हर संख्या में छिपा है एक अलग राज, कुछ हैं खास तो कुछ खतरनाक

786 का मतलब क्या है और अन्य रोचक संख्याएं जैसे 420, 13, 108, 7, 911, 666 का महत्व जानिए। इस लेख में हमने संख्याओं के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अर्थ को विस्तार से समझाया है।

786 means
क्या है 786 का मतलब?
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userअसमीना
calendar15 Jan 2026 04:27 PM
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हमारे जीवन में संख्याएं केवल गणित तक ही सीमित नहीं हैं। कई बार संख्याओं के पीछे विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व छिपा होता है। कुछ संख्याएं शुभ मानी जाती हैं, कुछ अशुभ और कुछ का इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी में किसी विशेष अर्थ में किया जाता है। आज हम आपके लिए लेकर आए हैं 10 ऐसी रोचक संख्याएं और उनके अर्थ जो अक्सर लोगों के मन में उठते हैं लेकिन इनके सही जवाब कम ही जानते हैं।

1. 786 का क्या मतलब होता है?

786 को इस्लाम धर्म में पवित्र माना जाता है। इसका संबंध अरबी वाक्य “बिस्मिल्लाह-इर-रहमान-इर-रहीम” से है जिसका अर्थ होता है “अल्लाह के नाम पर जो अत्यंत कृपालु और दयावान है।” अरबी में हर अक्षर का एक संख्यात्मक मान होता है जिसे अबजद प्रणाली कहते हैं। जब इस वाक्य के सभी अक्षरों का योग किया जाता है तो कुल 786 आता है। इसलिए मुस्लिम समुदाय में यह संख्या बहुत शुभ मानी जाती है और लोग इसे घर, दुकान और वाहनों पर लिखते हैं।

2. 420 का क्या मतलब होता है?

भारत में 420 का इस्तेमाल आमतौर पर ठग या धोखेबाज व्यक्ति के लिए किया जाता है। इसका स्रोत भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 है जो धोखाधड़ी और बेईमानी के अपराध को परिभाषित करती है। समय के साथ यह संख्या इतना लोकप्रिय हो गई कि आम बोलचाल में किसी धोखेबाज को “420” कहने लगे। बॉलीवुड की फिल्म श्री 420 ने भी इसे और मशहूर बना दिया।

3. 13 को क्यों माना जाता है अशुभ?

13 को पश्चिमी देशों में अशुभ माना जाता है। ईसाई धर्म में यीशु के अंतिम भोजन (Last Supper) में 13 लोग शामिल थे जिसमें जूडस ने यीशु को धोखा दिया। नॉर्स पौराणिक कथाओं में भी 13 को अशुभ माना गया। इसी वजह से कई होटलों और इमारतों में 13वीं मंजिल नहीं होती। इस डर को ट्रिस्कैडेकाफोबिया कहा जाता है। भारत में 13 को विशेष रूप से अशुभ नहीं माना जाता।

4. 333 का मतलब क्या होता है?

333 को कई संस्कृतियों में विशेष अर्थ दिया जाता है। एंजल नंबर के अनुसार, यह संख्या बताती है कि आप सही रास्ते पर हैं और ब्रह्मांड आपका साथ दे रहा है। इसे रचनात्मकता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है। भारत में कुछ लोग इसे 666 का आधा मानते हैं और इसे “हाफ एविल” कहते हैं।

5. 11, 21, 51, 101 शगुन क्यों देते हैं?

भारतीय परंपरा में विषम संख्याओं को शुभ माना जाता है। इसलिए 11, 21, 51, 101 जैसी संख्याएं शगुन के रूप में दी जाती हैं। इन संख्याओं में 1 जोड़ने का मतलब है वृद्धि, पूर्णता और आगे बढ़ने का प्रतीक। शादी, पूजा और अन्य शुभ अवसरों पर यही संख्या आमतौर पर दी जाती है।

6. 7 नंबर क्यों होता है इतना खास?

7 को दुनिया भर में भाग्यशाली और खास माना जाता है। सप्ताह में 7 दिन होते हैं, इंद्रधनुष में 7 रंग, संगीत में 7 सुर। हिंदू धर्म में 7 ऋषि, 7 चक्र और शादी में 7 फेरे महत्वपूर्ण हैं। इस्लाम में काबा की परिक्रमा 7 बार की जाती है। विज्ञान में भी 7 का महत्व है जैसे पीएच स्केल में 7 न्यूट्रल होता है।

7. 108 नंबर का क्या महत्व है?

