उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में घर बनाना होगा आसान, मिलेगी बड़ी छूट
माना जा रहा है कि इस बदलाव से उत्तर प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को कागजी झंझट और दफ्तरों की भागदौड़ से राहत मिलेगी, साथ ही नक्शा पास कराने के नाम पर होने वाली मनमानी, देरी और कथित अनावश्यक वसूली पर भी प्रभावी लगाम लगेगी।

UP News : उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों से इस वक्त एक बड़ी और राहत भरी अपडेट सामने आई है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार गांवों में पक्का घर बनाने की राह को और आसान करने की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक ग्रामीण उत्तर प्रदेश में 300 वर्ग मीटर तक के आवासीय निर्माण के लिए अब नक्शा पास कराने की अनिवार्यता खत्म हो सकती है। इसके लिए सरकार उत्तर प्रदेश भवन निर्माण एवं विकास उपविधि-2025 को जिला पंचायत क्षेत्रों में भी लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, ताकि गांवों में निर्माण प्रक्रिया सरल, कम खर्चीली और तय समय में पूरी होने वाली बन सके। माना जा रहा है कि इस बदलाव से उत्तर प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को कागजी झंझट और दफ्तरों की भागदौड़ से राहत मिलेगी, साथ ही नक्शा पास कराने के नाम पर होने वाली मनमानी, देरी और कथित अनावश्यक वसूली पर भी प्रभावी लगाम लगेगी।
दो मंजिल तक घर बनाने की अनुमति
प्रस्तावित नियमों के तहत ग्रामीण उत्तर प्रदेश के भू-स्वामियों को अपने कच्चे मकान, आवासीय प्लॉट या कृषि भूमि पर दो मंजिल तक आवासीय निर्माण की अनुमति दी जाएगी। यह राहत सिर्फ घर या कृषि उपयोग तक सीमित रहेगी। दुकान, गोदाम, कॉम्प्लेक्स या किसी भी प्रकार का व्यावसायिक निर्माण इस दायरे से बाहर रहेगा। नियमों में यह भी साफ किया गया है कि डिज़ाइन की मजबूती और निर्माण की गुणवत्ता की पूरी जिम्मेदारी भू-स्वामी की होगी; भविष्य में किसी तकनीकी या संरचनात्मक खामी पर शासन या जिला पंचायत की जवाबदेही नहीं बनेगी। हालांकि, निर्माण शुरू करने से पहले जिला पंचायत को लिखित सूचना देना अनिवार्य रहेगा, ताकि प्रशासनिक रिकॉर्ड अद्यतन रहे और ग्रामीण यूपी में निर्माण प्रक्रिया व्यवस्थित व पारदर्शी बनी रहे।
अलग-अलग जिलों के नियमों की उलझन होगी खत्म
उत्तर प्रदेश में शहरी प्राधिकरणों की तर्ज पर अब जिला पंचायत क्षेत्रों में नक्शा पास करने की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन करने की तैयारी है। इससे नियमों में पारदर्शिता बढ़ेगी और अलग-अलग जिलों में अलग नियमों के कारण होने वाली उलझन कम होगी। सरकार का लक्ष्य है कि पूरे यूपी में एक जैसी बिल्डिंग बाईलॉज व्यवस्था लागू हो, ताकि ग्रामीण क्षेत्र में भी निर्माण प्रक्रिया व्यवस्थित और समान रहे। नए नियमों की एक अहम बात यह भी है कि अगर किसी गांव में सड़क की चौड़ाई कम है, तब भी निर्माण/नक्शा प्रक्रिया में अड़चन नहीं आएगी। लेकिन शर्त रहेगी कि भविष्य में जितनी चौड़ी सड़क की जरूरत होगी, उतनी चौड़ाई नक्शे में रोड बाइंडिंग के लिए छोड़नी होगी। यानी आज सड़क भले संकरी हो, लेकिन कल के विस्तार की जगह पहले से सुरक्षित रखनी पड़ेगी।
कब लागू होंगे नए नियम?
एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार के मुताबिक, जिला पंचायत क्षेत्र में भी भवन निर्माण एवं विकास उपविधि लागू करने का प्रस्ताव तैयार है और इसका प्रेजेंटेशन मुख्यमंत्री के समक्ष किया जा चुका है। योजना है कि इसे जल्द लागू किया जाए। लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में 300 वर्ग मीटर तक दो मंजिल के मकान के लिए नक्शा पास कराने की बाध्यता नहीं रहेगी और जहां नक्शा पास करना जरूरी होगा, वहां प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों से इस वक्त एक बड़ी और राहत भरी अपडेट सामने आई है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार गांवों में पक्का घर बनाने की राह को और आसान करने की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक ग्रामीण उत्तर प्रदेश में 300 वर्ग मीटर तक के आवासीय निर्माण के लिए अब नक्शा पास कराने की अनिवार्यता खत्म हो सकती है। इसके लिए सरकार उत्तर प्रदेश भवन निर्माण एवं विकास उपविधि-2025 को जिला पंचायत क्षेत्रों में भी लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, ताकि गांवों में निर्माण प्रक्रिया सरल, कम खर्चीली और तय समय में पूरी होने वाली बन सके। माना जा रहा है कि इस बदलाव से उत्तर प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को कागजी झंझट और दफ्तरों की भागदौड़ से राहत मिलेगी, साथ ही नक्शा पास कराने के नाम पर होने वाली मनमानी, देरी और कथित अनावश्यक वसूली पर भी प्रभावी लगाम लगेगी।
दो मंजिल तक घर बनाने की अनुमति
प्रस्तावित नियमों के तहत ग्रामीण उत्तर प्रदेश के भू-स्वामियों को अपने कच्चे मकान, आवासीय प्लॉट या कृषि भूमि पर दो मंजिल तक आवासीय निर्माण की अनुमति दी जाएगी। यह राहत सिर्फ घर या कृषि उपयोग तक सीमित रहेगी। दुकान, गोदाम, कॉम्प्लेक्स या किसी भी प्रकार का व्यावसायिक निर्माण इस दायरे से बाहर रहेगा। नियमों में यह भी साफ किया गया है कि डिज़ाइन की मजबूती और निर्माण की गुणवत्ता की पूरी जिम्मेदारी भू-स्वामी की होगी; भविष्य में किसी तकनीकी या संरचनात्मक खामी पर शासन या जिला पंचायत की जवाबदेही नहीं बनेगी। हालांकि, निर्माण शुरू करने से पहले जिला पंचायत को लिखित सूचना देना अनिवार्य रहेगा, ताकि प्रशासनिक रिकॉर्ड अद्यतन रहे और ग्रामीण यूपी में निर्माण प्रक्रिया व्यवस्थित व पारदर्शी बनी रहे।
अलग-अलग जिलों के नियमों की उलझन होगी खत्म
उत्तर प्रदेश में शहरी प्राधिकरणों की तर्ज पर अब जिला पंचायत क्षेत्रों में नक्शा पास करने की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन करने की तैयारी है। इससे नियमों में पारदर्शिता बढ़ेगी और अलग-अलग जिलों में अलग नियमों के कारण होने वाली उलझन कम होगी। सरकार का लक्ष्य है कि पूरे यूपी में एक जैसी बिल्डिंग बाईलॉज व्यवस्था लागू हो, ताकि ग्रामीण क्षेत्र में भी निर्माण प्रक्रिया व्यवस्थित और समान रहे। नए नियमों की एक अहम बात यह भी है कि अगर किसी गांव में सड़क की चौड़ाई कम है, तब भी निर्माण/नक्शा प्रक्रिया में अड़चन नहीं आएगी। लेकिन शर्त रहेगी कि भविष्य में जितनी चौड़ी सड़क की जरूरत होगी, उतनी चौड़ाई नक्शे में रोड बाइंडिंग के लिए छोड़नी होगी। यानी आज सड़क भले संकरी हो, लेकिन कल के विस्तार की जगह पहले से सुरक्षित रखनी पड़ेगी।
कब लागू होंगे नए नियम?
एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार के मुताबिक, जिला पंचायत क्षेत्र में भी भवन निर्माण एवं विकास उपविधि लागू करने का प्रस्ताव तैयार है और इसका प्रेजेंटेशन मुख्यमंत्री के समक्ष किया जा चुका है। योजना है कि इसे जल्द लागू किया जाए। लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में 300 वर्ग मीटर तक दो मंजिल के मकान के लिए नक्शा पास कराने की बाध्यता नहीं रहेगी और जहां नक्शा पास करना जरूरी होगा, वहां प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। UP News












