले 7 साल से वे पाकिस्तान में सुनील अदे के नाम से बंद थे। उनकी बहन संघमित्रा पिछले पांच साल से लगातार उनके घर वापसी के लिए प्रयासरत थीं। संघमित्रा के अनथक प्रयासों के कारण ही आखिरकार प्रसन्नजीत पाकिस्तान जेल से छूटकर भारत लौट सके। भले ही उन्हें 7 सालों तक पाकिस्तानी जेल की यातनाएं सहनी पड़ी लेकिन आखिर उन्हें अपने देश की मिट्टी नसीब हो ही गई।
कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए और नेताओं से मांगी मदद
संघमित्रा ने कई सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगाया और कई नेताओं से मदद मांगी। साल 2021 में उन्होंने प्रसन्नजीत के लिए एक पत्र लिखा, जिसे लोकल 18 ने प्रकाशित किया और यह खबर धीरे-धीरे राष्ट्रीय मीडिया में भी सुर्खियों में आ गई। यह प्रसन्नजीत की बहन संघमित्रा के द्वारा लिखा गया पत्र ही था जिसने इस घटना को उजागर किया और राष्टÑीय मीडिया की सुर्खियों में आ जाने का कारण बनी। और अंत में पाकिस्तान की जेल से उसके भाई प्रसन्नजीत की रिहाई हो सकी।
प्रसन्नजीत को अमृतसर जाकर लाने की हो रही है तैयारी
31 जनवरी को पाकिस्तान ने सात भारतीय नागरिकों को रिहा किया, जिनमें से छह पंजाब के थे और एक बालाघाट का प्रसन्नजीत। उनके रिहाई की खबर मिलने पर संघमित्रा बेहद खुश हुईं। 1 फरवरी को उन्हें खैरलांजी पुलिस स्टेशन से रिहाई की जानकारी मिली। फोन पर भाई की आवाज सुनते ही संघमित्रा भावुक हो गईं, हालांकि भाई ने उनकी आवाज तुरंत पहचानी। संघमित्रा को यह दुख है कि उनके पिता के जिंदा रहते वह भाई को घर नहीं ला सके। अब प्रसन्नजीत जल्द ही बालाघाट लौटेंगे, प्रसन्नजीत को उनके जीजा राजेश अमृतसर जाकर उन्हें लाने की तैयारी कर रहे हैं।
Pakistani Prison : बालाघाट के प्रसन्नजीत रंगारी आखिरकार पाकिस्तान की जेल से रिहा हो गए। पिछले 7 साल से वे पाकिस्तान में सुनील अदे के नाम से बंद थे। उनकी बहन संघमित्रा पिछले पांच साल से लगातार उनके घर वापसी के लिए प्रयासरत थीं। संघमित्रा के अनथक प्रयासों के कारण ही आखिरकार प्रसन्नजीत पाकिस्तान जेल से छूटकर भारत लौट सके। भले ही उन्हें 7 सालों तक पाकिस्तानी जेल की यातनाएं सहनी पड़ी लेकिन आखिर उन्हें अपने देश की मिट्टी नसीब हो ही गई।
कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए और नेताओं से मांगी मदद
संघमित्रा ने कई सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगाया और कई नेताओं से मदद मांगी। साल 2021 में उन्होंने प्रसन्नजीत के लिए एक पत्र लिखा, जिसे लोकल 18 ने प्रकाशित किया और यह खबर धीरे-धीरे राष्ट्रीय मीडिया में भी सुर्खियों में आ गई। यह प्रसन्नजीत की बहन संघमित्रा के द्वारा लिखा गया पत्र ही था जिसने इस घटना को उजागर किया और राष्टÑीय मीडिया की सुर्खियों में आ जाने का कारण बनी। और अंत में पाकिस्तान की जेल से उसके भाई प्रसन्नजीत की रिहाई हो सकी।
प्रसन्नजीत को अमृतसर जाकर लाने की हो रही है तैयारी
31 जनवरी को पाकिस्तान ने सात भारतीय नागरिकों को रिहा किया, जिनमें से छह पंजाब के थे और एक बालाघाट का प्रसन्नजीत। उनके रिहाई की खबर मिलने पर संघमित्रा बेहद खुश हुईं। 1 फरवरी को उन्हें खैरलांजी पुलिस स्टेशन से रिहाई की जानकारी मिली। फोन पर भाई की आवाज सुनते ही संघमित्रा भावुक हो गईं, हालांकि भाई ने उनकी आवाज तुरंत पहचानी। संघमित्रा को यह दुख है कि उनके पिता के जिंदा रहते वह भाई को घर नहीं ला सके। अब प्रसन्नजीत जल्द ही बालाघाट लौटेंगे, प्रसन्नजीत को उनके जीजा राजेश अमृतसर जाकर उन्हें लाने की तैयारी कर रहे हैं।