108 हिंदू और बौद्ध धर्म में पवित्र माना जाता है। माला में 108 मोती, मंदिरों में 108 घंटियां और कई मंत्रों का 108 बार जाप किया जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य और चंद्रमा की दूरी पृथ्वी से लगभग उनके व्यास का 108 गुना है। मानव शरीर में 108 ऊर्जा केंद्र होते हैं। ज्योतिष में 12 राशियां × 9 ग्रह = 108।

8. 144 नंबर का क्या मतलब है?

144 को ग्रॉस कहा जाता है, यानी 12×12। व्यापार और गणित में इसका इस्तेमाल होता है। यह पूर्ण वर्ग संख्या (12²) है और फिबोनाची श्रृंखला में भी शामिल है। बाइबल में 144,000 चुने हुए लोगों का उल्लेख है।

9. 911 नंबर क्यों खास है?

911 अमेरिका और कई देशों में आपातकालीन नंबर है। 1968 में इसे आसान याद रखने के लिए चुना गया। 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद यह संख्या और प्रसिद्ध हुई। भारत में अब 112 एकल आपातकालीन नंबर है।

10. 666 को शैतान का नंबर क्यों कहते हैं?

666 को बाइबल की पुस्तक Revelation (प्रकाशितवाक्य) में शैतान की संख्या बताया गया है। पश्चिमी देशों में इसे अशुभ माना जाता है। कुछ लोग इससे डरते हैं (Hexakosioihexekontahexaphobia) हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

Disclaimer: ये सवाल और जवाब विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्रोतों पर आधारित हैं। अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों में संख्याओं के अलग-अलग अर्थ और महत्व हो सकते हैं। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता। 

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मकर संक्रांति पर क्या करें और क्या न करें? यह रही पूरी गाइड

Makar Sankranti Snan Muhurat: मकर संक्रांति 2026 का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करके उत्तरायण होते हैं। सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक का ब्रह्म मुहूर्त स्नान के लिए सबसे शुभ माना गया है।

Makar Sankranti
मकर संक्रांति ब्रह्म मुहूर्त स्नान
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userअसमीना
calendar14 Jan 2026 04:14 PM
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मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण हो जाते हैं। उत्तरायण का समय देवताओं का काल माना जाता है। इसलिए इस दिन स्नान और दान करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया स्नान और दान पापों का प्रायश्चित करता है और जीवन में सुख, समृद्धि और यश प्रदान करता है।

मकर संक्रांति 2026 का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्राह्माश्रम महाराज के अनुसार, इस दिन सुबह 4 बजे से दोपहर 3 बजे तक किसी भी समय पवित्र नदी या तीर्थ स्थल पर स्नान किया जा सकता है। विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना सबसे उत्तम माना गया है। द्रिग पंचांग के अनुसार, 15 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:27 बजे से लेकर सुबह 6:21 बजे तक रहेगा। इस समय स्नान करने से देवताओं का विशेष आशीर्वाद मिलता है।

मकर संक्रांति पर सुबह-सुबह स्नान क्यों जरूरी है?

शास्त्रों में मकर संक्रांति पर समयानुसार स्नान को अलग-अलग प्रकार के रूप में बताया गया है:

4 बजे से 5 बजे तक – मुनि स्नान: इस समय स्नान करने से बल और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

5 बजे से 6 बजे तक – देव स्नान: इस दौरान स्नान करने से धन, वैभव और यश की प्राप्ति होती है।

6 बजे से 8 बजे तक – मानव स्नान: इस समय स्नान सौभाग्य और कार्यों में सफलता दिलाता है।

8 बजे के बाद – राक्षसी स्नान: इसे निषिद्ध माना गया है क्योंकि देर से स्नान करने पर दुख और दरिद्रता आती है।

यदि किसी कारणवश पवित्र नदी या तीर्थ स्थल पर जाना संभव न हो तो घर में ही पानी में गंगाजल और तिल मिलाकर स्नान कर लें। स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करना शुभ माना गया है।

मकर संक्रांति पर दान का महत्व

मकर संक्रांति पर स्नान के बाद दान करना बेहद शुभ होता है। इस दिन किए गए दान का पुण्य हमेशा बना रहता है। विशेष रूप से निम्नलिखित चीजों का दान करने की परंपरा है:

तिल और गुड़: शुद्धता और समृद्धि के लिए।

नवीन अन्न और खिचड़ी: गरीबों और जरूरतमंदों को खाने का दान।

कंबल और वस्त्र: सर्दियों में जरूरतमंदों की मदद।

घी: धार्मिक कार्यों और पूजा में उपयोग के लिए।

दान करने से ग्रहों की अशुभता कम होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

स्नान के बाद दान जरूरी!

