लखनऊ T20 मैच: शहीद पथ पर भारी वाहनों की नो-एंट्री, डायवर्जन रूट जारी

इसके साथ ही शहीद पथ और सर्विस रोड पर ई-रिक्शा व ऑटो भी प्रतिबंधित रहेंगे। हालांकि निजी वाहन और टैक्सी/कार पर रोक नहीं होगी, लेकिन उन्हें निर्धारित नियमों के तहत ही चलना होगा।

इंडिया vs साउथ अफ्रीका मैच के लिए लखनऊ ट्रैफिक पुलिस का बड़ा प्लान
इंडिया vs साउथ अफ्रीका: मैच के लिए लखनऊ ट्रैफिक पुलिस का बड़ा प्लान
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Dec 2025 11:03 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 17 दिसंबर को इकाना स्टेडियम में होने वाले भारत–दक्षिण अफ्रीका टी-20 मुकाबले को लेकर ट्रैफिक पुलिस ने बड़ा डायवर्जन प्लान लागू किया है। बुधवार दोपहर 2 बजे से मैच समाप्ति तक शहीद पथ और स्टेडियम के आसपास यातायात व्यवस्था बदली रहेगी, ताकि दर्शकों को आवागमन में परेशानी न हो और सुरक्षा व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

शहीद पथ पर बड़े वाहन प्रतिबंधित

ट्रैफिक एडवाइजरी के मुताबिक दोपहर 3 बजे से मैच खत्म होने तक शहीद पथ पर रोडवेज बसों सहित सभी बसें, भारी वाहन और कॉमर्शियल वाहनों का संचालन प्रतिबंधित रहेगा। इसके साथ ही शहीद पथ और सर्विस रोड पर ई-रिक्शा व ऑटो भी प्रतिबंधित रहेंगे। हालांकि निजी वाहन और टैक्सी/कार पर रोक नहीं होगी, लेकिन उन्हें निर्धारित नियमों के तहत ही चलना होगा।

सिटी बसों के लिए अलग निर्देश

मैच के दौरान सिटी बसें शहीद पथ पर हुसड़िया से सुशांत गोल्फ सिटी के बीच नहीं रुकेंगी। बसें सड़क की दाईं लेन से संचालित की जाएंगी। वहीं अर्जुनगंज की तरफ से आने वाले ई-रिक्शा/ऑटो को अहिमामऊ से बाएं मुड़कर पीएचक्यू, यूपी-112, मातृत्व अस्पताल के पीछे वाली सड़क से सवारी उतारनी होगी। इसके बाद वाहन पीएचक्यू के सामने से होकर जी-20 तिराहे से गोमतीनगर की ओर जा सकेंगे। उत्तर प्रदेश पुलिस के निर्देशों के अनुसार ओला, ऊबर और अन्य टैक्सी सेवाएं शहीद पथ पर हुसड़िया से सुशांत गोल्फ सिटी के बीच न तो सवारी बैठाएंगी और न ही उतारेंगी।

पार्किंग व्यवस्था: पास वालों और बिना पास वालों के लिए गाइड

ट्रैफिक पुलिस के अनुसार जिनके पास वाहन पास होगा, वे अहिमामऊ से एचसीएल की ओर जाएंगे और वाटर टैंक तिराहे से प्लासियो होते हुए चिन्हित पार्किंग में वाहन खड़ा करेंगे। जिनके पास पास नहीं है, उन्हें भी इसी रूट (अहिमामऊ–एचसीएल) से आगे बढ़ना होगा और तय पार्किंग/निर्देशों का पालन करना होगा।

पार्किंग कैटेगरी

  1. P1: मीडिया और नॉर्थ हॉस्पिटैलिटी पास धारक
  2. P2: साउथ हॉस्पिटैलिटी मेहमान
  3. P3 और P3A: वीआईपी और टीम मालिकों के वाहन

स्टेडियम में एंट्री: किस गेट से जाएं?

