मूली की खेती में सफलता के लिए जानें बुवाई से लेकर सिंचाई तक
मूली की उन्नत किस्मों की खेती अपनाकर किसान कम समय में अधिक पैदावार और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। सही किस्म का चयन, वैज्ञानिक बुवाई और समय पर सिंचाई से यह फसल किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बन सकती है।

देश में सब्जी उत्पादन से जुड़े किसानों के लिए मूली की खेती एक तेज़ी से मुनाफा देने वाला विकल्प बनकर उभरी है। कम लागत, कम समय और बेहतर बाजार मांग के चलते मूली की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। खास बात यह है कि आधुनिक और उन्नत किस्मों की मदद से अब किसान सिर्फ 25 से 60 दिनों के भीतर प्रति हैक्टेयर 350 क्विंटल तक पैदावार हासिल कर सकते हैं।
कम समय में तैयार, हर मौसम में मांग
मूली का उपयोग सलाद, सब्जी, पराठा और औषधीय रूप में किया जाता है। पथरी जैसी बीमारियों में मूली का रस बेहद लाभकारी माना जाता है, जिससे इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है। मूली की फसल आमतौर पर 40 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है। देसी किस्मों से जहां 250–300 क्विंटल तक उत्पादन मिलता है, वहीं उन्नत किस्मों से यह आंकड़ा और भी अधिक हो जाता है।
मूली की खेती से कितनी हो सकती है कमाई?
बाजार में मूली की कीमत 500 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक रहती है। ऐसे में एक हैक्टेयर भूमि से किसान करीब 1 से 1.5 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में मूली की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
मूली की टॉप 5 उन्नत किस्में
1. पूसा हिमानी
यह किस्म ठंडी जलवायु के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसकी जड़ें सफेद, मोटी और 30–35 सेंटीमीटर लंबी होती हैं। यह किस्म 50–60 दिनों में तैयार होकर प्रति हैक्टेयर 320–350 क्विंटल तक पैदावार देती है।
2. पंजाब पसंद
पंजाब पसंद किस्म केवल 45 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी जड़ें लंबी, सफेद और बाल रहित होती हैं। यह बेमौसम खेती के लिए भी उपयुक्त है और मुख्य मौसम में 215–235 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक उत्पादन देती है।
3. जापानी सफेद
यह किस्म अपने हल्के तीखे स्वाद और मुलायम बनावट के लिए जानी जाती है। 45–55 दिनों में तैयार होने वाली इस किस्म से किसान 250–300 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।
4. पूसा रेशमी
इस किस्म की जड़ें लंबी, चिकनी और आकर्षक होती हैं। यह 55–60 दिनों में तैयार होती है और प्रति हैक्टेयर 315–350 क्विंटल तक उपज देती है, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
5. रैपिड रेड व्हाइट टिप्ड
यह सबसे जल्दी तैयार होने वाली किस्म है, जो मात्र 25–30 दिनों में फसल देती है। लाल-सफेद रंग की यह मूली देखने में आकर्षक और स्वाद में तीखी होती है, जिससे इसकी बाजार में मांग अधिक रहती है।
मूली की बुवाई और देखभाल
- लाइन से लाइन दूरी: 45–50 सेमी
- पौधे से पौधे की दूरी: 5–8 सेमी
- बुवाई की गहराई: 3–4 सेमी
- सिंचाई: पहली सिंचाई बुवाई के बाद, फिर 7–10 दिन के अंतराल पर
- खरपतवार नियंत्रण: नियमित निराई-गुड़ाई जरूरी
बीज उपचार भी है जरूरी
बता दें कि अच्छे अंकुरण और रोग से बचाव के लिए बीज उपचार आवश्यक है।
- रासायनिक उपचार: 1 किग्रा बीज को 2.5 ग्राम थायरम से उपचारित करें।
- जैविक उपचार: 1 किग्रा बीज को 5 लीटर गोमूत्र में भिगोकर उपचार करें।
देश में सब्जी उत्पादन से जुड़े किसानों के लिए मूली की खेती एक तेज़ी से मुनाफा देने वाला विकल्प बनकर उभरी है। कम लागत, कम समय और बेहतर बाजार मांग के चलते मूली की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। खास बात यह है कि आधुनिक और उन्नत किस्मों की मदद से अब किसान सिर्फ 25 से 60 दिनों के भीतर प्रति हैक्टेयर 350 क्विंटल तक पैदावार हासिल कर सकते हैं।
कम समय में तैयार, हर मौसम में मांग
मूली का उपयोग सलाद, सब्जी, पराठा और औषधीय रूप में किया जाता है। पथरी जैसी बीमारियों में मूली का रस बेहद लाभकारी माना जाता है, जिससे इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है। मूली की फसल आमतौर पर 40 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है। देसी किस्मों से जहां 250–300 क्विंटल तक उत्पादन मिलता है, वहीं उन्नत किस्मों से यह आंकड़ा और भी अधिक हो जाता है।
मूली की खेती से कितनी हो सकती है कमाई?
बाजार में मूली की कीमत 500 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक रहती है। ऐसे में एक हैक्टेयर भूमि से किसान करीब 1 से 1.5 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में मूली की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
मूली की टॉप 5 उन्नत किस्में
1. पूसा हिमानी
यह किस्म ठंडी जलवायु के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसकी जड़ें सफेद, मोटी और 30–35 सेंटीमीटर लंबी होती हैं। यह किस्म 50–60 दिनों में तैयार होकर प्रति हैक्टेयर 320–350 क्विंटल तक पैदावार देती है।
2. पंजाब पसंद
पंजाब पसंद किस्म केवल 45 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी जड़ें लंबी, सफेद और बाल रहित होती हैं। यह बेमौसम खेती के लिए भी उपयुक्त है और मुख्य मौसम में 215–235 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक उत्पादन देती है।
3. जापानी सफेद
यह किस्म अपने हल्के तीखे स्वाद और मुलायम बनावट के लिए जानी जाती है। 45–55 दिनों में तैयार होने वाली इस किस्म से किसान 250–300 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।
4. पूसा रेशमी
इस किस्म की जड़ें लंबी, चिकनी और आकर्षक होती हैं। यह 55–60 दिनों में तैयार होती है और प्रति हैक्टेयर 315–350 क्विंटल तक उपज देती है, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
5. रैपिड रेड व्हाइट टिप्ड
यह सबसे जल्दी तैयार होने वाली किस्म है, जो मात्र 25–30 दिनों में फसल देती है। लाल-सफेद रंग की यह मूली देखने में आकर्षक और स्वाद में तीखी होती है, जिससे इसकी बाजार में मांग अधिक रहती है।
मूली की बुवाई और देखभाल
- लाइन से लाइन दूरी: 45–50 सेमी
- पौधे से पौधे की दूरी: 5–8 सेमी
- बुवाई की गहराई: 3–4 सेमी
- सिंचाई: पहली सिंचाई बुवाई के बाद, फिर 7–10 दिन के अंतराल पर
- खरपतवार नियंत्रण: नियमित निराई-गुड़ाई जरूरी
बीज उपचार भी है जरूरी
बता दें कि अच्छे अंकुरण और रोग से बचाव के लिए बीज उपचार आवश्यक है।
- रासायनिक उपचार: 1 किग्रा बीज को 2.5 ग्राम थायरम से उपचारित करें।
- जैविक उपचार: 1 किग्रा बीज को 5 लीटर गोमूत्र में भिगोकर उपचार करें।












