पीड़िता को फेसबुक पर 'जोशुआ विलियम डगलस' नाम के एक व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। बातचीत बढ़ने के साथ ही आरोपी ने महिला पर अपनी गहरी पकड़ बनानी शुरू कर दी। धीरे-धीरे बातचीत फेसबुक से व्हाट्सएप पर शिफ्ट हो गई।

Facebook Social media : डिजिटल युग में तकनीक ने जीवन को सरल तो बनाया है, लेकिन साइबर अपराधियों ने इसका इस्तेमाल लोगों को फंसाने के लिए नया हथियार बना लिया है। इसकी ताजा मिसाल दक्षिण मुंबई के कफ परेड इलाके से सामने आई है, जहाँ एक 74 वर्षीय बुजुर्ग महिला साइबर ठगों के जाल में फंसकर अपनी जीवन भर की जमा पूंजी से हाथ धो बैठीं। भावनात्मक रूप से कमजोर करने वाले इस 'लव रैकेट' में आरोपियों ने महिला से करीब 50.80 लाख रुपये की ठगी की है।
पुलिस के अनुसार, इस पूरे खेल की शुरुआत जनवरी 2026 में हुई, जब पीड़िता को फेसबुक पर 'जोशुआ विलियम डगलस' नाम के एक व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। आरोपी ने अपनी पहचान एक न्यूजीलैंड के डॉक्टर के तौर पर गढ़ी थी और उसने दावा किया कि वह संयुक्त राष्ट्र (UN) के अभियान के तहत युद्धग्रस्त देश यमन में तैनात है। बातचीत बढ़ने के साथ ही आरोपी ने महिला पर अपनी गहरी पकड़ बनानी शुरू कर दी। उसने खुद को एक विधुर बताते हुए अपनी 5 साल की बेटी 'माया' की बीमारी की करुण कहानी सुनाई। धीरे-धीरे बातचीत फेसबुक से व्हाट्सएप पर शिफ्ट हो गई और ठग ने महिला की भावनाओं का फायदा उठाना शुरू कर दिया।
भावनात्मक ब्लैकमेलिंग और पैसों की मांग
आरोपी ने महिला को अपने जाल में पूरी तरह फंसाने के बाद अपना असली चेहरा दिखाया। उसने दावा किया कि उसकी बेटी ने जहरीला खाना खा लिया है और उसकी जान बचाने के लिए तत्काल सर्जरी की जरूरत है। इस भावनात्मक दबाव में आकर महिला ने शुरुआत में 30 हजार रुपये भेज दिए।
इसके बाद आरोपी की मांगों का सिलसिला शुरू हुआ। कभी वह युद्ध क्षेत्र में बैंक खाता फ्रीज होने का बहाना बनाता, तो कभी खुद को टाइफाइड होने का झूठ बोलकर इलाज के नाम पर पैसे मांगता। महिला आरोपी की बातों में इतनी फंस चुकी थीं कि उन्होंने 3 जनवरी से 9 फरवरी 2026 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में कुल 50.80 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब आरोपी ने एक बार फिर 'मेडिकल इमरजेंसी' का बहाना बनाकर बड़ी रकम मांगी। इस बार महिला को शक हुआ और उन्होंने अपने बेटे को पूरी घटना के बारे में बताया। बेटे ने जांच की तो पता चला कि यह एक बड़ा साइबर स्कैम है। जब उन्होंने आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की, तो उसके सभी नंबर बंद मिले।
पीड़िता ने इसकी शिकायत दक्षिण साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई है, साथ ही राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर भी सूचना दी गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। अभी तक यह पता लगाया जा रहा है कि पैसे किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए और ठगी के इस गिरोह तक पुलिस कैसे पहुंचे। Facebook Social media