  1. गेट 1 और 2: नॉर्थ पवेलियन और जनरल स्टैंड दर्शक
  2. गेट 3: केवल वीआईपी, खिलाड़ी और साउथ हॉस्पिटैलिटी पास धारक
  3. गेट 4 और 5: साउथ पवेलियन, प्रेसिडेंशियल गैलरी और अन्य सामान्य दर्शक

सुरक्षा व्यवस्था: 1000+ पुलिसकर्मी तैनात

इकाना स्टेडियम की सुरक्षा को 3 सुपर जोन, 6 जोन और 16 सेक्टर में बांटा गया है। एक हजार से अधिक पुलिसकर्मी ड्यूटी पर लगाए गए हैं। सुपर जोन की कमान एसपी, जोन की जिम्मेदारी एडिशनल एसपी, और सेक्टर का प्रभारी डिप्टी एसपी को बनाया गया है। यह जानकारी संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार ने दी। महत्वपूर्ण: दर्शकों के लिए डिजिटल टिकट मान्य नहीं होंगे—निर्देशों के अनुसार वैध/निर्धारित टिकट व्यवस्था का पालन करना होगा।

भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट (डायवर्जन)

  1. कमता से शहीद पथ होकर सुल्तानपुर/रायबरेली/कानपुर रोड जाने वाले भारी वाहन अब कमता तिराहा–इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान–समतामूलक–लालबत्ती–करियप्पा–तेलीबाग–बाराबिरवा/इंदिरानहर चौराहा होते हुए किसान पथ से जाएंगे।
  2. सुल्तानपुर आदि मार्ग की बसें/बड़े वाहन कबीरपुर तिराहे से संचालित होंगे।
  3. उतरेठिया अंडरपास (रायबरेली रोड/कैंट रोड) से आने-जाने वाले बड़े वाहन मोहनलालगंज/तेलीबाग होकर हरीकंशगढ़ी के रास्ते किसान पथ से निकलेंगे।
  4. कमता-शहीद पथ तिराहे से अहिमामऊ चौराहे पर U-टर्न लेकर कैंट/पुलिस मुख्यालय की ओर जाने वाला यातायात प्रतिबंधित रहेगा।

स्टेडियम में कौन-कौन सी चीजें ले जाना मना है?

  1. तरल पदार्थ: पानी की बोतल, कोल्ड ड्रिंक, जूस, शराब, बाहर का खाना/टिफिन
  2. धातु/ज्वलनशील वस्तुएं: सिक्के, लाइटर, माचिस, सिगरेट/बीड़ी
  3. इलेक्ट्रॉनिक सामान: पावरबैंक, हेडफोन/ईयरफोन, दूरबीन
  4. अन्य: हेलमेट, बैग/झोला, बड़े पर्स, आपत्तिजनक नारे वाले बैनर/झंडे

लोगों से अपील

उत्तर प्रदेश ट्रैफिक पुलिस ने दर्शकों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे समय से पहले निकलें, निर्धारित पार्किंग का ही उपयोग करें, और डायवर्जन रूट का पालन करें—ताकि मैच के दिन लखनऊ में ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था से बचा जा सके। UP News

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धर्मांतरण पर विहिप की चेतावनी, मंदिर-दान के उपयोग पर भी उठाए सवाल

संगठन पदाधिकारियों के मुताबिक 17 दिसंबर से शुरू होने वाली मुख्य बैठक में देशभर से करीब 450 प्रन्यासी और कार्यकर्ता हस्तिनापुर पहुंचेंगे, जहां आगामी रणनीति और सामाजिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

