PM Kisan सम्मान निधि योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों के खाते में 22वीं किस्त जल्द आएगी। सरकार ने योजना के लिए फंड बढ़ाया है और किसानों को सीधे बैंक खाते में राहत मिलने की प्रक्रिया जारी है।

देश के करोड़ों किसानों के लिए PM Kisan सम्मान निधि योजना हमेशा से ही राहत और आर्थिक समर्थन का अहम स्रोत रही है। अब किसानों की नजरें 22वीं किस्त और 1 फरवरी, 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट पर टिकी हैं। इस योजना के तहत हर साल छोटे और सीमांत किसानों को 6,000 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में तीन किस्तों में भेजे जाते हैं। आगामी बजट में इस राशि में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीद है जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिल सकती है।
केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए लगातार फंड बढ़ा रही है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए शुरुआत में 60,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था जिसे बाद में 63,500 करोड़ रुपये कर दिया गया। यह बढ़ोतरी सिर्फ संख्याओं का खेल नहीं है बल्कि इसका मतलब है कि लाभार्थियों की संख्या बढ़ रही है और सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई पात्र किसान मदद से वंचित न रहे। पिछले दो सालों में बजट में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि, सरकार की कृषि क्षेत्र पर प्राथमिकता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
सबसे बड़ी चर्चा यह है कि क्या सालाना 6,000 रुपये की सहायता राशि बढ़ाई जाएगी। महंगाई और खेती की लागत लगातार बढ़ रही है इसलिए किसानों की मांग है कि यह राशि बढ़ाई जाए। वर्तमान में यह पैसा सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजा जाता है जिससे खाद, बीज और अन्य कृषि जरूरतों में तुरंत राहत मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी बजट में इस राशि में बढ़ोतरी का ऐतिहासिक फैसला हो सकता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की जीवन शैली दोनों पर सकारात्मक असर डालेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। इस बार किसानों के कल्याण और आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए बजट में कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा तोहफा छिपा हो सकता है। योजना की पारदर्शिता और फंड वितरण के इतिहास को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार किसानों को 22वीं किस्त के साथ अतिरिक्त राहत मिल सकती है।
2019 से शुरू हुई यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। तीन किस्तों में सीधे खाते में पैसे का ट्रांसफर न केवल पारदर्शिता बढ़ाता है बल्कि बिचौलियों की भूमिका को भी खत्म करता है। आने वाले बजट और किस्त के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।