मकर संक्रांति 2026 पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना और दान करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक का समय विशेष रूप से शुभ है। यदि आप इस समय स्नान और दान करते हैं तो जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का प्रवेश होता है। इस पावन पर्व पर अपने परिवार और समाज की भलाई के लिए दान करना न भूलें।

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मकर संक्रांति पर इस स्टाइल में ट्राई करें खीर, बर्तन लेकर आएंगे पड़ोसी

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति 2026 पर इस बार तिल और ड्राई फ्रूट्स से बनी गरमा-गरम तिल की खीर बनाएं। यह स्वाद में लाजवाब होने के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है। ठंडी सर्दियों में तिल की खीर शरीर को गर्माहट देती है और मन को खुश कर देती है।

Makar Sankranti Kheer
मकर संक्राति खीर रेसिपी
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userअसमीना
calendar14 Jan 2026 03:45 PM
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मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ से बने लड्डू और बर्फी का स्वाद सबको पसंद है लेकिन क्या आपने कभी गरमा-गरम तिल की खीर ट्राई की है? अगर नहीं तो इस बार मकर संक्रांति पर इसे जरूर बनाएं। तिल, ड्राई फ्रूट्स और दूध से बनी यह खीर स्वाद में लाजवाब होने के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है। ठंडी सर्दियों में यह शरीर को गर्माहट देती है और मन को खुश कर देती है। मकर संक्रांति पर लोग तिल के लड्डू, बर्फी या पापड़ी बनाते हैं लेकिन गरमा-गरम तिल की खीर बनाकर आप परिवार और दोस्तों को चौंका सकते हैं। इसका स्वाद इतना लाजवाब होता है कि आप लड्डू-बर्फी का स्वाद भूल जाएंगे। चलिए जानते हैं रेसिपी।

तिल की खीर बनाने की सामग्री

फुल क्रीम मिल्क – 1.5 लीटर

खजूर या गुड़ – 1/2 कप

फ्लेक्ड बादाम – 1/2 कप

कंडेंस्ड मिल्क – 1/2 कप

तिल – 1 कप

मिक्स ड्राई फ्रूट्स – 1 कप

भुने हुए काजू – 1 मुट्ठी

तिल की खीर बनाने का आसान तरीका

1. सबसे पहले एक बड़े बर्तन में दूध डालें और उसे लगातार चलाते रहें ताकि दूध जले नहीं।

2. पैन में तिल को ड्राई रोस्ट करें। जब तिल चटकने लगे तो इन्हें प्लेट में निकाल लें।

3. उसी पैन में थोड़ा घी डालकर ड्राई फ्रूट्स को हल्का सुनहरा होने तक भूनें।

4. जब दूध थोड़ा गाढ़ा होने लगे तो आंच धीमी कर दें। अब इसमें भुने तिल, कंडेंस्ड मिल्क और ड्राई फ्रूट्स डालकर 10 मिनट तक अच्छे से उबालें।

5. अगर चाहें तो गुड़ या कंडेंस्ड मिल्क की मात्रा अपने स्वाद के हिसाब से एडजस्ट कर सकते हैं।

6. आंच बंद कर दें और इसमें खजूर, गुड़ और बाकी के ड्राई फ्रूट्स डालकर अच्छी तरह मिलाएं।

7. आपकी स्वादिष्ट और पौष्टिक तिल की खीर तैयार है। इसे सर्दियों में गरमा-गरम परोसें और ठंड के मौसम का मजा दोगुना करें।

तिल की खीर क्यों है खास?

तिल शरीर को गर्माहट देता है और सर्दियों में पोषण का बेहतरीन स्रोत है। ड्राई फ्रूट्स और बादाम खीर को सेहतमंद बनाते हैं। यह मिठाई बिना ज्यादा तेल या घी के तैयार होती है और हल्की होती है। बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए काफी पौष्टिक भी होती है।