विश्व हिन्दू परिषद
विश्व हिन्दू परिषद
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Dec 2025 09:36 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के ऐतिहासिक हस्तिनापुर में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) की वार्षिक प्रन्यासी मंडल बैठक से पहले मंगलवार को प्रबंध समिति की महत्वपूर्ण बैठक हुई। संगठन ने संकेत दिए कि इस बार विमर्श का फोकस सिर्फ संगठनात्मक फैसलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश सहित देशभर में चर्चा में रहे मुद्दों धर्मांतरण, मंदिरों की संपत्तियों/दानराशि के उपयोग में पारदर्शिता और “अल्पसंख्यक” की परिभाषा पर भी मंथन होगा। विहिप के केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा ने कहा कि धर्मांतरण से जुड़ी चुनौतियों पर गंभीर विचार जरूरी है और मंदिरों के दान का उपयोग “धर्महित” के अनुरूप, स्पष्ट नीति व जवाबदेही के साथ होना चाहिए। बैठक में विहिप के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय की मौजूदगी ने चर्चा को और वजन दिया। संगठन पदाधिकारियों के मुताबिक 17 दिसंबर से शुरू होने वाली मुख्य बैठक में देशभर से करीब 450 प्रन्यासी और कार्यकर्ता हस्तिनापुर पहुंचेंगे, जहां आगामी रणनीति और सामाजिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

मंदिर-दान और संस्थानों में उपयोग पर सवाल

बातचीत के दौरान विहिप के केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा ने एक उदाहरण पेश करते हुए दावा किया कि श्री वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड से जुड़े एक मेडिकल कॉलेज में छात्र-चयन के अनुपात को लेकर सवाल उठते हैं। उनका कहना था कि जिस ढांचे को देशभर और खासकर उत्तर प्रदेश के लाखों श्रद्धालुओं सहित हिन्दू भक्तों की आस्था और दान से बल मिलता है, वहां संसाधनों के इस्तेमाल में पारदर्शिता और उद्देश्य की स्पष्टता होना जरूरी है। बांगड़ा ने जोर देकर कहा कि दानराशि और संस्थागत सुविधाओं का उपयोग “धर्महित” और “हिन्दू हित” के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर नीति-आधारित विमर्श किया जाना चाहिए।

“अल्पसंख्यक” की परिभाषा पर पुनर्विचार की मांग

विहिप के केंद्रीय महामंत्री ने कहा कि देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और विशेष अधिकारों को लेकर समय-समय पर व्यापक विमर्श होता रहा है, लेकिन उनके मुताबिक कुछ मामलों में इन प्रावधानों की व्याख्या और लागू करने के तरीके पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दावा किया कि कहीं-कहीं “गलत विवेचना” या “दुरुपयोग” जैसी स्थितियां भी उभरती हैं, जिससे व्यवस्था में असंतुलन की आशंका पैदा होती है। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राष्ट्र स्तर पर “अल्पसंख्यक” की परिभाषा पर दोबारा गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि अधिकारों और जिम्मेदारियों का ढांचा अधिक स्पष्ट, संतुलित और न्यायोचित बन सके।

“जिहाद” और आतंकवाद पर संगठन का दावा

बजरंग लाल बांगड़ा ने यह भी कहा कि देश में “जिहाद के नाम पर आतंकवाद” जैसी गतिविधियों को लेकर सतर्कता जरूरी है। उन्होंने कुछ जांच-पड़ताल के संदर्भों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि ऐसे मामलों में उच्च शिक्षा प्राप्त लोग भी शामिल पाए गए हैं। (यह संगठन का पक्ष है, जिस पर अलग-अलग मत हो सकते हैं।)

बैठक में यह भी कहा गया कि ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150वें वर्ष को देशभर में मनाया जाना गौरव की बात है और इससे राष्ट्रीय भावना को बल मिला है।

विदेशी प्रतिनिधियों की भागीदारी का दावा

संगठन के अनुसार वार्षिक प्रन्यासी मंडल बैठक में भारत के विभिन्न प्रांतों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस, श्रीलंका सहित कई देशों से जुड़े हिन्दू संगठनों/मंचों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे। UP News

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उत्तर प्रदेश में किसान के बेटे ने कर दिया कमाल

