महाराष्ट्र बजट सत्र 2026: बजट से पहले आर्थिक संकट पर हंगामा
सीएम फडणवीस 6 मार्च को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश करेंगे। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य के बिगड़ते वित्तीय स्वास्थ्य को संभालना है।

Maharashtra Budget Session 2026: महाराष्ट्र विधानमंडल का आगामी बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होने जा रहा है, लेकिन इस बार सत्र का माहौल राजनीतिक रूप से काफी भारी और संवेदनशील होगा। एक महीने तक चलने वाले इस सत्र में राज्य पर बढ़ते कर्ज का बोझ, आगामी राज्यसभा चुनाव के गणित और वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद बनी राजनीतिक परिस्थितियां केंद्र में रहेंगी।
अजित पवार को दी जाएगी भावभीनी श्रद्धांजलि
सत्र की औपचारिक शुरुआत राज्यपाल के दोनों सदनों के संयुक्त संबोधन से होगी, लेकिन इसके तुरंत बाद सदन का ध्यान एक भावनात्मक मुद्दे की ओर जाएगा। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के सम्मान में एक शोक प्रस्ताव पेश किया जाएगा। याद रहे कि 28 जनवरी को हुई एक दर्दनाक विमान दुर्घटना में अजित पवार का निधन हो गया था, जिसने पूरे राज्य की राजनीति को झकझोर कर रख दिया था।
इस मुद्दे पर सदन में गर्माहट भी देखने को मिल सकती है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने इस दुर्घटना की पारदर्शी जांच की मांग की है, जबकि विपक्ष के कुछ अन्य नेता इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच की मांग को लेकर आक्रमक रुख अपनाए हुए हैं।
6 मार्च को पेश होगा 'चुनौतीपूर्ण' बजट
अजित पवार के निधन के बाद वित्त मंत्रालय का प्रभार अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास है। सीएम फडणवीस 6 मार्च को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश करेंगे। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य के बिगड़ते वित्तीय स्वास्थ्य को संभालना है। महाराष्ट्र का कुल कर्ज 9 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है, जो राजकोषीय घाटे को लेकर गंभीर चिंता का विषय है। सरकार ने महाराष्ट्र को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का जो महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, उसे देखते हुए इस बजट में बढ़ते खर्चों और कर्ज के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए परीक्षा साबित होगा।
बुनियादी ढांचा और जन कल्याण पर जोर
इस बजट में राज्य की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने के लिए भारी धन आवंटित किए जाने की संभावना है। इनमें पुणे-नासिक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, मेट्रो रेल का विस्तार, पालघर में प्रस्तावित वाढवन बंदरगाह का विकास और मुंबई वाटर मेट्रो परियोजना शामिल हैं।
वोट बैंक की राजनीति को देखते हुए सरकार अपनी प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं को भी जारी रखने के आसार हैं। 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' के तहत पात्र महिलाओं को मिलने वाली 1,500 रुपये प्रति माह की सहायता राशि को लेकर सरकार का रुख साफ दिख रहा है। इसके अलावा, विदर्भ और मराठवाड़ा के किसानों के लिए मौसम की अनिश्चितताओं को देखते हुए जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा भी हो सकती है।
विपक्ष की रणनीति और राज्यसभा चुनाव का समीकरण
विपक्षी दल इस सत्र में सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वे रोजगार सृजन की कमी और चुनावों को ध्यान में रखकर किए जा रहे अतिरिक्त खर्चों पर सवाल उठाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
सत्र के दौरान ही महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का माहौल भी बनेगा। इनमें शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की सीटें शामिल हैं। 288 सदस्यीय विधानसभा में महायुति के पास 232 विधायक हैं, जबकि जीत के लिए 36 वोटों का कोटा निर्धारित है। वर्तमान गणित के मुताबिक, विपक्ष के लिए एक से अधिक सीट जीतना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है। यह सत्र इसलिए भी ऐतिहासिक महत्व रखता है क्योंकि यह लगातार दूसरा ऐसा सत्र होगा, जहां किसी भी सदन में कोई मान्यता प्राप्त नेता प्रतिपक्ष नहीं होगा। Maharashtra Budget Session 2026
