बालाघाट के प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल से 7 साल बाद रिहा, बहन की मेहनत रंग लाई

प्रसन्नजीत रंगारी आखिरकार पाकिस्तान की जेल से रिहा हो गए। पिछले 7 साल से वे पाकिस्तान में सुनील अदे के नाम से बंद थे। उनकी बहन संघमित्रा पिछले पांच साल से लगातार उनके घर वापसी के लिए प्रयासरत थीं। संघमित्रा के अनथक प्रयासों के कारण ही आखिरकार प्रसन्नजीत पाकिस्तान जेल से छूटकर भारत लौट सके।

pak jail
प्रसन्नजीत और उनकी बहन संघमित्रा
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar02 Feb 2026 05:29 PM
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Pakistani Prison : बालाघाट के प्रसन्नजीत रंगारी आखिरकार पाकिस्तान की जेल से रिहा हो गए। पिछले 7 साल से वे पाकिस्तान में सुनील अदे के नाम से बंद थे। उनकी बहन संघमित्रा पिछले पांच साल से लगातार उनके घर वापसी के लिए प्रयासरत थीं। संघमित्रा के अनथक प्रयासों के कारण ही आखिरकार प्रसन्नजीत पाकिस्तान जेल से छूटकर भारत लौट सके। भले ही उन्हें 7 सालों तक पाकिस्तानी जेल की यातनाएं सहनी पड़ी लेकिन आखिर उन्हें अपने देश की मिट्टी नसीब हो ही गई।

कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए और नेताओं से मांगी मदद

संघमित्रा ने कई सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगाया और कई नेताओं से मदद मांगी। साल 2021 में उन्होंने प्रसन्नजीत के लिए एक पत्र लिखा, जिसे लोकल 18 ने प्रकाशित किया और यह खबर धीरे-धीरे राष्ट्रीय मीडिया में भी सुर्खियों में आ गई। यह प्रसन्नजीत की बहन संघमित्रा के द्वारा लिखा गया पत्र ही था जिसने इस घटना को उजागर किया और राष्टÑीय मीडिया की सुर्खियों में आ जाने का कारण बनी। और अंत में पाकिस्तान की जेल से उसके भाई प्रसन्नजीत की रिहाई हो सकी।

प्रसन्नजीत को अमृतसर जाकर लाने की हो रही है तैयारी 

31 जनवरी को पाकिस्तान ने सात भारतीय नागरिकों को रिहा किया, जिनमें से छह पंजाब के थे और एक बालाघाट का प्रसन्नजीत। उनके रिहाई की खबर मिलने पर संघमित्रा बेहद खुश हुईं। 1 फरवरी को उन्हें खैरलांजी पुलिस स्टेशन से रिहाई की जानकारी मिली। फोन पर भाई की आवाज सुनते ही संघमित्रा भावुक हो गईं, हालांकि भाई ने उनकी आवाज तुरंत पहचानी। संघमित्रा को यह दुख है कि उनके पिता के जिंदा रहते वह भाई को घर नहीं ला सके। अब प्रसन्नजीत जल्द ही बालाघाट लौटेंगे, प्रसन्नजीत को उनके जीजा राजेश अमृतसर जाकर उन्हें लाने की तैयारी कर रहे हैं।

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भारत के लिए सऊदी अरब क्यों अहम है? जानिए ऊर्जा से निवेश तक पूरा समीकरण

आज सवाल यह नहीं है कि सऊदी अरब भारत के लिए जरूरी है या नहीं, बल्कि यह है कि भारत की विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक भविष्य में सऊदी अरब की भूमिका कितनी केंद्रीय हो चुकी है।

भारत–सऊदी साझेदारी
भारत–सऊदी साझेदारी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar30 Jan 2026 02:52 PM
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India-Saudi Arabia relations : भारत और सऊदी अरब के संबंध अब केवल तेल आयात, हज-उमराह या प्रवासी भारतीयों तक सीमित नहीं रहे। पिछले एक दशक में यह रिश्ता तेजी से रणनीतिक साझेदारी में तब्दील हुआ है। बदलती वैश्विक राजनीति, ऊर्जा संकट, मध्य-पूर्व की अस्थिरता और आर्थिक पुनर्गठन के दौर में सऊदी अरब भारत के लिए पहले से कहीं अधिक अहम बनकर उभरा है। आज सवाल यह नहीं है कि सऊदी अरब भारत के लिए जरूरी है या नहीं, बल्कि यह है कि भारत की विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक भविष्य में सऊदी अरब की भूमिका कितनी केंद्रीय हो चुकी है।