वर्तमान में परिवार मेरठ शहर में छावनी स्थित रेड क्वार्टर में रहता है। परिवार में सेना में अधिकारी बनने वाले वे पहले सदस्य हैं। शांतनु की इस उपलब्धि के पीछे उनकी 85 वर्षीय दादी का वर्षों पुराना सपना था कि उनका पोता सेना में अफसर बने। पोते की पीओपी के साथ दादी का यह सपना आखिरकार साकार हो गया।

मेरठ के शांतनु पाराशर
मेरठ के शांतनु पाराशर
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar16 Dec 2025 05:47 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के एक किसान के बेटे ने बड़ा कमाल कर दिया है। उत्तर प्रदेश के इस बेटे की हर जगह चर्चा हो रही है। उत्तर प्रदेश के मूल निवासी किसान के बेटे ने अपने परिवार, अपने समाज, अपने गाँव, जिले तथा प्रदेश का सम्मान बढ़ाने का काम किया है। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश के इस लाड़ले बेटे ने अपनी 85 वर्ष की दादी का बड़ा सपना पूरा करने का भी काम किया है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का रहने वाला है कमाल का बेटा

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का रहने वाला किसान का बेटा शांतनु पाराशर खूब तारीफ बटोर रहा है। दरअसल उत्तर प्रदेश के बेटे शांतनु पाराशर ने अपने कठिन परिश्रम और अटूट आत्मविश्वास के बल पर भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए), देहरादून में हुई पासिंग आउट परेड के साथ भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया। यह गौरवपूर्ण क्षण न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। शांतनु मूल रूप से किसान परिवार से हैं। उनका पैतृक गांव उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में रोहटा रोड पर घसौली गाँव है। वर्तमान में परिवार मेरठ शहर में छावनी स्थित रेड क्वार्टर में रहता है। परिवार में सेना में अधिकारी बनने वाले वे पहले सदस्य हैं। शांतनु की इस उपलब्धि के पीछे उनकी 85 वर्षीय दादी का वर्षों पुराना सपना था कि उनका पोता सेना में अफसर बने। पोते की पीओपी के साथ दादी का यह सपना आखिरकार साकार हो गया।

उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुई है पढ़ाई

शांतनु की शैक्षिक यात्रा में उन्होंने कक्षा 10 तक सेंट मेरीज अकादमी से प्राप्त की और 95 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद कृष्णा पब्लिक स्कूल से कक्षा 11 व 12 की पढ़ाई की, जहां विज्ञान वर्ग में 96 प्रतिशत अंकों के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कक्षा 12 में पढ़ते हुए ही उन्होंने एनडीए की लिखित परीक्षा, एसएसबी और मेडिकल, तीनों को पहले प्रयास में सफलता पूर्वक उत्तीर्ण किया। एनडीए खडक़वासला में तीन वर्षों की कठोर सैन्य प्रशिक्षण और स्नातक शिक्षा के बाद शांतनु का चयन आईएमए, देहरादून के लिए हुआ, जहां से उन्होंने अधिकारी बनकर देशसेवा की राह चुनी। शांतनु पाराशर की इस सफलता में परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उनकी माता गृहिणी हैं और परिवार का मानना है कि बेटे की उपलब्धि का सम्पूर्ण श्रेय मां को जाता है, जिनके संस्कार और त्याग ने यह मुकाम दिलाया। शांतनु के ताऊ-ताई चिकित्सक हैं। ताऊजी सर्जन और ताईजी स्त्री रोग विशेषज्ञ। वहीं उनकी बहन डा. माला शर्मा ने प्रशिक्षण काल के दौरान समय-समय पर काउंसलिंग और निरंतर प्रेरणा देकर भाई का मनोबल ऊंचा बनाए रखा। डा. माला ने एमबीबीएस जुलाई में पूर्ण किया है और वर्तमान में नीट पीजी के माध्यम से स्पेशलाइजेशन की तैयारी कर रही हैं। शांतनु के पिता सतीश शर्मा वर्तमान में मेरठ के शांति पब्लिक स्कूल में प्रधानाचार्य हैं।