Maharashtra Budget Session 2026: महाराष्ट्र विधानमंडल का आगामी बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होने जा रहा है, लेकिन इस बार सत्र का माहौल राजनीतिक रूप से काफी भारी और संवेदनशील होगा। एक महीने तक चलने वाले इस सत्र में राज्य पर बढ़ते कर्ज का बोझ, आगामी राज्यसभा चुनाव के गणित और वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद बनी राजनीतिक परिस्थितियां केंद्र में रहेंगी।
अजित पवार को दी जाएगी भावभीनी श्रद्धांजलि
सत्र की औपचारिक शुरुआत राज्यपाल के दोनों सदनों के संयुक्त संबोधन से होगी, लेकिन इसके तुरंत बाद सदन का ध्यान एक भावनात्मक मुद्दे की ओर जाएगा। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के सम्मान में एक शोक प्रस्ताव पेश किया जाएगा। याद रहे कि 28 जनवरी को हुई एक दर्दनाक विमान दुर्घटना में अजित पवार का निधन हो गया था, जिसने पूरे राज्य की राजनीति को झकझोर कर रख दिया था।
इस मुद्दे पर सदन में गर्माहट भी देखने को मिल सकती है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने इस दुर्घटना की पारदर्शी जांच की मांग की है, जबकि विपक्ष के कुछ अन्य नेता इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच की मांग को लेकर आक्रमक रुख अपनाए हुए हैं।
6 मार्च को पेश होगा 'चुनौतीपूर्ण' बजट
अजित पवार के निधन के बाद वित्त मंत्रालय का प्रभार अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास है। सीएम फडणवीस 6 मार्च को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश करेंगे। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य के बिगड़ते वित्तीय स्वास्थ्य को संभालना है। महाराष्ट्र का कुल कर्ज 9 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है, जो राजकोषीय घाटे को लेकर गंभीर चिंता का विषय है। सरकार ने महाराष्ट्र को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का जो महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, उसे देखते हुए इस बजट में बढ़ते खर्चों और कर्ज के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए परीक्षा साबित होगा।
बुनियादी ढांचा और जन कल्याण पर जोर
इस बजट में राज्य की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने के लिए भारी धन आवंटित किए जाने की संभावना है। इनमें पुणे-नासिक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, मेट्रो रेल का विस्तार, पालघर में प्रस्तावित वाढवन बंदरगाह का विकास और मुंबई वाटर मेट्रो परियोजना शामिल हैं।
वोट बैंक की राजनीति को देखते हुए सरकार अपनी प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं को भी जारी रखने के आसार हैं। 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' के तहत पात्र महिलाओं को मिलने वाली 1,500 रुपये प्रति माह की सहायता राशि को लेकर सरकार का रुख साफ दिख रहा है। इसके अलावा, विदर्भ और मराठवाड़ा के किसानों के लिए मौसम की अनिश्चितताओं को देखते हुए जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा भी हो सकती है।
विपक्ष की रणनीति और राज्यसभा चुनाव का समीकरण
विपक्षी दल इस सत्र में सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वे रोजगार सृजन की कमी और चुनावों को ध्यान में रखकर किए जा रहे अतिरिक्त खर्चों पर सवाल उठाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
सत्र के दौरान ही महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का माहौल भी बनेगा। इनमें शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की सीटें शामिल हैं। 288 सदस्यीय विधानसभा में महायुति के पास 232 विधायक हैं, जबकि जीत के लिए 36 वोटों का कोटा निर्धारित है। वर्तमान गणित के मुताबिक, विपक्ष के लिए एक से अधिक सीट जीतना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है। यह सत्र इसलिए भी ऐतिहासिक महत्व रखता है क्योंकि यह लगातार दूसरा ऐसा सत्र होगा, जहां किसी भी सदन में कोई मान्यता प्राप्त नेता प्रतिपक्ष नहीं होगा। Maharashtra Budget Session 2026












