उत्तर प्रदेश में देसी हुई महंगी… कीमत सुनते ही उड़ जाएंगे होश!

योगी सरकार की कैबिनेट ने नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है, और इसके बाद देसी शराब की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है। नई दरें लागू होते ही उपभोक्ताओं को हर बोतल पर करीब 5 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे।

उत्तर प्रदेश में महंगी हुई देसी शराब
उत्तर प्रदेश में महंगी हुई देसी शराब
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Feb 2026 09:54 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश से जुडी यह बड़ी खबर हर उत्तरप्रदेश वासी को जाननी चाहिए। अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते है और शराब के शौकीन है, तो यह खबर आपके लिए है। 1 अप्रैल से देसी शराब की बोतल खरीदना पहले से महंगा पड़ने वाला है। योगी सरकार की कैबिनेट ने नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है, और इसके बाद देसी शराब की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है। नई दरें लागू होते ही उपभोक्ताओं को हर बोतल पर करीब 5 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे।

1 अप्रैल से बढ़ेंगे देसी शराब के दाम

सरकारी फैसले के मुताबिक 36% अल्कोहल वाली देसी शराब अब तक 165 रुपये में मिलती थी, 1 अप्रैल से बढ़कर 173 रुपये हो जाएगी। हालांकि राहत की बात यह है कि अन्य किस्म की शराब (अन्य श्रेणियां) के दामों में फिलहाल कोई बदलाव घोषित नहीं किया गया है। नई नीति के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आबकारी से 71,278 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य तय किया है। यानी सरकार की नजर साफ तौर पर बिक्री, लाइसेंसिंग और सिस्टम को और सख्त-व्यवस्थित करके कमाई बढ़ाने पर है। नीति में शहरी इलाकों को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है। शहरी क्षेत्र में देसी शराब दुकानों का कोटा घटाया जाएगा। वहीं, प्रदेशभर में शराब की फुटकर दुकानों का आवंटन ई-लॉटरी के जरिए किया जाएगा जिसे पारदर्शिता बढ़ाने और सेटिंग-सिस्टम पर लगाम के तौर पर देखा जा रहा है। नई आबकारी नीति में अंग्रेजी शराब की फुटकर दुकानों की लाइसेंस फीस 7.5% बढ़ा दी गई है। इसका असर खासकर बड़े शहरों और हाई-सेल जोन में कारोबार करने वाले लाइसेंसधारकों पर पड़ेगा और संभावना है कि बाजार में इसकी लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ता तक भी पहुंचे।

नोएडा से लखनऊ तक लो-अल्कोहल पेय को नए लाइसेंस

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरी केंद्र नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ में लो अल्कोहलिक स्ट्रेंथ बेवरेज (जैसे बियर, वाइन और RTD) की बिक्री के लिए नए तरीके से लाइसेंस दिए जा सकेंगे। यह कदम शहरों में अलग-अलग कैटेगरी के पेय की उपलब्धता और रेगुलेटेड सेलिंग को बढ़ाने की दिशा में माना जा रहा है। नीति के तहत उत्तर प्रदेश में निर्मित शराब और आबकारी से जुड़े अन्य उत्पादों के निर्यात का रास्ता भी और स्पष्ट किया गया है।  UP News

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उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाली वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

रुपईडीहा क्षेत्र के कुछ युवकों ने एक वीडियो रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया। वीडियो में एक युवक कथित रूप से उग्र भाषा का प्रयोग करते हुए धर्म के नाम पर धमकी देता नजर आता है। अन्य युवक उसके साथ खड़े दिखाई देते हैं और धार्मिक नारे लगाए जाते हैं।

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सतर्क पुलिस प्रशासन
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar12 Feb 2026 06:38 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर प्रशासन सक्रिय हो गया है। वीडियो में तीन युवक कथित तौर पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाली बातें करते दिखाई दे रहे हैं। मामला सामने आने के बाद पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, रुपईडीहा क्षेत्र के कुछ युवकों ने एक वीडियो रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया। वीडियो में एक युवक कथित रूप से उग्र भाषा का प्रयोग करते हुए धर्म के नाम पर धमकी देता नजर आता है। अन्य युवक उसके साथ खड़े दिखाई देते हैं और धार्मिक नारे लगाए जाते हैं। वीडियो रिकॉर्ड करते समय वहां और लोगों की मौजूदगी का भी अंदेशा जताया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित युवकों को पुलिस चौकी लाया गया था। हालांकि, बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। इस कदम से क्षेत्र में चर्चा और नाराजगी का माहौल बन गया। कुछ लोगों का आरोप है कि मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।

उच्च अधिकारियों का हस्तक्षेप

विवाद बढ़ने के बाद मामला पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के संज्ञान में पहुंचा। उन्होंने जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि वीडियो में कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली सामग्री पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि प्रारंभिक स्तर पर सख्त कदम क्यों नहीं उठाए गए।

कानून-व्यवस्था के मद्देनजर संवेदनशील समय

घटना ऐसे समय सामने आई है जब त्योहारों को देखते हुए प्रशासन शांति बनाए रखने के प्रयास कर रहा है। विभिन्न इलाकों में शांति समिति की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। ऐसे में इस प्रकार की सामग्री का प्रसारित होना प्रशासन के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। UP News


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उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर अहम फैसला : ओबीसी आरक्षण का फैसला समर्पित आयोग करेगा

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिलने वाले आरक्षण का निर्धारण एक समर्पित आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए सरकार विशेष रूप से एक डेडिकेटेड ओबीसी आयोग का गठन करेगी, जो प्रदेश में पिछड़े वर्ग की वास्तविक स्थिति का आकलन करने हेतु रैपिड सर्वे कराएगा।

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पंचायत चुनाव
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar12 Feb 2026 06:12 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिलने वाले आरक्षण का निर्धारण एक समर्पित आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए सरकार विशेष रूप से एक डेडिकेटेड ओबीसी आयोग का गठन करेगी, जो प्रदेश में पिछड़े वर्ग की वास्तविक स्थिति का आकलन करने हेतु रैपिड सर्वे कराएगा।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य 

यह कदम न्यायालय की आपत्तियों और संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है। दरअसल, स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। इसी क्रम में सरकार पहले ठोस आंकड़े जुटाएगी और फिर उसी के आधार पर आरक्षण का प्रतिशत और सीटों का निर्धारण किया जाएगा।

आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा

रैपिड सर्वे के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में पिछड़े वर्ग की जनसंख्या और सामाजिक स्थिति क्या है। आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद आरक्षण से संबंधित अंतिम निर्णय लिया जाएगा। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने तक पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं की जाएगी। सरकार का तर्क है कि इस प्रक्रिया से आरक्षण को लेकर भविष्य में कानूनी विवादों की संभावना कम होगी और चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं संवैधानिक ढंग से संपन्न हो सकेगी। इस फैसले से यह स्पष्ट है कि पंचायत चुनाव अब आंकड़ों पर आधारित आरक्षण व्यवस्था के तहत ही कराए जाएंगे, जिससे सामाजिक न्याय और कानूनी वैधता दोनों सुनिश्चित हो सकें।


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