ऊर्जा सुरक्षा: भारत की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। देश की औद्योगिक विकास दर, परिवहन व्यवस्था और महंगाई नियंत्रण सीधे तौर पर ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर करते हैं। ऐसे में सऊदी अरब भारत के लिए एक विश्वसनीय और स्थिर ऊर्जा साझेदार रहा है। वैश्विक संकटों चाहे वह रूस-यूक्रेन युद्ध हो या पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद सऊदी अरब ने भारत के साथ ऊर्जा आपूर्ति में संतुलन बनाए रखा। यही कारण है कि नई दिल्ली के लिए रियाद केवल एक सप्लायर नहीं, बल्कि रणनीतिक ऊर्जा सुरक्षा का स्तंभ है।

Vision 2030 के तहत भारत-सऊदी रिश्ते हुए मजबूत

सऊदी अरब अब खुद को केवल तेल निर्यातक देश के रूप में नहीं देखता। Vision 2030 के तहत वह अपनी अर्थव्यवस्था का विविधीकरण कर रहा है, और इसी प्रक्रिया में भारत एक महत्वपूर्ण भागीदार बनकर उभरा है। रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सऊदी निवेश की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। भारत का विशाल बाजार, कुशल श्रमशक्ति और तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम सऊदी निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। यह सहयोग केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का संकेत देता है।

प्रवासी भारतीय रिश्तों की सबसे मजबूत कड़ी

सऊदी अरब में लाखों भारतीय काम करते हैं। ये प्रवासी न केवल सऊदी अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं, बल्कि भारत के लिए बड़े पैमाने पर रेमिटेंस भी भेजते हैं। संकट के समय भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान दोनों देशों के रिश्तों की संवेदनशील कसौटी रहे हैं। हाल के वर्षों में इस मुद्दे पर भारत और सऊदी अरब के बीच संवाद पहले से कहीं अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हुआ है। मध्य-पूर्व की अस्थिरता भारत के लिए केवल कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक और सुरक्षा चुनौती भी है। ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आतंकवाद-रोधी प्रयासों में सऊदी अरब के साथ सहयोग भारत के लिए अहम बन गया है। दोनों देशों के बीच रक्षा संवाद, खुफिया जानकारी साझा करना और सुरक्षा सहयोग बढ़ा है। यह साझेदारी भारत की पश्चिम एशिया नीति को मजबूती देती है।

भू-राजनीति और कूटनीतिक संतुलन

भारत की विदेश नीति की खासियत संतुलन रही है। एक ओर भारत ईरान और इज़राइल जैसे देशों से रिश्ते बनाए रखता है, वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब के साथ गहरे संबंध उसे पश्चिम एशिया में रणनीतिक लचीलापन देते हैं। सऊदी अरब इस क्षेत्र में धार्मिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से प्रभावशाली देश है। ऐसे में उसके साथ मजबूत संबंध भारत को वैश्विक मंचों पर अधिक प्रभावी भूमिका निभाने में मदद करते हैं।

भारत–सऊदी सहयोग में बढ़ती संभावनाएं

डिजिटल इंडिया और सऊदी Vision 2030 के बीच स्पष्ट समानताएं दिखाई देती हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। यह साझेदारी दर्शाती है कि भारत–सऊदी रिश्ते अब भविष्य-केंद्रित हो चुके हैं, जहां तकनीक और नवाचार अहम भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि रिश्ते मजबूत हुए हैं, लेकिन चुनौतियां बनी हुई हैं। तेल कीमतों की राजनीति, क्षेत्रीय संघर्ष और वैश्विक दबाव कभी-कभी समीकरणों को जटिल बनाते हैं। इसके बावजूद दोनों देश व्यावहारिकता और संवाद को प्राथमिकता देते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और सऊदी अरब का रिश्ता अब हित आधारित साझेदारी के दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां असहमति के बावजूद सहयोग जारी रहेगा। India and Saudi Arabia Relations

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विजन 2030 के जरिए सऊदी अरब कैसे बदल रहा है?

लेकिन बदलती दुनिया ने सऊदी नेतृत्व के सामने एक कड़ा सच रख दिया तेल की कीमतों का अनिश्चित उतार-चढ़ाव, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ता वैश्विक रुझान और जलवायु संकट की चुनौतियां यह बताने लगीं कि सिर्फ पेट्रोलियम पर टिका मॉडल लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता।