मजदूर के बेटे ने भी कर दिया कमाल

उत्तर प्रदेश के शांतनु पाराशर की तरह ही हरियाणा के एक बेटे ने भी बड़ा कमाल किया है। हमेशा कहा जाता है कि सफलता की राह में अक्सर रूकावटें तो आती ही हैं, पर यहां मंजिल भी उन्हीं को मिलती है जो हार नहीं मानते।' हरियाणा के हरदीप गिल ने इस फेमस लाइन को सच साबित करके दिखाया दिया है। बचपन में पिता को खोना, मां के साथ खेतों में मजदूरी और सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (SSB) में लगातार 8 असफलता... किसी भी इंसान का हौसला तोडऩे के लिए काफी है। लेकिन सेना में जाने का जज्बा और मां का संघर्ष ही था जिन्होंने हरदीप को सेना में अफसर बन दिया। उनकी सक्सेस स्टोरी आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो जिंदगी में कुछ बनना चाहते हैं। हरियाणा के जींद जिले में उचाना के पास अलीपुर गांव के रहने वाले हरदीप का जीवन संघर्ष और मेहनत से भरा हुआ है। वह महज 2 साल के थे जब उनके पिता का निधन हो गया। तब उनकी मां संत्रों देवी ने हरदीप और उनकी तीन बहनों को अकेले पाला। चार बच्चों की सिंगल मदर के लिए यह आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने बच्चों की परवरिश के लिए कड़ी मेहनत की। हरदीप गिल की मां ने बच्चों की पढ़ाई के लिए दिन-रात एक कर दिया। वे सुबह जल्दी उठकर खेतों में मजदूरी और दोपहर में एक स्कूल में मिड-डे मिल वर्कर काम करतीं। उन्हें 800 रुपये महीना मिलते थे, जिससे परिवार का खर्चा चलता था। उनके पास जमीन का छोटा-सा टुकड़ा भी है, जिससे ज्यादा कुछ नहीं मिलता। जैसे-तैसे उन्होंने गांव के स्कूल में हरदीप का दाखिला कराया। खराब आर्थिक स्थिति ने छोटी-सी उम्र में ही हरदीप को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास करा दिया था। उन्होंने मां के साथ खेतों में जाना शुरू कर दिया। वे दिन में खेतों में काम करते और दोपहर के बाद पढ़ाई करते। उन्होंने गांव के स्कूल से ही 10वीं और 12वीं क्लास तक पढ़ाई पूरी की।

पढ़ाई के वक्त ही देख लिया था बड़ा सपना 

12वीं क्लास के बाद हरदीप के सिर सेना में जाने का जुनून सवार हो गया। उन्होंने इंडियन एयर फोर्स (IAF) एयरमैन की नौकरी के लिए अप्लाई किया। लेकिन चयन प्रक्रिया के दौरान छोटी-छोटी कमियों के चलते सेलेक्शन नहीं हो पाया। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। इंडियन एक्स्प्रेस को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि मैंने उन कमियों को ठीक किया और फिर से कोशिश की। जब एयरमैन पद के लिए करीब 3000 युवाओं का सेलेक्शन हुआ तो मैं ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट में 59वें नंबर पर था। तभी अग्निपथ योजना के चलते सबकुछ बदल गया और ज्वॉइनिंग लेटर नहीं आया।' निराश-हताश हरदीप ने आगे की पढ़ाई IGNOU से करने का मन बनाया, फिर भी उनका एक लक्ष्य था सेना में जाने का। IGNOU से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने फिर से कोशिश की। उन्होंने कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) एग्जाम दिया। हरदीप 9वीं बार में सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड (SSB) एग्जाम में सफल हुए। ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट में 54वां स्थान पाकर साल 2024 में भारतीय सैन्य अकादमी ((IMA)) में शामिल हुए। दिसंबर 2025 में अपनी गर्वित मां की मौजूदगी में पासिंग आउट परेड में मार्च किया। लेफ्टिनेंट हरदीप गिल सिख लाइट इन्फैंट्री की 14वीं बटालियन में शामिल होंगे। UP News


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