सऊदी अरब Vision 2030
सऊदी अरब Vision 2030
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar30 Jan 2026 02:37 PM
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Saudi Arabia : दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में शुमार सऊदी अरब आज अपनी पहचान को नए सिरे से गढ़ने की ऐतिहासिक यात्रा पर है। दशकों तक कच्चे तेल से मिलने वाली कमाई ही उसकी अर्थव्यवस्था का आधार रही सरकारी राजस्व, कल्याणकारी योजनाएं, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और वैश्विक प्रभाव, सब कुछ उसी तेल-आय के इर्द-गिर्द घूमता रहा। लेकिन बदलती दुनिया ने सऊदी नेतृत्व के सामने एक कड़ा सच रख दिया तेल की कीमतों का अनिश्चित उतार-चढ़ाव, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ता वैश्विक रुझान और जलवायु संकट की चुनौतियां यह बताने लगीं कि सिर्फ पेट्रोलियम पर टिका मॉडल लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता। इसी सोच के चलते सऊदी अरब अब ऑयल-इकोनॉमी से बाहर निकलकर डिजिटल, टेक्नोलॉजी-आधारित और विविध (डायवर्सिफाइड) इकॉनमी की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। लक्ष्य सिर्फ कमाई के नए स्रोत बनाना नहीं, बल्कि ऐसी अर्थव्यवस्था तैयार करना है जो निवेश, नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और आधुनिक सेवाओं के सहारे टिकाऊ विकास दे सके।

तेल पर निर्भरता और उसकी सीमाएं

बीसवीं सदी में तेल ने सऊदी अरब को वैश्विक ताकत बनाया। सरकारी राजस्व का बड़ा हिस्सा, सामाजिक कल्याण योजनाएं और बुनियादी ढांचा—सब कुछ तेल आय से संचालित होता रहा। लेकिन समय के साथ वैश्विक परिदृश्य बदला। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, जलवायु संकट और वैकल्पिक ऊर्जा की ओर बढ़ती दुनिया ने यह साफ कर दिया कि तेल आधारित मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।

Vision 2030: बदलाव की आधिकारिक शुरुआत

साल 2016 में सामने आया ‘विजन 2030’ आज सऊदी अरब की नई आर्थिक दिशा का सबसे बड़ा आधार माना जाता है। इस रोडमैप के जरिए सरकार ने तीन साफ लक्ष्य तय किए तेल पर निर्भरता घटाना, निजी व विदेशी निवेश को तेज करना, और टेक्नोलॉजी, डिजिटल सेवाओं व नवाचार को विकास की धुरी बनाना। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अगुवाई में यह विजन अब कागज़ी घोषणा भर नहीं रहा, बल्कि नीतियों से निकलकर जमीनी बदलाव की शक्ल लेने लगा है।

डिजिटल गवर्नेंस और टेक्नोलॉजी पर फोकस

सऊदी अरब ने सबसे पहले सरकारी ढांचे को डिजिटल करने पर जोर दिया। आज सरकारी सेवाएं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं चाहे वह नागरिक सेवाएं हों, बिजनेस रजिस्ट्रेशन या डिजिटल भुगतान। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यक्षमता दोनों में सुधार हुआ है। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। सऊदी अरब अब टेक्नोलॉजी अपनाने वाला ही नहीं, बल्कि उसे विकसित करने वाला देश बनने की दिशा में है।

NEOM: डिजिटल भविष्य का प्रतीक

डिजिटल इकॉनमी की सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरा है NEOM प्रोजेक्ट। यह एक हाई-टेक स्मार्ट सिटी है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और ग्रीन एनर्जी के जरिए भविष्य की जीवनशैली को आकार दिया जा रहा है। The Line, Oxagon और Trojena जैसे प्रोजेक्ट्स यह संकेत देते हैं कि सऊदी अरब शहरी विकास को भी टेक्नोलॉजी और डेटा के आधार पर दोबारा परिभाषित कर रहा है।

स्टार्टअप और युवाओं की नई भूमिका

डिजिटल इकॉनमी को गति देने में सऊदी युवाओं की भूमिका अहम मानी जा रही है। सरकार स्टार्टअप्स, फिनटेक, ई-कॉमर्स और इनोवेशन हब को बढ़ावा दे रही है। सरकारी फंडिंग, नीतिगत सुधार और विदेशी निवेश ने नए उद्यमों के लिए रास्ते खोले हैं। यह बदलाव उस मानसिकता से अलग है, जहां सरकारी नौकरी ही सबसे सुरक्षित विकल्प मानी जाती थी।

चुनौतियां अभी भी बरकरार

हालांकि यह बदलाव महत्वाकांक्षी है, लेकिन चुनौतियां कम नहीं हैं। तकनीकी दक्ष मानव संसाधन, सामाजिक बदलावों को स्वीकार करना और मेगा प्रोजेक्ट्स का ज़मीनी लाभ आम लोगों तक पहुंचाना ये सभी बड़ी परीक्षा हैं विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल विकास रोजगार और सामाजिक समानता से नहीं जुड़ा, तो यह बदलाव सीमित दायरे में सिमट सकता है। Saudi Arabia

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